17/7/18

मूंग की दाल के स्वास्थ्य लाभ // Health Benefits of Moong Dal


                                                       


    मूंग की दाल सिर्फ बीमारी में ही नहीं बल्कि हेल्थ को मेंटेन करने के लिए भी जरूरी है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फास्फोरस होता है। इस दाल के पापड़, लड्डू और हलवा भी बनता है। इस दाल को अपनी डाइट में शामिल करने से मसल्स मजबूत होती हैं और एनीमिया दूर होता है।

  जरूरी नहीं कि स्‍वाद में जो अच्‍छा हो, वो स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक भी हो। अक्‍सर ऐसा ही होता है, जो चीज खाने में बिल्‍कुल अच्‍छी नहीं लगती है वो गुणों से भरपूर ही होती है। स्‍वादिष्‍ट भोजन करने से पहले हर किसी को शरीर के विकास के लिए विटामिन और खनिज की जरूरत होती है। आयुर्वेद के चिकित्सक डॉ. सत्य प्रकाश मिश्र के मुताबिक दालों में सबसे पौष्टिक दाल, मूंग की होती है, इसमें विटामिन ए, बी, सी और ई की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पौटेशियम, आयरन, कैल्शियम की मात्रा भी मूंग में बहुत होती है। इसके सेवन से शरीर में कैलोरी भी बहुत नहीं बढ़ती है। अगर अंकुरित मूंग दाल खाएं तो शरीर में कुल 30 कैलोरी और 1 ग्राम फैट ही पहुंचता है।
स्‍प्राउट खाने से होता है स्‍वास्‍थ्‍य लाभ: अंकुरित मूंग दाल में मैग्‍नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी -6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है। मूंग की दाल के स्‍प्राउट ऐसे ही कुछ लाभकारी गुण निम्‍न प्रकार है। मूंग की दाल के स्‍प्राउट में ग्‍लूकोज लेवल बहुत कम होता है इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं।


जोड़ों और हड्डियों में दर्द के कारण, लक्षण और उपचार

* मूंग की दाल को उत्तम आहार माना गया है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करती है और पेट में ठंडक पैदा करती है, जिससे पाचन और पेट में गर्मी बढ़ने की समस्या नहीं होती।
*मूंग की दाल के स्‍प्राउट में ओलियोसाच्‍चाराइडस होता है जो पॉलीफिनॉल्‍स से आता है। ये दोनों की घटक, गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता को प्रबल करते हैं। कैंसर के रोगी भी इसका सेवन आराम से कर सकते हैं।
*मूंग की दाल में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफलामेट्री गुण होते हैं, जो शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाते हैं।
*मूंग की दाल के स्‍प्राउट में शरीर के टॉक्सिक को निकालने के गुण होते हैं। इसके सेवन से शरीर में विषाक्‍त तत्‍वों में कमी आती है।

*कब्ज की समस्या होने पर मूंग की छिलके वाली दाल का सेवन बेहद लाभप्रद होता है, इसके सेवन से पेट साफ होने में मदद मिलती है।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

*शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर मूंग दाल का सेवन लाभकारी होता है, यह अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को शरीर से हटाने में मददगार होती हैवजन कम करने की चाह रखने वालों के लिए मूंगदाल का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है, इसमें 100 से भी कम कैलोरी होती है और इसे खाने के बाद पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है जिससे आप अतिरिक्त कैलोरी नहीं लेते।

16/7/18

टांगों मे होने वाली ऐंठन और दर्द के उपचार

                                     

कमजोरी की वजह से अक्सर महिलाओं को रात के समय पैरों या फिर टांगों में ऐंठन पड़ने की समस्या हो जाती है। वैसे तो इसका कोई खास कारण नहीं है लेकिन शारीरिक कमजोरी, उठने-बैठने का गलत तरीका और बैलेंस डाइट की अनदेखी इसकी वजहें हो सकती है। कई बार को टांगों में होने वाली इस ऐंठन से थोडी देर में आराम मिल जाता है लेकिन लगातार इस तरह की समस्या बनी रहे तो आगे चलकर दिक्कत हो सकती है। इससे बचने के लिए दवाइयां खाने से बेहतर है कि घरेलू तरीकों को अपनाया जाए।
कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन
यह हड्डियों से जुड़ी कमजोरी मानी जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए कैल्शियम से भरपूर आहारों का सेवन करना शुरु करें। हर रोज कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करने से फायदा मिलता है। दूध,हरी पत्तेदार सब्जियां,फल और सूप को डाइट में शामिल करें।

थकान दूर करने के उपाय

गर्म दूध का सेवन
हर रोज रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन करें। इसे बैस्ट सुपरफूड्स में से एक माना गया है। इसके सेवन से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। इससे ऐंठन की समस्या से निजात मिलती है।  
*गुनगुने पानी से स्नान भी टांगों की ऐंठन से आराम दिलाने में मददगार है। इससे मांसपेशियों की ऐंठन से आराम मिलता है। तुरंत राहत पाने के लिए आप पैरों के लिए हॉट पैड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
रोजाना खाएं केला
केले में मौजूद कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए लाभकारी है। इसमें बहुत से पोषक तत्व शरीरिक कमजोरी को दूर करने में मददगार है। ऐंठन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हर रोज केले का सेवन करें।

स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

सरसों के तेल की मसाज
सरसों के तेल में एसिटीक एसिड किसी भी तरह की दर्द से राहत पाने में मददगार है। इससे कोई साइड इफैक्ट भी नहीं होता। इस तेल को गुनगुना करके इससे पैरों की मसाज करें।

6/7/18

खूनी या बादी बवासीर के मस्सो का इलाज

                                                          


बवासीर के मस्सो पर लगाने के लिए तेल
एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले। अगर कपूर की मात्रा १० ग्राम हो तो अरंडी का तेल ८० ग्राम होना चाहिए। मतलब ८ गुना अगर कपूर ५ ग्राम हैं तो तेल ४० ग्राम।
पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें। इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

बवासीर के मस्से सूजकर संगर की भांति मोटे हो जाते है और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते है। ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगाकर अंदर किया जाये तो दर्द नही होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किये जा सकते है।
सहायक उपचार.
बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल, मूंग की खिचड़ी ले। देसी घी प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज न होने दे। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार, उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थो के सेवन से बचे।
खुनी बवासीर में छाछ या दही के साथ कच्चा प्याज ( या पीसी हुयी प्याज की चटनी ) खाना चहिए।
रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घटे बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकारी है।

बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

बवासीर चाहे कैसी भी हो बड़ी हो अथवा खुनी, मूली भी अक्सीर है। कच्ची मूली ( पत्तो सहित ) खाना या इसके रस का पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषो को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।

बवासीर में विशेष

बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।
एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।


2/7/18

जेतून के तेल के अनजाने फायदे


                                                        


1. त्वचा के लिए जैतून का तेल बहुत फायदेमंद है। रोजाना चेहरे पर इसकी मसाज करने से त्वचा की झुर्रियां समाप्त हो जाती हैं और त्वचा में नमी और चमक बनी रहती है।
2. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

3. विटमिन ए, बी, सी, डी और ई के साथ-साथ जैतून के तेल में आयरन और पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो बालों की कोमलता और मजबूती बढ़ाने में मदद करते हैं। यह ओलेइक एसिड और ओमेगा-9 फैटी एसिड का भी अच्छा स्रोत है।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

4.जैतून के तेल में फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है जो हृदय रोग के खतरों को कम करती है। मधुमेह रोगियों के लिए यह काफी लाभदायक है। शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित बनाए रखने में इसकी खास भूमिका है। इसलिए आहार में भी इस तेल का प्रयोग किया जाता है।

5. लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
6.जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है।

7. जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है।

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

8. जैतून के तेल में संतृप्त वसा लगभग ना के बराबर होता है जिससे यह आपके शुुगर लेवल को नियंत्रि‍त करता है। साथ ही इसे खाने से बॉर्डर लाइन डायबीटिज होने का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

9. जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है साथ ही यह मानसिक विकार दूर कर आपको जवां बनाए रखने में भी मदद करता है
10.इसमें संतृप्त वसा की मात्रा कम होती है जिससे शरीर में कॉलेस्टेरोल की मात्रा को भी संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे हृदयाघात का खतरा काफी कम हो जाता है।


किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

    मालिश के लिए नारियल और सरसों के तेल के साथ-साथ जैतून के तेल को भी बेहतर माना जाता है.
प्राचीन काल से ही जैतून के तेल (ऑलिव ऑयल) को अत्यधिक गुणकारी एवं स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है. यह तेल बालों, त्वचा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हुआ है. ऐसा माना जाता है कि नवजात शिशु की जैतून के तेल की मालिश करने से वह रोगमुक्त हो जाता है. यह तेल विभिन्न कार्यों जैसे खाना बनाने, त्वचा की मालिश, हाथ-पैर के दर्द आदि के काम में भी लाया जा सकता है.जैतून के तेल की सिर पर नियमित रूप से मालिश करने से बाल मजबूत एवं घने होते हैं, साथ ही साथ बालों का झड़ना व बालों में दोमुँहें होने की समस्या का भी निवारण हो जाता है.
इसे बालों में कंडीशनर की तरह प्रयोग में लाया जा सकता है जिससे डैंड्रफ की समस्या का समाधान होता है व बाल मुलायम हो जातें हैं. 


आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय


• इसकी आँखों के चारों ओर मालिश से आँखों के नीचे काले घेरे एवं दाग नहीं होते. इससे रतौंधी की समस्या भी दूर होती है.
• जैतून के तेल में विटामिन E भरपूर मात्रा में पाए जाने के कारण यह त्वचा को कई बाहरी कारकों से सुरक्षित रखता है एवं त्वचा की सेंसिटिविटी को कम करता है.• जैतून के तेल की शरीर पर मालिश, शरीर को स्फूर्तिदायक एवं स्वस्थ बनाती है. इसका नित्य प्रयोग त्वचा की झुर्रियों एवं काले धब्बों को खत्म कर त्वचा को सौन्दर्यवान बनाता है.
• इसकी नियमित मालिश से शरीर पर कील, मुँहासे, दाग-धब्बे आदि नहीं होते. इसके अतिरिक्त यह स्किन कैंसर एवं स्किन सम्बन्धी अन्य बीमारियों के निवारण में भी सहायक सिद्ध होता है.
• जैतून के तेल का प्रयोग फेसपैक, बॉडी लोशन एवं स्क्रब के रूप में भी किया जाता है. इसके प्रयोग से त्वचा पर निखार आता है व त्वचा कोमल एवं मुलायम होती है.


मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज  

• इसमें विटामिन्स एवं मिनरल्स होने के कारण यह त्वचा के अंदर जाकर उसे खूबसूरत बनाता है. इसकी मालिश शरीर को स्फूर्तिदायक एवं दिमाग को तनावमुक्त करती है।
• जैतून के तेल की मालिश से त्वचा को पोषण मिलता है. इससे वह रूखी व शुष्क नहीं होती एवं त्वचा पर चमक बनी रहती है. इसके प्रयोग से त्वचा साफ़ हो जाती है.
इसकी मालिश से नवजात शिशु की हड्डियाँ मजबूत होतीं हैं. इसकी नियमित मालिश बच्चे को बढ़ने में सहायता प्रदान करती है.
• नहाने के थोड़ी देर बाद जैतून के तेल की मालिश करने से त्वचा का कालापन दूर हो जाता है एवं त्वचा दमकने लगती है.


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

• इसकी मालिश से होठों के फटने की समस्या भी दूर होती है व होंठ मुलायम होते है. जैतून के तेल की मालिश से नाखूनों में मजबूती और चमक भी आती है.
इस तरह जैतून के तेल की मालिश कई तरह से शरीर के लिए लाभप्रद है.
 • रात को सोने से पहले पैर की एड़ियों एवं जोड़ों पर जैतून का तेल मलने से एड़ियों व जोड़ों का दर्द दूर होता है. इससे एड़ियाँ कोमल व मुलायम होतीं हैं.

29/5/18

महिलाओं के लिए शेविंग टिप्स // Shaving tips for women

                                                        

      आजकल पुरुष और महिलाएं दोनों ही अनचाहे बालों को हटाने के लिए शेविंग विधि का अधिक उपयोग करने लगी है. धीरे धीरे इस विधि का प्रचलन महिलायों के बीच बढ़ने के कई कारण है, जैसे इससे न केवल वैक्सिंग से होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है बल्कि इस विधि में समय भी नहीं लगता. आजकल की व्यस्त दिनचर्या में किसी के पास अधिक समय नहीं होता, सबको अपना हर एक पल बचाना अच्छा लगता है. विशेषकर कामकाजी महिलाये तो अधिकतर शेविंग विधि को ही प्राथमिकता देती है. क्यूंकि उन्हें अपने घर के साथ साथ अपने ऑफिस के काम को भी पूरा करना होता है. और शेविंग से बड़ी आसानी व जल्दी से अनचाहे बालों से निजात पाया जा सकता है, अतः 80% कामकाजी महिलायों द्वारा तो यह एक बेहतर उपाय माना जाता है.


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 


   सर्द इलाको की अपेक्षा गर्म देशों में इस तरह की विधियों को अपनाकर अनचाहे बालों को हटाकर स्वच्छ और तरोताज़ा महसूस करने का अहसास बढ़ जाता है. शेविंग विधि के सन्दर्भ में एक बहुत प्रचलित भ्रान्ति है, जिसके रहते अधिकतर महिलाएं इस विधि को अपनाने में हिचकती है. वो यह कि शेव करने से नये आने वाले बाल अपेक्षाकृत अधिक कड़े, मोटे और काले होते है. इसके साथ साथ यह भी कि इससे त्वचा अधिक कड़ी हो जाती है. इसके विपरीत तथ्य तो यह है कि बालों की मोटाई, उनका रंग तथा उनकी संरचना जिस तत्व (हेयर फौलिकल) पर निर्भर करता है वो हमारी त्वचा के नीचे बीच की परत में स्थित होता है. जोकि शेविंग करने से प्रभावित ही नहीं हो सकता. अतः शेविंग करने से बालों की संरचना में कोई अंतर नहीं आता है. बल्कि जिन महिलायों की त्वचा अधिक संवेदनशील हो उन महिलायों को तो शेविंग विधि का ही प्रयोग करना चाहिए क्यूंकि संवेदनशील त्वचा पर वैक्स का प्रयोग करने से उस पर रेशिस पड़ सकते है.


मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज  
   
     शेव करने से त्वचा रुखी व पपड़ीदार नहीं होती, बल्कि इससे उपरी मृत त्वचा हट जाती है और नई त्वचा झलकती है. हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम सही प्रकार का रेजर प्रयोग कर रहे है. सदैव महिलायों के लिए बने रेजर का प्रयोग करें क्यूंकि महिलायों के बाल पुरुषों के मुकाबलें कोमल व मुलायम होते है. महिलायों के लिए शेव करने के लिए अलग तरह के अर्थात अलग डिज़ाईन के रेजर जो विशेषकर महिलायों के उपयोग के लिए होते है, बाज़ार में उपलब्ध होते है. रेजर भी दो तरह के होते है, एक इलेक्ट्रोनीक रेजर जिनका बार बार उपयोग किया जा सकता है और एक डिस्पोजेबल रेजर होते है. यदि आप डिस्पोजेबल रेजर का प्रयोग कर रहे है तो ध्यान रहे कि उसका उपयोग आप एक या दो बार से ज्यादा न करें.

स्तनों का दूध बढ़ाने के उपाय 


इसके अलावा शेविंग करते समय और भी अनेक बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है. जैसे :-
1.. शरीर के जिस हिस्से पर शेव की है उस हिस्से को सुखाकर, उस पर तुरंत कोई मोइश्चराइजर लगायें. इसके बाद थोड़ा टेलकॉम पाउडर छिडकें.
2. सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों के दिनों में बालों की वृद्धि अधिक तेजी से होती है, ऐसे में गर्मियों में कम दिनों के अंतराल पर अर्थात ३ या ४ दिन बाद रेजर का प्रयोग करना पड़ सकता है, ऐसे में त्वचा को आद्रता/नमी पहुंचाना न भूलें. हलके हाथों से चलायें.

धनिया के  चोक़ाने वाले फ़ायदे जानकर हैरान रह जायेंगे

3. कभी भी रुखी त्वचा पर रेजर न चलायें. रुखी त्वचा पर रेजर चलाने से एक तो आपको शेविंग करने में दिक्कत आ सकते है और दूसरा शेविंग के बाद आपकी त्वचा और रुखी लग सकती है.
4. हमेशा स्नान करने के बाद ही शेविंग करें. बालों को दो से तीन मिनट गर्म पानी में भिगोने से बाल तकरीबन 70% तक मुलायम हो जाते है. इससे उन्हें साफ़ करने में आसानी हो जाती है.
5. शेव करने वाले स्थान पर साबुन का प्रयोग न करने तो अधिक अच्छा होगा, इसके अलावा आप कोई भी शेविंग फोम्म क्रीम या किसी शैम्पू का प्रयोग कर सकती है. ऐसा करने से त्वचा पर रेजर आसानी से चलेगा और त्वच भी रुखी नहीं लगेगी.


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

6. शरीर के संवेदेनशील अंगो पर शेव करने के लिए शेविंग माध्यम (फोम आदि) का उपयोग करें, और यदि आवश्यकता हो तो उस स्थान पर आप शेविंग माध्यम का दुबारा इस्तेमाल कर सकती है.
7. शरीर के कुछ कठिन क्षेत्र जैसे घुटने, कोहनियाँ, एडियाँ आदि जहां पर हड्डी त्वचा के काफी नजदीक होती है और वहां कटने का डर अधिक होता है, उन हिस्से को बाद के लिए छोड़ दें. उन पर शेविंग माध्यम लगाकर अपेक्षाकृत ज्यादा देर के लिए छोड़ दें, इससे बाल हटाना आसन हो जाता है. 
8. रेजर का प्रयोग करने के बाद उसे तुरंत धो लें तथा सुखा भी दें. रेजर को हमेशा साफ़ करके ही रखना चाहिए, ताकि अगली बार उसे पुनः प्रयोग करने से आपको किसी प्रकार की एलर्जी न हो.


मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार


9. रेजर के ब्लेड के किनारों को तौलिए या टिश्यू पेपर आदि से नहीं पौंछना चाहिए, ऐसा करने से ब्लेड के किनारे खराब हो जाते है. साथ ही ब्लेड का धार कम होने पर उसे अवश्य बदल दें.
10. इस बात का ध्यान रखे कि शेविंग करते समय रेजर को १०. एक और बात जिस पर आपको विशेष ध्यान देना चाहिए वो यह कि कभी भी किसी और द्वारा प्रयोग किये हुए रेजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए. और ना ही अपना रेजर किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए देना चाहिए, ऐसा करना न केवल आपको बल्कि दूसरे व्यक्ति को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
11. रेजर को चलाने की दिशा बालों के उगने की दिशा के विपरीत होनी चाहिए. अर्थात जिस हिस्से पर आप शेव करना चाह रहे है यदि उस हिस्से पर बालों की दिशा उपर से नीचे की ओर है तो वहाँ रेजर को उपर से नीचे की ओर न चलाकर बालों के विपरीत नीचे से उपर की ओर चलाये.

23/5/18

इलायची के फायदे ,उपयोग // Benefits of Cardamom,

                                     à¤‡à¤²à¤¾à¤¯à¤šà¥€ लाभ के लिए इमेज परिणाम
 इलायची का आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। प्राचीन काल से ही इलाइची का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता रहा है। इलाइची के इस्तेमाल ना सिर्फ भोजन और व्यंजनों को और स्वादिष्ट बनाया जाता है बल्कि इसके इस्तेमाल से आपको कई स्वस्थ लाभ भी होते हैं।
     एक इलायची बहुत कुछ कर सकती है। जी हां दोस्तों सिर्फ 6 दिन सोते वक्त दो इलायची खाने से ऐसा चमत्कार होता है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। हम आपको इसके प्रति पूरी जानकारी देंगे कृपया इस खबर को पूरा पढ़िए ताकि आपको जानकारी मिल जाए।

किडनी फेल रोग की अचूक औषधि

अब हम आपको इलाइची से होने वाले स्वस्थ लाभ के बारे में बताएंगे कि कैसे रात में सोने से पहले इलाइची खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। 
पेशाब का इंफेक्शन खत्म करता है
अगर आपको पेशाब एक संक्रमण है तो आपको इलायची का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। इसके निरंतर इस्तेमाल से पेशाब का इन्फेक्शन भी ठीक हो जाता है।

पथरी की अचूक हर्बल औषधि से डाक्टर की बोलती बंद!

हाजमे को दुरुस्त रखता है
अक्सर देखा गया है कि लोगो में खान पान को लेकर चाव होने के बावजूद वे खाने से परहेज़ करते हैं। ऐसा करने कि मुख्या वजह है उनका हाजमा दुरुस्त ना होना। ऐसे में अगर व्यक्ति लगातार इलायची का प्रयोग करता है तो उसका हाजमा दुरुस्त हो जायेगा। एक शोध में ऐसा पाया गया है कि इलाइची पाचन तंत्र को सुधरने में बेहद कारगर है।

प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि


वजन बढ़ाने में मदद करता है
अगर आपका वजन नहीं बढ़ रहा है तो इलायची का प्रयोग आपके लिए नए दरवाज़े खोल सकता है। एक शोध में पाया गया कि इलायची का प्रयोग आपकी भूख को बढ़ाता है। इलाइची खाने से आपकी भूख भी बढ़ेगी और आपका पाचन तंत्र भी दुरुस्त होगा जिससे आप भोजन को बेहतर तरीके से पचा सकेंगे।

2/5/18

आक ,मदार के टोटके

                                                                     
                                                 


   तंत्र शास्त्र, यह भले ही प्राचीन गुप्त विद्याओं में शुमार रहा है, लेकिन कलियुग में जब ना तो किसी के पास सात्विक क्रियाओं के परिणाम हासिल करने का धैर्य बचा है और ना ही हिम्मत। इसलिए तंत्र विद्याओं के सहारे मनुष्य जीवन की बहुत सी परेशानियों को सुलझाया जा सकता है बशर्ते उनपर विश्वास किया जाए।
तांत्रिक क्रियाओं में बहुत सी ऐसी चीजों का सहारा लिया जाता है तो सामान्य तौर पर आपको उपोअलब्ध होते हैं।


दालचीनी के अद्भुत फायदे

 किसी को वश में करना हो या किसी को गंभीर बीमारी से निजात दिलवानी हो, पति को किसी दूसरी स्त्री के चंगुल से छुड़ाना हो या किसी को बड़ी समस्या से छुटकारा दिलवाना हो... इन सभी कार्यों में तांत्रिक विद्याओं का सहारा लिया जाता है। नारियल से लेकर हल्दी तक... इन सभी का अलग-अलग तरीके से प्रयोग किया जाता है। लेकिन हम आपको सफेद आक के पौधे बारे में बताएंगे जिसका प्रयोग तांत्रिक क्रियाओं की काट के तौर पर किया जाता है।
सफेद आक का पौधा अन्य सामान्य आक के पौधों से अलग होता है, तांत्रिक क्रियाओं से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जानकारों के अनुसार जिस घर में यह पौधा लगा होता है उस घर पर कोई बुरी नजर नहीं लगती और वह काली शक्तियों से भी मुक्त रहता है। उस घर में रहने वाले लोगों पर किसी जादू-टोने का असर नहीं होता।



भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार


इस पौधे से भी ज्यादा शक्तिशाली और प्राभावी होती है इससे निर्मित गणेश जी की प्रतिमा। तंत्र शास्त्र के अनुसार अगर आक के इस पौधे से गणेश जी की प्रतिमा बनवाकर, विशि-विधान से उसकी पूजा-अर्चना की जाए तो ये सभी कष्ट कर लेते है। लेकिन इस पूजा के नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है, इनके बिना अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो पाता।
* मदार की जड़:- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।


रतनजोत के औषधीय प्रयोग,उपयोग,लाभ


* मदार की जड़:- रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
* मदार की जड़:- कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।