नाशपति के रोग निवारक गुण









बारीश का मौसम आते ही लोग बीमार पड़ने लगते हैं | वायरल बुखार का रोग सबसे अधिक आक्रान्त करता है| इस मौसनम में लोगों को अपने खान-पान के मामले में ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिय| सेहत बनाए रखने में मौसमी फलों की महती भूमिका होती है| नाशपाती एक बारीश के मौसम का फल है जिसके सेवन से कई बीमारियों से निजात पाने में मदद मिल सकती है| इसमें कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं| बहुत से गुण तो सेव फल जैसे हैं| इसमें विटामिन,एन्जईम और पानी में घुलनशील फाईबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं|
*नियमित रूप से नाशपती का रस पीने से आँतों के विकार दूर करने में मदद मिलती है| विषाक्त पदार्थों और रसायनों की वजह से बड़ी आंत की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से निपटने में नाशपती की अहम भूमिका हो सकती है|
*नाशपती का जूस १०० मिली दिन में दो बार पीने से गले की खराश और कफ की समस्या ठीक हो जाती है| इसे खाने से शरीर का ग्लूकोज ऊर्जा में बदल जाता है| अत; जब भी थकावट महसूस हो नाशपती का जूस पियें| *नाशपती का जूस बुखार के रोगियों में तापमान कम कर राहत पहुंचाता है |ह्रदय की सुरक्षा करता है
-*  नाशपाती में प्रचुर फाईबर होता है जिससे शरीर का कोलेस्ट्रोल कम होता है | नाशपाती जैसे रेशे समृद्ध फल नियमित खाने से हार्ट -स्ट्रोक की रिस्क ५० प्रतिशत तक कम हो जाती है|
*नाशपती के नियमित उपयोग से छाती के केंसर की संभावना ३४ प्रतिशत तक कम हो जाती है|
*नाशपती का फ़ल खूब खाएं। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्व से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।पित्ताशय की पथरी रोगी को नियमित रूप से नाशपाती का सेवन करना कर्तव्य है|
*केल्शियम की कमी से हड्डिया खोखली होने लगती हैं| नाशपाती में बोरोन तत्व पाया जाता है | इससे शरीर में केल्शियम का अवशोषण सरल हो जाता है | नाशपाती के सेवन से अस्थि भंगुरता समस्या से बचा जा सकता है|
*गर्भवती स्त्रियों को फोलिक एसिड की जरूरत होती है \ फोलिक एसिड गर्भस्थ शिशु की जन्म जात विकृतियों से सुरक्षा करता है\ गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड समृद्ध नाशपती फल के सेवन करने की सलाह दी जाती है|
*नाशपती में पाया जाने वाला पेक्टिन तत्त्व कब्ज निवारक गुण रखता है| यह मूत्रल प्रभाव भी रखता है| *नाशपती खाने से आंतों की जरूरी गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिलती है| कब्ज पीडितों के लिए हितकारी है|
*नाशपती में प्रचुर विटामिन सी ,कापर,विटामिन के पाया जाता है | इन तत्वों की मौजूदगी से त्वचा की झुर्रियों से बचाव होता है और बुढापे को आगे सरकाया जा सकता है|









आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


सेहत के लिए गुणों से भरपूर है लहसुन.








*लहसुन गुणों से भरपूर भरतीय सब्जियों का स्वाद बढाने वाला ऐसा पदार्थ है जो प्राय; हर घर में इस्तेमाल किया जाता है|अधिकाँश लोग इसे केवल एक  मसाले के तौर पर ही प्रयोग करते हैं| लेकि एक औषधि के रूप में भी  लहसुन बेहद महत्वपूर्ण है|
*लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढाती है| यह केंसर जैसे मारक रोग से लड़ने में शरीर की मदद करता है|  चिकित्सक पेनक्रियाज , कोलन,ब्रेस्ट प्रोस्टेट  केंसर में  इसका प्रयोग करने की सलाह देते  हैं| लहसुन सेवन  से शरीर में रोग का  संक्रमण  कम होता है|
* लहसुन खाने से खून में  अच्छे कोलेस्ट्रोल  की मात्रा बढती है इससे ह्रदय रोगों पर काबू पाना आसान हो जाता है|  हाईपर टेंशन  के रोगियों को प्रतिदिन तीन  लहसुन की कली  खाने का नियम बना लेना चाहिए| इसमें जो एलीसिन तत्त्व  होता है वो




ब्लड प्रेशर को सामान्य  बनाने  मे सहायता  करता  है|
*पेट की गैस और कब्ज की बीमारी से परेशान  लोगों को अपने भोजन में  लहसुन का नियम पूर्वक व्यवहार  करना कर्त्तव्य है|






*जोड़ों  के  दर्द  व कमर के दर्द में लहसुन की खीर असरदार होती है|
* पाँच कली लहसुन की बारीक काट लें और दूध में उबालें  ,स्वाद के लिए थौड़ी  सी शकर भी डालें|  मामूली गरम हालत में  पियें|  दर्द भी  घुटने टेकेगा|





*सुनने की क्षमता बढाने के लिए  सरसों के तेल में लहसुन डालकर पकालें|  छान लें ,शीशी  में  भर लें| बहरापन दूर करने के लिए यह तेल  २-३ बूँद  कान में डालकर रूई लगालें|  ४५ दिन में फ़ायदा दिखेगा | कान का दर्द भी इस दवा से मिट जाता है|





किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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गर्भवती स्त्री को उल्टी ,जी मचलाना के आसान उपचार





 1) किसी  भी तरह की उल्टी हो रही हो या जी मिचलाता हो  तो सूखा धनिया या हरा धनिया कूट-पीस कर   निचोड़ कर  तरल तैयार कर लें|  ५-५ चम्मच  तरल बार - बार देते रहें\ इससे उल्टी रुक सकती है|  गर्भवती  की उल्टी  के लिए भी यह उपाय  सफल रहता है|
2)  चार नींबू का रस निकाल  कर छान लें|  ५० ग्राम सैंधा नमक डालें और  १२५ ग्राम जीरा  रस में भिगो दें|  धीरे -धीरे जब रस पूरी तरह सूख जाए और  सिर्फ जीरा रह जाये  तो इसे कांच या प्लास्टिक की शीशी में भरकर रख लें| जब उल्टी आती हो तब इसे आधी चम्मच मात्रा में मुहं में  चूसें|  उल्टी काबू में आ जाती है|
3)  अदरक व प्याज का रस दो-दो चम्मच  पिलाने से उल्टी होना बंद हो जाती है\
4) बार-बार उल्टी होना रोकने के लिए बर्फ चूसना हितकारी उपचार है|

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


5) तुलसी के पत्ते पीसकर रस निकालें| इसके सेवन से उल्टी बंद होती है और पेट के कृमि  भी मर जाते हैं|
6) तुलसी के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चाटने से  लाभ मिलता है|
7) पित्त की उल्टी होती हो तो शहद और दालचीनी  मिलाकर चाटना कर्त्तव्य है|
8)   २ लौंग पानी में  उबालकर  पियें| उल्टी में हितकारी असर होता है| लौंग चबाकर भी खाया  जा  सकता  है|

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9)  गर्भवती  स्त्री  भुने चने का सत्तू  पानी में  पतला  घोल बनाकर  ,नमक शकर  मिलाकर  पीये तो उल्टी  की समस्या दूर होती है|
10) यात्रा के दौरान खान पान की गडबडी से उल्टी आती हो तो लहसुन की कली चबाने से लाभ मिलता है|
11)  जी मिचलाने पर प्याज काटें उसमें नींबू रस  और  काला  नमक मिलाकर  खाना  चाहिए
12)  गर्भवती स्त्री को गाजर का रस बराबर  पिलाते रहें| इससे केल्शियम  की  कमी नहीं होगी तथा  रक्त में हीमोग्लोबिन का उचित स्तर कायम रहेगा|
13)  कच्चे टमाटर  के रस में शहद मिलाकर देना चाहिए, इससे  गर्भिणी एनीमिया  की शिकार नहीं होगी  | इससे भूख भी बढ़ती है|
14)  गर्भिणी को खाना खाने के बाद थौड़ी  अजवाइन जरूर  लेना  चाहिए| इससे मिचली नहीं होती और खाना ठीक से  हजम होता है|

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15)  दैनिक आहार में हरी सब्जिया  लेना  स्वास्थ्यकारी  रहता है ,इससे  आयरन  की  पूर्ति  होती है|
16)  हर्रे को पीसकर  शहद  के साथ चाटें,  उल्टी  बंद करने का अच्छा  उपाय है|
17)  पूरे गर्भ काल में  दस मिली सौंफ का अर्क पीते रहना चाहिए ,इससे गर्भपात की संभावना नहीं रहती है|
18)  गर्भिणी को  आँवला किसी भी रूप लेना हितकर है| आंवला  शरीर  को एक अंडे  से भी ज्यादा शक्ति,स्फूर्ति ,बल देता है|
19)  एक कप कच्चे दूध में एक चुटकी  पीसी  फिटकरी  डालकर  पीने से  गर्भ गिरना रुक जाता है|
20)  गर्भिणी को नारियल गोला और मिश्री  का उपयोग करना चाहिए| इससे  प्रसव आसानी से होता है|

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21)  जिस स्त्री को बार-बार गर्भ गिर जाता है वह गर्भावस्था में सिंघाड़े खाए तो  गर्भपात से निजात मिलेगी|
22)  यदि गर्भिणी को उल्टियां अधिक हो रही हों तो राई को पीसकर  पेट पर मल मल का कपड़ा  रखकर लेप करें पन्द्र मिनिट तक रहने दें| उल्टियां बंद हो जायेंगी|
23)  गर्भावस्था में  छाछ पीना लाभदायक है|
२४) जी मिचलाना अखरोट खाने  से भी ठीक हो जाता है|
2५)  गर्भिणी को चुकंदर का रस सेवन करते रहना  हितकर है|  इससे  रक्त बढ़ता है और स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ती है| 

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