17.10.15

पेट की चर्बी कम करने के उपचार : Home remedies to reduce belly fat




बाहर निकले हुए पेट को अन्दर करने के  उपाय 





ऊपर  चित्र में दिए गए उपचारों   के अलावा नीचे  पेट की चर्बी कम करने में मददगार कुछ और  उपाय  दिए जा रहे हैं-

1)  दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पिएं। ऐसा करने से पेट की चर्बी कम होकर  मोटापा कम होने लगेगा।





2) खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।

3) ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें न खाएं। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।

4) सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन पर्याप्त  मात्रा में करें।लेकिन  केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है।



5)  खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन नियंत्रित  करने में मदद मिलती है|

6)  केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।

7) आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं।  यह उपाय चर्बी कम करने  में अक्सीर है| 

8) पुदीने की ताजी हरी पत्तियों की चटनी बनाकर चपाती के साथ खाएं। पुदीने वाली चाय पीने से भी वजन नियंत्रण में रहता है।

9) आधा चम्मच सौंफ को एक कप खौलते पानी में डाल दें। 10 मिनट तक इसे ढककर रखें। ठंडा होने पर इस पानी को पिएं। ऐसा लगातार करते रहने से वजन कम होने लगता है।

10) पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।



 11) छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।

12) दही  खाने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।

9.10.15

पायरिया का सरल ईलाज :Pyorrhea tips


   


    दांतों की साफ सफाई में कमी होने से जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया। सांसों की बदबू, मसूड़ों में खून और दूसरी तरह की कई परेशानियां। जाड़े के मौसम में पायरिया की वजह से ठंडा पानी पीना मुहाल हो जाता है। पानी ही क्यों कभी-कभी तो हवा भी दांतों  में सिहरन  पैदा कर देती है|


  पायरिया के बारे में एक गलत धारणा ये है कि इसका इलाज मुमकिन नहीं जबकि हकीकत ये है कि इसका इलाज मुमकिन है। पायरिया की वजह से हिलते दांतों को भी पक्का किया जा सकता है। अच्छी तरह से मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई से ये बीमारी दूर हो सकती है|

 1)   नीम के पत्ते साफ कर के छाया में सुखा लें। अच्छी तरह सूख जाएँ तब एक बर्तन में रखकर जला दें और बर्तन को तुरंत ढँक दें। पत्ते जलकर काले हो जाएँगे और इसकी राख काली होगी। इसे पीसकर कपड़छान कर लें। जितनी राख हो, उतनी मात्रा में सेंधा नमक पीसकर शीशी में भर लें। इस चूर्ण से तीन-चार बार मंजन कर कुल्ले कर लें। भोजन के बाद दाँतों की ठीक से सफाई कर लें। यह नुस्खा अत्यंत गुणकारी है।

 2)  सादी तम्बाकू, पर्याप्त मात्रा में लेकर तवे पर काला होने तक भूनें। फिर पीसकर कपड़छान कर महीन चूर्ण कर लें। इसके वजन से आधी मात्रा में सेंधा नमक और फिटकरी बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और तीनों को मिलाकर तीन बार छान लें, ताकि ये एक जान हो जाएँ।इस मिश्रण को थोड़ी मात्रा में हथेली पर रखकर इस पर नीबू के रस की 5-6 बूँदें टपका दें। अब इससे दाँतों व मसूढ़ों पर लगाकर हलके-हलके अँगुली से मालिश करें। यह प्रयोग सुबह और रात को सोने से पहले 10 मिनट तक करके पानी से कुल्ला करके मुँह साफ कर लें।दो-तीन माह में मसूड़े स्वस्थ, दाँत मजबूत हो जाते हैं और पायरिया रोग चला जाता है। जो लोग तम्बाकू खाते हैं, उन्हें इस मंजन के प्रयोग में परेशानी नहीं होगी, परंतु जो तम्बाकू का प्रयोग नहीं करते उन्हें इसके प्रयोग में तकलीफ होगी। उन्हें चक्कर आ सकते हैं। अत: सावधानी के साथ कम मात्रा में मंजन लेकर प्रयोग करें। इस मंजन को करते समय थूक कदापि न निगलें, तम्बाकूयुक्त लार पेट में कदापि न जाने पाए। यह नुस्खा लाजवाब सिद्ध होगा।बच्चों के लिए यह प्रयोग निषेध है।





३)  कच्चे अमरुद पर थोडा सा नमक लगाकर खाने से भी पायरिया के उपचार में सहायता मिलती है, क्योंकि यह विटामिन सी का उम्दा स्रोत होता है जो दाँतों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है।

४) पायरिया शरीर में कैल्शियम की कमी होने, मसूड़ों की खराबी और दांत-मुंह की साफ सफाई में कमी रखने से होता है। इस रोग में मसूड़े पिलपिले और खराब हो जाते हैं और उनसे खून आता है। सांसों की बदबू की वजह भी पायरिया को ही माना जाता है।

५) ज्ञातव्य है  की  मुंह में 700 किस्म के बैक्टीरिया होते हैं। इनकी संख्या करोड़ों में होती है। अगर समय पर मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई नहीं की जाए तो ये बैक्टीरिया दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। पायरिया होने पर दांतों को सपोर्ट करने वाले जॉ बोन को नुकसान पहुंचता है।

६)  घी में कपूर मिलाकर दाँतों पर मलने से भी पायरिया मिटाने में सहायता मिलती है।



 ७) काली मिर्च के चूरे में थोडा सा नमक मिलाकर दाँतों पर मलने से भी पायरिया के रोग से छुटकारा पाने के लिए काफी मदद मिलती है।

८)      200 मिलीलीटर अरंडी का तेल, 5 ग्राम कपूर, और 100 मिलीलीटर शहद को अच्छी तरह मिला दें, और इस मिश्रण को एक कटोरी में रखकर उसमे नीम के दातुन को डुबोकर दाँतों पर मलें और ऐसा कई दिनों तक करें। यह भी पायरिया को दूर करने के लिए एक उत्तम उपचार माना जाता है।

९) . आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं,इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें।

१०) खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं। 


 ११) जीरा, सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी  को समान मात्रा में लें, इसे तवे पर जलाकर पीस लें,इस मंजन का नियमित प्रयोग करें।

.१२)  बादाम के छिलके तथा फिटकरी को भूनकर फिर इनको पीसकर एक साथ मिलाकर एक शीशी में भर दीजिए। इस मंजन को दांतों पर रोजाना मलने से पायरिया रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

१३) दशना संस्कार चूर्ण पायरिया के उपचार के लिए एक बहुत ही प्रचलित औषधि है। यह पाउडर मसूड़ों से रक्तस्राव और पस के निर्माण पर नियंत्रण रखता है, और मुँह से दुर्गन्ध हटाने में भी सहायता करता है।
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7.10.15

निम्न रक्त चाप के घरेलू उपचार : Home Remedies for Low Blood Pressure





निम्न रक्त चाप जिसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं , इसमें शरीर में रक्त परिवहन बहुत ही धीमा हो जाता है जिसके कारण सिर घूमना, चक्कर आना, कमजोरी, जी मिचलाना, धुंधला दिखाई देना और सांस लेने में दिक्कत जैसी बहुत सी परेशानियां होने लगती हैं। शरीर का सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 होता है लेकिन अगर बीपी का लेवल 90/60 आ रहा है तो ध्यान देने की जरूरत है। निम्न रक्त चाप का ब्रेन, किडनी और हार्ट पर बुरा असर पड़ता है। जिसके चलते ह्रदय रोग , गर्भावस्था , दिमाग से संबंधित बीमारियों के होने की भी संभावना रहती है।
निम्न रक्त चाप में उपयोगी घरेलू उपचार



नमक वाला पानी-
बीपी लो होने पर सबसे पहले घरेलू उपचार के तौर पर नमक मिला पानी पिएं क्योंकि नमक में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाने का काम करता है। लेकिन ध्यान रहे बहुत ज्यादा मात्रा में भी इसका इस्तेमाल नहीं करना है। नमक की ज्यादा मात्रा शरीर के लिए उचित नहीं है|
अनार-
अनार का जूस भी निम्न रक्त चाप की समस्या को दूर करके का बेहतरीन इलाज है। सिर्फ एक हफ्ते के इस्तेमाल के बाद ही फर्क नजर आने लगता है। इसके अलावा सेब, केला, चीकू भी अच्छा विकल्प होता है।
कॉफी-
एक कप कॉफी, हॉट चाकलेट या कैफीन मिली हुई चीजों खाने या पीने से भी लो बीपी को तुरंत कंट्रोल किया जा सकता है। लो बीपी की प्रॉब्लम काफी वक्त से चल रही है तो सुबह उठते ही एक कप कॉफी पिएं या नाश्ते के साथ जरूर लें। लेकिन कॉफी पीने की आदत न डालें क्योंकि ज्यादा कैफीन भी बॉडी के लिए सही नहीं।
अदरक-
अदरक के टुकड़ों को नींबू और नमक मिलाकर किसी एयर टाइट डिब्बे में रखें। रोजाना खाने से पहले इसके टुकड़ों को अच्छे से चबाएं। बीपी की प्रॉब्लम दूर करने में ये फॉर्मूला भी बहुत ही कारगर है।
गाजर-
गाजर में मौजूद प्रोटीन ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने में कारगर होता है। कच्चा खाने के साथ ही अगर शहद मिले इसके जूस को एक महीने तक दिन में एक बार पिया जाएं तो समस्या दूर हो जाएगी।
तुलसी के पत्ते-
तुलसी की पत्तियों में विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटैशियम और पैंटोथेनिक एसिड पाया जाता है। ये सारे मिनरल्स स्ट्रेस कम करने के साथ ही दिमाग को शांत रखते हैं। तुलसी की 10-15 पत्तियों का रस निकाल लें उसमें लगभग 1 चम्मच शहद की मात्रा मिलाएं। रोजाना खाली पेट इसे पिएं। बहुत जल्द फायदा मिलेगा।


किशमिश-
किशमिश को काफी वक्त से हाइपोटेंशन के लिए इलाज के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। एक महीने तक लगातार इसके इस्तेमाल से लो बीपी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। रात भर किशमिश को पानी में भिंगोकर रखें। सुबह खाली पेट इसे चबाकर खाएं और पानी को छानकर पी लें। बहुत ही कारगर नुस्खा है।
चुकंदर का रस-
चुकंदर का रस हाई ब्लड प्रेशर के साथ ही लो ब्लड प्रेशर होने पर भी इस्तेमाल किया जाता है। लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर एक हफ्ते तक लगातार दिन में दो बार एक कप चुकंदर का जूस पिएं।

बादाम वाला दूध-


दिमागी शक्ति बढ़ाने के साथ ही बादाम मिला दूध ब्लड सर्कुलेशन का लेवल भी सही रखता है। बादाम को रातभर पानी में भिंगोकर रख दें। सुबह इसे छीलकर अच्छे से पीसकर इसका पेस्ट बना लें। पेस्ट को दूध में मिलाकर रोजाना सुबह पीना फायदेमंद होता है।

हींग-
चुटकी भर हींग के इस्तेमाल से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर किया जा सकता है। इससे ब्लड क्लोटिंग नहीं होती जिससे सर्कुलेशन सही तरीके से होता है।
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6.10.15

पेट के कीड़ों का रामबाण इलाज :Treatment of intestinal worms


१)  छोटे  बच्चों  के पेट के कीड़ों को निकालने के लिए सौंफ का तेल ५ मिली थोड़ी  सी शकर के साथ ३ से  ५ दिन  दें|

२| वयस्क लोगों के पेट के कीड़ों के लिए २० मिली सौंफ का तेल  कुछ शकर के साथ  ४-५ दिन तक दें| 

३)  सोते वक्त  २ चम्मच  अरंडी  का तेल  पिलायें|  सुबह की दस्त में तमाम कीड़े निकल जायेंगे| 

४)  तुलसी के पत्ते का रस  पेट के कीड़े ख़त्म करने का अच्छा उपाय है|  तुलसी के पत्तों  का रस २-३ मिली  ७ दिन तक देना चाहिए| 

५)  मामूली  गरम पानी के साथ  आधा चम्मच  हल्दी की फक्की  लेने से  पेट के कीड़े मर जाते है|  यह उपचार ७ दिन तक करना  उचित है|    

६) बच्चों को यदि पेट में कृमि-कीड़ों की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर  निकल आते हैं।

७) बेल के पके फलों के गूदे का रस या जूस तैयार करके पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।  बेल के फलों के बजाए पत्तों का रस का सेवन किया जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

८) पपीते के फलों की डंठल से निकलने वाले दूध 3 मिली दूध को बच्चों को रात सोते समय देने से पेट के कीड़े मर जाते है और शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

९) जीरा के कच्चे बीजों को दिन में 5 से 6 बार करीब 3 ग्राम की मात्रा चबाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। कच्चा जीरा पाचन  क्रिया  को दुरुस्त भी करता है और गर्म प्रकृति का होने की वजह से कीड़ों को मार देता है और कीड़े शौच के साथ बाहर निकल आते हैं

१०) तेजपान के पत्तियों में कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं। सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन रात में सोने से पहले 2 ग्राम गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिया जाए तो पेट के कृमि मर कर मल के साथ बाहर निकल आते हैं।
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