दस्त रोकने के घरेलू उपचार::Home remedies for loose motions

दस्त रोकने के घरेलू उपचार::Home remedies for loose motions


दस्त लगना या डायरिया एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम होती है। खाने या पानी को लेकर कि गई थोड़ी सी लापरवाही भी इस समस्या का कारण बन सकती है। दस्त लगने पर शरीर के मिनरल्स और पानी शरीर से तेजी से बाहर हो जाते हैं, जिससे मरीज को कमजोरी महसूस होने लगती है।
जब भी लगातार पतला दस्त आए या फिर उल्टी आए तो उसे हम डायरिया कहते हैं। डायरिया हमें वायरल, बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है, लेकिन इसका सबसे मुख्य कारण हमारा गलत तरीके से खानपान, प्रदूषित पानी और हमारी आंतो में गड़बड़ी डायरिया जैसी बीमारी को जन्म देते हैं। दिन में यदि हमें तीन या इससे अधिक बार हमें पतला दस्त आता है, तो यह डायरिया की तरफ इशारा करता है। डायरिया होने पर हमारे शरीर में पानी की कमी आने लगती है, जिसके कारण हमें डिहाइड्रेशन हो जाता है, जो हमारे लिए किसी भयानक बीमारी से कम नहीं है, क्योंकि इससे हमारा शरीर कमज़ोर होने लगता है, जिससे शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक हो जाता है। यह बीमारी अधिकतर रूप से हमें सर्दियों के दिनों में देखने को मिलती है, इसकी सबसे बड़ी वजह है गंदा पानी। यह किसी भी उम्र वाले व्यक्ति को हो सकती है। इसकी एक वजह एसिडिटी भी हो सकती है।
डायरिया का लक्षण…
1. बार-बार पतले (पानी की तरह ) दस्त आना।
2. आंतों में सुजन होना।
3. उल्टी आना।
4. दस्त में खून आना।
5. एसिडिटी होना।
6. शरीर में कमज़ोरी आना आदि डायरिया के लक्षण होते हैं|

डायरिया के कारण
आमतौर पर डायरिया जैसी परेशानी का सामना हमें तब करना पड़ता है, जब हम बाहर की वस्तुओं का अधिक सेवन करते हैं। इसके इलावा जब भी डायरिया हमें सर्दियों के दिनों में होता है, तो यह गर्मियों के मुकाबले अधिक घातक होता है। ठंड के मौसम में हमारे शरीर का तापमान कम हो जाता है, जिसके कारण हमें उल्टी या दस्त होने लगती है। इसके अलावा इसके और भी कई कारण है जैसे कि…
1. पेट में कीड़ो के संक्रमण से डायरिया हो सकता है।
2. आस-पास सफाई का न होना।
3. शरीर में पानी की कमी होना।
4. दवाई रिएक्श्न होना।
5. पानी में अधिक समय रहना।
6. पाचन शक्ति का कमज़ोर होना।
7. सर्दियों में कई दिनों तक रखा खाना खा लेना आदि से डायरिया हो सकता है।
डायरिया में अपनाएं ये घरेलू नुस्खे
मेथीदाना -

 मेथीदाना में एंटीबैक्टिरियल और एंटीफंगल प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं। एक चौथाई चम्मच मेथीदाना पाउडर ठंडे पानी से लें। इससे पेट की गर्मी छट जाएगी और दस्त की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। यह पाउडर खाली पेट दो से तीन दिनों तक लेना चाहिए। बहुत जल्दी आराम मिलता है।
*शहद -

शहद भी इस समस्या में दवा का काम करता है। जब भी लूज मोशन की समस्या हो दिन भर में कम से कम दो से तीन चम्मच शुद्ध शहद खाएं। एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर लेने पर भी दस्त से राहत मिलती है।
कच्चा पपीता -

 कच्चा पपीता दस्त की समस्या में एक जबरदस्त दवा का काम करता है। कच्चे पपीता को छिलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उबाल लें। इस पानी को छानकर जब हल्का गर्म रह जाए तब पिएं। दस्त बंद हो जाएंगे। यह पानी दिनभर में दो से तीन बार पीना चाहिए।
*सरसों के बीज -

सरसों के बीज में एंटीबैक्टिरियल गुण पाए जाते हैं। इसीलिए इसे डायरिया की समस्या में रामबाण माना जाता है। सरसों के एक चौथाई चम्मच बीजों को एक कप पानी में एक घंटे के लिए भिगो दें। एक घंटे बाद इस पानी को छानकर पी लें। यह नुस्खा एक दिन में दो से तीन बार दोहराएं। डायरिया की समस्या से बहुत जल्दी आराम मिल जाएगा।
पानी-

एक किलो पानी उबालें । चौथाई पानी रहने पर साफ कपड़े से छान लें। हल्का गर्म रहने पर इसे पीयें। इससे दस्त आना बन्द होते हैं, भूख अच्छी लगती है; आफरा, पेट दर्द, कब्ज, हिचकी, उल्टी होना ठीक हो जाते हैं। –
जब पानी जैसी पतली टट्टी होती है, तो उसे ‘दस्त होना’ कहा जाता है। दस्त का रंग या कारण कुछ भी हो सकता है, परन्तु एक बार दस्त होना गम्भीर खतरे का संकेत देता है। यह एक जानलेवा रोग है जो किसी भी, विशेषकर कमजोर व्यक्तियों और छोटे बच्चों को हो सकता है। इस रोग से बचने के लिए निम्न उपाय हैं- –
जब तक हो सके, बच्चे को माँ का दूध पिलायें। बच्चे को दूध पिलाने के लिए बोतल के बजाय कटोरी व चम्मच ही काम में लें । ।
*पीने का पानी ढक कर रखें। पानी लेने के लिए हत्थेदार लोटे का प्रयोग करें। स्वच्छ जल-स्रोतों से ही पेयजल भरें।
भोजन की चीजें ढक कर रखें और मक्खियों से बचायें। बासी भोजन नहीं करें। कटे एवं सड़े फल तथा मक्खियाँ बैठे पदार्थों का सेवन भी नहीं करें। भोजन बनाने अथवा खाने से 
पहले अच्छी तरह से हाथ धोयें। . रहने की जगह से दूरी पर शौच करें।
नींबू - 

नींबू के रस में एंटी इंफ्लामेट्री प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं। इससे पेट आसानी से साफ हो जाता है। यह डायरिया की समस्या से राहत देने वाला बहुत प्राचीन नुस्खा है। एक नींबू के रस में एक चम्मच नमक और थोड़ी चीनी मिलाकर अच्छे से मिक्स करने के बाद पिएं। हर एक घंटे में ये घोल बनाकर पीने से डायरिया में बहुत जल्दी आराम मिलता है। इस नुस्खे को अपनाने के साथ ही हल्का खाना लें। इससे आपको इस समस्या से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा।
अनार -

अनार लूज मोशन्स की समस्या में रामबाण दवा की तरह काम करता है। अनार के बीजों को चबाएं। दिनभर में कम से कम दो बार अनाज का जूस पिएं। अनार की पत्तियों को पानी में उबाल लें। इस पानी को छानकर पीने से भी दस्त में आराम मिलता है
*जब कभी दस्त लगें हों तो एक चम्मच जीरा (5 ग्राम) हल्का भूनकर पीस लीजिये, अभी इसको तुरंत दही या दही की लस्सी के साथ लेने से तुरंत लाभ हो जाता है.
*मरोड़ के साथ पतले दस्त लगें तो जीरा और उतनी ही मात्रा में सौंफ को भून लीजिये, इन दोनों को पीसकर मिला लीजिये, अभी 1 चम्मच दिन में 3-4 बार लेने से मरोड़ के साथ लगने वाले पतले दस्त में तुरंत लाभ होता है.
केला
केले में काफी मात्रा में पौटेशियम होते हैं, इसलिए डायरिया वाले रोगी को दिन में दो से तीन पके हुए केलों का सेवन करना चाहिए।
चावल
डायरिया होने पर हमें चावल का सेवन करना चाहिए, क्योंकि चावल खाने से हमें दस्त कम आते हैं। ऐसे में आप को सादा चावल को थोडा गीला करके खाना चाहिए। इसके साथ आप दही का सेवन भी कर सकते हो।
गाजर का सूप
डायरिया होने पर हमारे शरीर के पोषक तत्वों में कमी आ जाती है, ऐसे में गाजर का सूप हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसका सूप बनाने के लिए इसके छोटे छोटे टुकडों को काटकर पानी में तब तक उबाले जब तक गाजर अच्छे से घुल न जाए, फिर इस पानी को छान लें। फिर इसमें स्वादानुसार नमक,भुना हुआ जीरा और काली मिर्च पाउडर मिलाकर पी लें।
दही
हम जानते हैं कि दही में बैक्टीरिया होता है। जब हम डायरिया होने पर दही का सेवन करते हैं तो जो हमारे शरीर में विषैले बैक्टीरिया होते हैं उनका नाश हो जाता है।
सेब का सिरका
सेब के सिरके में एसिडिक गुण होते हैं, जो डायरिया के बैक्टीरिया को खत्म करने में बहुत ही फायदेमंद होते हैं। लेकिन जब भी आप इसका सेवन करते हैं, तो एक गिलास पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर पी लेना चाहिए और इसे दिन में दो से तीन बार पीना चाहिए। ऐसा करने से आपका डायरिया ठीक हो जाता है।
अदरक
डायरिया में अदरक बहुत ही फायदेमंद होता है, अदरक को कद्दूकस करके इसमें शहद मिलाकर खाएं फिर इसके तुरंत बाद ही पानी पी लें।
*एक छोटा चम्मच पावडर किया हुआ अदरक, दालचीनी, जीरा में ज़रूरत के अनुसार शहद डालकर पेस्ट जैसा बना लें। इस पेस्ट का सेवन दिन में तीन बार करने से दस्त से जल्दी राहत मिल जाता है। क्योंकि इसका एन्टी-बैक्टिरीअल (anti bacterial), एन्टी ऑक्सिडेंट (anti oxidant), एन्टी फंगल गुण जीवाणुओं से लड़कर दस्त को रोकने में मदद करता है। इस घरेलू मिश्रण का इस्तेमाल उपचार के रूप में सदियों से किया जा रहा है।
*एक कप बिना चीनी के ब्लैक टी का सेवन दस्त के कष्ट को दूर करने में बहुत मदद करता है। ब्लैक टी का रोगजनक (pathogenic) गुण दस्त को विकारों से लड़ने में बहुत मदद करता है।
• केला-

एक केला को मैश करके उसमें एक चुटकी नमक और एक छोटा चम्मच इमली का गूदा डालकर पेस्ट जैसा बनाकर दिन में दो बार इसका सेवन करने से जल्दी ही इसके कष्ट से राहत मिल जाता है। केला शरीर से ज़रूरी पोषक तत्वों   को रोकने और जल की मात्रा को संतुलित रखने में बहुत मदद करता है ।
लौकी-
लौकी का रायता दस्तों में लाभदायक है। * पोदीना-दस्तों में आधा कप पोदीने का रस हर दो घण्टे से पिलायें। चावल-चावल बनाने के पश्चात् इसका उबला हुआ पानी जिसे माण्ड कहते हैं, फेक देते है। यह माण्ड दस्तों में लाभदायक है। बच्चों को आधा कप, बड़ों को एक कप प्रति घण्टे पिलाने से दस्त बन्द हो जाते हैं। छोटे शिशुओं को अल्प मात्रा में पिला सकते हैं। इस माण्ड में नमक स्वाद के अनुसार मिलाने से यह स्वादिष्ट, पौष्टिक और सुपाच्य हो जाता है। अधिक समय रखने से बदबू देने लगता है। माण्ड को छ: घण्टे से अधिक पड़ा न रहने दें। माण्ड बनाने की सरल विधि यह है कि सौ ग्राम चावल आटे की तरह पीस लें, इसे एक लीटर पानी में उबालें। भली प्रकार उबालने के पश्चात् इसे छानकर स्वादानुसार नमक मिला लें। इसे उपर्युक्त ढंग से पीएँ, दस्तों में लाभकारी पायेंगे। दस्तों में चावल उत्तम खाद्य है। चावल दही में मिला कर खायें।

खस-
खस-दो चम्मच खस-खस में पानी डाल कर चौथाई कप दही में मिला कर नित्य दो बार छ: घण्टे के अन्तर से खाने से पेचिश, मरोड़ और दस्त ठीक हो जाते हैं। खसखस की खीर बनाकर खाने से भी लाभ होता है।
धनिया-

हरा धनिया, काला नमक, काली मिर्च मिलाकर चटनी बना कर चटाने से लाभ मिलता है। यह सुपाच्य रहती है। पिसे हुए धनिये को सेक कर एक-एक चम्मच पानी से फैकी लेने से दस्त बन्द हो जाते हैं। दस्तों में अॉव, मरोड़ हो तो धनिया के काढ़े में मिश्री मिलाकर पिलावें। खाने के बाद दस्त हों तो पिसे हुए धनिये में स्वादानुसार काला नमक मिलाकर भोजन के बाद एक चम्मच ठंडे पानी से नित्य दो बार फॅकी लें।
मसूर की दाल व चावल-

ये दस्त और पेचिश के रोगियों के लिए उत्तम् भोजन है। गेहूँ-सौंफ को बारीक पीस लें। इसे पानी में मिलायें। इस सौंफ के पानी में गेहूँ का आटा ओषण कर रोटी बनाकर खाने से दस्त और पेचिश में लाभ होता है।
छाछ-

आधा पाव छाछ में 12 ग्राम शहद मिलाकर तीन बार पीने से दस्त बन्द हो जाते हैं। घी-दस्त होने पर आधा गिलास गर्म पानी में एक चाय की चम्मच गाय या भैस का देशी घी मिला कर सुबह-शाम दो बार पीयें। दस्त बन्द हो जायेंगे। बच्चों को कम मात्रा में उनके पीने की क्षमतानुसार दें। यह नुस्खा अनेक परिवारों में पीढ़ियों से प्रयोग किया जाता है।
सौंफ-

यदि मरोड़ देकर थोड़ा-थोड़ा मल आता हो तो तीन ग्राम कच्ची और तीन ग्राम भुनी हुई सौंफ मिलाकर, पीसकर, मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है। छोटे बच्चों के पतले दस्त, पेचिश में छ: ग्राम सौंफ 82 ग्राम पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाय तो उसमें एक ग्राम काला नमक डाल दें। बच्चों को बारह ग्राम पानी दिन में तीन बार देने से बहुत लाभ होता है।
जब ज्यादा दस्त उल्टी होने के कारण बच्चे के शरीर में पानी, नमक और सोडियम की कमी हो जाए तो बच्चे को नमक और चीनी का घोल बनाकर बार-बार पिलाते रहना चाहिए। डायरिया का मतलब है बच्चे को बार-बार पानी के जैसे पतले दस्त होना जिसकी वजह से बच्चे के शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है यह रोग ज्यादातर 6 महीने से लेकर 2 साल तक के बच्चों को होता है। नमक-चीनी का घोल बनाने की घरेलू विधि : एक गिलास उबले पानी में एक चुटकी भर पिसा हुआ नमक या एक चुटकी खाने वाला सोडा और एक चाय वाला चम्मच भर चीनी ( यदि ग्लूकोज मिलायें तो चीनी से आधी मात्रा मिलाएं और यदि गुड़ मिलाना हो तो सुपारी के बराबर गुड़) डालकर घोल बनाकर किसी, कांच के बर्तन में ढककर रख दें। इस घोल के पानी को 1-2 चम्मच हर आधे घंटे के बाद बच्चे को तब तक पिलाते रहे जब तक दस्त चालू रहे और बच्चे को 2 बार पेशाब न आ जाए।

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