डायलिसिस पेशेंट का डाईट चार्ट




जब किडनी सही से काम करना बंद कर देती है, तो खून को साफ कर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए डायलिसिस की प्रक्रिया को अपनाया जाता है । इस स्थिति में किडनी मरीजों को खान-पान के प्रति बड़ा सजग रहना पड़ता है। 

डायलिसिस पेशेंट डाइट चार्ट
डायलिसिस पेशेंट्स के लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना अच्छा माना जाता है। साथ ही इस दौरान ऐसे खाद्य को लेने की सलाह दी जाती है, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट, मिनरल और तरल की मात्रा को संतुलित रखा जा सके । इसी आधार पर यहां  डायलिसिस पेशेंट डाइट चार्ट का एक नमूना दे रहे हैं।
भोजनक्या खाना है
सुबह उठते ही (7:00-7:30 बजे के बीच) एक कप टोन्ड मिल्क से तैयार चाय या कॉफी।
नाश्ता (8:00-8.30 बजे के बीच)1 कटोरी सब्जियों को मिलाकर बनाई गई दलिया या एक कटोरी ओट्स उपमा या आधी कटोरी सांभर के साथ तीन प्लेन डोसा या एक व्हीट ब्रेड वेजिटेबल सैंडविच।
ब्रंच  (11:00-12:00 बजे के बीच)एक छोटा अमरूद या 100 ग्राम पपीता या 4 स्ट्रॉबेरी या एक छोटा सेब या 100 ग्राम अनानास।
दोपहर का खाना (1:00-2:00 बजे के बीच)एक कटोरी दाल, एक कटोरी चावल, दो मल्टीग्रेन रोटी और आधी कटोरी ट्यूना मछली की करी या एक कटोरी चावल, 2 मल्टीग्रेन रोटी, दाल और आधी कटोरी वेज सब्जी (जैसे :- पत्ता गोभी, लौकी, अरबी, आलू बैंगन) के साथ एक कटोरी सलाद।
शाम का नाश्ता(4:00-5:00 बजे के बीच)एक एवोकैडो व्हीट ब्रेड सैंडविच या एक कटोरी शकरकंद सैलेड या एक कटोरी उबले हुए स्प्राउट्स या मुट्ठीभर मूंगफली के साथ एक कप ग्रीन टी।
रात का खाना (8:30-9:30 बजे के बीच)गेहूं, ज्वार व बाजरा से तैयार दो रोटी के साथ आधी कटोरी लौकी की सब्जी और एक कटोरी सलाद या दो मल्टीग्रेन रोटी के साथ आधी कटोरी भिंडी की सब्जी और एक कटोरी सलाद या एक कटोरी चावल के साथ तोरई की रसेदार सब्जी और एक कटोरी सलाद या दो मल्टीग्रेन रोटी के साथ आधी कटोरी कच्चे केले की सब्जी और एक कटोरी सलाद।

नोट:  व्यक्ति की स्थिति, उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर इसमें संभावित परिवर्तन किए जा सकते हैं। 
डायलिसिस में क्या खाएं
यहां हम उन खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन डायलिसिस की स्थिति में लाभकारी साबित हो सकता है। यह खाद्य कुछ इस प्रकार हैं :
अंडे का सफेद भाग: डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजर रहे मरीजों के लिए भी अंडे के फायदे उपयोगी हो सकते हैं। डायलिसिस के मरीजों के लिए अंडे का सफेद भाग खाना अच्छा माना जाता है।
ऑलिव ऑयल: स्वास्थ्य के लिए एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल काफी उपयोगी माना जाता है। ऐसे में इसका सेवन डायलिसिस पेशेंट्स के लिए भी सहायक माना जा सकता है।  इसलिए खाना बनाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
ओट्स:  ओट्स का सेवन करने से किडनी के मरीजों के सीरम एल्ब्युमिन और सीरम पोटेशियम में सुधार हो सकता है। ऐसे में डायलिसिस रोगियों के डाइट चार्ट में ओट्स को शामिल किया जा सकता है ।
शहद: डायलिसिस के दौरान किडनी के मरीजों में इंफेक्शन होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में शहद का सेवन लाभकारी हो सकता है। 
मछली: मछली को भी डायलिसिस रोगियों के डाइट चार्ट में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, डायलिसिस में प्रोटीन की आवश्यकता होती है। वहीं मछली शरीर में प्रोटीन के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकती है । 
इन चीजों का भी कर सकते हैं सेवन
डायलिसिस पेशेंट्स को कम पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में हम नीचे कुछ विशेष खाद्यों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें डायलिसिस मरीज सीमित मात्रा में अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं :
फल: बेरी, अंगूर, चेरी, सेब, आलूबुखारा
सब्जी: पत्ता गोभी, प्याज, बैंगन, शलजम
प्रोटीन: चिकन, फिश, अंडे, बिना नमक के तैयार सी फूड
कार्ब्स: व्हाइट ब्रेड, सैंडविच, पास्ता
ड्रिंक्स: पानी, डाइट सोडा, बिना चीनी की चाय
उपरोक्त बताई गई सभी चीजें किडनी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। इसके बावजूद किसी भी चीज का अत्यधिक मात्रा में सेवन न करें |
डायलिसिस में परहेज
 यह खाद्य कुछ इस प्रकार हैं :
ज्यादा नमक वाले भोजन से दूरी बनाकर रखें ।
जिन सब्जियों और फलों में उच्च मात्रा में पोटेशियम होता है जैसे संतरा, कीवी, आलू, टमाटर, एवोकाडो आदि को डाइट में शामिल करने से बचें ।
जिन खाद्य पदार्थों में फास्फोरस की उच्च मात्रा हो जैसे :- मिल्क, चीज और योगर्ट का सेवन न करें ।
अचार, सॉफ्ट ड्रिंक्स, ड्राई फिश, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि का सेवन न करें ।
डाइट का रखें खास ख्याल: तले हुए खाने का सेवन न करके उबला हुआ या ग्रिल किया हुआ खाना खाएं। गेहूं की रोटी, डोनट, समोसा, भजिया, क्रीम युक्त कॉफीआदि का सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है। इन चीजों का डायलिसिस में परहेज करना चाहिए ।
स्मोकिंग से परहेज करें: स्मोकिंग किडनी की स्थिति को पहले से ज्यादा बदतर बना सकता है। इसलिए बेहतर होगा इससे दूरी बनाकर रखें ।
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें: किडनी रोगियों में ब्लड प्रेशर का नियंत्रित रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए खाने में सोडियम की मात्रा कम लेने के साथ पर्याप्त नींद और समय पर दवा लें ।
अत्यधिक भोजन न करें।
डायलिसिस डाइट के फायदे –
 डायलिसिस डाइट को इस्तेमाल में लाने से होने वाले फायदे- 
शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के साथ ही डायलिसिस डाइट मरीज के शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। इससे मरीज का स्वास्थ्य कुछ हद तक बेहतर हो सकता है। साथ ही मरीज अधिक लंबे समय तक सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकता है ।
गंभीर रूप से किडनी खराब होने की स्थिति में आहार पर ध्यान देने से किडनी की स्थिति में सुधार के साथ ही हृदय व हड्डियों से संबंधित रोगों से बचाव में मदद मिल सकती है ।
पानी तथा पेय पदार्थ
किडनी फेल्योर के मरीजों को पानी या अन्य पेय पदार्थ ( द्रव ) लेने में सावधानी क्यों जरुरी हैं ?
किडनी की कार्यक्षमता कम होने के साथ साथ अधिकतर मरीजों में पेशाब कि मात्रा भी कम होने लगती हैं। इस अवस्था में अगर पानी का खुलकर प्रयोग किया जाये, तो शरीर में पानी की मात्रा बढ़ने से सूजन और साँस लेने की तकलीफ हो सकती हैं, जो ज्यादा बढ़ने से प्राणघातक भी हो सकती हैं
शरीर में पानी की मात्रा बढ़ गई हैं, यह कैसे जाना जा सकता हैं?
सूजन आना, पेट फूलना, साँस चढ़ना, खून का दबाव बढ़ना, कम समय में वजन में वृद्धि होना इत्यादि लक्षणों की मदद से शरीर में पानी की मात्रा बढ़ गई हैं, यह जाना जा सकता हैं ।
किडनी फेल्योर के मरीजों को कितना पानी लेना हैं , यह मरीज को होनेवाली पेशाब और शरीर में आई सूजन को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है। जिस मरीज को पेशाब पूरी मात्रा में होता है, एवं शरीर में सूजन भी नहीं आ रही हो , तो ऐसे मरीजों को उनकी इच्छा के अनुसार पानी - पेय पदार्थ की छूट दी जाती है 
जिन मरीजों को पेशाब कम मात्रा में होता हो, साथ ही शरीर में सूजन भी आ रही हो, ऐसे मरीजों को पानी कम लेने की सलाह दी जाती हैं । सामान्यतः 24 घंटे में होनेवाले कुल पेशाब के मात्रा के बराबर पानी लेने की छूट देने से सूजन को बढ़ने से रोका जा सकता है।



विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -




लेटेस्ट  केस रिपोर्ट -26/10/2020

नाम किडनी फेल रोगी : अमरसिंगजी -जुझारसिंगजी यादव   
स्थान : टाटका तहसील -सीतामऊ,जिला मंदसौर,मध्य प्रदेश 
इलाज से पहिले की टेस्ट रिपोर्ट 26/10/2020 के अनुसार 

serum Creatinine :7.18mg/dl

Urea                    :129mg/dl 


 यह औषधि पीने के 20 दिन बाद की स्थिति-

दिनांक-  15 /11/2020 की रिपोर्ट 

Serum creatinine :     2.18 mg/dl

urea:                          69  mg/dl  

तेजी से सुधार होते हुए स्थिति नॉर्मल होती जा रही है|
अभी इलाज जारी है| 





इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की एक लेटेस्ट  केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 







 केस रिपोर्ट 2-

रोगी का नाम - Awdhesh 

निवासी - कानपुर 

ईलाज से पूर्व की रिपोर्ट






दिनांक - 26/4/2016

Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


यह हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34 
mg/dl

urea 22  mg/dl




सेब के सिरके के फायदे और नुकसान




पिछले कुछ समय से सेब के सिरके या एप्‍पल साइडर विनेगर का प्रयोग काफी हो रहा है। सेब के सिरके का प्रयोग कई घरों में किया जाता है। घरों में खाना पकाने के साथ ही इसका प्रयोग कई और कामों में किया जाता है। आजकल बाजार में कई प्रकार के सिरके उपलब्ध हैं।

परन्तु इन सभी सिरकों में एप्पल सिडर विनेगर को सबसे अधिक अच्छा माना जाता है। इसे सेब के रस को फरमेंट करके बनाया जाता है। इसमें कई प्रकार के पोषक तत्वों पाये जाते हैं जो हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं।
इसको बनाने के लिए सबसे पहले सेब का ​रस निकाला जाता जाता है फिर उस रस में यीस्ट को मिलाकर उसमें मौजूद फ्रूट शुगर को एल्कोहल में बदल जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया को फरमेंट या खमीरीकरण कहते हैं। इसके बाद उसमें बैक्टीरिया को डाल दिया जाता है जो एल्कोहल को एसिटिक एसिड में बदल देता है। मैलिक एसिड और एसिटिक एसिड से इस सिरके को इसका स्वाद मिलता है जो खट्टा होता है साथ ही इसकी महक भी मिलती है। इसका रंग पीला व हल्का नारंगी होता है।
सेब के सिरके का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यह हमारी सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
हम अपने इस लेख में इसको बनाने का का तरीका बताने जा रहे हैं साथ ही इससे होने वाले फायदों व नुकसान के बारे में विस्तार से जानेंगे।
सेब का सिरका क्या है? What is Apple Cider Vinegar in Hindi
हमने इसके बारे में आपको ऊपर बताया है कि सेब का सिरका या एप्पल साइडर विनेगर को बनाने के लिए सेब के रस को फरमेन्ट किया जाता है। इस फर्मेन्टेड रस अर्थात साइडर में एथिल अल्कोहल पाया जाता है जो एसीटोबैक्टर नामक बैक्टीरिया के द्वारा एसिटिक एसिड में बदल जाता है।
एसिटिक एसिड सेब के सिरके का एक महत्वपूर्ण यौगिक है। सिरके में यह इसकी तीव्र गंध और स्वाद में खट्टास लाने के लिए भी जिम्मेदार है। सेब के सिरके या एप्पल साइडर विनेगर में विटामिन के साथ कई अन्य पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं।
आगे हम इसको बनाने की विधि के साथ ही सेब के सिरके के फायदों के बारे में भी बात करेंगे।
सेब का सिरका बनाने की विधि —how to make apple cider vinegar at home in hindi
नीचे हम आपको सेब का सिरका बनाने की विधि बताने जा रहे हैं। जो बहुत ही आसान है इसे आप खुद अपने घर में भी बना सकते हैं। तो आइये शुरू करते हैं —
सबसे पहले 9 से 10 अच्छी क्वालिटी या ऑर्गेनिक सेब लें।
दूसरे चरण में सेब के छिलके को साफ करें और बीजों को निकालें।
अब साफ हुये सेब को अच्छी तरह से पानी से धो लें साथ ही उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें।
इन टुकड़ों को किसी अच्छी तरह से साफ किये गये सीसे के जार में डाल दें और उसमें पीने का साफ पानी भी डालें।
ध्यान रहे पानी उतना ही डालें जिससे सेब के टुकड़े उसमें डूब जाएं।
अगले चरण में इस जार को किसी जालीदार सूती कपड़े से ढक दें पर ध्यान रहे इसे एयर टाइट न करें बल्कि बन्द करते हुये ध्यान दें कि उस जालीदार कपड़े से हवा अंदर जार तक जाती रहे।
इस चरण में इस तैयार जार को किसी अंधेरी जगह अर्थात जहां रोशनी न पहुंच उस स्थान पर रखें मगर यह देखे की वह गर्म भी हो।
इस जार को उसी स्थान पर कम से कम 5 से 6 माह तक रहने दें। समय—समय पर उसे चम्मच से चलाते रहना जरूरी है।
6 माह की अवधि के बाद जार को उस स्थान से निकाल लें।
सेब फर्मेंटेड हो चुका होगा और उसके ऊपर एक बैक्टीरिया की परत जम गई होगी।
अब इस तरल पदार्थ को किसी साफ जालीदार कपड़े या जार वाले जालीदार कपड़े की सहायता से छानकर दूसरे जार में जमा कर लेते हैं।
इस नये जार को फिर से उसी जालीदार कपड़े से ढक कर बंद कर देते हैं।
इस जार को फिर से कुछ सप्ताह के लिए उसी अंधेरी व गर्म जगह पर रख दिया जाता है।
कुछ सप्ताह बाद इस तैयार सेब के सिरके या एप्पल साइडर विनेगर को किसी अन्य बर्तन में निकाल कर ​फ्रिज में रख लें। अब आप इसका प्रयोग अपने भोजन में कर सकते हैं।

सेब के सिरके के फायदे – 
1. पाचन के लिए सेब के सिरके के फायदे –
गैस, अपच औेर पाचन जैसे पेट के रोग वर्तमान समय में आम हो चुके हैं। ऐसे में सेब का सिरका आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए लाभकारी हो सकता है। अर्थात अगर आप भोजन से पहले कम मात्रा में सेब के सिरके का प्रयोग करते हैं तो यह डाइजेस्टिव जूस को उत्तेजित करने में मदद करता है, जिससे भोजन पचाने में आसानी होती है। ऐसा माना जाता रहा है कि सेब के सिरके का सेवन करना हमारी पाचन शक्ति को बढ़ाने में सकारात्मक प्रभाव डालता है।
2. वजन घटाने में एप्पल विनेगर के फायदे 
एप्पल विनेगर अर्थात सेब का सिरका के फायदों में एक वजन को कम करना भी है। ऐसा माना गया है कि अगर हम अपने रोजमर्रा के जीवन में सेब के सिरके का प्रयोग करते हैं तो इससे हमें अपना वजन कम करने में मदद मिलती है। क्योंकि सेब का सिरके में एसिटिक एसिड पाया जाता है, जो शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को कम करने में सहायक होता है।
3. डायबिटीज के लिए सेब के सिरके के फायदे –
डायबिटीज या ब्लड शुगर के लिए सेब के सिरके का प्रयोग करना लाभकारी हो सकता है। प्रयोगों से पता चला है कि सेब के सिरके के प्रयोग से ग्लूकोज के स्तर को कम करने में सहायता मिलती है। सेब के सिरके के मुख्य घटक एसिटिक एसिड जो कि एक एंटी-डायबिटिक और एंटी-ग्लाइसेमिक गुणों वाला है इसके इन्हीं गुणों के कारण आपको डायबिटीज में कुछ आराम मिल सकता है।
4. ब्लड प्रेशर के लिए सेब का सिरका —
अगर आप ब्लड प्रेशर से परेशान हैं तो आपके लिए सेब का सिरका फायदेमंद हो सकता है। सेब के सिरके का प्रयोग ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने के लिए किया जाता है। क्योंकि एप्पल साइडर विनेगर में पाये जाने वाले एसिटिक एसिड में एंटी-ह्यपरटेंसिव (Antihypertensive) अर्थात ब्लड प्रेशर को कम करने का गुण भी पाया जाता है। अर्थात अगर सेब के सिरके का प्रयोग एक संतुलित मात्रा में किया जाय तो ब्लड प्रेशर के खतरे को कम किया जा सकता है। परन्तु ध्यान देना चाहिए जिन्हें लो—ब्लड प्रेशर की शिकायत रहती है उन्हें सेब के सिरके का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
5. जोड़ों में दर्द के लिए एप्पल के सिरके के फायदे —
अगर आपको जोड़ों के दर्द की समस्या है, तो सेब का सिरका आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसमें पाये जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया या जोड़ों के दर्द से कुछ हद तक राहत पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।
6. कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए सेब के सिरके के फायदे —
हमारे शरीर में बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल हृदय रोगों के अलावा हार्ट अटैक का प्रमुख कारण बन सकता है। ऐसी परिस्थिति से बचाव के लिए आप सेब के सिरके पर भरोसा कर सकते हैं। क्योंकि एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के एक शोध में बताया गया है कि हमारे भोजन में पाया जाने वाला एसिटिक एसिड, सीरम टोटल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड (Triglyceride – जो अलग-अलग प्रकार के फैटी एसिडों का का मिश्रण है) को कम करने में मददगार पाया गया है।
इसके अतिरिक्त एप्पल वेनेगर खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने व अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकता है। सेब का सिरके का उपयोग हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करके हृदय रोग से बचाने में मदद कर सकता है।
7. रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए सेब के सिरके का उपयोग —
एप्पल साइडर विनेगर में फ्लेवोनोइड और एसिटिक एसिड पाये जाते हैं। जिसे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। इसके साथ ही सेब के सिरके में एंटी-माइक्रोबियल गुण भी पाये जाते हैं जो कई प्रकार के खतरनाक बैक्टीरिया से लड़कर हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं।
8. त्वचा के लिए सेब के सिरके के लाभ —
सेब का सिरका हमारे लिए बहुत की फायदेमंद तो है ही साथ ही यह मुंहासों के लिए भी असरदार हो सकता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। किन्तु इसमें पाये जाने वाले एंटीमाइक्रोबियल गुण जो मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया के प्रभाव को नष्ट करने में हमारी मदद करते हैं। यह हमारी त्वचा को बैक्टीरियल संक्रमण से बचाने में सहायक हो सकता है। ध्यान रहे अगर आप इसका प्रयोग कर रहें हैं तो इसका उपयोग गुलाब जल या पानी के साथ मिलाकर क्लींजर की तरह करें।
9. बालों के लिए सेब के सिरके के लाभ —
बालों के लिए भी सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए शैम्पू से बालों को साफ करने के बाद पानी में में कुछ मात्रा में एप्पल विनेगर को मिला लें और उस पानी से बालों को धो लें। ऐसा करने से बाल स्वस्थ्य और चमकदान हो जायेंगे। पर ध्यान दें अगर आप प्रथम बार इसका प्रयोग कर रहें हैं तो उससे पहले इसे अपने काम के पीछे कुछ मात्रा में लगा लें अगर उस स्थान पर कुछ समय बाद जल या अन्य कोई परेशानी हो रही है तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।
10. दांतों के लिए एप्पल साइडर सिरका के फायदे —
सेब के सिरके का प्रयोग दांतों के पीलेपन के लिए ब्लीचिंग की तरह कर सकते हैैं। इसके पयोग से दांतों के रंग में सुधार होता है और वह स्वस्थ्य होते है पर ध्यान दें की सिरके का अधिक प्रयोग करना दांतों के लिए खतरना हो सकता है।
11. सूजन को कम करने में सेब के सिरके के फायदे —
यदि आप आपकी त्वचा धूप में जल गई हो और उसमें कारण सूजन आ गई है तो सेब के सिरके को पानी में मिला लेना चाहिए और आपको उस पानी से नहा लेना चाहिए इससे आपकी सूजन कम हो जायेगी। इसके अतिरिक्त अगर आपके अन्दरूनी भागों में भी सूजन है तो आपको सेब के सिरके का प्रयोग सलाद में डालकर या पानी के साथ करना चाहिए। इसके अलावा सेब का सिरका पैर और टखने की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
सेब के सिरके के अन्य लाभ –
इसमे एंटीबैक्टीरियल तत्व पाये जाते हैं जो त्वचा से लाल निशान हटाने में मदद करते हैं।
सेब के सिरके का रोज प्रयोग करने से कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोका जा सकता है।
मुँह की बदबू खत्म करने के लिए ​सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।
यह त्वचा के टोनर की तरह कार्य करता है। इसके प्रयोग से त्वचा में मुहाँसे कम हो जाते हैं।
सेब के सिरके से रोज सुबह गरारा करने से दांतों के पीलापन को हटाया जा सकता है।
सेब के सिरके का प्रयोग यीस्ट संक्रमण को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।
सेब के सिरके के प्रयोग कर नाखूनों की चमक को बढ़ाया जा सकता है।
सेब के सिरके का उपयोग – How use apple cider vinegar in hindi
आगे हम सेब के सिरके के कुछ उपयोगों के बारे में बता रहे हैं।
इसका प्रयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक टॉनिक की तरह किया जा सकता है। इसके प्रयोग के लिए किसी भी सिट्रस फल के जूस में इसके दो चम्मच रस को मिला लें और पील लें यह आपके लिए फायदेमंद होगा।
सलाद में छिड़कर का भी सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।
सोने से पहले डॉक्टर की सलाह पर एक या दो चम्मच सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।
सेब के सिरके को पानी के साथ मिलाकर आप अपने बालों को धो सकते हैं। इससे आपके बाल तो मजबूत होंगे ही साथ ही डैंड्रफ की समस्या भी कम होगी।
एक चम्मच सेब के सिरके का सेवन पानी में मिलाकर भी कर सकते हैं।
सेब का सिरका दुर्गंद और बक्टेरिया को खत्म करता है, क्योंकि इसमें एन्टीबैटीरियल गुण पाये जाते हैं। इसके प्रयोग से आप अपने घर को साफ कर सकते हैं।
सेब के सिरके के नुकसान 
सेब का सिरके का प्रयोग करना काफी लोकप्रिय है क्योंकि इसके कई फायदे हमसे जुड़े हुये हैं। लेकिन कभी—कभी इसका सेवन हमारे शरीर के लिए हानिकारकहो सकता है। सेब के सिरके का अधिकतर प्रयोग वजन को कम करने व डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों को कम करने के लिए किया जाता है परन्तु इसके अत्यधिक प्रयोग से नुकसान हो सकता है। आइये इससे होने वाले कुछ नुकसानों के बारे में जानते हैं।
सेब के सिरके में एसिड पाया जाता है। जिसके अधिक प्रयोग से इसोफोगस, टूथ इनेमल और पेट की परेशानियां पैदा हो सकती हैं। अगर आप इसका प्रयोग सीधे त्वचा पर करते हैं तो खुजली, जलन जैसी समस्या हो सकती है। इसके सीधे त्वचा पर प्रयोग के लिए हमेशा मना किया जाता है। इसके लिए इसको पानी, गुलाबजल, शहद, जूस आदि में मिलाकर प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।
सेब के सिरके में पाया जाने वाला एसिड शरीर में मौजूद ब्लड में पोटैशियम के स्तर को कम कर सकता है। सेब के सिरके को सीधे दांतों पर प्रयोग करने से आपके दांतों को नुकसान हो सकता है। इसमें मौजूद एसिड दांतों की संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है। अगर आप सेब के सिरके का प्रयोग करते हैं तो तुरन्त पानी से अच्छी तरह कुल्ला कर लें।
सेब के सिरके का अत्यधिक प्रयोग हड्डियों में मौजूद मिनरल (bone mineral density) को भी कम कर देता है। जिसके कारण हड्डियों से जुड़े कई रोग हो सकते हैं।
अत: आपको यह सलाह दी जाती है कि इसका प्रयोग सोच—समझ कर करें। यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद तो है मगर अत्यधिक प्रयोग करने से आपको नुकसान भी हो सकता है अत: इसके प्रयोग से पहले आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।

नारायण चूर्ण के फायदे

 




नारायण चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है . इस औषधि में वात, पित्त, कफ दोष को दूर करने के गुण मौजूद होते है .
ये एक पाचक औषधि है जो पेट से संबंधित समस्याओं का इलाज करने के लिए बहुत लाभकारी है. बवासीर या अर्श की समस्या में मल त्याग करते समय बहुत परेशानी होती है कुछ लोगों को हमेशा कब्ज की शिकायत रहती है जिसके कारण उनका पेट अच्छी तरह से साफ नहीं होता और बवासीर की समस्या निर्माण होती है|
ऐसे समय में आप नारायण चूर्ण का सेवन कर सकते है इससे पेट अच्छी तरह से साफ हो जायेगा और कब्ज की समस्या भी नहीं रहेगी | जिन लोगों के पेट में कीड़े है, जिन्हे बार बार भूख लगती है, लेकिन वजन नहीं बढ़ता है ऐसे लोगों को इस चूर्ण का सेवन जरूर करना चाहिए इससे पेट के कीड़े मर जाते है |
भोजन करने के बाद खट्टी डकारे आना, जी मचलाना उल्टी या दस्त लगना जैसी समस्या में आप नारायण चूर्ण का सेवन कर सकते है | पेट में गैस बनने की समस्या में ये चूर्ण बहुत ही गुणकारी है | श्वसन संबंधी समस्या जैसे की अस्थमा क्रोनिक कफ में ये चूर्ण फायदेमंद होता है |
इस चूर्ण का नियमित सेवन अग्नि को प्रदीप्त करता है, मेटाबोलिज्म को सुधारता है | इसके नियमित सेवन से अच्छी तरह से भूख लगने लगती है | जलोदर कुष्ठ पांडू जैसी समस्या में भी इससे लाभ होता है|
नारायण चूर्ण में मौजूद घटक –
अजवायन, हाऊबेर, धनिया, हरड़, बहेड़ा, आवला, कलौंजी, कालाजीरा, सौंफ, पीपलमूल, अजमोदा, कचूर, बच, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सत्यानाशी की जड़, चीतामूल, जवाखार,सज्जीक्षार,पुष्करमूल कूठ, सेंधा नमक, काला नमक, सांभर नमक , समुद्र नमक, बीड नमक वायविडंग, निसोत, दंतीमूल, इन्द्रायण की जड़ थूहर के पत्ते और थूहर के दूध की भावना
नारायण चूर्ण की मात्रा –
१ से ५ ग्राम चूर्ण सुबह श्याम गर्म पानी के साथ ले सकते है. हाइपरटेंशन के मरीज को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. इसमें अलग अलग तरह के नमक होते है जिसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है | किडनी डिजीज की समस्या में इसका उपयोग सम्भलकर करना चाहिए | प्रेगनेंसी में या छोटे बच्चों को इसका सेवन नहीं करना |

गंगाधर चूर्ण के फायदे




पेट खराब होने पर मुख्यतः इस औषधि का उपयोग किया जाता है।

गंगाधर चूर्ण घटक –
नागरमोथा
इंद्रजो
बेलगिरी
लोधर
मोचरस
धाय के फूल
चलिए इन घटकोंको एक एक करके जानते है |
नागरमोथा –

इस में दीपन याने की पाचन शक्ति को बढ़ानेवाले, पाचन भोजन को पचानेवाले गुण मौजूद होते है | नागरमोथा की तासीर शीतल होती है l यह अग्निवर्धक याने की भूक को बढ़ानेवाला होता हैl साथ ही साथ यह मतली, उलटी, बुखार,अतिसार की समस्या को भी ठीक करता है l पेट के कीड़ों को भी नष्ट करता है l
इन्द्र्जो –

इन्द्र्जो को कुटज भी कहा जाता हैl इसमे ग्राही, स्तम्भन, शीतल और पाचन गुण मौजूद होते हैl साथ ही यह कृमिनाशक भी होती हैl आमातिसार रक्तातिसार में विशेष लाभकारी हैl यह पेट की मरोड़ को ठीक करती है , बवसीर के खून को बंद करती हैl

बेलगिरी –

यह विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर होता है l बेल में मौजूद टैनिन और पेक्टिन मुख्य रूप से डायरिया और पेचिश के इलाज में मुख्य भूमिका निभाते है l बेल पाचन प्रक्रिया में सुधार लाता है, पाचन संबंधी विकारों को दूर करता है l
लोध्र –

इसमे ग्राही, शीतल, कफ पित्तशामक, शोथनाशक, अतिसार को काम करनेवाले गुण मौजूद होते है|
मोचरस –

यह कफ पित्तशामक, ग्राही, शीतल, स्निग्ध, पुष्टिकारक और वीर्यवर्धक होता है l मोचरस प्रवाहिका, रक्तातिसार, रक्तवमन, श्वेतप्रदर जैसी समस्याओं का इलाज करता हैl
धाय के फूल –

इसे धातकी भी कहा जाता हैl धातकी पेट के कीड़ों को कम करती है, यह अतिसार को रोकती है l
गंगाधर चूर्ण फायदे –
इस औषधि में सभी घटक आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां है।
गंगाधर चूर्ण में एंटी डायरियल गुण मौजूद होते हैं।
यह एक शीतल और स्तंभक औषधि है जो पतले दस्त को रोकती हैl
इस औषधि में शोथ हर गुण मौजूद होते हैं जो पेट की सूजन को कम करते हैं साथ ही यह औषधि भूक को बढ़ाती है पाचन में सुधार करती है।
इसके अलावा यह औषधि वात दोष और कफ दोष को दूर करती है।
अल्सरेटिव कोलाइटिस, मालअब्जॉर्प्शन सिंड्रोम की समस्या का इलाज करने के लिए भी यह लाभकारी हैl
गंगाधर चूर्ण की सेवन विधि और मात्रा
1-3 ग्राम दिन में तीन बार लें।
इसे छाछ, पानी के साथ लें।
इसे भोजन करने के पहले लें।
या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

अदरक सौंठ के स्वास्थ्य लाभ

 


अदरक भारतीय रसोई में मौजूद अद्भुत मसालों में से एक है जो खाने के स्वाद को बढ़ाता है। इस के अलावा, सूखे अदरक जिसे सौंठ या आयुर्वेद में शुंठी कहते है का भी मसाले के रूप में इस्तेमाल होता है। आयुर्वेद में इस के अनेक गुण बताए गये है जो इसे कई बीमारियों के इलाज में कारगर बनाते है। इसीलिए इसका एक नाम महौषधि भी है।

सौंठ के ज्यादातर गुण अदरक के समान ही होते है। इसका स्वाद तीखा और तासीर गर्म या उष्ण होता है। यह कफ और वात दोषों का शमन करती है और ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर पित्त को बढ़ाती है।

यह भोजन में स्वाद को बढ़ाती है। भूख और पाचन में सुधार लाती है।

यह आम का पाचन करने में उपयुक्त होने के कारण आमवात में काफी लाभदायक है। सौंठ १ चम्मच, २ चम्मच शहद और २ चम्मच एरंड तेल को मिलाकर सुबह खाली पेट लगातार कुछ दिनों तक लेने से आमवात में जोड़ों के सूजन और दर्द  में फायदा होता है।

कफ नाशक होने से खांसी, श्वास (दमा) जैसे श्वसन मार्ग के विकारों में फायदेमंद है। इस में शहद के साथ सेवन करना चाहिए।

अपने ग्राही गुण के कारण यह आंतों से अतिरिक्त पानी का शोषण करती है और दस्त, पेचिश में उपयुक्त है।

यह मितली, उलटी, जोड़ों के दर्द, मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द और वजन कम करने में भी फायदेमंद है।






80 वात रोगों की रामबाण औषधि बनाने की विधि और लाभ




भले ही आपको यकीन न हो, लेकिन सिर्फ एक दवा का प्रयोग कर आप 80 प्रकार के वात रोगों से बच सकते हैं। जी हां, इस दवा का सेवन करने से आप कठिन से कठिन बीमारियों से पूरी तरह से निजात पा सकते हैं। अगर आपको भी होते हैं वात रोग, तो पहले जानिए इस चमत्कारिक दवा और इसकी प्रयोग विधि के बारे में...

विधिः 200 ग्राम लहसुन छीलकर पीस लें। अब लगभग 4 लीटर दूध में लहसुन व 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर गाढ़ा होने तक उबालें। फिर इसमें 400 ग्राम मिश्री, 400 ग्राम गाय का घी तथा सौंठ, काली मिर्च, पीपर, दालचीनी, इलायची, तमालपात्र, नागकेशर, पीपरामूल, वायविडंग, अजवायन, लौंग, च्यवक, चित्रक, हल्दी, दारूहल्दी, पुष्करमूल, रास्ना, देवदार, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, शतावरी, विधारा, नीम, सुआ व कौंचा के बीज का चूर्ण प्रत्येक 3-3 ग्राम मिलाकर धीमी आंच पर हिलाते रहें। जब मिश्रण घी छोड़ने लगे लगे और गाढ़ा मावा बन जाए, तब ठंडा करके इसे कांच की बरनी में भरकर रखें।
प्रयोग : प्रतिदिन इस दवा को 10 से 20 ग्राम की मात्रा में, सुबह गाय के दूध के साथ लें (पाचनशक्ति उत्तम हो तो शाम को पुनः ले सकते हैं।)परंतु ध्यान रखें, इसका सेवन कर रहे हैं तो भोजन में मूली, अधिक तेल व घी तथा खट्टे पदार्थों का सेवन न करें और स्नान व पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
इससे पक्षाघात (लकवा), अर्दित (मुंह का लकवा), दर्द, गर्दन व कमर का दर्द,अस्थिच्युत (डिसलोकेशन), अस्थिभग्न (फ्रेक्चर) एवं अन्य अस्थिरोग, गृध्रसी (सायटिका), जोड़ों का दर्द, स्पांडिलोसिस आदि तथा दमा, पुरानी खांसी,हाथ पैरों में सुन्नता अथवा जकड़न, कंपन्न आदि के साथ 80 वात रोगों में लाभ होता है और शारीरिक विकास होता है।

दूध मे हल्दी मिलाकर पीने के स्वास्थ्य लाभ


हल्दी वाला दूध सिर्फ पुरुषों को ही नहीं अपितु सभी मानवों हेतु फायदेमंद हैं जो कि निम्तों प्रकार हैं…

कई बार सुना होगा कि हल्दी का दूध शरीर के लिए अच्छा होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके लाभदायक कैसे है? चलिए, हम बताते हैं। दरअसल, हल्दी में प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण होते हैं और दूध कैल्शियम से भरपूर होता है । जब आप दूध और हल्दी दोनों को एक साथ मिला देते हैं, तो दोनों में मौजूद पोषक तत्व आपके शरीर को बीमारियों और संक्रमण से बचाने के साथ ही भरपूर ऊर्जा भी देते हैं।मिन (curcumin) कंपाउंड यानी पॉलीफेनोल भी होता है, जो आपके शरीर को कई रोगों से बचाने में मदद करता है। करक्यूमिन बीमारियों की रोकथाम के लिए फायदेमंद तो होता है, लेकिन इसे अवशोषित (Absorb) करना शरीर के लिए मुश्किल होता है। इसलिए, इसे काली मिर्च और वसायुक्त खाद्य पदार्थों जैसे दूध और घी के साथ मिलाने की सलाह दी जाती है।

हल्दी का दूध पीने के फायदे

1. पाचन शक्ति को बेहतर करता है हल्दी का दूध

पेट और पाचन शक्ति के ठीक से काम न करने पर इसका असर आपके शरीर पर तेजी से पड़ता है। ऐसे में हल्दी का दूध आपकी आंतों को स्वस्थ रखने और पाचन तंत्र को बेहतर करने में मदद कर सकता है । दरअसल, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटी इंफ्लेमेटरी गुण की तरह काम करता है, जो आंत संबंधी बीमारियों को दूर करने में शरीर की सहायता करता है ।

2. जोड़ों का दर्द कम करने में मदद करता है हल्दी का दूध

हर्बल चाय और गोल्डन मिल्क कहलाने वाले हल्दी दूध में मौजूद करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों और गठिया के दर्द को कम कर सकते हैं। साथ ही हल्दी दूध में एंटी-अर्थराइटिस गुण भी पाए जाते हैं, जो जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं ।

3. अनिद्रा दूर करने के लिए हल्दी का दूध

अनिद्रा की परेशानी लोगों में काफी बढ़ती जा रही है। इस परेशानी को दूर करने के लिए आप हल्दी दूध का सेवन कर सकते हैं। विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट भी हुआ है कि करक्यूमिन व्यक्ति में याददाश्त को भी ठीक करता है । ऐसे में जब भी आपको नींद न आए, तो आप हल्दी-दूध पिएं या हर रोज रात को सोने से पहले इसका सेवन करें।

4. कैंसर के खतरे को कम करता है हल्दी का दूध

कैंसर सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है, जिससे बचाव करना बेहद जरूरी है। ऐसे में आप हल्दी-दूध का सेवन कर सकते हैं। हल्दी-दूध में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। हल्दी वाला दूध प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकता है या उन्हें बढ़ने से रोक सकता है । यह डीएनए को नुकसान पहुंचाने वाले कैंसर कोशिकाओं के प्रभाव को कम करता है और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करता है।

5. हड्डी स्वास्थ्य

हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम जरूरी होता है। दूध में कैल्शियम होता है, जो आपकी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है। हल्दी वाला दूध हड्डियों के नुकसान और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी संबंधी रोग) की आशंका को कम कर सकता है।

6. डायबिटीज

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है, इसलिए इसे डायबिटीज के रोकथाम में उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा, यह डायबिटीज संबंधी लीवर विकारों को भी रोकने में अहम भूमिका निभाता है । हल्दी में मौजूद करक्यूमिन इंफ्लेमेशन और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को भी कम करता है। एक अध्ययन के मुताबिक डायबिटीज-1 के मरीजों को 3 माह तक प्रतिदिन 5 ग्राम हल्दी देने से उनका रक्त शर्करा काफी हद तक कम हुआ है ।

7. वजन घटाने के लिए

व्यस्त दिनचर्या, बाहर का खाना, लंबे वक्त तक कुर्सी पर बैठे रहना, व्यायाम न करना, तनाव और ऐसे ही कई कारणों की वजह से लोग मोटापे की समस्या से ग्रसित हो रहे हैं। जैसे-जैसे वजन बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर बीमारियों से घिरता चला जाता है। ऐसे में हल्दी दूध आपकी मदद कर सकता है।

8. सर्दी और खांसी

बदलते मौसम और कमजोर इम्यूनिटी की वजह से सर्दी-जुकाम होना आम बात है। ऐसे में कई बार घरेलू नुस्खे जादू की तरह काम करते हैं और हल्दी-दूध भी उन्हीं में से एक है। हल्दी युक्त दूध अपने एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण सर्दी और खांसी को ठीक करने के लिए उपयोगी माना जाता है । यह गले की खराश, खांसी और जुकाम से तुरंत राहत देता है। अगर आप हर रोज हल्दी-दूध का सेवन करेंगे, तो जल्द ही ठंड से शरीर को बचा सकते हैं।

9. हृदय स्वास्थ्य

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन हमारे शरीर में साइटोकिन्स (एक तरह के प्रोटीन) को हमारे शरीर में निकलने से रोकता है, जिनकी वजह से हृदय संबंधी (कार्डियोवस्कुलर) रोग उत्पन्न होते हैं । वहीं, अदरक के इस्तेमाल से भी हृदय संबंधी बीमारी बढ़ाने वाले जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है। अदरक में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड हानिकारक कोलेस्ट्रोल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है।

10. इंफ्लेमेशन

हल्दी दूध में एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को इंफ्लेमेशन से लड़ने में मदद देते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कंपाउंड इंफ्लेमेशन की वजह से होने वाले गठिया और अन्य बीमारी जैसे चर्म रोग से बचाव करते हैं । इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में ‘प्राकृतिक एस्पिरिन’ के रूप में भी जाना जाता है, जो सूजन और दर्द को ठीक कर सकता है ।

11. मस्तिष्क स्वास्थ्य

हल्दी वाले दूध में मौजूद करक्यूमिन आपके मस्तिष्क स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। यह दिमाग से संबंधित अवसाद और अल्जाइमर (याददाश्त का जाना) के खतरे को कम करने में सहायक साबित हो सकता है। यह पार्किंसंस रोग (दिमागी विकार) को दूर करने में भी मदद कर सकता है ।

12. इम्यूनिटी

हल्दी दूध में मौजूद करक्यूमिन बतौर इम्यूनोमॉड्यूलेटरी एजेंट काम करता है। यह टी कोशिकाओं व बी कोशिकाओं समेत शरीर में मौजूद सभी स्वस्थ कोशिकाओं को बढ़ावा देने में मदद करता है। इन सभी कोशिकाओं की मदद से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होने में मदद मिलती है। करक्यूमिन शरीर में एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को भी बढ़ावा देता है, जिसकी मदद से हमारा शरीर कई बीमारियों जैसे गठिया, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और अल्जाइमर से बचा रहता है । इसके अलावा, हल्दी वाले दूध के फायदे में आपको ठंड और गले की खराश से भी बचाना शामिल है ।

13. डिटॉक्स

ज्यादातर लोगों को तला-भूना, मसालेदार या फिर जंक फूड खाना बहुत पसंद है, जिसका सीधा असर लिवर पर पड़ता है। इसलिए, बॉडी को डिटॉक्सीफाई यानी शरीर में मौजूद विषाक्तता को हटाना जरूरी हो जाता है। ऐसे में हल्दी-दूध एक प्राकृतिक लिवर डिटॉक्सीफाई की तरह काम करता है, जिससे लिवर की कार्यप्रणाली तेज होती है ।

14. त्वचा स्वास्थ्य

धूल-मिट्टी व प्रदूषण की वजह से त्वचा की चमक लगातार फीकी पड़ने लगती है। साथ ही स्किन संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में हल्दी-दूध आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। दमकती त्वचा के लिए आप हल्दी दूध का सेवन कर सकते हैं या फिर आप हल्दी दूध में रूई भिगोकर चेहरे पर लगा सकते हैं, जिससे आपका चेहरा दमकता रहेगा। इसके अलावा, इसमें मौजूद करक्यूमिन (curcumin) आपको स्किन कैंसर और अन्य संक्रमण से बचाता है। साथ ही त्वचा पर बुरा प्रभाव डालने वाले बैक्टीरिया से भी लड़ने में मदद करता है ।