23.7.13

कष्टसाध्य रोग जलोदर के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार //Home remedies for ascites


                                                                                                                                                
पेट (peritoneal cavity)में पानी इकट्ठा होने लगने को जलोदर कहा जाता है। रोगी का पेट फूल जाता है।
जलोदर के कारण--
जलोदर मुख्यतः लिवर के पुराने रोग से उत्पन्न होता है।
खून में एल्ब्युमिन के स्तर में गिरावट होने का भी जलोदर से संबंध रहता है।
जलोदर के लक्षण--
पेट का फूलना
सांस में तकलीफ
टांगों की सूजन
बेचैनी और भारीपन मेहसूस होना
 
घरेलु चिकित्सा--
मूली के पत्तों के 50 ग्राम रस में थोड़ा-सा जल मिलाकर सेवन करें।
* अनार का रस पीने से जलोदर रोग नष्ट होता है।
* प्रतिदिन दो-तीन बार खाने से, अधिक मूत्र आने पर जलोदर रोग की विकृति नष्ट होती है।
* आम खाने व आम का रस पीने से जलोदर रोग नष्ट होता है।
* लहसुन का 5 ग्राम रस 100 ग्राम जल में मिलाकर सेवन करने से जलोदर रोग नष्ट होता हैं।
* 25-30 ग्राम करेले का रस जल में मिलाकर पीने से जलोदर रोग में बहुत लाभ होता है।
* बेल के पत्तों के 25-30 ग्राम रस में थोड़ा-सा छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जलोदर रोग नष्ट हो जाता है।
* करौंदे के पत्तों का रस 10 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से जलोदर राग में बहुत लाभ होता है।
* गोमूत्र में अजवायन को डालकर रखें। शुष्क हो जाने पर प्रतिदिन इस अजवायन का सेवन करने पर जलोदर रोग नष्ट हो जाता है।
*जलोदर रोग में लहसुन का प्रयोग हितकारी है। लहसुन का रस आधा चम्मच आधा गिलास जल में मिलाकर लेना कर्तव्य है। कुछ रोज लेते रहने से फर्क नजर आएगा।
*देसी चना करीब ३० ग्राम ३०० मिली पानी में उबालें कि आधा रह जाए। ठंडा होने पर छानकर पियें। २५ दिन जारी रखें।
*करेला का जूस ३०-४० मिली आधा गिलास जल में दिन में ३ बार पियें। इससे जलोदर रोग निवारण में अच्छी मदद मिलती है।
*जलोदर रोगी को पानी की मात्रा कम कर देना चाहिये। शरीर के लिये तरल की आपूर्ति दूध से करना उचित है। लेकिन याद रहे अधिक तरल से टांगों की सूजन बढेगी।
*जलोदर की चिकित्सा में मूली के पत्ते का रस अति गुणकारी माना गया है। १०० मिली रस दिन में ३ बार पी सकते हैं।
*मैथी के बीज इस रोग में उपयोग करना लाभकारी रहता है। रात को २० ग्राम बीज पानी में गला दें। सुबह छानकर पियें।
*अपने भोजन में प्याज का उपयोग करें इससे पेट में जमा तरल मूत्र के माध्यम से निकलेगा और आराम लगेगा।
*जलोदर रोगी रोजाना तरबूज खाएं। इससे शरीर में तरल का बेलेंस ठीक रखने में सहायता मिलती है।
*छाछ और गाजर का रस उपकारी है। ये शक्ति देते हैं और जलोदर में तरल का स्तर अधिक नहीं बढाते हैं।
*अपने भोजन में चने का सूप ,पुराने चावल, ऊंटडी का दूध , सलाद ,लहसुन, हींग को समुचित स्थान देना चाहिये।
*रोग की गंभीरता पर नजर रखते हुए अपने चिकित्सक के परामर्शानुसार कार्य करें।
क्या न खाएं?
* जलोदर रोग में पीड़ित व्यक्ति को उष्ण मिर्च-मसालें व अम्लीस रसों से बने चटपटे खाद्य पदार्थो का सेवन नही करना चाहिए।
* घी, तेल, मक्खन आदि वसा युक्त खाद्य पदार्थाो का सेवन न करेें
* गरिष्ठ खाद्य पदार्थों, उड़द की दाल, अरबी, कचालू, फूलगोभी आदि का सेवन न करें।
* चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें।

कष्टसाध्य रोग जलोदर
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