18.6.10

मिर्गी रोग के इतने प्रभावी उपचार जानते हैं आप? . Epilepsy: simple treatment.


  


मिर्गी एक नाडीमंडल संबंधित रोग है जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय प्रक्रिया में व्यवधान पडने से शरीर के अंगों में आक्षेप आने लगते हैं। दौरा पडने के दौरान ज्यादातर रोगी बेहोंश हो जाते हैं और आंखों की पुतलियां उलट जाती हैं। रोगी चेतना विहीन हो जाता है और शरीर के अंगों में झटके आने शुरू हो जाते हैं। मुंह में झाग आना मिर्गी का प्रमुख लक्षण है।
दुनिया भर में पांच करोड़ से ज्यादा लोग मिर्गी के शिकार हैं और यह समस्या लगातार बढ़ रही है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में मिर्गी की बीमारी आम है। शायद यही कारण है कि इस बार ′वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी′ ने ′विश्व मस्तिष्क दिवस′ पर मिर्गी को थीम बनाया है। यह रोग दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी (विद्युत प्रवाह) की गड़बड़ी के कारण होता है। मिर्गी आने का कारण जेनेटिक होने के अलावा सिर में चोट लगना, इन्फेक्‍शन, ट्यूमर, कोई सदमा, मानसिक तनाव, स्ट्रोक आदि हो सकता है।
यदि किसी बच्चे को मिर्गी की शिकायत है, तो कोई मानसिक कमी भी इसका कारण हो सकती है। आमतौर पर मिर्गी आने पर रोगी बेहोश हो जाता है। यह बेहोशी चंद सेकेंड, मिनट या घंटों तक हो सकती है। दौरा समाप्त होते ही मरीज सामान्य हो जाता है।
यदि किसी की बेहोशी दो-तीन मिनट से ज्यादा है, तो यह जानलेवा भी हो सकती है। उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए । कुछ लोग मिर्गी आने पर रोगी को जूता, प्याज आदि सुंघाते हैं, इसका मिर्गी के इलाज से कोई संबंध नहीं है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में मिर्गी की लाक्षणिक चिकित्सा की जाती है और जीवन पर्यंत दवा-गोली पर निर्भर रहना पडता है। लेकिन रोगी की जीवन शैली में बदलाव करने से इस रोग पर काफ़ी हद तक काबू पाया जा सकता है।
कुछ निर्देश और हिदायतों का पालन करना मिर्गी रोगी और उसके परिवार जनों के लिये परम आवश्यक है। शांत और आराम दायक वातावरण में रहते हुए नियंत्रित भोजन व्यवस्था अपनाना बहुत जरूरी है।
भोजन भर पेट लेने से बचना चाहिये। थोडा भोजन कई बार ले सकते हैं।
रोगी को सप्ताह मे एक दिन सिर्फ़ फ़लों का आहार लेना उत्तम है। थोडा व्यायाम करना भी जीवन शैली का भाग होना चाहिये।
मिर्गी रोगी की चिकित्सा ऐसे करें---
१) अंगूर का रस मिर्गी रोगी के लिये अत्यंत उपादेय उपचार माना गया है। आधा किलो अंगूर का रस निकालकर प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिये। यह उपचार करीब ६ माह करने से आश्चर्यकारी सुखद परिणाम मिलते हैं।
२) एप्सम साल्ट (मेग्नेशियम सल्फ़ेट) मिश्रित पानी से मिर्गी रोगी स्नान करे। इस उपाय से दौरों में कमी आ जाती है और दौरे भी ज्यादा भयंकर किस्म के नहीं आते है।
३) मिट्टी को पानी में गीली करके रोगी के पूरे शरीर पर प्रयुक्त करना अत्यंत लाभकारी उपचार है। एक घंटे बाद नहालें। इससे दौरों में कमी होकर रोगी स्वस्थ अनुभव करेगा।
४) विटामिन ब६ (पायरीडाक्सीन) का प्रयोग भी मिर्गी रोग में परम हितकारी माना गया है। यह विटामिन गाजर,मूम्फ़ली,चावल,हरी पतीदार सब्जियां और दालों में अच्छी मात्रा में पाया जाता है। १५०-२०० मिलिग्राम विटामिन ब६ लेते रहना अत्यंत हितकारी है।
५) मानसिक तनाव और शारिरिक अति श्रम रोगी के लिये नुकसान देह है। इनसे बचना जरूरी है।
6) मिर्गी रोगी को २५० ग्राम बकरी के दूध में ५० ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर नित्य प्रात: दो सप्ताह तक पीने से दौरे बंद हो जाते हैं। जरूर आजमाएं।
7) रोजाना तुलसी के २० पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है
पेठा मिर्गी की सर्वश्रेष्ठ घरेलू चिकित्सा में से एक है। इसमें पाये जाने वाले पौषक तत्वों से मस्तिष्क के नाडी-रसायन संतुलित हो जाते हैं जिससे मिर्गी रोग की गंभीरता में गिरावट आ जाती है। पेठे की सब्जी बनाई जाती है लेकिन इसका जूस नियमित पीने से ज्यादा लाभ मिलता है। स्वाद सुधारने के लिये रस में शकर और मुलहटी का पावडर भी मिलाया जा सकता है।
९) १०० मिलि दूध में इतना ही पानी मिलाकर उबालें दूध में लहसुन की ४ कुली चाकू से बारीक काटक्रर डालें ।यह मिश्रण रात को सोते वक्त पीयें। कुछ ही रोज में फ़ायदा नजर आने लगेगा।
१०) गाय के दूध से बनाया हुआ मक्खन मिर्गी में फ़ायदा पहुंचाने वाला उपाय है। दस ग्राम नित्य खाएं।
११) होम्योपैथी की औषधियां मिर्गी में हितकारी सिद्ध हुई हैं।कुछ होम्योपैथिक औषधियां है--
क्युप्रम,आर्टीमेसिया,साईलीशिया,एब्सिन्थियम,हायोसायमस,एगेरिकस,स्ट्रामोनियम,कास्टिकम,साईक्युटा विरोसा,ईथुजा| इन दवाओं का लक्षणों के मुताबिक उपयोग करने से मिर्गी से मुक्ति पाई जा सकती है
१२) तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है।
१३) राई पीसकर चूर्ण बना लें। जब रोगी को दौरा पड़े तो सुंघा दें इससे रोगी की बेहोशी दूर हो जायगी।
१४) मिर्गी के रोगी के लिए
शहतूत का रस लाभदायक होता है। सेब का जूस भी मिर्गी के रोगी को लाभ पहुंचता है।
१५) मिर्गी के रोगी के पैरों तलवों में
आक की आठ-दस बूंदे रोजाना शाम के समय मलें। ऐसा 2 महीनों तक रोजाना करें। इससे काफी लाभ मिलेगा।
१६) तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है।
१७) तुलसी के पत्तों के रस में जरा सा सेंधा नमक मिलाकर 1 -1 बूंद
नाक में टपकाने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है।
१८) मिरगी के रोगी को ज़रा सी हींग को निम्बू के साथ चूसने से लाभ होता है|
१९) निम्न मंत्र का विधिपूर्वक उच्चारण करने से मिर्गी रोग नष्ट होने की बात मंत्र चिकित्सा सिस्टम में उल्लेखित है।यह मंत्र १०,००० बार जपने से सिद्ध होता है। मंत्र शक्ति में विश्वास रखने वाले यह उपाय अवश्य आजमाएं।
"ओम हाल हल मंडिये पुडिये श्री रामजी
फ़ूंके वायु ,सुखे,सुख होई,ओम ठाह ठाह स्वाहा".

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