19.5.17

पैरों और टांगों में नसों का ऐंठना फूलना व सूजना के घरेलू उपचार -


पैरों और टांगों में नसों का ऐंठना फूलना व सूजना - टांगों में ऐंठन - नस पर नस का चढ़ जाना - मांस-पेशियाँ में दर्द होना जैसे कि पिंडली में (टांग के पीछे) -
माँस-पेशियों की ऐंठन :
कई लोगों को रात में सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है। नस पर नस चढ़ जाती है। कई लोगों को टांगों और पिंडलियों में मीठा - 2 दर्द सा भी महसूस होता है। पैरों में दर्द के साथ ही जलन, सुन्न, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होता है।
ऐसा कई कारणों से होता है। कुछ दिन पहले मैने 'पैरों के तलवों में दर्द - कारण व् निवारण' विषय पर लिखा था।
आज की समस्या - 'ऐंठन' के कारण भी उसी से बहुत सीमा तक मिलते जुलते हैं. मेरे विचार में इसके प्रमुख कारण हैं :
कारण :
- अनियंत्रित मधुमेह (रक्त में शक्कर का स्तर)
- शरीर में जल, रक्तमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम स्तर कम होने
- पेशाब ज्यादा होने वाली डाययूरेटिक दवाओं जैसे लेसिक्स सेवन करने के कारण शरीर में जल, खनिज लवण की मात्रा कम होने
- मधुमेह, अधिक शराब पीने से, किसी बिमारी के कारण कमजोरी, कम भोजन या पौष्टिक भोजन ना लेने से, 'Poly-neuropathy' या नसों की कमजोरी।
- कुछ हृदय रोगी के लिये दवायें जो कि 'Beta-blockers' कहलाती हैं, वो भी कई बार इसका कारण होती हैं।
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कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा सेवन करने से.
- अत्यधिक कठोर व्यायाम करने, खेलने, कठोर श्रम करने से.
- एक ही स्थिति में लंबे समय तक पैर मोड़े रखने के कारण और पेशियों की थकान के कारण हो सकता है।
- पैर की धमनियोंकी अंदरूनी सतह में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से, इनके संकरे होने (एथ्रीयो स्कोरोसिस) के कारण रक्त प्रवाह कम होने पर,
- पैरों की स्नायुओं के मधुमेह ग्रस्त होने
- अत्यधिक सिगरेट, तंबाकू, शराब का सेवन करने, पोष्क तत्वों की कमी, संक्रमण से।
घरेलू उपचार :
- आराम करें। पैरों को ऊंचाई पर रखें।
- प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे। सिकाई 15 मिनट, दिन में 3-4 बार करे।
- अगर गर्म-ठंडी सिकाई 3 से 5 मिनट की (दोनों तरह की बदल-2 कर) करें तो इस समस्या और दर्द - दोनों से राहत मिलेगी।
- आहिस्ते से ऎंठन वाली पेशियों, तंतुओं पर खिंचाव दें, आहिस्ता से मालिश करें।
- वेरीकोज वेन के लिए पैरों को ऊंचाई पर रखे, पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए।
- यदि आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं, तो परहेज, उपचार से नियंत्रण करें।
- शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले तत्वों का सेवन नहीं करें।
-सही नाप के आरामदायक, मुलायम जूते पहनें।
- अपना वजन घटाएं। रोज सैर पर जाएं या जॉगिंग करें। इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं।
- फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल। मैदा व पास्ता जैसे रिफाइंड फूड का सेवन न करें।
- लेटते समय अपने पैरों को ऊंचा उठा कर रखें। पैरों के नीचे तकिया रख लें, इस स्थिति में सोना बहुत फायदेमंद रहता है।
भोजन :
- भोजन में नीबू-पानी, नारियल-पानी, फलों - विशेषकर मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला आदि शामिल करें।
- सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चाकुँदर आदि का खूब सेवन करें।
- 2-3 अखरोट की गिरि, 2-5 पिस्ता, 5-10 बादाम की गिरि, 5-10 किशमिश का रोज़ सेवन करें।
- अगर आप मांसाहारी हैं तो मछली का सेवन लाभदायक है।
- चिकित्सक से परामर्श लें :
पैरों में दर्द के साथ सूजन, लाली हो और बुखार आ रहा हो, पैर नीला या काला हो गया हो या फिर पैर ठंडा या पीला पड़ गया हो और घरेलू उपचार से राहत नहीं मिल पा रही हो, तो ऎसी स्थिति में चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
- पैरों के तलवों पर एक्यूप्रेशर रोलर करनें से दर्द से राहत मिलती है। इस क्रिया में पैरों को रोलर पर रखकर धीरे-धीरे घुमाएं। यह क्रिया दिन में 5-7 बार करनी चाहिए। इसे दो मिनट तक करना पर्याप्त रहता है। रोलर करने से पहले तलवों पर हल्का पाउडर लगाएं। इससे एक्यूप्रेशर आसानी से होगा।
मालिश : पैरों को दबाने या मालिश करने से आराम मिलता है। मालिश करते समय दोनों पैरों के तलवों की ओर अंगूठे के बिल्कुल नीचे पड़ने वाले बिंदु पर दबाव दें। अब पैरों के ऊपर छोटी उंगली के नीचे पड़ने वाले तीन बिंदुओं पर दबाव दें। पैरों के नीचे एड़ी पर पड़ने वाले तीन मास्टर बिंदुओं पर प्रेशर दें।
मालिश के लिए कोई भी तेल काम में लिया जा सकता है। दिन में दो-तीन बार 15-15 सेकंड तक प्रेशर करें और मालिश करें। 2-3 सप्ताह में आपको आराम मिलने लगेगा।
बचाव :
खून में ग्लूकोस की मात्रापर नियंत्रण रखें - यानी की मधुमेह को नियंत्रित रखें. मध्यम
- तीव्रता के व्यायाम करें, जिससे पेशियां, हडि्डयां मजबूत हों और जोड़ लचीले।
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संतुलित भोजन का सेवन करें।
- भोजन में वसा का सेवन कम करें।
- खेलने, व्यायाम करने के पहले और बाद में हल्के व्यायाम (वार्मअप, कूल डाउन) करें।
- प्रचुर मात्रा में पानी पीएं, विशेष रूप से व्यायाम करने, खेलने से पूर्व, इनके दौरान और बाद में।
- लंबी यात्रा के दौरान लगातार एक ही मुद्रा में बैठे न रहे। नियमित अंतराल में सीट से खड़े होकर टहलें, शरीर को खिंचाव दें।
- मालिश और रिलेक्सेशन व्यायामों के जरिए मांसपेशियों के खिंचाव व दर्द को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक औषधियां, होमियोपैथिक औषधियां, फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर व व्यायाम आदि सुविधानुसार कुछ भी अपनाया जा सकता है।
आयुर्वेदिक औषधियां :
- अश्वगंधापाक 10-10 ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम। अगर ना मिले तो अश्वगंधा का चूर्ण भी लाभदायक है।
- सुबह-शाम ही गुनगुने दूध के साथ किसी भी अच्छी कम्पनी का च्यवनप्राश लें।
- वृहतवात चिंतामणि की एक गोली दिन में किसी भी समय दूध की मलाई के साथ लें।
- महानारायण तेल की मालिश करें व गर्म पानी की बोतल से सिकाई करें।
हड्डी दौर्बल्य के कारण होने वाला दर्द :
- मुक्ताशक्ति भस्म 500 मि.ग्रा. में पर्याप्त मलाई के साथ सुबह-शाम, गर्म दूध के साथ लें।
- इसी के साथ महायोग राज गुग्गुल की 2-2 गोली सुबह-शाम गर्म दूध के साथ लें।
-बलारिष्ट नामक औषधि की 30 मि.ली. खुराक समभाग ताजा जल के साथ सुबह-शाम लेनी चाहिए।
- इसके अलावा सुबह-शाम दो-दो गोली लाक्षादि गुग्गुल की एक चम्मच कैस्टर ऑयल से लेनी चाहिए।
फिजियोथेरेपी :
दर्द मिटाने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट हल्के हाथों से मालिश करता है और कशेरुकाओं को उनकी सही जगह पर बैठा देता है। यह उपचार चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही योग्य व कुशल फिजियोथेरेपिस्ट से कराना चाहिए।
एक्यूप्रेशर व एक्यूपंक्चर :
पारंगत व्यक्ति से ही यह उपचार कराना चाहिए। कुशल हाथों के द्वारा रोगी के दर्द में काफी आराम मिल सकता है।
होमियोपौथिक उपचार :
लक्षणों की समानता के आधार पर मुख्यरूप से निम्न औषधियों का प्रयोग किया जा सकता है।
चेलीडोनियम: गर्दन में दर्द, कठोरता, घुमाने में दर्द, दाएं कंधे की हड्डी (स्केपुला) पर अंदर एवं नीचे की तरफ लगातार दर्द रहने पर 30 शक्ति औषधि लेनी चाहिए।
जिंकम मेट : कमर दर्द, छूना भी पीड़ादायक, कंधों पर तनाव, रीढ़ की हड्डी में चिड़चिड़ाहट, आखिरी डॉरसल अथवा रीढ़ की प्रथम लम्बर हड्डी में दर्द, गुम चोट जैसा दर्द, एक जगह बैठे रहने पर दर्द, अकड़न, कंधों में टूटन-ऐंठन आदि लक्षण मिलने पर उक्त औषधि 30 शक्ति में दिन में तीन बार 3-3 बूंद लेनी चाहिए। इस औषधि से रोगी को टट्टी-पेशाब के बाद राहत मिलती है।
स्त्रियों को सफेद पानी (श्वेत प्रदर) के साथ कमर दर्द व चिड़चिड़ाहट पर सीपिया 30 तथा एलुमिना 30 शक्ति में देनी चाहिए।
अत्यधिक मैथुन के बाद कमर दर्द रहने पर एग्नस कैस्टस एवं एसिडफॉस औषधियां 30 शक्ति में लेना हितकर रहता है।
यदि चलने-फिरने पर दर्द बढ़ने लगे एवं दबाने पर तथा दर्द वाली सतह पर लेटने से आराम मिले तो ब्रायोनिया 30 शक्ति में, दिन में तीन बार, एक हफ्ते तक लेनी चाहिए।
कालीकार्ब औषधि के रोगी में ब्रायोनिया से विपरीत लक्षण मिलते हैं। अर्थात् रोगी को चलने-फिरने से आराम मिलता है एवं बाईं तरफ अथवा दर्द वाली सतह पर लेटने से परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में कालीकार्ब औषधि 30 शक्ति में लेनी चाहिए।
व्यायाम :
- कैटरपिलर वॉक बेहद लाभकारी व्यायाम है जिसमें मशीनों की जरूरत नहीं होती। इसके लिए जमीन पर पुश-अप पोजीशन में आइए। दोनों हाथ जमीन पर और पैरों का वजन पंजों पर। पहले अपना दायां पैर आगे लेकर आएं, उसके बाद बायां पैर आगे लाएं। याद रहे हथेलियां जमीन पर रहें। इसके बाद हथेलियों के सहारे धीरे-धीरे आगे चलें और बाद में पैरों को भी आगे ले जाएं। फिर पीछे की तरफ मुड़े और दोबारा इस प्रक्रिया को करें। धीरे -धीरे इसको करें और कमरे या जगह के हिसाब से यह एक्सरसाइज करें।
- कॉफ रेजिज एक्सरसाइज ऐड़ी और पंजे के द्वारा की जाती है। इस एक्ससाइज को करने के लिए एक प्लेटफार्म की जरूरत होती है जिस पर आप पंजों के बल कॉफ रेजिज करने की सही पोजीशन में खड़ी हो सकें। यह संभव ना हो तो कुछ बार सीधे खड़े होकर पंजों के बाल खड़े हों और कुछ देर बाद वापिस सामान्य स्थिति में आ जायें। ऐसा 5-10 सेकेंड तक 10 बार तक करने का प्रयास करें।
- किसी कुर्सी पर बैठकर पेहले एक टांग को घुटने से सीधा करें। उसे जमीन के समानान्तर लाने का प्रयास करें, नहीं तो जितना आराम से कर सकते हैं-करें. टांग को 5-10 सेकेंड तक रोकें और धीरे-2 वापिस नीचे ले आयें। ऐसा 10 बार करें। फिर दूसरी टांग से 10 बार करें। 1-2 मिनट आराम करके दोनों टांगों के साथ ऐसा 10 बार करें. इस से आपको घुटनों के दर्द में भी आराम मिलेगा।
- भूमि पर या किसी भी आरामदायक सख्त आसान पर बैठकर टांगें फैला लें. अब एक पैर को एडी और पंजों से बाहिर की ओर फेलाने / खींचने का प्रयास करें (वैसे ही - हाथ से पकड़े बिना). 5-10 सेकेंड बाद ढीला छोड़ दें. दोनों पैरों से 10-10 बार करें। इस से आप को इस समस्या, घुटनों और पैरों के दर्द में भी राहत मिलेगी।
तैरना :
तैरना एक बेहद फायदेमंद व्यायाम साबित हुआ है। तैरने से हमारे पेट, पीठ, बांह, व टांगों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। पानी हमारे शरीर के गुरुत्वाकर्षी खिंचाव को कम कर देता है, जिसके चलते तैरते समय पीठ पर किसी तरह का तनाव या बोझ नहीं पड़ता। यह सावधानी जरूर रखें कि कुछ निश्चित स्ट्रोक के बाद अपना चेहरा पानी के भीतर जरूर कर लें। हमेशा सिर ऊपर करके तैरने से रीढ़ के अस्थिबंधों में कुछ ज्यादा ही खिंचाव पैदा हो जाता है। इस कारण पीठ दर्द बढ़ भी सकता है।
योग आसन :
उत्तान पादासन :
इस आसन को स्त्री पुरुष समान रूप से कर सकते हैं। छह सात वर्ष के बालक-बालिकाएं भी इसे कर सकते हैं। यह बहुत आसान आसन है एवं अधिक लाभदायक है। करने की शर्त यह कि आपको पेट और कमर में किसी प्रकार का कोई गंभीर रोग न हो। यदि ऐसा है तो किसी योग- चिकित्सक से पूछकर करें।


विधि : पीठ के बल भूमि पर चित्त लेट जाएं। दोनों हथेलियों को जांघों के साथ भूमि पर स्पर्श करने दें। दोनों पैरों के घुटनों, एड़ियों और अंगूठों को आपस में सटाए रखें और टांगें तानकर रखें।
अब श्वास भरते हुए दोनों पैरों को मिलाते हुए धीमी गति से भूमि से करीब डेढ़ फुट ऊपर उठाएं अर्थात करीब 45 डिग्री कोण बनने तक ऊंचे उठाकर रखें। फिर श्वास जितनी देर आसानी से रोक सकें उतनी देर तक पैर ऊपर रखें।
फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए पांव नीचे लाकर बहुत धीरे से भूमि पर रख दें और शरीर को ढीला छोड़कर शवासन करें।
आसन अवधि : इस आसन का प्रात: और संध्या को खाली पेट यथाशक्ति अभ्यास करें। जब आप श्वास को छाती में एक मिनट से दो तीन मिनट तक रोकने का अभ्यास कर लेंगे तब आपका आसन सिद्ध हो जाएगा।
- रोज सर्वागासन करें।
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