लकवा रोग की जानकारी और घरेलू उपचार // Paralysis disease information and home remedies




लकवा (Paralysis)

मस्तिष्क की धमनी में किसी रुकावट के कारण उसके जिस भाग को खून नहीं मिल पाता है मस्तिष्क का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है अर्थात मस्तिष्क का वह भाग शरीर के जिन अंगों को अपना आदेश नहीं भेज पाता वे अंग हिलडुल नहीं सकते और मस्तिष्क (दिमाग) का बायां भाग शरीर के दाएं अंगों पर तथा मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं अंगों पर नियंत्रण रखता है। यह स्नायुविक रोग है तथा इसका संबध रीढ़ की हड्डी से भी है।
लकवा रोग निम्नलिखित प्रकार का होता है-

निम्नांग का लकवा- 

इस प्रकार के लकवा रोग में शरीर के नीचे का भाग अर्थात कमर से नीचे का भाग काम करना बंद कर देता है। इस रोग के कारण रोगी के पैर तथा पैरों की उंगुलियां अपना कार्य करना बंद कर देती हैं।

अर्द्धाग का लकवा- 

इस प्रकार के लकवा रोग में शरीर का आधा भाग कार्य करना बंद कर देता है अर्थात शरीर का दायां या बायां भाग कार्य करना बंद कर देता है।

एकांग का लकवा-

इस प्रकार के लकवा रोग में मनुष्य के शरीर का केवल एक हाथ या एक पैर अपना कार्य करना बंद कर देता है।

पूर्णांग का लकवा-

इस लकवा रोग के कारण रोगी के दोनों हाथ या दोनों पैर कार्य करना बंद कर देते हैं।


मेरूमज्जा-प्रदाहजन्य लकवा- 

इस लकवा रोग के कारण शरीर का मेरूमज्जा भाग कार्य करना बंद कर देता है। यह रोग अधिक सैक्स क्रिया करके वीर्य को नष्ट करने के कारण होता है।

मुखमंडल का लकवा-

इस रोग के कारण रोगी के मुंह का एक भाग टेढ़ा हो जाता है जिसके कारण मुंह का एक ओर का कोना नीचे दिखने लगता है और एक तरफ का गाल ढीला हो जाता है। इस रोग से पीड़ित रोगी के मुंह से अपने आप ही थूक गिरता रहता है।

जीभ का लकवा-
इस रोग से पीड़ित रोगी की जीभ में लकवा मार जाता है और रोगी के मुंह से शब्दों का उच्चारण सही तरह से नहीं निकलता है। रोगी की जीभ अकड़ जाती है और रोगी व्यक्ति को बोलने में परेशानी होने लगती है तथा रोगी बोलते समय तुतलाने लगता है।

स्वरयंत्र का लकवा-

इस रोग के कारण रोगी के गले के अन्दर के स्वर यंत्र में लकवा मार जाता है जिसके कारण रोगी व्यक्ति की बोलने की शक्ति नष्ट हो जाती है।

सीसाजन्य लकवा- 

इस रोग से पीड़ित रोगी के मसूढ़ों के किनारे पर एक नीली लकीर पड़ जाती है। रोगी का दाहिना हाथ या फिर दोनों हाथ नीचे की ओर लटक जाते हैं, रोगी की कलाई की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं तथा कलाई टेढ़ी हो जाती हैं और अन्दर की ओर मुड़ जाती हैं। रोगी की बांह और पीठ की मांसपेशियां भी रोगग्रस्त हो जाती हैं।

लकवा रोग का लक्षण-

लकवा रोग से पीड़ित रोगी के शरीर का एक या अनेकों अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं। इस रोग का प्रभाव अचानक होता है लेकिन लकवा रोग के शरीर में होने की शुरुआत पहले से ही हो जाती है। लकवा रोग से पीड़ित रोगी के बायें अंग में यदि लकवा मार गया हो तो वह बहुत अधिक खतरनाक होता है क्योंकि इसके कारण रोगी के हृदय की गति बंद हो सकती है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है। रोगी के जिस अंग में लकवे का प्रभाव है, उस अंग में चूंटी काटने से उसे कुछ महसूस होता है तो उसका यह रोग मामूली से उपचार से ठीक हो सकता है।

लकवा रोग होने के और भी कुछ लक्षण है जो इस प्रकार है-


*रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
*लकवा रोग के हो जाने के कारण शरीर का कोई भी भाग झनझनाने लगता है तथा उसमें खुजलाहट होने लगती है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
*इस रोग से ग्रस्त रोगी के मन में किसी कार्य को करने के प्रति उत्साह नहीं रहता है।
*शरीर के जिस भाग में लकवे का प्रभाव होता है उस तरफ की नाक के भाग में खुजली होती है।

साध्य लकवा रोग होने के लक्षण-


*इस रोग के कारण रोगी की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है और रोगी जिस भोजन का सेवन करता है वह सही तरीके से नहीं पचता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी को और भी कई अन्य रोग हो जाते हैं।
*इस रोग के कारण शरीर के कई अंग दुबले-पतले हो जाते हैं।

असाध्य लकवा रोग होने के लक्षण इस प्रकार हैं-

*असाध्य लकवा रोग के कारण रोगी के मुहं, नाक तथा आंख से पानी निकलता रहता है।
*असाध्य लकवा रोग के कारण रोगी को देखने, सुनने तथा किसी चीज से स्पर्श करने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
*असाध्य लकवा रोग गर्भवती स्त्री, छोटे बच्चे तथा बूढ़े व्यक्ति को होता है और इस रोग के कारण रोगी की शक्ति काफी कम हो जाती है।
*इस प्रकार के लकवे के कारण कई शरीर के अंगों के रंग बदल जाते हैं तथा वह अंग कमजोर हो जाते हैं।
*असाध्य लकवा रोग से प्रभावित अंगों पर सुई चुभाने या नोचने पर रोगी व्यक्ति को कुछ भी महसूस नहीं होता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी की ज्ञानशक्ति तथा काम करने की क्रिया शक्ति कम हो जाती है।
*असाध्य लकवा रोग से पीड़ित रोगी को और भी कई अन्य रोग हो जाते हैं।

लकवा रोग होने के निम्नलिखित कारण हैं-

*मस्तिष्क तथा रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज चोट लग जाने के कारण लकवा रोग हो सकता है।
*सिर में किसी बीमारी के कारण तेज दर्द होने से लकवा रोग हो सकता है।
*दिमाग से सम्बंधित अनेक बीमारियों के हो जाने के कारण भी लकवा रोग हो सकता है।
*अत्यधिक नशीली दवाईयों के सेवन करने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
*बहुत अधिक मानसिक कार्य करने के कारण लकवा रोग हो सकता है।
*अचानक किसी तरह का सदमा लग जाना, जिसके कारण रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक कष्ट होता है और उसे लकवा रोग हो जाता है



*गलत तरीके के भोजन का सेवन करने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
*कोई अनुचित सैक्स संबन्धी कार्य करके वीर्य अधिक नष्ट करने के कारण से लकवा रोग हो जाता है।
*अधिक शराब तथा धूम्रपान करने के कारण भी लकवा रोग हो जाता है।
*अधिक पढ़ने-लिखने का कार्य करने तथा मानसिक तनाव अधिक होने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
लकवा रोग के घरेलू उपचार-
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपना उपचार कराते समय अपना मानसिक तनाव दूर कर देना चाहिए तथा शारीरिक रूप से आराम करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को योगनिद्रा का उपयोग करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को पूर्ण रूप से व्यायाम करना चाहिए जिसके फलस्वरूप कई बार दबी हुई नस तथा नाड़ियां व्यायाम करने से उभर आती हैं और वे अंग जो लकवे से प्रभावित होते हैं वे ठीक हो जाते हैं।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए। इसके बाद रोगी का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से कराना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भाप-स्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद *धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
*रोगी व्यक्ति का रक्तचाप अधिक बढ़ गया हो तो भी रोगी को गर्म चीजों को सेवन नहीं करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए अंगूर, नाशपाती तथा सेब के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को कुछ सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से *अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।

*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए उसके पेट पर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए तथा उसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में लकवा रोग ठीक हो जाता है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त पीले रंग की बोतल का ठंडा पानी दिन में कम से कम आधा कप 4-5 बार पीना चाहिए तथा लकवे से प्रभावित अंग पर कुछ देर के लिए लाल रंग का प्रकाश डालना चाहिए और उस पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से रोगी का लकवा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।




हरी मटर खाने के स्वास्थ्य और सौन्दर्य लाभ // Health and beauty benefits of eating green peas

   

सर्दियां आते ही हरी सब्जियों का मौसम शुरू हो जाता है जो पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर होती है। हरी फलियों और हरी मटर की पैदावार सर्दियों में सबसे ज्‍यादा होती है। कई लोगों को भ्रम होता है कि मटर में पोषक तत्‍व नहीं होते है लेकिन यह गलत है। हरी मटर, पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर होती है
हरी मटर काफी स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों में से एक है और यह कच्चा खाने में भी काफी स्वादिष्ट लगते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंटस, विटामिन्स, मिनरल्स (anti-oxidants, vitamins, minerals) और अन्य कई स्वास्थ्यवर्धक तत्व भरे हुए हैं जो रोगों का निदान करते हैं और आपके स्वास्थ्य में निखार लाते हैं। आप हमेशा ही स्वाद तथा पोषक मूल्य बढ़ाने के लिए अपने भोजन में हरे मटर डाल सकती हैं, पर इसे कच्चा खाना और भी ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक साबित होता है। जब मटर ताज़े और कच्चे होते हैं, तब ये ज्यादा स्वास्थ्यकर होते हैं। अतः आप इनका कच्चा सेवन करके भी स्वस्थ रह सकते हैं

शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाता है

मटर शरीर में मौजूद आयरन, जिंक, मैगनीज और तांबा शरीर को बीमारियों से बचाता है। मटर में एंटीआॅक्सीडेंट होता है। जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ताकि शरीर बीमारियों से मुक्त रह सके

मटर वजन निंयत्रित करता है

मटर में मौजूद गुण वजन को नियंत्रित करते हैं। मटर में लो कैलोरी और लो फैट होता है। हरी मटर में हाई फाइबर होता है जो वजन को बढ़ने से रोकता है। यदि वजन कम करना चाहते हैं तो अपने भोजन में हरी मटर का इस्तेमाल अधिक से अधिक करें।
आजकल कई डायटीशियन भी फूड चार्ट में हरी मटर को शामिल करने की सलाह देते है। एक शोध में पता चला है कि हरी मटर में काउमेस्‍ट्रोल होता है जो कि एक प्रकार का फाइटोन्‍यूट्रीयन्‍ट होता है, अगर शरीर में इसकी संतुलित मात्रा होती है तो कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि अगर आप हर दिन हरी मटर का सेवन करें तो पेट का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

बढ़ाए चेहरे की चमक

मटर का प्रयोग चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यह प्राकृतिक स्क्रब है। पानी में थोड़े से मटरों को उबाल लें और फिर उन्हें कूट पीसकर उनका लेप यानि पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर रगडें और 15 से 20 मिनट के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। यह चेहरे की खोई हुई चमक को वापस लाता है। और चेहरे की गंदगी को दूर करता है। मटर का उबटन चेहरे से झांई और धब्बों को मिटाता है।
दूध में भुनी हुई मटर के दानों और नारंगी के छिलकों को पीसकर उबटन तैयार करें और इसे चेहरे पर मलें। यह आपके रंग और रूप को संवारेगा।

भूल जाने की बीमारी को घटाएं :

कई लोगों को अल्‍जाइमर की समस्‍या होती है, ऐसे में वह रोजमर्रा की बातें भी भूल जाते है। हरी मटर के नियमित सेवन से यह समस्‍या दूर हो जाती है। हरी मटर को खाने से ऑस्ट्रियोपोरोसिस और ब्रोंकाइटिस आदि से लड़ने में सहायता मिलती है।

दिल की देखभाल करें :

हरी मटर के स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक गुणों में एक गुण यह भी है कि इसके सेवन से हार्ट की बीमरियां कम होती है। इसमें एंटी - इनफ्लैमेट्टरी कम्‍पाउंड होते है और एंटी - ऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होता है। इन दोनों ही कम्‍पाउंड के कॉम्‍बीनेशन से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।

ज्यादा उम्र  मे भी जवां रखे :

हरी मटर में भरपूर मात्रा में एंटी - ऑक्‍सीडेंट होते है जो शरीर को चुस्‍त - दुरूस्‍त रखने में सहायक होते है। इसके अलावा, हरी मटर में फ्लैवानॉड्स, फाइटोन्‍यूटिंस, कैरोटिन आदि होते है जो शरीर को हमेशा यंग और एनर्जी से भरपूर बनाएं रखता है। ये वाकई में हरी मटर का सबसे दिलचस्‍प गुण है।

गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद

मटर में मौजूद फालोक एसिड जो पेट में भू्रणं की समस्याओं को दूर करता है साथ ही गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषण देता है। गर्भवती महिलाओं को अपने खाने में हरी मटर को जरूर शामिल करना चाहिए।

ब्‍लड़ शुगर लेवल को कंट्रोल में करना :

हरी मटर में उच्‍च फाइबर और प्रोटीन तत्‍व होते है जो शरीर में ब्‍लड़ सुगर की मात्रा को नियंत्रित करते है।

दे सूजन और जलन में राहत

सर्दियों के समय में हाथों में होने वाली सूजन में मटर के काढ़े को हल्का गरम करके उसमें थोडी देर के लिए उंगलियों को डालकर रखने से सूजन कम होती है।
यदि सूजन शरीर में है तो मटर के उबले हुए पानी से नहाने से शरीर की सूजन खत्म होती है।
यदि किसी वजह से त्वचा जल गई हो तो हरी मटर का पेस्ट लगा लें। यह तुरंत राहत देती है।

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी // Shankpushpi Makes sharp mind


शंखपुष्पी के गुण:-

यह दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन (chemical) ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति (memory power), कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली (increase the sweetness in voice), मंगलकारी , अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट (destroying the mental problems) करने वाली होती है l
परिचय : —-मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l
फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (1) सफ़ेद फूल वाली (2) लाल फूल (red flowers) वाली और (3) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है |

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी:–

प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी एक्ससी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l
इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l

 शुक्रमेह :

-शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च (black pepper powder) आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानीके साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l
(3) ज्वर में प्रलाप :—तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थितिमें शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभहोता है और नींद भी अच्छी आती है l

 उच्च रक्तचाप :–
उच्च रक्तचाप के रोगी ] को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l

 बिस्तर में पेशाब :

-कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत (habit) नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहदमें मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें |

घर से चूहे भगाने के कारगर तरीके//Effective ways to drive out rats from home



अधिकांश घरों में आजकल चूहे देखने को मिल ही जाते हैं. आजकल चूहों की समस्या होने एक आम बात है. लेकिन घर में चूहों के पनपने के कारण कई बार अनाज के साथ ही कपड़ों और अन्य मूल्यवान चीजों का नुकसान होने लगता है. आम तौर पर चूहे झूठे छोड़े गए खाद्य पदार्थों, अनाज, चावल इत्यादि खा कर जीवित रहते हैं.चूहे खुद को आस पास के वातावरण के अनुकूल बनाने में माहिर होते हैं. घर मे चूहे होने के कारण घर में तो नुकसान होता ही है साथ ही इनसे अनेक बीमारियों का खतरा भी रहता है. जिसमे सबसे खतरनाक संक्रामक रोग है रबिस. इस बीमारी से अनेक लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

इस समस्या को दूर करने के लिए लोग बाजार में मिलने वाली अनेक दवाओं का प्रयोग करते हैं. लेकिन इन दवाओं का कभी घर में खतरा भी हो सकता है इस समस्या के समाधान के लिए आप कुछ घरेलु उपायों की मदद ले सकते हैं. यह घरेलू उपाय अत्यन्त सरल तथा लाभदायक होते हैं.
यदि चूहे ने घर में बिल बन लिया हो तो उसके लिए पुदीने का प्रयोग करना लाभदायक होता है. चूहे पुदीना की गंध बर्दाश्त नहीं कर पाते. इसके लिए आप पुदीना तेल में कपास का टुकड़ा डुबाकर उनके बिल के पास रख दें. इससे चूहे घर से भाग जायेंगे.
बाल का प्रयोग
घर में चूहे होने के कारण घर में आतंक मचा रहता है. जिसके कारण हमें अनेक समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समयसा को दूर करने के लिए बालों का प्रयोग करना चाहिए. चूहे मानव बाल की दृष्टि बर्दाश्त नहीं कर सकते और अनेक बार चूहे बाल निगल लेते हैं जिसके कारण चूहे घर से भाग जाते हैं

बिल्ली पालें
घर में चूहे होने के कारण हमें अनेक समस्याएं होने लगती हैं. इस परेशानी से निपटने के लिए बिल्ली को घर में पाल लें. घर में बिल्ली को पालने से घर में चूहे समाप्त हो जाते हैं. बिल्ली चूहों की प्राकृतिक दुश्मन होती है. जहाँ बिल्लियाँ होगी वहां चूहों के होने का खतरा नहीं रहता.
पिपरमिन्ट का प्रयोग -
पिपरमिन्ट को आमतौर पर पुदीना कहा जाता है. पुदीने के कुछ फूल या पत्तियों को लें. अब इन पत्तियों को कूटकर घर के दरवाजे में रख दे. कुछ दिन इस विधि का प्रयोग करे. घर से भाग जाते हैं. 
चूहा जाल का प्रयोग
चूहे को कैद करने का जाल बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है. चूहों की समस्या होने पर आप एक चूहा जाल खरीद लें. अब इस जाल में कोई रोटी या अन्य खाद्य समग्री का टुकड़ा रखें. जब भी चूहा इस टुकड़े को खाने जायेगा तो उस जाल में फस जायेगा. अब इस फसे हुए चूहे को घर से कहीं दूर फेक दें, ताकि वह दुबारा घर में ना आ सके.

बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण नुस्खे //Hair loss and baldness remedies




बालों के गिरने -झड़ने और टूटन की सबसे बड़ी वजह होती है तनाव यह माना जाता है की तनाव के कारण हमारे बालो का बढ़ने का चक्र रुक जाता है अगर हमारा तनाव बढ़ जाता है तो बालों का बढ़ना तो रुक ही जाता है |एवं बालो का गिरना या टूटना शुरू हो जाता है इसलिए यदि हम बालों को तेजी से बढ़ाना चाहते है तो हमे चाहिए कि हम तनाव से दूर रहे ओर हमेशा प्रसन्न रहने की कोशिस करे|

 आजकल की भागदौड़ और व्यस्त  लाइफस्‍टाइल की वजह से आखिर कितनी ऐसी औरते हैं , जो अपने बालों को लंबा करने की सोंच सकती हैं? लंबे बाल पाने के लिये खान-पान और उनकी केयर करने की आवश्‍यकता होती है, जो कि हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन अगर आप हमारे बताए गए इन तरीको को आजमाएंगी तो आपके भी बाल लंबे और घने हो सकते हैं। 
बालो के बढ़ने की गति हमारी खानपान की आदतों ,बालों की देख भाल  और बहुत से अन्य कारणों पर निर्भर करती है |आज हम आपके लिए कुछ उपाय लेकर आये है जिनका प्रयोग करके आपके बाल तेजी से बढ़ने लगेंगे तो आइये जानते है उन उपायो के बारे मे जिनका प्रयोग करके आपके बाल घने काले और तेजी से बढ़ने लग जायेंगे |

*बालों में तेल लगाएं 

अगर बाल बढाना है तो उसमें तेल लगाना होगा। बालों में तकरीबन 1 घंटे के लिये तेल लगा रहने दें जिससे बालों की जड़ तेल को पूरी तरह से सोख ले। सिर पर हल्‍के गरम तेल से मालिश करें और गरम पानी में डुबोई हुई तौलिये से सिर ढंक कर भाप लें। 

*नीम और बेर के पत्तो

को  पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा ले और इसके 3 घण्टो के बाद सिर को पानी से धो ले इसके प्रयोग से बालों का झड़ना कुछ ही दिनों में बन्द हो जायेगा और आपके बाल लम्बे भी होंगे|

* बादाम का तेल :

-जल्‍दी बाल बढाने के लिये कोई भी तेल कारगर नहीं होता। इसके लिये सबसे अच्‍छा तेल बादाम का होता है। बादाम के तेल में विटामिन इ भारी मात्रा में पाया जाता है। 

* रोजाना धुलाई :-

जिस तरह से बालों में तेल लगाना जरुरी है उसी तरह से बालों की सफाई और धुलाई भी बहुत जरुरी है। अगर आपके बाल लंबे हैं तो उन्‍हें हफ्ते में दो बार जरुर धोएं। आपके सिर की सफाई बहुत जरुरी है जिससे जड़ों को सांस लेने की जगह मिल सके।  

*सीताफल के बीज और बेर के पत्तो

को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर बालों की जड़ो पर लगा ले और कुछ समय के अड़ अपने बालों को धो ले कुछ ही दिनों में आपको इसका असर देखने को मिलेगा 

* 250 ग्राम अमरबेल 

को ले और साथ में 3 लीटर पानी भी ले इस 3 लीटर पानी में अमरबेल को उबाले जब यह पानी उबलकर आधा रह जाए तो इसे आग से उतार ले और अपने बालों को इस पानी से धोये आपके बाल लम्बे होने लग जायेंगे 

* नीम ,मेहँदी और ग्रीन टी

आदि  ऐसे हर्ब्स है जिनको बालो पर लगाने से बाल काले, घने और लम्बे होते है इन सब में मेहँदी सबसे अच्छी है क्योकि यह बालों की जड़ो को पोषण देती है और इसके प्रयोग से बाल काले ,घने और चमकदार बनते है|

नारियल तेल और बेकिंग सोडा का ये प्रयोग आपको बना देगा 10 साल जवां


                                                    

स्वच्छ, सुंदर त्वचा हर औरत का सपना होता है। और इस के लिए बाज़ार में कैमिकल युक्त फेशिअल क्रीमो की भरमार है | जिस से बहुत सारे साइड इफैक्ट हो सकते हैं इसी लिए आज हम आप के लिए एक ऐसा फेशिअल पैक लेकर आये हैं जो आपकी त्वचा को 10 साल तक जवां बना देगा | 
इसमें केवल दो घरेलु सामग्रियों का उपयोग होता जो हैं बेकिंग सोडा और नारियल का तेल आप इस प्राकृतिक फेस क्लीनर का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो आप आसानी से मुँहासे, दाग धब्बे ,चेहरे की सिअहियाँ और कई कॉस्मेटिक समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। साथ ही, यह प्रभावी ढंग से त्वचा की मृत कोशिकाओं, अतिरिक्त sebum और मलबे को हटाने अद्भुत काम करता है। इसके इलावा ये त्वचा के छिद्रों की सफाई , मुहासों से छुटकारा और blackheads को रोकने में बहुत ही कारगर है | इस औषधि का इतना प्रभावशाली होने की वजह इस में शामिल  सामग्रियों का मिश्रण हैं बेकिंग सोडा त्वचा के ph लेवल को संतुलित करता है जिस से मुहासों को रोकने में मदद मिलती है दूसरी ओर, नारियल तेल अद्भुत जीवाणुरोधी, चिकित्सा और मॉइस्चराइजिंग गुणों से भरपूर है । यह त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार के लिए बेहद फायदेमंद है।

सामग्री :

2 चमच शुद्ध नारियल तेल 1 चमच बेकिंग सोडा
दिशा-निर्देश : 1. एक छोटी कटोरी में सामग्री ब्लेंड कर के एक पेस्ट की तरह मिश्रण बना लें ।
2. अपने चेहरे पर इस पेस्ट को धीरे धीरे हलके हाथों से रगड़ें |
3. लगभग 5 मिनट के लिए ऐसा करें | 

4. इसके बाद गुनगुने पानी से इसे साफ़ कर दें
5. नारियल तेल आपकी त्वचा को हाइड्रेट कर देगा इस लिए बाद में moisturizer का उपयोग करने की जरूरत नहीं है। 

बालों को घने काले और लम्बे बनाने के चमत्कारी उपाय // Measures to create thick black long hair:




कुछ सालों पहले तक लोगों के सिर पर काफी बाल होते थे। यह वह समय था जब सौन्दर्य उत्पादों और रसायनों का प्रयोग ना के बराबर किया जाता था। तब रास्ते में प्रदूषण भी काफी कम होता था। पर आजकल चीज़ें काफी बदल गयी हैं। लोग अब निरंतर बालों के झड़ने और पतले होने की शिकायतें करते पाए जाते हैं। इसके पीछे उन रसायनों का हाथ है जो बालों की मज़बूती और घनत्व को काफी नुकसान पहुँचता है। बालों के स्टाइलिंग (styling) के उत्पादों का ज़्यादा इस्तेमाल करने पर भी कंघी करते वक़्त बाल बाहर निकल सकते हैं। पर कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप आसानी से बालों का घनत्व बढ़ा सकते हैं।
स्त्री और पुरुष के लिए बाल सुंदरता का प्रतीक होता है। सुंदर घने बाल अपने आप मे विश्वास जगाता है। कम बालो के कारण शर्म महसूस होती है और आत्मविश्वास की कमी भी होती है जो की मानसिक तनाव का कारण बनती है। बाजार मे बहुत सारे उत्पाद उपलब्ध है जो की बालो को घना बनाने मे आपकी मदद करता है। बालो की चमक बनाए रखने के लिए आपको ज़रूरत होती है सही उत्पाद के चुनाव और उपयोग करने के तरीके की। प्राकृतिक रूप से बालो को घना बनाने के लिए कुछ नुस्खे नीचे बताए गए है।
जब बात खासकर महिलाओं की हो रही हो तो घने बाल काफी खूबसूरत माने जाते हैं। पुराने ज़माने में शादियों के समय लड़के वाले लड़की के बाल की जाँच करते थे कि वे घने, काले तथा सुन्दर हैं या नहीं। अगर बाल सुन्दर हों तो लड़के के घरवाले भी लड़की का खुले दिल से स्वागत करते थे। पर कुछ सालों के बाद लम्बे बालों का चलन कम हो गया और मध्यम आकार के बालों का चलन शुरू हो गया। अब बालों का घना होना और भी ज़्यादा आवश्यक हो गया है। कुछ आसान नुस्खों से आप बालों का घनत्व बढ़ा सकते हैं।
आलू का रस
आलू का रस बालों के झड़ने से लड़ने और घना, लम्बा करने में मदद करता है। आप कुछ आलू का रस का उपयोग करें।
कैसे करें: अपने सिर पर आलू का रस का प्रयोग करें और आप सिर को धोने से पहले 15 मिनट के लिए छोड़ दें। आलू में मौजूद विटामिन बी आपके बालों को और मजबूत बनाता है।
बालों की जड़ो मे रोज तेल से मालिश करना चाहिए जो की रक्त संचार को बढ़ाता है और आपके बालो की जड़ो को मजबूत भी करता है। बालो की जड़ो मे गर्म तेल से और गोलाई मे मालिश करे। जोजोबा का तेल और नारियल का तेल बालो के लिए सबसे अच्छा तेल होता है। रूसी दूर करने के लिए मेहंदी का तेल लगाए | तेल लगाने के बाद और बालो को धोने से पहले बालों को गर्म पानी के तोलिये से 15 मिनिट तक ढक कर रखे, फिर बालो को धोए। ये आपके बालो को चमक देगा | रूसी से बचने के लिए हफ्ते मे 4 बार बालो को धोए और सिर मे सफाई बनाए रखे।
अमला
अमला विटामिन सी का एक भंडार है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
कैसे करें: आंवला पाउडर और नीबू के रस को बराबर भागों मिलाएं। बालों पे इस मिश्रण को लगाना शुरू करें। इसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ धो ले और सूखने दें
बालों के झड़ने से रोकने और घने बाल पाने का सबसे आच्छा तरीका है संतुलित आहार लेना। ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे की विटामिन और पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन ए, सी, तांबा(कॉपर), लोहा(आयरन), ज़िंक मौजूद हो।हमेशा हाइड्रेटेड रहना चाहिये जो की बालो को घना बनाए रखता है इसलिए शरीर मे पानी कमी नही होने देना चाहिये और भरपूर मात्रा मे पानी का सेवन करना चाहिये।
नींबू का रस
नींबू का रस भी आपके बालों को लंबा घना तथा स्वस्थ रखने में सहायक होता है ।
कैसे करें:
दो चम्मच नींबू का रस को थोड़े पानी के साथ मिलाकर लगा ले । 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं।
इस प्रकार बालों की देखभाल करें।
प्याज
प्याज रक्त के परिसंचरण को बढ़ावा और सिर को साफ रखने में मदद करता हैं।
कैसे करें: छोटे टुकड़ों में प्याज काटें और रस निचोड़ ले। अपने सिर पर इस रस को लगा ले। 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं।
कॅनडीशनर आपके बालों को कोमल और चमकीला बनता है बालो को धोने के बाद कॅनडीशनर लगाए और ध्यान रहे कॅनडीशनर बालो की जड़ो से 1-2 इंच की दूरी से लगाए। कॅनडीशनर को बालो की जड़ो मे नही लगाना चाहिये।
अंडे :
नियमित रूप से प्रोटीन बालों को मजबूत और घना बनाने के लिए आवश्यक है।
एक या दो अंडे ले लो और इसे ठीक से मिला लो। गीले बालों पर अंडा लगाना आरम्भ करे और 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार बालों की देखभाल करें।
अंडा बालो की जड़ो को मजबूती प्रदान करता है और बालो घना और लंबा भी। एक अंडे को फोड़कर इसका पीला और सफेद भाग अलग कर ले और गीले बालो पर मास्क की तरह 1 घंटे तक लगाकर रखे फिर गर्म पानी या शैम्पू से धो दे। अब आपके बाल घने और चमकदार हो जाएगे। हफ्ते मे 2 बार इस नुस्खे का पालन करे।
जैतून का तेल
गर्म तेल के साथ अपने बालों और सिर की मालिश 45 मिनट करें। इसके बाद शैम्पू का उपयोग कर अपने बाल धो लें। इससे आपके बाल स्वस्थ होंगे और इसमें एक अद्भुत चमक नजर आएगी ।
नारियल का तेल
नारियल का तेल बालों के लिए अच्छा है और इससे आपको घना, मोटा और लम्बा बाल पाने के लिए मदद मिलती है। नारियल के तेल में प्रोटीन मौजूद होते हैं।घना, मोटा और लम्बा बाल प्राप्त करने के लिए नारियल तेल का उपयोग करे, खोपड़ी और बालों में गरम नारियल तेल का मालिश एक गर्म तौलिया के साथ करें। पचास मिनट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दे और फिर एक हल्के शैम्पू से धो लें।
*मेथी के दाने हमेशा रसोई घर मे मिल ही जाते है क्यो ना आप इनका इस्तेमाल करे। रातभर मेथी के दानो को पानी मे भिगोकर रखे फिर सुबह इसे पीस ले। बालो मे 1 घंटे तक लगाकर रखे फिर पानी से धो ले। हफ्ते मे 2 बार लगाए जिससे आप पाएगे काले और लम्बे घने बाल।

संतरे का रस
संतरे का रस भी मोटा बालों को घना करने के लिए एक बहुत अच्छा तरीका ह। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
संतरे का रस और सेब का एक मिश्रण स्वाभाविक रूप से घना बाल पाने के लिए एक अच्छा तरीका है। एक सप्ताह में दो बार, तीस मिनट के लिए अपने बाल में लगाए। यह अच्छी तरह से मिश्रित होना चाहिए।
गुडहल का फूल बालों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। नारियल और शीशम के तेल मे गुडहल के फूल का घोल मिलाए और बालो की ग्रोथ के लिए बालो मे 15 मिनिट तक लगाकर रखे फिर बालो को धो ले।
घने बालो के लिए उपाय – अरंडी का तेल (Castor oil)
यह एक चिपचिपा तेल है जिसकी गंध शायद आपको पसंद ना आए। पर ज़्यादातर लोगों का यह मानना है कि बालों को घना करने के लिए यह सबसे बेहतरीन तेल है। दूसरे तेलों के मुकाबले यह तेल चिपचिपा होता है जिससे कि बालों में अच्छे से लग जाता है और बालों का टूटना रोक देता है। इस तेल में फैटी एसिड एवं विटामिन इ के गुण होते हैं जो बालों को बढ़ाने में सहायता करते हैं। अगर आपको लगता है कि यह तेल ज़्यादा गाढ़ा और चिपचिपा है तो इसमें नारियल का तेल मिलाकर इसे गर्म करें। अब इसे बालों की जड़ों तक लगाएं। घने बाल पाने के लिए बालों पर गोलाकार मुद्रा में मालिश करें।

तनाव के कारण भी बाल कम और सफेद होते है इसलिए इन सब से बचने के लिए कोशिश करे की तनाव रहित रहे। तनाव से दूर रहने के लिए योगा , कसरत, ध्यान आदि कर सकते है। बालो को लंबा, काला और मजबूत बनाने के लिए उपर दी गई विधियो का पालन करे। जिसे आप ज़रूर ही अपने बालो मे एक बहतर फ़र्क महसूस करेगे।
अमला
अमला विटामिन सी का एक भंडार है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
कैसे करें: आंवला पाउडर और नीबू के रस को बराबर भागों मिलाएं। बालों पे इस मिश्रण को लगाना शुरू करें। इसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ धो ले और सूखने दें।

7 बीमारियों की एक दवा= नमक+नींबू+काली मिर्च // A drug for 7 diseases =salt + lemon + pepper




नमक, काली मिर्च और नींबू के इस प्रयोग से इन 7 बिमारियों को किसी भी दवा से बेहतर ठीक कर सकते हैं..!!
मौसम के बदलने पर लोग अक्सर बीमार पड़ जाते है. बुखार व खांसी हो जाती है,जिसकी वजह से बार-बार हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पड़ते है. मानसून आने वाला है ऐसे में कई लोग वेदर चेंज को आसानी से सह नहीं पाते और उनके लिए छोटी से बीमारी बड़ी बिमारी का रूप ले लेती है. इन छोटी-छोटी बीमारी की वजह से आपको हॉस्पिटल के चक्कर न काटना पड़े इसके लिए आप घर में ही घरेलु उपचार कर सकते है. 

तो बताते  है नमक,नींबू और काली मिर्च के मिश्रण के कुछ चमत्कारी  फायदे –
Salt, Pepper and Lemon / नमक, काली मिर्च और नींबू
नमक (1 छोटा चम्‍मच), काली मिर्च (½ छोटा चम्‍मच) और नींबू (कुछ बूंद) के रस से 7 तरह की बीमारियों को ठीक कर सकते हैं । जी हां, आपकी जानकारी के लिये हम नीचे बताएंगे कि यह कौन कौन सी बीमारियों को ठीक कर सकता है।

*वजन घटाए
एक चौथाई छोटा चमच पीसी हुए काली मिर्च , 2 बड़े चमच ताज़ा निम्बू का रस , 1 बड़ा चमच शहद लेकर एक ग्लास पानी में मिला लें |
रोज सुबह खाली पेट इस मिश्रण को लेने से शरीर का मैटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।



*दांत दर्द में राहत
1/2 छोटा चमच पीसी हुई काली मिर्च, 1/2 छोटा चमच लौंग का तेल ले कर मिला लें | इस मिश्रण को गरम पानी में मिला कर कुल्‍ला कीजिये, आपका दांत दर्द खतम हो जाएगा।
*.फ्लू भगाए
अगर इस मिश्रण को शहद के साथ खाएं तो फ्लू पैदा करने वाले वायरस और रोगाणुओं की छुट्टी हो जाती है।
*.मतली कम कर देता है

एक बड़ा चमच नीम्बू का रस , एक छोटा चमच काली मिर्च ले कर एक गिलास गरम पानी में मिला घूंट घूंट कर के पिए |ये मिश्रण आपके पेट में बढ़े हुए एसिड को कम कर देता हैं, इसलिये आपको जब भी मतली या एसिडिटी का एहसास हो तो, इसे लेना ना भूलें।
*.बंद नाक को खोले
इन तीनों का मिश्रण अगर गरम पानी के साथ लिया जाए तो यह शरीर में गर्मी का उत्पादन कर के नाक की नली में हुई सूजन को कम करेगा और बंद नाक को खोलेगा।
*.गले के दर्द में राहत दिलाए
इस मिश्रण में एंटीबैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो गले में पनप रहे बैक्‍टीरिया का नाश कर के गले के दर्द से राहत दिलाता है। एक बड़ा चमच ताज़ा निम्बू का रस, 1/2 छोटा चमच पिसी हुए काली मिर्च और एक छोटा चमच उच्च गुणवत्ता वाला नमक लेकर एक गिलास गरम पानी में मिला लें इस मिश्रण से दिन में कई बार कुल्ला करें इस से आपको गले के दर्द और खांसी से राहत मिलेगी|
*.गॉलस्‍टोन ठीक करे
यदी इन तीनों मिश्रण के साथ जैतून का तेल भी मिला लिया जाए और फिर इसका सेवन किया जाए तो यह मिश्रण बड़ा ही शक्तिशाली बन जाता है। तब यह मिश्रण गॉल ब्‍लैडर में इकत्रित स्‍टोन्‍स को घुलने में मदद करता है। लेकिन इसको नियमित लेना होगा।

लहसुन से मचाये रात भर बिस्तर पर धमा चौकडी



आपने सेक्स पावर बढाने के लिए लोगों को विभिन्न प्रकार दवाई, टेबलेट और इजेक्शन लेते देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ प्रकृति चीजें है ज्यादा इन दवाईयों से ज्यादा गुणकारी है। प्रकृति की कई ऎसी चीजें है जो दवाईयों के मुकाबले कहीं अधिक सेक्स पावर बढाती हैं हम आपको उनके बारे में रूबरू कराते है। ये प्रकृति चीजें जो आसानी से उपलब्ध होती और आपकी सेक्स पॉवर को बढाती है। इनकी उपयोगिता को यदि गंभीरता से सीखा और जाना जाए तो ये बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। दुनियाभर में इन वस्तुओं पर इतने प्रयोग हो चुके हैं कि ये भी सामने आया है कि यह आपकी सेक्स क्षमता को भी कई गुना बढा सकती हैं।

मर्दाना ताक़त, जोड़ो का दर्द , (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि, शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल आदि के लिए उत्तम औषिधि – लहसुन पाक।
लहसुन पाक पोष्टिक आहार के रूप में वाजीकारक योग हैं। विवाहित पुरुषों के लिए यौन शक्तिदायक वृद्धक तो होता ही है साथ ही शरीर की सप्त धातुओं को पुष्ट और सबल करके शरीर को सुडौल और बलवान बनाने वाला भी है। 


लहसुन पाक बनाने की विधि-

लहसुन की 100 ग्राम कलियोँ  छिलका अलग करके , काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। एक लीटर दूध में एक गिलास पानी डाल कर, ये सभी टुकड़े डाल दें और गरम होने के लिए रख दें। उबल जाने पर जब दूध गाढ़ा हो जाये और मावा जैसा बन जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और मिक्सी में पीसकर लुगदी बना लें।
एक कढाई में थोडा सा शुद्ध देशी घी गरम करके इस लुगदी को डाल दें और धीमी ( मंदी ) आंच पर पकाएं। जब लाल हो जाये तब इसे उतार लें यदि घी बच जाए तो अलग कर लें। अब इसमें आवश्यक मात्रा में शक्कर की चाशनी तैयार करें।

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

भुनी हुई लुगदी और केशर 1 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, दालचीनी 2 ग्राम, और सौंठ 5 ग्राम — इन सबको बारीक़ पीसकर चाशनी में डाल दें और भली-भांति मिला लें और थाली में फैला कर जमा लें यही लहसुन पाक है।
यह पाक सुबह शाम ( रात को सोने से पहले ) एक-एक चम्मच की मात्रा में, मिश्री मिले हुए हलके गरम दूध के साथ कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।

वर्षा ऋतु के रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार 

इसके सेवन से जोड़ो का दर्द, (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि ,शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल, आदि अनेक रोगों को निरोगी बनाने में सहायक होता है तथा स्नायविक संस्थान की कमजोरी, व यौन शिथिलता दूर करके बल प्रदान करता है।
एसे रोगों से ग्रस्त रोगी के अलावा यह पाक प्रौढ़ एवम वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए शीतकाल में सेवन योग्य उत्तम योग है।


अनचाहा गर्भ गिराने के सही तरीके और उपाय // The ways and means to bring down unwanted pregnancy


पहले तिमाही में गर्भपात
निर्वात पंप से गर्भपात करना
यह गर्भ के पहले तिमाही यानी १२ सप्ताह तक प्रयोग किया जा सकता है| यह एक सुरक्षित और अच्छा तरीका है| इसके अधिकांश स्थितियों में बच्चेदानी के मुँह को फैलाना नहीं पडता है| बच्चादानी या उसके मुँह में चोट लगने की संभावना कम रहती है| संक्रमण कम होता है और रक्तस्त्राव भी कम होता है| डी.एण्ड सी (क्युरेटिंग) तरीके में विपरीत घटनाओं का संभावना अधिक रहती है|
गर्भपात कराने में कोई भी सक्षम डॉक्टर जो प्रशिक्षित हो, इसे कर सकता है|
इसका उपयोग १२ सप्ताह तक के गर्भ की गर्भपात , १२ सप्ताह तक का अपूर्ण गर्भपात और अलक्षित गर्भपात में किया जा सकता है|

इन महिलाओं में इसका इस्तेमाल न करे जिन्हे योनी या योनी संक्रमण के लक्षण हो, जिसमें पहले किए गए इलाज के कारण बच्चेदानी में छेद होने का संदेह है| जहॉं अस्थान गर्भ होने का संदेह है|
इन महिलाओं में इसका इस्तेमाल करते हुए विशेष ध्यान दे - २० वर्ष से कम उम्र वाली औरते, अगर बच्चादानी में गोला है (फाईब्राइड) अगर बच्चादानी का मुँह सिकुडा हुआ है, अगर उसे पहले बच्चादानी का ऑपरेशन हुआ हो, और अगर अन्य बिमारियॉं हो जैसे बहुत ज्यादा खून की कमी, रक्तचाप बढा हुआ हो, शक्कर की बिमारी, दिल की बिमारी, गुर्दे की बिमारी हो, या खून जमने में गडबडी हो, हो,इसके इस्तेमाल में महिला को बेहोश नहीं करना पडता है, दर्द के लिए गोलियॉं और स्थानीय इंजेक्शन (सुन्नपन के लिए) पर्याप्त है|
महिला को खतरे के संकेत के बारे में बताएँ| अगर अधिक रक्त स्त्राव या पेट में दर्द हो तो तुरंत अस्पताल वापस जाएँ|
गर्भ निरोधक विधि अपनाना चाहे तो उपलब्ध कराएँ|


गोलियॉं द्वारा गर्भपात कराना-
इसमें दो दवाओं का इस्तेमाल होता है - मेफिप्रेस्टोन और मीसोप्रोस्टॉल| यह विधी गर्भ के पहले सात सप्ताह (४९ दिन तक) सबसे प्रभावशाली होता है, मगर उसके बाद भी ९ सप्ताह (६३ दिन) तक उपयोग किया जा 


सकता है।
५% तक महिलाओं में इसके बाद अपूर्ण गर्भपात होने के कारण डी एण्ड सी करवाना पडता है, मगर बाकी में अपने आप गर्भपात पूर्ण हो जाता है|
जिन महिलाओं को गंभीर अनिमिया है (८ ग्राम से कम) उच्च रक्तचाप है योनी प्रदाहक रोग है, मिर्गी की बिमारी है इनमें गोलियॉं न दे|
पहले दिन मेफिप्रेस्टोन की एक गोली (२०० मि.ग्रा.) खाने को दे| तीसरा दिन मीसोप्रोस्टॉल की ४०० मैक्रोग्राम (२०० मै.ग्रा. के दो गोली) मुँह से ले या योनी में लगाएँ|
रक्तस्त्राव ८-१३ दिन तक हो सकता है और भारी माहवारी जैसे होता है| अगली माहवारी १-२ सप्ताह देर से हो सकती है|

महिला को काफी पेट दर्द और मितली हो सकती है| इसे कम करने की दवाइयॉं दे|
अगर मीसोप्रोस्टॉल की गोलियॉं खाने बाद महिला तुरन्त उल्टी कर डालती है या गोली खाने से २४ घंटे बाद भी रक्तस्त्राव शुरु नही होती तो मीसोप्रोस्टॉल की ४०० मैक्रोग्राम की एक और खुराक दे|
विशेष सूचना
गर्भपात गर्भ निरोधन पद्धती नही है। अन्य विकल्प ना होनेपर ही गर्भपात करवाएँ। उचित समय पर गर्भ निरोधक साधनोंका प्रयोग करे और गर्भपात टालना उत्तम नीति है।
गर्भपात में किसी ना किसी तकलीफ या खतरे की संभावना रहती है।
गर्भपात के बाद कभी-कभी बांझपन भी आ सकता है।
गर्भपात हेतू कभी भी झोला छाप डॉक्टर या बाबा के पास ना जाएँ। उससे खर्च, समय और जानलेवा खतरा कईं गुना बढ जाता है। गर्भपात केंद्र भी अधिकृत होने का भरोसा कर ले।

१२-२० हफ्तोंका गर्भपात सुव्यवस्थित अस्पताल में ही करवाएँ।
गर्भपात हेतू डॉक्टर भी मान्यता प्राप्त होना चाहिये। गर्भपात केंद्र में इसका दाखिला होता है।
गर्भपात करवाना गुनाह नहीं है। खुदको इसके लिये अपराधी न समझे। सही कारण हेतु गर्भपात करवाना आपका हक है।
हर गर्भपात का ठीक पंजीयन अस्पतालमें किया जाता है।
इस गर्भपात के बाद बच्चे की चाहत ना होने पर नसबंदी करवाना उत्तम है।
गर्भधारण के २० हफ्तों बाद गर्भपात करवाना गैरकानूनी है और यह स्वास्थ्य के हिसाब से खतरनाक भी है। १२ हफ्तों से पहले गर्भपात करने का तरीका १२ से २० हफ्तों के बीच गर्भपात करने के तरीके से अलग होता है।

गर्भपात कौन कर सकता है?
सिर्फ प्रशिक्षित चिकित्सीय विशेषज्ञ ही गर्भपात कर सकते हैं। डॉक्टर जो विशेषज्ञ है वही गर्भपात कर सकते हैं। अन्य एम.बी.बी.एस. डॉक्टर या विशेषज्ञ भी किसी मान्यता प्राप्त सरकारी केन्द्र में गर्भपात का प्रशिक्षण हासिल कर सकते हैं। इसके बाद ही वो गर्भपात करवा सकते हैं।
म.टी.पी. करने वाले केन्द्र में सभी सुविधाएँ उपलब्ध होनी चाहिए। और उसे मान्यता के लिए सर्टिफिकेट मिला हुआ होना चाहिए। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा मान्यता मिले बगैर किसी भी अस्पताल या क्लीनिक में गर्भपात नहीं किया जा सकता। अगर उस केन्द्र में पेट के ऑपरेशन, खून चढ़ाने और ऐनेस्थीशिया की सुविधा हो तो २० हफ्तों के भीतर होने वाले गर्भपात की इजाज़त मिल सकता है। छोटे केन्द्रों में गर्भधारण के १२ हफ्तों के भीतर के गर्भपात हो सकते हैं। १२ हफ्तों के बाद के गर्भपात के लिए दो डॉक्टरों का सहयोग और गर्भपात का निर्णय लेना ज़रूरी है। १२ हफ्तों से कम वाले गर्भपात में एक डॉक्टर की राय भी काफी होती है|

ब्लड शुगर (Diabetes) और मोटापे का काल है आक का पत्ता



इसके पत्ते के इस्तेमाल से आप सिर्फ 7 दिन से 3 महीने के भीतर शुगर से मुक्त हो सकते हैं यह बिलकुल सच है कि आक का पत्ता मोटापे और डायबिटीज का काल बन सकता है बहुत सारे लोग इस उपाय से फायदा उठा चुके है तो देर किस बात की है आप भी इस आक के पत्ते या आकडे के पत्ते का प्रयोग करके इससे फायदा उठा सकते है आप इस आक के पत्ते का प्रयोग करके 5 दिन से लेकर 2 महीने के अंदर ब्लड शुगर को कण्ट्रोल कर सकते है यह प्रयोग न केवल शुगर बल्कि मोटापे को कम करने को लेकर भी काफी असरदार है कुछ लोगो ने तो इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में फायदा पाया है

प्रयोग की विधि :-

आपको करना बस इतना है की इस आकडे के पत्ते को लेकर उल्टा करके यानि की खुरदरा भाग पैर के तलवे पर लपेटकर ऊपर से मोजा पहन ले आप पूरा दिन इसको ऐसे ही लगा रहने दे और रात को सोते समय इसको निकाल दे थोड़ी देर अपने पैर को हवा लगाकर फिर दोबारा दूसरा पत्ता लेकर बांध ले कुछ ही दिनों में आपका शुगर लेवल कम हो जायेगा यह पोधा आपको हर जगह आसानी से मिल जायेगा इस पोधे के प्रयोग करने से आपका मोटाप भी कम होगा\

सावधानी :-
इस प्रयोग को करने में एक सावधानी बरतनी है जब भी आप आकडे के पत्ते को तोड़े तो इससे दूध निकलता है आप उसको हाथ न लगाये क्योकि वो दूध अगर आँख में चला जाता है तो नुकसान करता है तो आप यह प्रयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे|
   आप भी इस प्रयोग को आज से ही शुरू करे और इससे फायदा उठाये लेकिन  आप इसके साथ साथ अपने खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखे क्योकि किसी भी रोग को दूर करने में इनका अहम रोल होता है आपको स्वस्थ रखने में |

मूत्र रोगों की रामबाण होम्योपैथिक चिकित्सा // Homeopathic Medicine of Urine Diseases



इस लेख मे मूत्र रोग और इसके होमियोपैथिक चिकित्सा निदान पर चर्चा करेंगे।
मूत्र का रोग भी हो सकता है, ऐसा कोई निरोग व्यक्ति नही सोच सकता है, लेकिन जिसे यह रोग हो जाता है वहीं काफी परेशान हो जाता है। मूत्र विकार के अंतर्गत कई रोग आते हैं जिनमें मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना, मूत्रकृच्छ और बहुमूत्र प्रमुख हैं| यह सभी रोग बड़े कष्टदायी होते हैं। यदि इनका यथाशीघ्र उपचार न किया जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं। भागदौड की जिन्दगी जीनेवाले लोगों में मूत्र रोग की समस्या होती है। जीवन शैली से यह बीमारी जुड़ गयी है। इसके कारण न सिर्फ मूत्र रोग बल्कि नपुंसकता की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि यौन मार्ग की सफाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सफाई के अभाव में संक्रमण होने की संभावना रहती है। ऐसे रोगी जिनके मूत्र मार्ग में 5 मि.मी.से कम आकार की पथरी कोई परेशानी नहीं कर रही है तो चिंता करने की बात नहीं है। ऐसे लोगों को 24 घंटे में इतना पानी पीना चाहिए जिससे कि दो-तीन लीटर पेशाब हो सके।


कारण:

यदि मूत्राशय में पेशाब इकट्ठा होने के बाद किसी रुकावट की वजह से बाहर न निकले तो उसे मूत्रावरोध कहते हैं| स्त्रियों में किसी बाहरी चीज के कारण तथा पुरुषों में सूजाक, गरमी आदि से मूत्राशय एवं मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे पेशाब रुक जाता है| वृद्ध पुरुषों की पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट ग्लैंड) बढ़ जाती है जिसके कारण उनका मूत्र रुक जाता है|
मूत्रकृच्छ में पेशाब करते समय दर्द होता है| जब मूत्राशय में दर्द उत्पन्न होता है तो पेशाब रुक जाता है| इसी प्रकार हिस्टीरिया (स्त्री रोग), चिन्ता, सिर में चोट लग जाना, आमाशय का विकार, खराब पीना, आतशक, कब्ज, पौष्टिक भोजन की कमी आदि के कारण भी बार-बार पेशाब आता है|मूत्र पथ का संक्रमण समुदाय-प्राप्त हो सकता है या अस्पताल में मूत्र पथ में उपयोग किये जानेवाले उपकरण (मूत्राशय कैथीटेराइजेशन) के जरिये भी प्राप्त हो सकता है। समुदाय-प्राप्त संक्रमण बैक्टीरिया के द्वारा होते है। इनमें सबसे सामान्य जन्तु ‘ई. कोलई’ कहा जाता है। प्रतिरोधी बैक्टीरिया और फंगस (कवक) से अस्पताल-प्राप्त संक्रमण हो सकते हैं।