19.11.13

हल्दी के रोग नाशक उपचार

हल्दी से करें रोगों की चिकित्सा

हल्दी पीले रंग का एक मसला है जो भारत में बहुतायत से भोजन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है| रोगों के उपचार में हल्दी में पाया जाने वाला एक तत्त्व है जिसे करक्यूमिन कहा जाता है| करक्यूमिन तत्त्व हल्दी पीले रंग के लिए उत्तरदायी है| करक्यूमिन बहुत ही जबरदस्त शोथ रोधी(anti swelling) गुणों से संपन्न तत्त्व है| इसके एंटी ऑक्सीडेंट गुण भी इसे रोगोपचार में महत्ता प्रदान करते हैं| अब मैं इसके औषधीय गुणों के बारे में बताऊंगा-  संधिवात का दर्द कम करती है
हल्दी के सूजन विरोधी गुणों की वजह से संधिवात की चिकित्सा में इसका उपयोग उचित है| जो संधिवात के रोगी हल्दी का नियमित सेवन करते हैं यह देखा गया है कि उनमें जोड़ों के दर्द का लेविल बहुत नीचे रहता है| जोड़ों की सूजन भी कम हो जाती है| १००० एमजी हल्दी पावडर दिन में तीन बार लेना कर्त्तव्य है|

केंसर में उपयोगी है-

हल्दी का एक शक्तिशाली गुण यह है कि इसके नियमित इस्तेमाल से कई तरह के केंसर की रोक थाम की जा सकती है| प्रमाण मिले हैं कि हल्दी सेवन से केंसर की बढोतरी की चाल आधी रह जाती है और यहां तक कि करक्यूमिन केंसर के सेल्स को सीधे ही खत्म कर सकता है| रेडीएशन आधारित ट्यूमर्स करक्यूमिन तत्त्व से रोके जा सकते हैं| छाती और बड़ी आत के केंसर में हल्दी का उपयोग करना लाभ प्रद है|हल्दी प्रोस्टेट केंसर में हितकारी साबित हुई है| जो लोग प्रोस्टेट केंसर के रोगी हैं ,हल्दी के सेवन से केंसर की बढोतरी रुक सकती है|
डायबिटीज  में उपयोगी है-हल्दी शर्करा नियंत्रण में उपयोगी पायी गयी है| डायबिटीज रोगी शर्करा नियंत्रण के लिए जिन दवाओं का प्रयोग करते हैं ,हल्दी उनका प्रभाव बढ़ा देती है| टाईप -२ डायबिटीज में भी हल्दी का प्रयोग असरदार है| आंतों की सूजन में लाभ दायक है-

आन्तो में कई तरह के सूजन वाले रोग पैदा होते हैं| ऐसे रोगों में हल्दी का प्रयोग करना उचित है| | बड़ी आत के घाव में हल्दी के उपयोग से अच्छे परिणाम की आशा रहती है| फिर भी एक बात सनझ लें कि पित्ताशय के रोगों व पित्ताश्मरी (गाल स्टोन) में हल्दी का प्रयोग नहीं करना ही श्रेयस्कर है| वरना रोग के उग्र हो जाने की संभावना बन जाती है|लीवर के दोष  दूर करती है-
हल्दी रक्त के दोष दूर करती है | यह कार्य एन्जईम्स के माध्यम से संपन्न होता है| हल्दी नैसर्गिक तौर पर ऐसे एन्जाईम्स का उत्पादन बढाती है जिससे लीवर के विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है|
वजन घटाने में सहायक-
हल्दी में मौजूद  करक्यूमिन  भोजन  की वसा को विखंडित कर वजन कम करने में सहायता करती है|  नियमित व्यायाम और स्वास्थ्यकर   भोजन के साथ एक चम्मच हल्दी पावडर  दिन में दो बार लेते रहने से  वजन घटाने में  सफलता मिलती है|


दमा में हितकारी है-

हल्दी में सूजन विरोधी और दर्द नाशक गुण होने से दमा रोग में हितकारी है| इसके लिए आप एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पावडर घोलकर रात को सोते वक्त पीते रहें|

 हल्दी कोलेस्ट्रोल  घटाती है- 
  रक्त  में उच्च कोलेस्ट्रोल से शरीर में कई व्याधिया जन्म लेती हैं | अनुसंधान में पाया गया है कि  हल्दी के नियमित सेवन से  कोलेस्ट्रोल का लेविल  संतुलित  रखने में  मदद मिलती है|  इससे ह्रदय रोगों में हितकारी प्रभाव देखा जाता है| 
शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति उन्नत करती है

    हल्दी में लिपोपोलिसेकराईड तत्त्व पाया जाता है जो शरीर  की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढाता है|  इसके  एन्टी बेक्टीरीयल,एंटी वायरल ,एंटी फंगल  गुण विशेष  महत्व के हैं| अगर आपका इम्यून  सिस्टम ताकतवर है तो आप रोगों  की चपेट में कम आएंगे| 


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