29.1.17

पीपल के औषधीय गुण ,लाभ ,प्रयोग ::Benefits of Ficus religiosa

   

     पीपल का वृक्ष सबके लिए जाना पहचाना है, यह हर जगह पाया जाता है। पीपल ही एक ऐसा वृक्ष है, जो चौबीसों घंटे ऑक्सीजन देता है, इसके औषधीय गुणों को बहुत कम लोग जानते हैं। पीपल को औषधियों का खजाना माना गया है। आयुर्वेद की सुश्रुत संहिता और चरक संहिता में पीपल के औषधीय गुणों के बारे में बताया गया है। पीपल के अलग-अलग हिस्सों जैसे पत्तों से लेकर छाल तक का इस्तेमाल करके बुखार, अस्थमा, खांसी, स्किन डिजीज जैसी कई प्रॉब्लम्स से राहत पाई जा सकती है।
दांतों के लिए फायदेमंद
दांतों की बदबू, दांतों का हिलना और मसूड़ों का दर्द व सड़न को दूर करने के लिए 2 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम पीपल की छाल और कत्था को बारीक पीसकर उसका पाउडर बना लें। और इससे दांतों को साफ करें। आपको इन रोगों से मुक्ति मिलेगी।
झुर्रियों से बचाव-
बहुत ही कम लोगों को ही यह बात मालूम है कि झुर्रियों को खत्म करने के लिए पीपल एक अहम भूमिका निभाता है। यह बढ़ती हुई उम्र की वजह से चेहरे पर झुर्रियां रोक देता है। पीपल की जड़ों को काट लें और उसे पानी में अच्छे से भिगोकर इसका पेस्ट बना लें। और इस पेस्ट को नियमित चेहरे पर लगाएं।
नजला-जुकाम से मुक्ति
नजला-जुकाम होने पर पीपल के पत्तों को छाया में सुखा लें। और इनकों पीसकर चूर्ण बना लें। और इसे गुनगुने पानी में थोड़ी सी मिश्री के साथ मिलाकर पीएं।


पेट की तकलीफ को दूर करे
पेट की किसी भी तरह की समस्या जैसे कब्ज, गैस और पेट दर्द आदि को दूर करता है। पीपल के ताजे पत्तों को कूट कर इसका रस सुबह-शाम पीएं। पीपल के पत्ते वात और पित्त को खत्म करते हैं।
दमा : 
पीपल की अन्तरछाल (छाल के अन्दर का भाग) निकालकर सुखा लें और कूट-पीसकर खूब महीन चूर्ण कर लें, यह चूर्ण दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है। पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसमें यह चूर्ण बुरककर खीर को 4-5 घंटे चन्द्रमा की किरणों में रखें, इससे खीर में ऐसे औषधीय तत्व आ जाते हैं कि दमा रोगी को बहुत आराम मिलता है। इसके सेवन का समय पूर्णिमा की रात को माना जाता है।
दाद-खाज :
 पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से या एैसा नहीं कर सकते हो तो पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बना लें और इसे दाद व खुजली वाली जगह पर लगाएं।
मसूड़े : 
मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए इसकी छाल के काढ़े से कुल्ले करें।   
घावों को करे ठीक-
चोट के घावों को जल्दी भरने के लिए पीपल के पत्तों को गर्म कर लें और चोट की वजह से होने वाले घावों पर लगा दें।

 
फटी एड़ियों मे लाभप्रद - 
पीपल के पत्तों से निकलने वाले दूध को फटी एड़ियों पर लगाने से एड़ियां कोमल और सामान्य हो जाती हैं।इसकी छाल का रस या दूध लगाने से पैरों की बिवाई ठीक हो जाती है।  
   हिचकी:
पीपल की छाल को जलाकर राख कर लें, इसे एक कप पानी में घोलकर रख दें, जब राख नीचे बैठ जाए, तब पानी नितारकर पिलाने से हिचकी आना बंद हो जाता है।
     पीपल में प्रतिदिन जल अर्पित करने से कुंडली के कई अशुभ माने जाने ग्रह योगों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। शनि की साढ़ेसाती या ढय्या में पीपल की पूजा शनि के कोप से बचाती है। इस पेड़ की मात्र परिक्रमा से ही कालसर्प जैसे ग्रह योग के बुरे प्रभावों से छुटकारा मिल जाता है। इसके अतिरिक्त शास्त्रों के अनुसार इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास भी माना गया है।
    धार्मिक के साथ-साथ पीपल के पेड़ और उसके कोमल पत्तों का ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व भी है। चाणक्य के काल में पीपल के पत्ते सांप का जहर उतारने के काम आते थे। आज जिस तरह जल को पवित्र करने के लिए तुलसी के पत्तों को पानी में डाला जाता है, वैसे पीपल के पत्तों को भी जलाशय और कुंडों में इसलिए डालते थे ताकि जल किसी भी प्रकार की गंदगी से मुक्त हो जाए।

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