16.4.14

रक्त चाप पर काबू के लिए खाएं पपीता.

   पपीता एक गुणकारी फल 


शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वैसे तो हर फल फायदेमंद होता है लेकिन पपीता अपने गुणकारी और पौषक तत्वों के चलते सेहत को तारो ताजा रखने में ज्यादा कारगर साबित होता है| पपीता में कई ऐसे पौषक तत्त्व होते जो कई तरह के रोगों से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं| इसमें केल्शियम,फास्फोरस,लोह तत्त्व,प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं जो शरीर के स्वस्थ्य को उन्नत करने में सहायक है|
*पपीता में कारपेंन तत्व होता है जो ब्लड प्रेशर नियंत्रण करने में उपयोगी है| अत: उच्च रक्त चाप रोगी को पपीते का नियमित सेवन करने की सलाह दी जाती है| पीलिया हो जाने पर रोगी को पपीता खाना चाहिए| इससे पाचन संस्थान ठीक होता है|
*जिन स्त्रियों में मासिक धर्म की अनियमितता हो ,तकलीफ के साथ मासिक आता हो वे कम से कम एक माह तक पका हुआ पपीता ३०० ग्राम की मात्रा में खाएं\
*चेहरे की झुर्रिया कम करने और खूबसूरती बढाने के लिए पके हुए पपीते का गूदा चेहरे पर लगाएं\ सूख जाने पर गुन गुने जल से धोलें| ऐसा कम से कम एक माह तक करना चाहिए|
*कब्ज निवारण के लिए भोजन के बाद पपीता खाना चाहिए| पपीते में पेप्सीन तत्व होता है जो भोजन को पचाने और पाचन संस्थान को ठीक रखने में मदद कर्ता है|
*पका पपीता खाने से मोटापा नियंत्रित होता है,खट्टी डकारों की समस्या से मुक्ति मिलती है|
कच्चे पपीते की सब्जी भी गुणकारी होती है|


पपीता के गुण, लाभ 

गर्मी में ईमली खाएं रोग भगाएं.



ईमली खाना कई रोगों में लाभप्रद -








               कच्ची  और नई इमली खाने से  शरीर में कई रोग उत्पन्न हो सकते हैं  लेकिन पुरानी इमली  कई बीमारियों में बेहतरीन  औषधि का काम करती है|  गर्मी की ऋतू  में इसका सेवन  विशेष रूप से  फायदेमंद  रहता है|इसके सेवन से एसीडीटी  और कब्ज जैसी  अनेक समस्याओं  का निराकरण किया जा सकता है|  ईमली का गूदा ही नहीं ,इसके बीज,छिलके और पत्ते  भी उपयोगी हैं|

















    इमली में  साईट्रिक एसीड ,टार्टरिक एसीड ,पोटाशियम बाई  टार्टरेट.फास्फोरिक एसीड ,इनोसिटोल आदि तत्व पाए जाते हैं| इन तत्वों की मौजूदगी से इमली हमारी त्वचा और गुणसूत्रों को सीधे  प्रभावित करती है|  गर्मियों में इमली के नियमित सेवन करने से लू नहीं लगती है| ईमली का पेय लेने से मितली,चक्कर आना  जैसी  समस्याएं नहीं होती हैं|  





    इसे गर्मी का टोनिक भी मना जाता है| जिन लोगों को पित्त बढ़ने की समस्या हो उन्हें रात में  थोड़ी  इमली कुल्हड़ में भिगो देना चाहिए | सुबह में  मसलकर छानकर  इमली का रस निकाल लेना चाहिए|  इस रस में थोड़ा सा गुड  डालकर खाली पेट पी जाएँ| एक सप्ताह के प्रयोग से पित्त की  समस्या से मुक्ति मिल जाती है| 





   सीने में जलन हो तो पकी इमली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से राहत मिलती है|





      ३० ग्राम इमली पानी में भिगो दें| कुछ घंटे बाद मसलकर इसका  पानी पीएं| इससे घाव और फोड़े-फुंसी में लाभ मिलता है| 





   गर्मी की वजह से उल्टियां हो रही हों तो ईमली का पानी पीने से तुरंत फ़ायदा होता है| 





        इमली के पत्तों का रस पानी में मिलाकर पीने से   बवासीर रोग  खत्म हो जाता है|  इसकी छल के चूर्ण में दही मिलाकर लेने से से भी



बवासीर  रोग ठीक होता  है| इमली के फूलों का रस भी बवासीर  ठीक करने की  ताकत रखता है| 





 









   १० ग्राम इमली एक लीटर  पानी में उबालें| इस पानी में गुलाब जल मिलाकर गरारे करने से  गले की सूजन दूर होती है| 





   इमली के पत्ते का रस शकर  मिलाकर पीने से



अतिसार(डायरिया)  ठीक होता है| 





    इमली के पानी में नमक डालकर पीने से कब्ज में फायदा होता है| 





  इमली  के पत्ते सेंधा नमक  डालकर  पीसकर  लेप लगाने से संधिवात की सूजन दूर होती है  और जोड़ों का दर्द भी कम हो जाता है|



     लू लग जाने पर रोगी की हथेली और तलवों पर इमली के गूदे की मालिश करना हितकारी है|



  इमली के बीजों को भुनकर  पीसलें|  इसकी आधा चम्मच चूर्ण  गुनगुने जल से दिन में तीन बार लेने से दस्त -अतिसार रोग ठीक हो जाता है|



   इमली के फूलों को सूखाकर पीसकर  रखलें| इसके सेवन से भूख बढ़ती है| इमली के बीज का चूर्ण  पानी में मिलाकर बिच्छू काटे जगह पर लगाने से राहत मिलती है|



   चोंट और मोच  की जगह  पर इमली के पानी  में उबले  पत्ते के गरम पानी से सेक करें|   दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है|



7.4.14

गर्मी के दिनों में क्या खाएं क्या न खाएं?

                        गर्मी के मौसम की दिनचर्या



         बदलती ऋतुओं के अनुसार शरीर में स्वाभाविक  रासायनिक परिवर्तन होते हैं और इस परिवर्तन में  ऋतूचर्यानुसार  खाध्य  पदार्थों  का सेवन किया जाए तो वात-पित्त-कफ के उभार से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है| यहाँ मैं  गर्मी की ऋतू  में अच्छी सेहत के लिए  सेहतमंद दिन चर्या  की बात करूँगा-

     अल सुबह उठते ही २-३ गिलास पानी पीना चाहिए|  इसके बाद  शौच,दन्त सफाई,आसान और प्राणायाम नियमित रूप से करें| अब रात को पानी भिगोये हुए ११ बादाम  को  छिलके उतारकर  पीसकर एक गिलास दूध   के साथ पीएं|  इसके नियमित प्रयोग से  शारीरिक  तंदुरुस्ती  मिलती है और आंतरिक उष्मा शांत होती है| गर्मी के मौसम में तले भुने,गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार  पदार्थों की बजाय  फल फ्रूट ,हरी सब्जियों  के सलाद और  जूस का ज्यादा इस्तेमाल  करना  बेहद फायदेमंद रहता है|  इससे गर्मी की वजह से  पसीना होने से  होने वाली  पानी कमी  का पुनर्भरण  भी होता रहता है|

    ग्रीष्म ऋतू में बाजारू  चीजें खाने से  बचने  की सलाह  दी जाती है|  इस मौसम में शारीरिक कमजोरी ,अपच,दाद,पेचिश,सीने में जलन.खूनी बवासीर  ,मुहं की बदबू आदि रोगों से बचने  का सरल उपचार  भी लिख देता हूँ|  खाली पेट,नींबू का रस आंवले का रस  और हरे धनिये का रस  मिश्री  मिलाकर  पीने से  कई रोगों से बचाव हो सकता है|  दोपहर और सांयकालीन  भोजन  में चावल के साथ अरहर,मूंग,उडद  की दाल और हरी  पत्तीदार सब्जियों  का समावेश करें|  छाछ  व्  दही का सेवन करना हितकारी है|  रात का भोजन  ना करें तो ज्यादा अच्छा|

    गर्मी में घर से बाहर निकलने  के पाहिले २ गिलास पानी जरूर पी लेना चाहिए|  टमाटर,तरबूज,खरबूज,खीरा ककड़ी,गन्ने का रस और प्याज  का उपयोग  करते रहना चाहिए|  इन चीजों से पेट की सफाई होती है और अंदरूनी  गर्मी  शांत होती है|

     गर्मी दूर भगाने के कारगर तरीके-

१)  नींबू पानी- यह गर्मी के मौसन का देसी  टानिक है| शरीर  में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाने पर एनीमिया,जोड़ों का दर्द,दांतों के रोग,पायरिया,kहंसी और दमा जैसी दिक्कते हो सकती हैं|  नींबू में भरपूर  विटामिन सी होता है|  अत; इन बीमारियों से दूरी  बनाए रखने में यह उपाय सफल रहता है| पेट में खराबी होना,कब्ज,दस्त होना में नींबू के रस में  थौड़ी सी हींग,काली मिर्च,अजवाइन ,नमक ,जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत  मिलती है|

२) तरबूज का रस-  तरबूज के रस से एसीडीटी  का निवारण होता है|  यह दिल के रोगों डायबीटीज  व् केंसर रोग से शरीर की रक्षा करता है|

३) पुदीने का शरबत-  गर्मी में पुदीना बेहद फायदेमंद रहता है| पुदीने को पीसकर स्वाद अनुसार नमक,चीनी जीरा मिलाएं| इस तरह  पुदीने का शरबत बनाकर पीने से लू.जलन,बुखार ,उल्टी व  गैस  जैसी समस्याओं में काफी लाभ होता है|

४)  ठंडाई- गर्मी में ठंडाई  काफी लाभ दायक होती है| इसे बनाने के लिये खस खस और बादाम  रात को भिगो दें|सुबह इन्हें मिक्सर  में पीसकर ठन्डे दूध में मिलाएं| स्वाद अनुसार  शकर मिलाकर पीएं|  गर्मी से मुक्ति मिलेगी|

५) गन्ने का रस-  गर्मी में गन्ने का रस सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है| इसमें विटामिन्स  और मिनरल्स  होते हैं| इसे पीने से ताजगी बनी रहती है| लू नहीं लगती है| >बुखार होने पर गन्ने का रस पीने से बुखार जल्दी उतर जाता है| एसीडीटी की वजह  से होने वाली जलन  में गन्ने का रस राहत पहुंचाता है| गन्ने के रस में नीम्बू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है|  गन्ने के रस में बर्फ  मिलाना  ठीक नहीं है|

६) छाछ - गर्मी के दिनों में छाछ का प्रयोग  हितकारी है| आयुर्वेद शास्त्र में  छाछ  के  लाभ बताए गए  हैं|    भोजन के  बाद आधा गिलास छाछ  पीने से फायदा होता है| छाछ में पुदीना ,काला नमक,जीरा  मिलाकर पीने से एसीडीटी की समस्या से निजात मिलती है|

७) खस का शरबत - गर्मी में खस का शरबत बहुत ठंडक  देने वाला होता है| इसके शरबत से दिमाग को ठंडक मिलती है|< इसका शरबत बनाने के लिये खस    को धोकर  सुखालें| इसके बाद इसे पानी में उबालें|  और स्वाद  अनुसार शकर मिलाएं| ठंडा होने पर छानकर  बोतल में भर लें|

८)  सत्तू - यह एक प्रकार का व्यंजन है| इसे भुने हुए चने , जोऊं और गेहूं पीसकर बनाया जाता है|  बिहार में यह काफी लोकप्रिय है| सत्तू पेट की गर्मी शांत  करता है|  कुछ लोग इसमें शकर  मिलाकर तो कुछ लोग  नमक और मसाले मिलाकर  खाते हैं|

९)  आम पन्ना - कच्चे आम को पानी में उबालकर  उसका गूदा  निकाल  लें| इसमें शकर,भुना जीरा,धनिया,पुदीना,नमक  मिलाकर पीयें| गर्मी  की बीमारियाँ दूर होंगी|