29.7.10

कोलेस्टरोल की संक्षिप्त जानकारी


    कोलेस्ट्रोल क्या है?
                                       
    कोलेस्टरोल मोम जैसा पदार्थ होता है जो हमारे शरीर और लिवर में कुदरती तौर पर पैदा होता रहता है।यह शरीर के हर भाग में पाया जाता है। कोशिकाओं की झिल्ली में कोलेस्टरोल की उचित मात्रा बनी रहने से आवश्यक तरलता और पारगम्यता की स्थिति बनी रहती है।कोलेस्टरोल हमारे शरीर में विटामिन डी, पित्त एवं हार्मोन्स के निर्माण के लिये उत्तरदायी है और हमारे शरीर की चर्बी को पचाने में सहायता करता है। मांसाहार से कोलेस्टरोल हमारे शरीर में पहुंचता है।मांस मछली अंडे से कोलेस्टरोल की वृद्धि होती है।दूध और दूध से बनी चीजें भी कोलेस्टरोल बढाती हैं।याद रखने योग्य है कि अनाज सब्जियों और फ़लों में कोलेस्टरोल नहीं होता है। एक बात और जान लें कि हमारे शरीर में जितना कोलेस्टरोल पाया जाता है उसका सिर्फ़ २० प्रतिशत हिस्सा भोजन के जरिये शरीर में पहुंचता है। बाकी का कोलेस्टरोल लिवर में उत्पन्न होता है। भोजन करने के बाद आंते उसमें से कोलेस्टरोल खींचकर लिवर को पहुंचा देती हैं। हमारा लिवर कोलेस्टरोल नियंत्रण का काम करता है,और जरूरत के मुताबिक खून में कोलेस्टरोल पहुंचाता रहता है।
    यद्धपि थोडी मात्रा में कोलेस्टरोल शरीर के लिये जरूरी है लेकिन इसकी मात्रा बढने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। कोलेस्टरोल अच्छा भी होता और खराब भी। अच्छे कोलेस्टरोल को एच डी एल( हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) कहा जाता है। खराब यानि हानिकारक कोलेस्टरोल को एल डी एल(लो डेन्सिटी लिपो प्रोटीन) कहते हैं। जब शरीर में इस खराब कोलेस्टरोल की मात्रा बढ जाती है तो यह कोरोनरी धमनी में जमा होना शुरू हो जाता है और उसे जाम करने लगता है। इससे रक्त प्रवाह में बाधा आने लगती है और हार्ट अटेक तथा हाई ब्लड प्रेशर रोगों की भूमिका तैयार होने लगती है। अब दूसरे प्रकार के एच डी एल कोलेस्टरोल का काम समझ लें। यह हमारी धमनियों में जमी हुई चिकनाई और थक्कों को हटाकर उसे लिवर को भेजता है, यह लाभदायक कोलेस्टरोल होता है। यह खराब कोलेस्टरोल को नियंत्रण में रखता है।
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