18.9.16

बच्चों मे खून की कमी के उपचार



रक्ताल्पता या खून की कमी : खून का कार्य शरीर के हर भाग में भोजन और आक्सीजन पहुंचाना और वहां से अनावश्यक पदार्थों को मूत्र द्वारा विसर्जित करना है। अत: रक्त संबंधी किसी भी विकार से शरीर की सामान्य गतिविधियों पर गहरा असर पड़ता है।
खून में लाल रक्त की पेशियां होती हैं जिनका प्रमुख कार्य स्नायुओं को आक्सीजन पहुंचाना है, उनके भीतर हीमोग्लोबिन नामक पदार्थ मौजूद होता है जिससे खून को लाल रंग प्राप्त होता है और जब भी इन लाल कोशिकाओं की कमी हो जाती है, एनीमिया या रक्ताल्पता हो जाती है।
लक्षण : एनीमिया को जानने का सबसे आसान उपाय है कि आप बच्चों के होंठों की भीतरी त्वचा, आंखों की भीतरी त्वचा, उसकी हथेलियों और नाखूनों का रंग देखें। आमतौर पर गुलाबी रहने वाले इन भागों का रंग इस रोग के कारण सफेद या पीला दिखाई देता है। रोग की तीव्रता का निदान खून की जांच द्वारा किया जा सकता है। यह इस बात को दर्शाएगा कि रोग का कारण क्या है।
क्यों होता है एनीमिया? : बच्चों में इसका प्रमुख कारण है लौह तत्वों की कमी। निर्धारित वक्त से पहले जन्मे 

बच्चों में यह अधिक पाया गया है।  
छह माह से अधिक उम्र के बच्चों में इस बीमारी का कारण उनके आहार में लौह तत्वों की कमी है।
दूध में लौह तत्व अल्प मात्रा में मौजूद होते हैं। अत: यह जरूरी है कि चार से छह माह के बच्चों को दूध के अतिरिक्त अन्य ठोस आहार भी दिया जाए। इसी तरह जिन बच्चों में बार-बार किसी रोग का संक्रमण होता है उन्हें भी इस रोग से पीड़ित होने का भय होता है। इसी तरह जन्मजात विकार, वंशानुगत बीमारी, पेट में कृमि और अन्य बीमारियों द्वारा रक्त क्षय भी इस बीमारी को जन्म दे सकता है।
उपचार : लौह तत्वों का प्रचुर मात्रा में सेवन इस बीमारी का सीधा और सरल उपचार है। छोटी आयु के बच्चों को यह औषधि के द्वारा दिया जा सकता है। उसी तरह जो बच्चे ठोस आहार लेने में सक्षम हैं, उन्हें अंडे, हरी सब्जी और टमाटर अधिक मात्रा में सेवन कराना चाहिए। यदि रक्ताल्पता की तीव्रता अधिक हो तो लौह तत्व युक्त दवाओं का भी प्रयोग किया जा सकता है।
                                                      
एक टिप्पणी भेजें