8.9.16

हाथ -पैर व अंग सुन्न हो जाने के उपचार


कभी-कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्न हो जाती है| कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं| इस कारण रक्तवाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर सुन्न हो जाता है|
शरीर के अंग सुन्‍ना पड़ जाना एक आम सी समस्‍या है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहना, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक शराब का सेवन, थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्‍नीशियम की कमी आदि।
शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है| इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है| लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है| यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है|
जो अंग सुन्न हो जाता है, उसमें हल्की झनझनाहट होती है| उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है| सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है, लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता|
अगर यह समस्‍या कुछ मिनटों तक रहती है तो कोई परेशानी की बात नहीं है लेकिन अगर यही कई कई घंटों तक बनी रहे तो आपको डॉक्‍टर के पास जाने की आवश्‍यकता है। हो सकता है कि किसी बड़ी बीमारी का लक्षण हो।हाथ पैर का सुन्‍न हो जाना बड़ा ही कष्‍टदायक होता है क्‍योंकि ऐसे में फिर आपका कहीं मन नहीं लगता। पर आप चाहें तो इस समस्‍या को घरेलू उपचार से ठीक कर सकते हैं।
कभी-कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्न हो जाती है| कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं| इस कारण रक्तवाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर सुन्न हो जाता है|

शरीर सुन्न हो जाने का कारण
शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है| इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है| लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है| यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है|

शरीर सुन्न हो जाने की पहचान
जो अंग सुन्न हो जाता है, उसमें हल्की झनझनाहट होती है| उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है| सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है, लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता|
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शरीर सुन्न हो जाने के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

पपीता और सरसों-
पपीते या शरीफे के बीजों को पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर सुन्न होने वाले अंगों पर धीरे-धीरे मालिश करें|
सोंठ, लहसुन और पानी-
सुबह के समय शौच आदि से निपट कर सोंठ तथा लहसुन की दो कलियों को चबाकर ऊपर से पानी पी लें| यह प्रयोग आठ-दस दिनों तक लगातर करने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है|
अजवायन, लहसुन और तिली तेल-
तिली के तेल में एक चम्मच अजवायन तथा लहसुन की दो पूतियां कुचलकर डालें| फिर तेल को पका-छानकर शीशी में भर लें| इस तेल से सुन्न स्थान की मालिश करें|
बादाम-
बादाम का तेल मलने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है|
पीपल और सरसों-
पीपल के पेड़ की चार कोंपलें सरसों के तेल में मिलाकर आंच पर पकाएं| फिर छानकर इस तेल को काम में लाएं|
सोंठ, पीपल, लहसुन और पानी-



सोंठ, पीपल तथा लहसुन - सभी बराबर की मात्रा में लेकर सिल पर पानी के साथ पीस लें| फिर इसे लेप की तरह सुन्न स्थान पर लगाएं|
बादाम-
बादाम घिसकर लगाने से त्वचा स्वाभाविक हो जाती है|
कालीमिर्च और इलायची-
कालीमिर्च तथा लाल इलायची को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाएं|
नारियल और जायफल-
100 ग्राम नारियल के तेल में 5 ग्राम जायफल का चूर्ण मिलाकर त्वचा या अंग विशेष पर लगाएं|
लहसुन और पानी-
एक गांठ लहसुन और एक गांठ शुंठी पीस लें| इसके बाद पानी में घोलकर लेप बना लें| इस लेप को त्वचा पर लगाएं|
 


दालचीनी-
दालचीनी में कैमिकल और न्‍यूट्रियंट्स होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्‍लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्‍सपर्ट बताते हैं रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्‍छा तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्‍मच दालचीनी पावडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें। दूसरा तरीका है कि 1 चम्‍मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें।
घी-
रात को सोते समय तलवों पर देशी घी की मालिश करें| इससे पैर का सुन्नपन खत्म हो जाएगा|
चोपचीनी, पीपरामूल, मक्खन और दूध
5 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 4 ग्राम मक्खन - तीनों को मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें|
बेल, पीपल, चित्रक और दूध
बेल की जड़, पीपल और चित्रक को बराबर की मात्रा में लेकर आधा किलो दूध में औटाएं| फिर रात को सोते समय उसे पी जाएं|

. व्‍यायाम-
व्‍यायाम करने से शरीर में ब्‍लड र्स्‍कुलेशन होता है और वहां पर ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिये 30 मिनट एरोबिक्‍स करें, 


जिससे आप हमेशा स्‍वस्‍थ बने रहें।
हल्‍दी-
हल्‍दी में ऐसे तत्‍व पाए जाते हैं जो ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं। साथ ही यह सूजन, दर्द और परेशानी को भी कम करती है। एक गिलास दूध में 1 चम्‍मच हल्‍दी मिक्‍स कर के हल्‍की आंच पर पकाएं। आप इसमें हल्‍दी भी मिला सकते हैं। इसे पीने से काफी राहत मिलेगी। आप हल्‍दी और पानी के पेस्‍ट से प्रभावित स्‍थान की मसाज भी कर सकते हैं।
गरम पानी का सेंक-
सब
मैग्‍नीशियम से पहले प्रभावित जगह पर गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की ब्‍लड सप्‍पलाई बढ़ जाएगी। इससे मासपेशियां और नसें रिलैक्‍स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिये भिगोएं और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्‍नान भी कर सकती हैं।



मैग्‍नीशियम का सेवन करें-
हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि खानी चाहिये। आप रोजाना मैग्‍नीशियम 350 एम जी की सप्‍पलीमेंट भी ले सकती हैं। -
प्रभावित हिस्‍से को ऊपर उठाएं-
हाथ और पैरों के खराब ब्‍लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है। इसलिये उस प्रभावित हिस्‍से को ऊपर की ओर उठाइये जिससे वह नार्मल हो सके। इससे सुन्‍न वाला हिस्‍सा ठीक हो जाएगा। आप अपने प्रभावित हिस्‍से को तकिये पर ऊंचा कर के भी लेट सकते हैं।
मसाज-
जब भी हाथ पैर सन्‍न हो जाएं तब उन्‍हें मसाज देना शुरु कर दें। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गरम जैतून तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल से मसाज करें।
अगर हाथ पैरों में जन्‍नाहट होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12 को शामिल करें। इनके कमी से हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्‍नता पैदा हो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये। आप चाहें तो vitamin B-complex supplement भी दिन में दो बार खा सकते हैं

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