30.1.17

अपामार्ग या चिरचिटा असाध्य रोगों की अनुपम औषधि: Rough chaff tree unique drug of incurable diseases

  

  परिचय : यह पौधा एक से तीन फुट ऊंचा होता है और भारत में सब जगह घास के साथ अन्य पौधों की तरह पैदा होता है। खेतों की बागड़ के पास, रास्तों के किनारे, झाड़ियों में इसे सरलता से पाया जा सकता है। यह वर्षा ऋतु में पैदा होता है। इसमें शीतकाल में फल व फूल लगते हैं और ग्रीष्मकाल में फल पककर गिर जाते हैं। इसके पत्ते अण्डकार, एक से पाँच इंच तक लंबे और रोम वाले होते हैं। यह सफेद और लाल दो प्रकार का होता है। सफेद अपामार्ग के डण्ठल व पत्ते हरे व भूरे सफेद रंग के होते हैं। इस पर जौ के समान लंबे बीज लगते हैं। लाल अपामार्ग के डण्ठल लाल रंग के होते हैं और पत्तों पर भी लाल रंग के छींटे होते हैं। इसकी पुष्पमंजरी 10-12 इंच लंबी होती है, जिसमें विशेषतः पोटाश पाया जाता है।  अपामार्ग को कई नामों से जाना जाता है जैसे की चिरचिटा, लटजीरा, प्रिकली चाफ फ्लावर आदि।
    बारिश के मौसम यह प्राकृतिक रूप से हर जगह उगता पाया जाता है। आयुर्वेद में अपामार्ग के पूरे सूखे पौधे को औषधीय प्रयोजनों लिए हजारों वर्षों से प्रयोग किया जाता रहा है। अपामार्ग में काफी मात्रा में क्षार पाया जाता है इसलिए इसका प्रयोग अपामार्ग क्षारऔर अपामार्ग क्षार तेल बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
   अपामार्ग एक औषधीय वनस्पति है। इसका वैज्ञानिक नाम 'अचिरांथिस अस्पेरा' (ACHYRANTHES ASPERA) है। हिन्दी में इसे 'चिरचिटा', 'लटजीरा' 'चिरचिरा ' आदि नामों से जाना जाता है। अपामार्ग एक सर्वविदित क्षुपजातीय औषधि है। वर्षा के साथ ही यह अंकुरित होती है, ऋतु के अंत तक बढ़ती है तथा शीत ऋतु में पुष्प फलों से शोभित होती है। ग्रीष्म ऋतु की गर्मी में परिपक्व होकर फल शुष्क हो जाते हैं। इसके पुष्प हरी गुलाबी आभा युक्त तथा बीज चावल सदृश होते हैं, जिन्हें ताण्डूल कहते हैं। इसके कई सारे औषधीय गुण हैं जिनका वर्णन निम्न प्रकार है-
    अपामार्ग क़ी क्षार का प्रयोग विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में बहुतायात से किया जाता है I अपामार्ग कफ़-वात शामक तथा कफ़-पित्त का संशोधन करने वाले गुणों से युक्त होता है Iइसे रेचन ,दीपन ,पाचन ,कृमिघ्न,रक्तशोधक ,रक्तवर्धक ,शोथहर,डायुरेटिक गुणों से युक्त माना जाता है I

     
इण्डियन मेटेरिया मेडिका के लेखक डॉ. नाडकर्णी के अनुसार अपामार्ग का काढ़ा उत्तम मूत्रल होता है। इसके पत्तों का रस उदर शूल और आँतों के विकार नष्ट करने में उपयोगी होता है। इसके ताजे पत्तों को काली मिर्च लहसुन और गुड़ के साथ पीसकर गोलियां बनाकर सेवन करने से काला बुखार ठीक होता है। 
इसे अत्यंत भूख लगने (भस्मक रोग), अधिक प्यास लगने, इन्द्रियों की निर्बलता और सन्तानहीनता को दूर करने वाला बताया है। इस पौधे से सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जन्तु के काटे हुए को ठीक किया जा सकता है।  
    अपामार्ग में विरेचक laxative, मूत्रवर्धक diuretic और आल्टरेटिव alterative (पूरे शरीर के अंगों का फंक्शन नार्मल करना, जैसे की खून साफ़ करना, भूख बढ़ाना, पाचन और विरेचन कराना आदि) गुण हैं। बड़ी मात्रा में इसका सेवन वमनकारी (उल्टी लाने वाला) emetic है। लेकिन कम मात्रा में यह कफ ढीला करने वाला है।
आल्टरेटिव होने के कारण इसे रक्त शोधक के रूप में प्रयोग किया जाता है
अपामार्ग का पाउडर शहद के साथ जलोदर dropsy, ascites की स्थिति में लिया, ग्रंथियों वृद्धि और त्वचा संबंधी विकारों में प्रयोग किया जाता है। बाह्य रूप से अपामार्ग का प्रयोग कुत्ता काटने, सांप के काटने, आदि के मामलों में प्रयोग किया जाता है।
रतौंधी में लाभदायक :-
रतौंधी रोग में यह पौधा इतना ज्यादा लाभदायक है इससे मात्र तीन दिनों में रतौंधी को ठीक किया जा सकता है इसके लिए इस पौधे के पाउडर को 6 ग्राम की मात्रा में रात को पानी के साथ 3 दिनों तक सेवन करे ऐसा करने से 3 दिनों में रतौंधी रोग ठीक हो जाता हैं।

दमा Asthma
करंज पत्तों + वासा के पत्ते + अपामार्ग जड़ + कंटकारी, से बना काढा २ चम्मच लिया जाता है।
कान के रोग-
 
अपामार्ग क़ी जड़ को साफ़ से धो कर इसका रस निकालकर बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर आग में पकाकर ,तेल शेष रहने पर छानकर किसी शीशी या बोतल में भरकर रख लें,हो गया ईयर ड्राप तैयार ,अब इसे दो-दो बूँद कानों में डालने से कान के विभिन्न रोगों में लाभ मिलता है
• फोड़ा Abscess
बाह्य रूप से जड़ का पेस्ट लगाएं।
त्वचा के रोग दूर करे :-
अगर आपको किसी भी तरह के त्वचा के रोग है तो ये पौधा आपके लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है। त्वचा के रोग में इस पौधे को पानी में उबाल कर अगर रोगी उस पानी को सारी त्वचा पर लगाए तो त्वचा के सारे रोग कुछ ही दिनों में ठीक होने लगते है।

• विसूचिका 
रूट पाउडर (3-6 ग्राम) दिन में तीन बार लें।• रक्त-बवासीर
बवासीर में बीजों का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।

आधे सिर के दर्द-
यदि आप आधे सिर के दर्द से परेशान हों तो इसके बीजों के पाउडर को सूंघने मात्र से दर्द में आराम मिलता है I-यदि साइनस में सूजन (साईनोसाईटीस) जैसी समस्या से आप परेशान हो रहे हों जिस कारण नाक हमेशा बंद रहती हो और सिर में अक्सर भारीपन बना रहता हो तो इसके चूर्ण को सूंघने मात्र से लाभ मिलता है
पेट फूलने की समस्या :-
पेट फूलने की समस्या होने पर इस पौधे के पाउडर का सेवन करने से तुरंत लाभ देखने को मिलता है। इसीलिए पेट के रोगी को इसका सेवन जरूर करके देखना चाहिए।

• घाव
घाव पर पत्तों का एस लगाने से उन्हें भरने में मदद मिलती है।
कान का बहरापन, कान में आवाज़ पाना, काने से पानी बहना, • कान में दर्द
*कान के विकार होने पर, 

अपामार्ग क्षार का तिल में बना तेल जो की मार्किट में ‘अपामार्ग क्षार तेल’ के नाम से जाना जाता है, 2-6 बूँद की मात्रा में कान में डालना चाहिए।
 

• नकसीर, नाक से खून
अपामार्ग क्षार तेल की कुछ बूंदे नाक में डालें।
• हैज़ा cholera
1 चाय के चम्मच में भरकर रूट पाउडर का सेवन हैजे में लाभ करता है।

दमा-
यदि रोगी सांस (दमे ) के कारण सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहा हो तो अपामार्ग क़ी जड़ का पाउडर पांच ग्राम, ढाई ग्राम काली मिर्च के पाउडर के साथ प्रातः सायं लेने से लाभ मिलता है
• खुजली Scabies
रूट पाउडर + एक चुटकी नमक को बाह्य रूप से प्रभावित अंग पर लगाएं।
बुखार ठीक करे :-
अगर आपको किसी भी तरह का बुखारा क्यों ना हो अगर इसमें आपको कोई और दवाई आराम नहीं दे रही तो अपामार्ग के पौधे का रस निकाल ले और उसका सेवन शहद के साथ मिलाकर करे ऐसे करने से कुछ ही मिनट में आपको इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है।
• बवासीर Hemorrhoids
रूट पाउडर (5 ग्राम), खाली पेट लें।
पत्तों का पेस्ट, तिल तेल में मिलाकर प्रभावित हिस्से पर बाहरी रूप से लगाया जाता है।
• प्रसव पीड़ा 

भयंकर पीड़ा होने पर जब प्रसव में विलम्ब हो रहा है तो इसकी जड़ को पीसकर पेडू पर लेप करने से प्रसव शीघ्र हो जाता है।
• आधाशीशी migraine, दिमाग के रोग, पीनस, नाक, माथे में अधिक कफ
बीजों का चूर्ण बनाकर सूंघने से कफ ढीला हो कर निकलने में मदद मिलती है।
• कीड़ों का काटना, बिच्छू काटना, सोरिसिस
पत्तों का पेस्ट प्रभावित हिस्सों पर लगाएं।
• पथरी
ताज़ी जड़ (6 ग्राम) की मात्रा में पानी में घोंटकर दी जाती है।
• यक्ष्मा Tuberculosis
पौधे का पाउडर (5 ग्राम) + शहद, का प्रयोग किया जाता है।
• दांत दर्द Toothache
अपामार्ग की ताज़ी जड़ का प्रयोग दातून के रूप में कराया जाय तो दांतों क़ी चमक बरकार रहेगी और दाँतों क़ी विभिन्न समस्याओं जैसे दाँतों का हिलना,मसूड़ों क़ी दुर्गन्ध एवं दाँतों के हिलने जैसे स्थितियों में लाभ मिलता है
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