अदरक लाभ कारी है प्रोस्टेट और ओवेरियन केन्सर में





                                                             



              अदरक के  सामान्य गुणों  से अधिकाँश लोग परिचित   हैं |सूखी खांसी,  सर्दी ,जुकाम,भूख न लगना जैसी समस्याओं  से निजात पाने के लिए अदरक का उपयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है| लेकिन इस जानकारी  को  आगे  बढाते  हुए  अमेरिका की मिशीगन  यूनिवर्सिटी  के  वेज्ञानिकों  द्वारा  किये गए एक शौध के परिणाम  केन्सर  चिकित्सा में  बेहद उत्साह्कारी हैं| शौध के मुताबिक़ अदरक ओवेरियन केन्सर की कोशिकाओं को नष्ट करने में सफल हुई है| 



   
 पुरुषों में प्रोस्टेट केन्सर की कोशिकाएं  अदरक के प्रयोग से नष्ट हो जाती हैं| वज्ञानिकों का कहना है कि प्रोस्टेट केन्सर और ओवेरियन केन्सर से पीड़ित  लोगों के लिए  अदरक  एक जीरो साईड इफेक्ट  वाली केमो थीरेपी  है|  वैज्ञानिकों ने प्रयोग के दौरान देखा कि जैसे ही केन्सर कोशिकाओं को अदरक के चूर्ण  के संपर्क में लाया गया , केन्सर के सेल्स  नष्ट होते चले गए| वेज्ञानिक भाषा में इसे  एपोप्टीज याने  कोशिकाओं की आत्म ह्त्या कह सकते हैं| यह भी देखा गया कि अदरक की मौजूदगी  में  केन्सर के सेल्स एक दुसरे को खाने लगे|  इसे डाक्टरी भाषा में  ऑटो फिगिज  कहते हैं| 


   ओवेरियन और प्रोस्टेट केन्सर से पीड़ित रोगियों में  अदरक एक प्राकृतिक  कीमो थिराप्यूटिक एजेंट की तरह  काम करता है| ब्रिटिश जनरल आफ  न्युट्रीशन में प्रकाशित  एक शौध  के अनुसार  अदरक का  सत्व    बढे हूए प्रोस्टेट ट्युमर की साईज  ५६% तक कम  कर  देता है|  सबसे अच्छी बात यह कि  अदरक की मात्रा  ज्यादा भी हो जाए तो  इसका दुष्प्रभाव  कीमो थेरपी की तरह नहीं होता है| 

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लहसुन से करें कई रोगों का ईलाज.



                                           

 लहसुन सैकडों वर्षों से रसोईघर में मसाले  के तौर पर व्यवहार  में आ रही है|  लेकिन इसका उपयोग  कई तरह के रोगों के इलाज में  प्राचीन काल  से होता आया है|  यह  ह्रदय रोगों और  रक्त परिसंचरण  तंत्र के विकारों  को ठीक करने  में सफलता  से प्रयोग की जा रही है|  उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रोल ,कोरोनरी धमनी संबधित  ह्रदय दोष  और हृदयाघात  जैसी स्थितियों  में इसका उपयोग उत्साहवर्धक परिणाम  प्रस्तुत करता है|  धमनी-काठिन्य रोग में भी  लहसुन लाभदायक है\ लहसुन के प्रयोग विज्ञान सम्मत  होने के दावे किये जा रहे हैं| 

 कुछ चिकित्सक  लहसुन का प्रयोग  फेफड़े  के केंसर ,बड़ी  आंत  के केंसर ,प्रोस्टेट केंसर ,गुदा के केंसर ,आमाशय के केंसर ,छाती के केंसर  में कर रहे हैं|  मूत्राशय के केंसर में भी प्रयोग हो रही है लहसुन|  लहसुन का प्रयोग पुरुषों में प्रोस्टेट  वृद्धि  की शिकायत में भी  सफतापूर्वक किया जा रहा है|  इसका उपयोग  मधुमेह रोग  अस्थि-वात् व्याथि  में भी करना उचित है|   
लहसुन का प्रयोग  बेक्टीरियल  और फंगल उपसर्गों में  हितकारी सिद्ध  हुआ है\  ज्वर,सिरदर्द,सर्दी-जुकाम ,खांसी,,गठिया रोग,बवासीर  और दमा रोग में इसके प्रयोग से अच्छा लाभ मिलता है|
सांस भरने , निम्न  रक्त चाप, उच्च रक्त शर्करा  जैसी स्थितियों में लाभ लेने के लिए लहसुन  के प्रयोग  की सलाह दी जाती है| 

    लहसुन का उपयोग तनाव दूर करने वाला है,थकान दूर करता है | यह यकृत के कार्य को सुचारू बनाती है|  चमड़ी के मस्से ,दाद  भी लहसुन  के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं|  लहसुन में  एलीसिन  तत्त्व  पाया जाता है| रोगों में यही तत्त्व  हितकारी है|   प्रमाणित हुआ है कि  लहसुन ई कोलाई, और साल्मोनेला  रोगाणुओं को नष्ट  कर देती है|  लहसुन की ताजी गाँठ  ज्यादा असरदार होती है| पुरानी  लहसुन कम प्रभाव  दिखाती है| 

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पालक से करें पथरी,रक्ताल्पता ,थायराईड की चिकित्सा





निम्न रक्त चाप में लाभकारी--

निम्न रक्त चाप रोगी को प्रतिदिन पालक की सब्जी खाने  से रक्त प्रवाह संतुलित करने में मदद मिलती है|

रक्ताल्पता में उपयोगी है--

रक्ताल्पता याने खून की कमी में पलक का उपयोग  बेहद लाभकारी है|  इसके सेवन से हेमोग्लोबिन में वृद्धि  होती है| एक गिलास जूस दिन में तीन बार लेना उचित है| इसमें श्रेष्ठ किस्म का लोह तत्व होता है जो एनीमिया  निवारण में सकारात्मक प्रभाव  डालता है|

थायरायड रोग में हितकर है--

एक गिलास पालक के जूस में एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच  जीरा  का पावडर  मिलाकर लेते रहने से  थायरायड रोग में लाभ होते देखा गया है| 

पथरी  निष्कासन में उपयोगी है-

पालक के पत्ते का रस और नारियल पानी सामान भाग मिलकर लेते रहने से  गुर्दे और मूत्र पथ की  पथरी   निकल जाती है|

पीलिया रोग ठीक होता है-

कच्चे पपीते  के साथ  पालक का रस  सेवन करना  पीलिया ठीक होने में सहायक है| छिलके वाली मूंग की दाल में पालक मिलाकर  सब्जी  बनाकर  रोगी को खिलाना चाहिए| 

दिल के रोग में--

ह्रदय रोगी एक गिलास पालक के जूस में २ चम्मच  शहद मिलाकर  पीते रहें| 

कब्ज मिटाता है पालक - 

धनिया के चौंकाने वाले फ़ायदे

धनिये के उपयोग 

धनिये की हरी-हरी पत्तियों की सुगंध किसी भी व्यंजन की सुंगध और उसके स्वाद को
कई गुना बढ़ा देती है। सब्जियों में हरे धनिये के साथ ही सुखे धनिये का
उपयोग भी भारतीय भोजन में बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। लेकिन हरे
धनिए की कोमल पत्तियां सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं डाली जाती
बल्कि इनका औषधीय महत्व भी है। इसका सेवन जाने-अनजाने ही आपको कई
बीमारियों से निजात भी दिलाता है। आइये जानें कि धनिया किन-किन बीमारियों
या परेशानियों में मददगार हो सकता है...





आंख -

आंखों के लिए धनिया बड़ा गुणकारी होता है। थोड़ा सा धनिया कूट कर पानी
में उबाल कर ठंडा कर के, मोटेकपड़े से छान कर शीशी में भर लें। इसकी दो बूंद आंखों
में टपकाने से आंखों में जलन, दर्द तथा पानी गिरना जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
ताजा धनिया पत्ते में विटामिन सी,विटामिन ए,एंटी ऑक्सीडेंट्स और फास्फोरस जैसे
मिनरल्स पाए जाते हैं जो मस्कुलर डिजनरेशन,नेत्र शोथ और आँखों की उम्र वृद्धि को
कम करते है|

नकसीर -

हरा धनिया 20 ग्राम व चुटकी भर कपूर मिला कर पीस लें। सारा रस निचोड़ लें।
इस रस की दो बूंद नाक में दोनों तरफ टपकाने से तथा रस को माथे पर लगा कर
मलने से खून तुरंत बंद हो जाता है।

गर्भावस्था में जी घबराना उल्टी  होना  :










गर्भ धारण करने के दो-तीन महीने तक गर्भवती महिला को उल्टियां आती है। ऐसे में धनिया
का काढ़ा बना कर एक कप काढ़े में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से जी घबराना बंद
होता है।

पित्त -

पित्त बढ़ जाने से जी मिचलाना रहता हो तो हरा धनिया पीसकर
उसका ताजा रस दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से लाभ होता है। भोजन में हरे
धनिये की ताजी पिसी चटनी का प्रयोग करते रहने से भी जी मिचलाना कम होता है।
धनिये की हरी पत्तियों को लहसुन, प्याज, गुड़, इमली, अमचूर, आंवला,
नींबू, पुदीना आदि के साथ बारीक पीसकर चटनी के रूप में खाते रहने से पाचन
क्रिया दुरुस्त बनी रहती है तथा भूख भी खूब लगती है।

पित्ती-

शरीर में पित्ती की तकलीफ हो तो हरे धनिये के पत्तों का रस, शहद और रोगन गुल तीनों
को मिला कर लेप करने से पित्ती की खुजली में तुरंत आराम होता है।

पित्त-

बढ़ जाने पर हरी-पीली उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं। इस अवस्था में हरे
धनिया का रस निकालकर उसमें गुलाब जल मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

लू लगने पर 

गर्मी में बाहर जाने से, लू लग जाने पर परेशानी हो रही हो तो
धनिया पीसकर, रस निकालकर, इसे पानी में घोलकर मिठास के लिए चीनी डालकर पी
लें।
एक बड़ा गिलास पानी लें। इसमें दो बड़े चम्मच धनिया डालें। उबालें।
जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उतार लें। इसमें मिश्री मिलाकर, छानकर, पी लें,
कुछ दिन जारी रखें।

अधिक गैस बनना-

एक गिलास पानी लें, दो चम्मच धनिया मिलाकर उबालें। छानें, तीन भाग कर, दिन में तीन बार पी लें।

भोजन में अरुचि 

खाना खाने को मन नहीं करता। भरपेट नहीं खा सकते। पचता भी
नहीं, धनिया, छोटी इलायची, कालीमिर्च तीनों एक जैसी मात्रा में लें। इन्हें
पीसकर छानकर शीशी में रखें। चौथाई चम्मच घी तथा आधा चम्मच चीनी में आधा
चम्मच इस चूर्ण को डालकर खायें। चन्द दिनों में अरुचि खत्म।



श्वास के रोग-




खांसी हो, दमा हो, सांस फूलता हो, धनिया तथा मिश्री पीसकर रख लें। एक
चम्मच चावल के पानी के साथ रोगी को पिलाएं। आराम आने लगेगा। कुछ दिन नियमित लें।













पेट दर्द 

आधा गिलास पानी लें। इसमें दो चम्मच धनिया डालें। उबालें। गुनगुना पिला दें। पेट दर्द ठीक होगा।

पेशाबमें जलन रहना-

एक छोटा चम्मच धनिया लें। इसे एक कप बकरी के दूध में
मिलाएं, एक चम्मच मिश्री भी। पीने से पेशाब की जलन खत्म होगी। धनिया तथा
आंवला एक-एक चम्मच (पिसा) रात पानी में भिगो दें। प्रात: मसलकर छानकर पीने
से पेशाब की जलन खत्म होगी। कुछ दिन रोजाना लिया करें।

गंजापन होने पर-

हरा धनिया पीसकर, गंजे पर लेप करें। कुछ दिनों के इस उपचार से बाल
आने लगते हैं। अजमाया जा चुका है।

 कमजोरी-

अधिक काम वासना की पूर्ति या स्वप्नदोष हो जाने से आने वाली कमजोरी में
रात को पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा धनिया भिगों दें। प्रात: छानकर पी लें।
कुछ दिन नियमित करें। कमजोरी दूर होगी। अत: धनिया को केवल मसालों में नहीं,
दवा के रूप में भी प्रयोग करें।




त्वचा की समस्याएं-

  अपने एंटी फंगल,एंटी सेप्टिक ,डीटाक्सीफाईंग और डिसइन्फेक्टेट गुणों के चलते धनिया पत्ता त्वचा की कुछ समस्याओं से भी निजात दिलाता है| खुजली से राहत पाने के लिए इसके रस का सेवन करना उपादेय है या इसका पेस्ट भी त्वचा पर लगा सकते हैं| शरीर की फुंसियों को ठीक करने के लिए धनिया पत्ती के रस में शहद मिलाकर प्रभावित भाग पर लगाएं| १५ मिनिट बाद ठन्डे पानी से धो लें|
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नपुंसकता और शीघ्रपतन मे प्याज के चमत्कारी प्रभाव





वीर्य वृद्धि के लिए-

सफ़ेद प्याज के रस को शहद के साथ लेने से वीर्य बनाने की प्रक्रिया में तेजी आ जाती है|
देसी उपचारों के जानकार बताते हैं कि



सफ़ेद प्याज का रस ५ मिली ,शहद १० ग्राम ,अदरक का रस ५ मिली और गाय का घी ५ ग्राम मिश्रण कर सुबह शाम २१ दिन तक लेते रहने से नपुंसकता का निवारण होता है और पुरुषत्व में वृद्धि होती है|



जोड़ों के दर्द में उपकारी :-
प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर कुछ गर्म करके जोड़ों पर मालिश करने से बहुत लाभ होता है| यह उपचार लगातार दो माह करने से आशातीत सफल परिणाम प्राप्त होते हैं|

खांसी में उपयोग-

बच्चों और बूढों की खांसी में प्याज का रस मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए| खांसी धीरे धीरे ठीक होने लगती है|
सफ़ेद प्याज दिल के रोगों में उपकारी होता है| लाल प्याज बल बढाने वाला होता है|
बालकों की शारीरिक विकास हेतु प्याज का उपयोग गुड के साथ करने की सलाह दी जाती है|
प्याज के रस में नमक मिलाकर दांत-मसूढों पर मलने से दर्द और सूजन दूर होते हैं|

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कष्टसाध्य रोग जलोदर के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार //Home remedies for ascites


                                                                                                                                                
पेट (peritoneal cavity)में पानी इकट्ठा होने लगने को जलोदर कहा जाता है। रोगी का पेट फूल जाता है।

जलोदर के कारण--

जलोदर मुख्यतः लिवर के पुराने रोग से उत्पन्न होता है।
खून में एल्ब्युमिन के स्तर में गिरावट होने का भी जलोदर से संबंध रहता है।

जलोदर के लक्षण--

पेट का फूलना
सांस में तकलीफ
टांगों की सूजन
बेचैनी और भारीपन मेहसूस होना

घरेलु चिकित्सा--

मूली के पत्तों के 50 ग्राम रस में थोड़ा-सा जल मिलाकर सेवन करें।
* अनार का रस पीने से जलोदर रोग नष्ट होता है।
* प्रतिदिन दो-तीन बार खाने से, अधिक मूत्र आने पर जलोदर रोग की विकृति नष्ट होती है।
* आम खाने व आम का रस पीने से जलोदर रोग नष्ट होता है।
* लहसुन का 5 ग्राम रस 100 ग्राम जल में मिलाकर सेवन करने से जलोदर रोग नष्ट होता हैं।
* 25-30 ग्राम करेले का रस जल में मिलाकर पीने से जलोदर रोग में बहुत लाभ होता है।
* बेल के पत्तों के 25-30 ग्राम रस में थोड़ा-सा छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जलोदर रोग नष्ट हो जाता है।
* करौंदे के पत्तों का रस 10 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से जलोदर राग में बहुत लाभ होता है।
* गोमूत्र में अजवायन को डालकर रखें। शुष्क हो जाने पर प्रतिदिन इस अजवायन का सेवन करने पर जलोदर रोग नष्ट हो जाता है।
*जलोदर रोग में लहसुन का प्रयोग हितकारी है। लहसुन का रस आधा चम्मच आधा गिलास जल में मिलाकर लेना कर्तव्य है। कुछ रोज लेते रहने से फर्क नजर आएगा।
*देसी चना करीब ३० ग्राम ३०० मिली पानी में उबालें कि आधा रह जाए। ठंडा होने पर छानकर पियें। २५ दिन जारी रखें।
*करेला का जूस ३०-४० मिली आधा गिलास जल में दिन में ३ बार पियें। इससे जलोदर रोग निवारण में अच्छी मदद मिलती है।
*जलोदर रोगी को पानी की मात्रा कम कर देना चाहिये। शरीर के लिये तरल की आपूर्ति दूध से करना उचित है। लेकिन याद रहे अधिक तरल से टांगों की सूजन बढेगी।
*जलोदर की चिकित्सा में मूली के पत्ते का रस अति गुणकारी माना गया है। १०० मिली रस दिन में ३ बार पी सकते हैं।
*मैथी के बीज इस रोग में उपयोग करना लाभकारी रहता है। रात को २० ग्राम बीज पानी में गला दें। सुबह छानकर पियें।
*अपने भोजन में प्याज का उपयोग करें इससे पेट में जमा तरल मूत्र के माध्यम से निकलेगा और आराम लगेगा।
*जलोदर रोगी रोजाना तरबूज खाएं। इससे शरीर में तरल का बेलेंस ठीक रखने में सहायता मिलती है।
*छाछ और गाजर का रस उपकारी है। ये शक्ति देते हैं और जलोदर में तरल का स्तर अधिक नहीं बढाते हैं।
*अपने भोजन में चने का सूप ,पुराने चावल, ऊंटडी का दूध , सलाद ,लहसुन, हींग को समुचित स्थान देना चाहिये।
*रोग की गंभीरता पर नजर रखते हुए अपने चिकित्सक के परामर्शानुसार कार्य करें।
क्या न खाएं?
* जलोदर रोग में पीड़ित व्यक्ति को उष्ण मिर्च-मसालें व अम्लीस रसों से बने चटपटे खाद्य पदार्थो का सेवन नही करना चाहिए।
* घी, तेल, मक्खन आदि वसा युक्त खाद्य पदार्थाो का सेवन न करेें
* गरिष्ठ खाद्य पदार्थों, उड़द की दाल, अरबी, कचालू, फूलगोभी आदि का सेवन न करें।
* चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें।


  किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

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पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



बुढापा रोकने के घरेलू ,प्राकृतिक उपचार




         उम्र  बढने के साथ हर व्यक्ति में हार्मोन संबंधित बदलाव होने लगते हैं। ऐसे में जिन लोगों की दिनचर्या अनियमित होती है उनकी त्वचा की रंगत और चमक आहिस्ता-आहिस्ता समाप्त होने लगती है। त्वचा पर झुर्रियां पसरने लगती हैं।बुढापे के लक्षणों से निपटने के लिये निम्न उपाय करना प्रयोजनीय हैं-

    ज्यादा पानी पीयें-- 

        त्वचा की झुर्रियां बुढापे का प्रमुख लक्षण होता है। दिन भर में ४ लीटर पानी पीना इसका कारगर उपचार है। अधिक पानी पीने से शरीर के अन्य कई रोग दूर होते हैं।

 तनाव से बचें-- 


 क्रोध करने और मानसिक चिंता से समय से पहिले ही त्वचा पर झुर्रिया आने लगती हैं। दिमागी तनाव से हमारे शरीर में एक रासायनिक प्रक्रिया उत्पन्न होती है जिससे कोर्टिसोल उत्पन्न  होता  है जो  हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है।




धूम्रपान न करें-- 



   



 बीडी,सिगरेट पीने वालों की त्वचा पर सिलवटें बुढापा आने से पहिले ही दिखाई देने लगती हैं। धूम्र पान से शरीर में ऐसे एन्जाईम्स उत्पन्न होते हैं जो झुर्रियों के लिये जिम्मेदार माने गये हैं। जेतुन के तैल में नींबू का रस मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से चेहरे की त्वचा की झुर्रियां नियंत्रित होती हैं। चेहरे पर चमक लाने का यह अच्छा उपाय है।

कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार



 विटामिन सी का अधिक मात्रा में सेवन करना परम हितकारी उपचार है। इस विटामिन के सेवन करने से त्वचा की झुर्रियों का निवारण होता है। इसके अच्छे स्रोत हैं--आंवला,संतरा,पपीता,नींबू,टमाटर,फ़ूल गोभी,हरी मिर्च,आम,तरबूज,पाईनेपल ।इन चीजों का भरपूर इस्तेमाल करने से शरीर् पर बुढापे की छाप आसानी से नहीं लग पाएगी।

           थोड़ी सी कसरत और मछली के तेल के नियमित सेवन से मांसपेशियों में नई ताकत लाकर बुढापे की आमद को धीमा किया जा सकता है। हाल के एक परीक्षण से पता चला है कि 65 साल से अधिक आयु की जिन महिलाओं ने हलकी कसरत के साथ मछली के तेल का सेवन किया उनकी मांसपेशियों की ताकत जैतून के तेल का सेवन करने वाली महिलाओं से दुगुनी बढी।
       मस्तिष्क को बूढ़ा होने से रोकने में मदद करता है मछली का तेल --वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मछली खाने से आपको अपने मस्तिष्क को ताकतवर  रखने में मदद मिल सकती है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने पाया कि आहार में ‘ओमेगा...3 फैट्टी एसिड’ की कमी के चलते मस्तिष्क के संकुचन और मानसिक क्षय में तेजी आती है।


      अलसी में ओमेगा फ़ेट्टी एसीड प्रचुरता से पाया जाता है। मछली न खाने वालों के लिये यह बेहतरीन विकल्प है। १०० ग्राम अलसी के बीज लेकर मिक्सर या  ग्राईंडर में चलाकर दर दरा चूर्ण बनालें। २० ग्राम चूर्ण  पानी के साथ रोज सुबह सेवन करें। लंबे समय तक जवान बने  रहने का  यह बहुत आसान उपाय है।



*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

  ज्यादा शकर  खाने से हो सकते हैं असमय बूढ़े -त्वचा,बालों और शरीर के अन्य अंगों के तेजी से बूढ़े होने के लिए  तीन प्रमुख कारण हैं|-

१) ग्लाईकेजिन

२) अघिक धुप में रहना

३) इन्फ्लेमेशन ( शोथ)

    झुर्रियाँ  त्वचा के ढीलेपन और उस पर गहरी  लकीरें  पड़ने का मुख्य कारण ग्लाईकेजिन है जो अधिक चीनी  खाने से होता है| इससे  कम उम्र में ही बुढापे की झलक  प्रकट होने लगती है|
पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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रोगों के घरेलू उपचार




                                                                                                             
                                                                                                                                                                                            

सर्दी जुकाम के उपचार--

१) सर्दी जुकाम के निवारण के लिये नींबू का प्रयोग हितकारी रहता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक ताकत में इजाफ़ा होता है। एक गिलास मामूली गरम पानी में एक नींबू का रस निचोडकर और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार पीना चाहिये।



२) १० ग्राम काली मिर्च का पावडर दूध में उबालें इसमें आधा चम्मच हल्दी भी डाल दें। दिन में दो बार कुछ दिन पीने से लाभ होता है।







३) ३ चम्मच प्याज का रस में ३ चम्मच शहद भली प्रकार से मिलाकर पी जाएं । २-३ रोज में काफ़ी फ़र्क नजर आएगा।






खांसी के घरेलू उपचार--




१) ७ नग बादाम लें । रात भर पानी में रखें। सुबह छिलकर सिलबट्टे पर पेस्ट जैसा बनाएं। इसमें ४ चम्मच शकर और ४ चम्मच मक्खन मिलाकर पेस्ट बनाएं। दिन में दो बार लेना है। खांसी निवारण का स्वादिष्ट उपचार है।


२) अंगूर खांसी चिकित्सा में बेहद हितकारी उपचार है। ३०० ग्राम अंगूर का रस बनाएं । इसमें थौडा सा शहद मिलाकर पी जाएं।










सोरायसिस(छाल रोग) के आयुर्वेदिक उपचार 



3) गले में खराश या सूखी खांसी होने पर अदरक के पेस्ट में गुड और देशी घी मिलाकर खाएं| आराम लग जाएगा|
४) तुलसी के साथ शहद हर दो घंटे में खाएं| कफ वाली खांसी में हितकर है|
मुहं और शरीर की बदबू -
१) सांस की बदबू दूर करने के लिये रोजाना तुलसी के पत्ते चबाएं|
२) नहाते से २० मिनिट पहिले शरीर पर बेसन और दही का पेस्ट लगाएं| इससे त्वचा साफ़ हो जाती है और बंद रोम छिद्र खुल जाते हैं|
३) गाजर का जूस रोज पीने से तन की दुर्गन्ध दूर हो जाती है|
४) पान के पत्ते और आंवला बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर नहाने से पाहिले यह पेस्ट लगाएं| तन की दुर्गन्ध में हितकारी है|

५) इलायची और लोंग चूसने से मुख की दुर्गन्ध मिटती है|

दमा (अस्थमा) के उपचार--




१) एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी का पावडर अच्छी तरह मिलाकर चाट लें।
२) अधिक गरम पानी में २ चम्मच शहद मिलाकर थौडा थौडा पीते हुए उपयोग करें। रात को सोते वक्त यह उपचार लेने से श्वास रोग में जबर्दस्त फ़ायदा होता है।





३) लहसुन की ७ कुली बारीक काटकर एक गिलास दूध में उबालें कि आधा रह जाए। सोते वक्त उपयोग की सलाह दी जाती है।










कान दर्द के उपचार--

१) कान के दर्द में लहसुन का रस उपकारी सिद्ध हुआ है। दर्द वाले कान मे ४-५ बूदें टपकाएं। लहसुन में एंटीबायोटिक तत्व पाये जाते हैं जो कर्ण पीडा में हितकारी होते हैं।
२) कान दर्द के रोगी को दूध और दूध से निर्मित वस्तुओं से परहेज करना चाहिये।
3) इस रोग में विटामिन सी और जिन्क का उपयोग लाभदायक रहता है।
4) कर्ण पीडा मे पुल्टिस का प्रयोग करें। ७ लहसुन की कुली बारीक काटें और पानी में उबालें फ़िर मसलकर ऊनी वस्त्र में रखकर पीडित कान पर रखें, राहत मिलेगी।

कमर दर्द के घरेलू उपचार--

१) नींबू कमर दर्द में अति उपयोगी साबित हुआ है। एक नींबू का रस निचोडें । इसमें थौडा सा काला नमक मिलाकर पी जाएं। ऐसा दिन में दो बार करें । कटि पीडा में बडी राहत मिलेगी। २)  लहसुन का तेल कमर दर्द में उपयोगी है। सरसों के तेल में दस कुली लहसुन की डालकर आंच पर रखें ।धीमी आंच पर जब लहसुन भूरे रंग की हो जाए तब आंच से उतारकर ठंडा होने दें\ इस तेल की मालिश पीडित भाग पर करें और २ घंटे तक तेल लगा रहने दें। चंद रोज में जादुई असर देखने को मिलेगा।
३)  कच्चे  आलू की पुल्टिस बनाकर प्रभावित भाग पर लगाने से कमर दर्द में आशातीत लाभ होता है।
४)  मैं घरेलू चिकित्सा में विटामिन सी के प्रयोग को महत्व देता आया हूं। कमर दर्द में भी इसकी महती उपयोगिता है। ५०० एम जी की चार गोलियां नित्य प्रयोग करें। खट्टे फ़लों में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

ज्वर में उपयोगी घरेलू उपचार--

१॰अंगूर समस्त प्रकार के ज्वरों में उपयोगी है। आधा गिलास अंगूर का रस एक गिलास पानी के साथ दिन में ३ बार पीना कर्तव्य है। इससे बुखार रोगी की प्यास भी शांत होती है। 
२) संतरा ज्वर रोगी के लिये अमृत समान है।  इससे पेशाब खुलकर होता है। संतरा रोगी को तुरंत शक्ति देता है। संतरे के उपयोग से रोग प्रतिरोधक शक्ति उन्नत होती है। संतरा ज्वर रोगी के  
 पाचन तन्त्र को सुधारता है।

बाल गिरने की घरेलू चिकित्सा--

१)  आंवला का तेल  बाल झडने में  उपयोगी है। ऊंगली से बालों की ज्डों  में मालिश करें।इससे बालों की चमक भी बढती है।
२) नारियल का दूध सिर पर मालिश करने से  बालों को पोषण मिलता है।
३_ प्याज को दो फ़ाड में काट लें। इसे गंज वाली जगहों पर रगडें कि स्थान कुछ लाल हो जाए। २-३ माह मे गंज वाली जगह पर नये बाल आते दिखेंगे

खून में अधिक  कोलेस्टरोल  के उपचार--

१)  एक गिलास जल में २० ग्राम सूखा धनिया उबालें ।ठंडा होने पर छानलें। ऐसा मिश्रण दिअ में दो बार पीयें। कोलेस्टरोल कम करने का  अनुभूत उपचार है।
२) सूरजमुखी  के बीज कोलेस्टरोल घटाने  में उपयोगी पाये गये हैं। इनमें लिनोलिक एसीड होता है जो धमनियों की दीवारों पर जमे हुए कोलेस्टरोल को हटाने का काम करता हैं। भोजन पकाने में सूरज मुखी का तेल उपयोग करें।

नीम के पत्ते खाने के फायदे 


भोजन में रेशे वाली चीजें ज्यादा लें।  पत्तेदार सब्जियों में भरपूर फ़ायबर होता है जो खून में कोलेस्टरोल की मात्रा कम करता है।

अम्ल पित्त (एसीडीटी) के उपचार--

१)  मट्ठा (छाछ) एसीडीटी निवारण  में उपयोगी है। एक गिलास मट्ठे में  चौथाई चम्मच  काली मिर्च का पावडर मिलाकर दिन में तीन बार पीना प्रयोजनीय है।
२)   जीरा अम्ल पित्त में लाभदायक है।  

हिचकी  निवारक उपाय-

  हिचकी हमारे शरीर की  वेगास  नाड़ी   से संबंधित रोग है| |यह नाड़ी मस्तिष्क से  पेट के अंगों तक जाती है| इस नाड़ी में आक्षेप आने से हिचकी  की उत्पत्ति मानी गयी है| |  हिचकी निवारण के सरल लेकिन पूरी तरह कारगर उपाय नीचे लिख देता हूँ-
 १-  हिचकी रोगी की जीभ पर  एक  चम्मच शकर  रखकर   चूसने से हिचकी कुछ समय में बन्द हो जाती है||
२- रोगी अपने दोनों कानों में अपने दोनों अंगूठे से डाट लगाकर  हाथ की  छोटी अंगुलियां  से नाक पर दवाब  डालें ताकि श्वास  आना जाना बन्द हो जाए फिर एक गिलास पानी  नली के द्वारा मुहं से  पीएं| |  हिचकी बन्द करने का बेहद सफल उपाय है|


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग



 ३- लंबी सांस  लेने से भी  हिचकी निवारण होता है|  तरीका इस प्रकार है--दोनों हाथों के अंगूठे और छोटी ऊँगली  के सिरे मिलाएं | अब सांस भरते हुए दोनों हाथ धीरे धीरे  ऊपर उठाएं ,पूरा श्वास भरने के बाद हाथों को आहिस्ता  आहिस्ता नीचे लाते हुए श्वास बाहर छोड़ें| १० बार करें| यह उपाय ऐसा है कि कठिन से कठिन हिचकी  भी काबू में आ जाती है|

सूखी खांसी और नाक की एलर्जी :

सूखी खांसी- 

किसी भी मौसम में हो सकती है। इसका घरेलू उपचार इस प्रकार है-नुस्खा : गाय के दूध से बना घी 15-20 ग्राम और काली मिर्च लेकर एक कटोरी में रखकर आग पर गर्म करें। जब काली मिर्च कड़कड़ाने लगे और ऊपर आ जाए तब उतार कर थोड़ा ठंडा कर के 20 ग्राम पिसी मिश्री मिला दें। थोड़ा गर्म रहे तभी काली मिर्च चबाकर खा लें। इसके एक घंटे बाद तक कुछ खाएं-पिएं नहीं। इसे एक-दो दिन तक लेते रहें, खांसी ठीक हो जाएगी।

     एलर्जी-

धूल मिट्टी से नाक में एलर्जी हो जाती है। निम्नलिखित नुस्खे आजमाएं - सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीकर और मिश्री सभी द्रव्यों का चूर्ण 10-10 ग्राम, बीज निकाला हुआ मुनक्का 50 ग्राम, गोदंती हरताल भस्म 10 ग्राम तथा तुलसी के दस पत्ते सभी को मिलाकर खूब घोंटकर पीस लें और 3-3 रत्ती की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखा लें। 2 गोली सुबह व 2 गोली शाम को गर्म पानी के साथ तीन माह तक सेवन करें। ठंडे पदार्थ, बर्फ, दही, ठंडे पेय से परहेज करें। नाक की एलर्जी दूर हो जाएगी।   


 बवासीर :

10 से 12 ग्राम धुले हुए काले तिल ताजा मक्खन के साथ लेने से भी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है। जमीकंद का देसी घी में मसाला रहित भुरता बनाकर खाएं। शीघ्र लाभ होगा।

 गर्भावस्था में जी घबराना :

गर्भ धारण करने के दो-तीन महीने तक गर्भवती महिला को उल्टियां आती है। ऐसे में धनिया का काढ़ा बना कर एक कप काढ़े में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से जी घबराना बंद होता है। 

सिर दर्द  में सेक्स  लाभकारी -

सिर के एक तरफ होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए दवा नहीं, यौन संबंध का सहारा लीजिए। दर्द दूर भगाने का यह कारगर उपाय है। हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन में जर्मनी के शोधकर्ताओं ने पाया कि माइग्रेन से पीड़ित 60 फीसदी और कलस्टर सिरदर्द से पीड़ित 37 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि दर्द से राहत पाने में सेक्स ने उनकी मदद की।माइग्रेन के 800 और कलस्टर सिरदर्द के 200 मरीजों पर किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई कि सेक्स के दौरान पांच में से एक मरीज को दर्द से पूरी तरह राहत मिली। माइग्रेन या कलस्टर सिरदर्द अटैक के दौरान लोग अक्सर सेक्स करने से बचते हैं।
जर्मनी के मंस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के दल ने कहा कि हमारे निष्कर्ष से इस बात का खुलासा होता है कि सेक्स से माइग्रेन और कलस्टर सिरदर्द से पीड़ित कुछ लोगों को दर्द से पूरी तरह या आंशिक तौर पर राहत मिलती है। सेक्स के दौरान इन्डॉर्फिन हॉर्मोन का स्रावित होती है, जो स्वाभाविक दर्द निवारक के रूप में काम करती है|
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




चक्कर आना के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार






चक्कर आना या सिर घूमना या आंखों के सामने गोल गोल घूमती हुई दिखाई देने वाली स्तिथि को चक्कर आना या(vertigo )कहते है ।कुछ देर बैठे रहने के बाद जब उठते हैं तो चक्कर आने लगते हैं और आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। रोगी को लगता है कि उसके चारों तरफ़ की चीजें बडी तेजी से घूम रही हैं।चक्कर का एक कारण दिमाग में खून की पूर्ति कम हो जाना है। चक्कर आने के विस्तृत कारण हो सकते हैं जैसे--कान में संक्रमण होना,कान में मेल अधिक होने से डाट लग जाना,माईग्रेन, आंखों की समस्या,सिर की ताजा चोट,हृदय के रोग,अर्बुद,रक्ताल्पता, खून में केल्सियम का लेविल बिगड जाना आदि। अब इतने सारे कारणों की जांच कराना और हर समस्या के लिये दवाईयां लेते रहने के बावजूद रोग से मुक्ति नहीं पाने को देखते हुए निम्न घरेलू उपचार से लाभ पाने की आशा करना बेहतर  विकल्प है --

१) नारियल का पानी रोज पीने से चक्कर आना बंद हो जाते हैं।
२) खरबूजे के बीज की गिरी गाय के घी में भुन लें। इसे पीसकर रख लें। ५ ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेने से चक्कर आने की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।
३) १५ ग्राम मुनक्का देशी घी में भुनकर उस पर सैंधा नमक बुरककर सोते समय खाने से चक्कर आने का रोग मिट जाता है।
४) सूखा आंवला पीस लें। दस ग्राम आंवला चूर्ण और १० ग्राम धनिया का पावडर एक गिलास पानी में डालकर रात को रख दें। सुबह अच्छी तरह मिलाकर छानकर पी जाएं। चक्कर आने में आशातीत लाभ होगा।
अदरक लगभग 20 ग्राम की मात्रा में बारीक काटकर पानी में उबालें आधा रह जाने पर छानकर पीयें। अदरक का रस भी इतना ही उपकारी है।सब्जी बनाने में भी अदरक का भरपूर उपयोग करें। चाय बनाने में अदरक का प्रयोग करें।अदरक किसी भी तरह खाएं चक्कर आने के रोग में आशातीत लाभकारी है।


*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

६) तुलसी के २० पत्ते पीसकर शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आने की समस्या काफ़ी हद तक नियंत्रण में आ जाती है।

७) चक्कर आने की बीमारी में असरदार एक और उपचार नोट करलें-
*१० ग्राम गेहूं,५ ग्राम पोस्तदाना,७ नग बादाम,७नग कद्दू के बीज लेकर थोडे से पानी के साथ पीसकर इनका पेस्ट बनालें। अब कढाई में थोडा सा गाय का घी गरम करें और इसमें २-३ नग लोंग पीसकर डाल दें। अब बनाया हुआ पेस्ट इसमें डालकर एक मिनट आंच दें। इस मिश्रण को एक गिलास दूध में घोलकर पियें। चक्कर आने में असरदार स्वादिष्ट नुस्खा है।
८) चाय,काफ़ी और तली गली मसालेदार चीजों से परहेज करना आवश्यक है। इनके उपयोग से चक्कर आने की तकलीफ़ में इजाफ़ा होता है।

९) ) कभी-कभी नमक की मात्रा शरीर में कम होने पर भी चक्कर आने लगते हैं। आलू की नमकीन चिप्स खाने से लाभ होता देखा गया है
१०) जब चक्कर आने का हमला हुआ हो , बर्फ़ के समान ठंडा पानी ३ गिलास पीने से भी तुरंत राहत मिलती है
११) ) चक्कर आने की तकलीफ़ में रोगी को आहिस्ता घूमना चाहिये। तेज चलने से गिरकर चोंट लगने की संभावना रहती है।आहिस्ता चलने से वर्टिगो का प्रभाव कम हो जाता है।
१२) अचानक चक्कर आने पर सबसे बढिया बात यह है कि लेट जाएं। चित्त लेटना उचित नहीं है। साइड से लेटें और सिर के नीचे तकिया अवश्य लगाएं।

१३) अगर विडियो गेम्स की वजह से चक्कर आते हो तो यह रुचि नियंत्रित करें।१५) अनुलोम विलोम प्राणायाम से चक्कर आने की व्याधि से हमेशा के लिये छुटकारा मिल जाता है। टीवी पर बाबा रामदेव से इस प्राणायाम की तकनीक सीखें।
१४) होम्योपैथी में इस रोग को काबू में करने की कई औषधियां हैं लेकिन मेरे अनुभव मे चार औषधियां विशेष कारगर हैं-जेल्सेमियम,काकुलस,लोबेलिया इ
नफ़्लाटा,ब्रायोनिया ३० शक्ति की  इन  चारों दवाओं की २-२ बूंदे आधा कप पानी में टपकाकर दिन में तीन बार  पीयें।

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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