28.6.10

हाई ब्लड प्रेशर के सरल उपचार. How to treat and tackle high blood pressure?

                            उच्च रक्तचाप की  सरल चिकित्सा                                                                                      

                                                                                                                  
 ब्लड प्रेशर का चार्ट -




                 अनियमित दिनचर्या और जीवन शैली की वजह से होने वाला तनाव आज शहरी आबादी और खासकर युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर( हाईपरटेंशन) की समस्या के रूप में तेजी से सामने आ रहा है।भारत की लगभग ३० प्रतिशत शहरी आबादी इस रोग की चपेट में बताई गई है। जबकि १० से १२ प्रतिशत ग्रामीण इस रोग से पीडित हैं। चिकित्सा विग्यान में निम्न रक्त चाप की तुलना में उच्च रक्त चाप ज्यादा नुकसानदेह बताया गया है। कारण ये है कि हाई ब्लड प्रेशर से रोगी में अन्य कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ज्यादा रक्त चाप की परिणिति लकवा अथवा हार्ट अटेक में भी होती है। भारत में ३५ वर्ष से ज्यादा के लोगों में यह रोग तेजी से प्रवेश कर रहा है।


Protected by Copyscape DMCA Copyright Detector     दुनिया भर में कई लोगों की मौत के मुख्य कारणों में से हाईपरटेंशन भी एक कारण है। और इसकी वजह है शारीरिक गतिविधियों की कमी। मोटापा, तनाव, खाने पीने में लापरवाही, गंभीर बीमारियाँ, धूम्रपान, नशा  आदि।
   
      रक्त चाप के अधिकतम दवाब को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं। जबकि कम से कम दाब को डायस्टोलिक प्रेशर कहते हैं।आदर्श ब्लड प्रेशर १२०/८० याने ऊंचे में १२० और नीचे में ८० है। युवा वर्ग में अक्सर डायस्टोलिक प्रेशर बढा हुआ पाया जाता है जबकि अधिक उम्र के लोगों में सिस्टोलिक प्रेशर ज्यादा देखने में आता है। उच्च रक्त चाप के चलते रोगी में हृदय संबंधी विकार,किडनी के रोग,नाडी मंडल की तकलीफ़ें आदि कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।उच्च रक्त चाप से ब्रेन हेमरेज  जैसी अत्यंत गंभीर समस्या भी उत्पन होते देखी जा रही है।

  चिकित्सा विज्ञान में उच्च रक्त चाप  निम्न रुधिर दाब से ज्यादा खतरनाक माना गया है।

उच्च रक्त चाप के लक्षण


रक्त चाप बढने से तेज सिर दर्द,थकावट,टांगों में दर्द ,उल्टी होने की शिकायत और चिडचिडापन होने के लक्षण  मालूम पडते हैं। यह रोग जीवन शैली और खान-पान की आदतों से जुडा होने के कारण केवल दवाओं से इस रोग को समूल नष्ट करना संभव नहीं है। जीवन चर्या एवं खान-पान में अपेक्षित बदलाव कर इस रोग को पूरी तरह नियंत्रित किया सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर के मुख्य कारण


१) मोटापा

२) तनाव(टेंशन)

३) महिलाओं में हार्मोन परिवर्तन

४) ज्यादा नमक उपयोग करना

अब यहां ऐसे सरल घरेलू उपचारों की चर्चा की जायेगी जिनके सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने से बिना गोली केप्सुल लिये इस भयंकर बीमारी  पर पूर्णत: नियंत्रण पाया जा सकता है-

१) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोगी को नमक का प्रयोग बिल्कुल कम कर देना चाहिये। नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है।

२) उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे धमनियों और शिराओं में  दवाब बढ जाता है।लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू वस्तु है।यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्ररोल होने की स्थिति का समाधान करती है।

 ३)  एक बडा चम्मच आंवला का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह -शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।

४) जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गरम पानी में काली मिर्च पावडर एक चम्मच घोलकर २-२ घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही मुकाम पर लाने का बढिया उपचार है।

५) तरबूज का मगज और पोस्त दाना दोनों बराबर मात्रा में लेकर पीसकर मिलालें। एक चम्मच सुबह-शाम खाली पेट पानी  लें।३-४ हफ़्ते तक या जरूरत मुताबिक लेते रहें।
८) पपीता आधा किलो रोज सुबह खाली पेट खावें। बाद में २ घंटे तक कुछ न खावें। एक माह तक प्रयोग से बहुत लाभ होगा।
९) सौंफ़,जीरा,शकर तीनों बराबर मात्रा में लेकर पावडर बनालें। एक गिलास पानी में एक चम्मच मिश्रण घोलकर सुबह-शाम पीते रहें।

१०) उबले हुए आलू खाना रक्त चाप घटाने का श्रेष्ठ उपाय है।आलू में सोडियम(नमक) नही होता है।

११) पालक और गाजर का रस मिलाकर एक गिलास रस सुबह-शाम पीयें। अन्य सब्जीयों के रस भी लाभदायक होते हैं।

१२) नमक दिन भर में ३ ग्राम से ज्यादा न लें।
१४) करेला और सहजन की फ़ली उच्च रक्त चाप-रोगी के लिये परम हितकारी हैं।

१५) फल खाएं- केला,अमरूद,सेवफ़ल ब्लड प्रेशर रोग को दूर करने में सहायक कुदरती पदार्थ हैं।

१६) मिठाई और चाकलेट का सेवन बंद कर दें।

१७) सूखे मेवे :--जैसे बादाम काजू,खारक आदि  उच्च रक्त चाप रोगी  के लिये लाभकारी पदार्थ हैं।

१८) चावल:-  (भूरा) उपयोग में लावें। इसमें नमक ,कोलेस्टरोल,और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है। इसमें पाये जाने वाले केल्शियम से नाडी मंडल की भी सुरक्षा हो जाती है।
१९)  अदरक:-   प्याज और लहसून की  तरह अदरक  भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैलसियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है।  अदरक में   बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स   होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।

२०)  लालमिर्च:- धमनियों के सख्त होने के कारण या उनमे प्लेक जमा होने की वजह से रक्त वाहिकाएं और नसें संकरी हो जाती हैं जिससे कि रक्त प्रवाह में रुकावटें पैदा होती हैं। लेकिन लाल मिर्च से नसें और रक्त वाहिकाएं चौड़ी हो जाती हैं, फलस्वरूप रक्त प्रवाह सहज हो जाता है और रक्तचाप नीचे आ जाता है।







ब्लड प्रेशर कम( Low blood pressure)  रहता हो तो निम्न उपचार हितकारी साबित हुए हैं---

   किशमिश १० नग रात भर पानी में गलाएं। सुबह एक-एक किशमिश  बहुत बारीक चबाकर खाएं। यह उपाय एक दो माह करें।

बादाम ७ नग रात भर पानी में गलाएं। छिलका निकालें।अच्छी तरह पीसकर २५० मिलि दूध के साथ उपयोग करें।

ब्लड प्रेशर ज्यादा गिरने पर चुटकी भर नमक पानी में घोलकर पीयें।

  बोलना बंद करें। सो जाएं। बाईं करवट लेटें। नींद लेना लाभदायक होता है।
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