25.4.17

गर्मी के मौसम मे क्या खाएं

   बदलती ऋतुओं के अनुसार शरीर में स्वाभाविक रासायनिक परिवर्तन होते हैं और इस परिवर्तन में ऋतूचर्यानुसार खाध्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो वात-पित्त-कफ के उभार से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है| यहाँ मैं गर्मी की ऋतू में अच्छी सेहत के लिए सेहतमंद दिन चर्या की बात करूँगा-
   
गर्मियां में बहुत जरूरी है कि हम अपने खानपान का पूरा ध्यान रखें. खासतौर पर ऐसा खान-पान होना चाहिए तो कि शरीर को ठंडा करे.खुबानी यानी एप्रीकॉट में बीटा-कैराटीन होता है, जिसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये कैंसर और हृदय रोगों की रोकथाम के लिए बहुत अच्छा है. इसे त्वचा के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे त्वचा ऑयली नहीं होती.

  अल सुबह उठते ही २-३ गिलास पानी पीना चाहिए| इसके बाद शौच,दन्त सफाई,आसान और प्राणायाम नियमित रूप से करें| अब रात को पानी भिगोये हुए ११ बादाम को छिलके उतारकर पीसकर एक गिलास दूध के साथ पीएं| इसके नियमित प्रयोग से शारीरिक तंदुरुस्ती मिलती है और आंतरिक उष्मा शांत होती है| गर्मी के मौसम में तले भुने,गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार पदार्थों की बजाय फल फ्रूट ,हरी सब्जियों के सलाद और जूस का ज्यादा इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद रहता है| इससे गर्मी की वजह से पसीना होने से होने वाली पानी कमी का पुनर्भरण भी होता रहता है|
   गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए छाछ बहुत ही अच्छी होती है. इसमें लैक्ट‍िक एसिड पाया जाता है, जो कि स्कीम मिल्क से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होता है. ये शरीर में चुस्ती लाता है. इसे खाने के बाद लिया जाता है, क्योंकि ये पाचन में बहुत मददगार है. इसमें अध‍ि‍क मात्रा में कैल्श्‍िायम, पोटैश‍ियम और जिंक होता है
   *आम सबको बहुत पसंद आता है और गर्मियों में खूब मिलता है. इसे भरपूर मात्रा में विटामिन सी और आयरन पाया जाता है. ये गर्भवती महिलाओं के लिए भी बहुत अच्छा है.

  
 *ग्रीष्म ऋतू में बाजारू चीजें खाने से बचने की सलाह दी जाती है| इस मौसम में शारीरिक कमजोरी        ,अपच,दाद,पेचिश,सीने में जलन.खूनी बवासीर ,मुहं की बदबू आदि रोगों से बचने का सरल उपचार भी लिख देता हूँ| खाली पेट,नींबू का रस आंवले का रस और हरे धनिये का रस मिश्री मिलाकर पीने से कई रोगों से बचाव हो सकता है| दोपहर और सांयकालीन भोजन में चावल के साथ अरहर,मूंग,उडद की दाल और हरी पत्तीदार सब्जियों का समावेश करें| छाछ व् दही का सेवन करना हितकारी है| रात का भोजन ना करें तो ज्यादा अच्छा|
तरबूज गर्मियों में शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है. गर्मियों के मौसम में इसका अध‍िक सेवन शरीर के लिए फायदेमंद होता है. इसमें सोड‍ियम, पोटैश‍ियम और विटामिन बी भी पाया जाता है.
कॉर्न यानी भुट्टे में विटामिन सी, मैगनेश‍ियम, फॉसफोरस और फोलेट पाया जाता है. इसमें फाइबर भी होता है, जो कि पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है.
गर्मी में घर से बाहर निकलने के पाहिले २ गिलास पानी जरूर पी लेना चाहिए| टमाटर,तरबूज,खरबूज,खीरा ककड़ी,गन्ने का रस और प्याज का उपयोग करते रहना चाहिए| इन चीजों से पेट की सफाई होती है और अंदरूनी गर्मी शांत होती है|
नारियल पानी गर्मियों के लिए सबसे बेहतर है. इसमें बहुत अध‍ि‍क मात्रा में कैल्‍िशयम, क्लोराइड और पोटैशि‍यम पाया जाता है.
गन्ने का रस- गर्मी में गन्ने का रस सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है| इसमें विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं| इसे पीने से ताजगी बनी रहती है| लू नहीं लगती है| बुखार होने पर गन्ने का रस पीने से बुखार जल्दी उतर जाता है| एसीडीटी की वजह से होने वाली जलन में गन्ने का रस राहत पहुंचाता है| गन्ने के रस में नीम्बू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है| गन्ने के रस में बर्फ मिलाना ठीक नहीं है|
कटहल गर्मियों में खूब पाया जाता है और ये बढ़े हुए ब्लडप्रेशर को कम करने में मददगार है.


योगर्ट में प्रोटीन की मात्रा अध‍िक और वसा कम होता है. ये वजन घटाने में भी बहुत मददगार है. ये पाचन तंत्र को भी बहुत मजबूत बनाता है.
आम पन्ना - कच्चे आम को पानी में उबालकर उसका गूदा निकाल लें| इसमें शकर,भुना जीरा,धनिया,पुदीना,नमक मिलाकर पीयें| गर्मी की बीमारियाँ दूर होंगी
खीरे को भी गर्मियों के लिए बहुत परफेक्ट माना जाता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है. ये ऑयली त्वचा को ठीक करता है. खीरा गर्मियों में होने वाले गैस, एसीडिटी, सीने में जलन की समस्याओं को भी दूर करता है.
ठंडाई- गर्मी में ठंडाई काफी लाभ दायक होती है| इसे बनाने के लिये खस खस और बादाम रात को भिगो दें|सुबह इन्हें मिक्सर में पीसकर ठन्डे दूध में मिलाएं| स्वाद अनुसार शकर मिलाकर पीएं| गर्मी से मुक्ति मिलेगी|
पुदीने का शरबत- गर्मी में पुदीना बेहद फायदेमंद रहता है| पुदीने को पीसकर स्वाद अनुसार नमक,चीनी जीरा मिलाएं| इस तरह पुदीने का शरबत बनाकर पीने से लू.जलन,बुखार ,उल्टी व गैस जैसी समस्याओं में काफी लाभ होता है|

24.4.17

गर्मियों में रहे सावधान! धूप,लू और बीमारियों से बचने के उपाय

   

   गर्मी के आगमन के साथ ही कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। लोग इससे बचने के लिए तरह-तरह के उपाय करने लगते हैं। बढ़ती गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है धूप की। इससे बचने के लिए पूरे शरीर को ढंकने के साथ ही कई और उपाय करने में जुट जाते हैं। अब गर्मी के कारण रोजमर्रा के कामों को तो छोड़ा नहीं जा सकता है, आपके शरीर में पानी की कमी न हो। ऐसे कौन से उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप तेज गर्मी से राहत पा सकते हैं।
   गर्मी में होने वाली गर्मी से थकावट, लू लगना, पानी की कमी, फूड पॉयजनिंग आम बीमारियां हैं। अगर हम कुछ सावधानियां बरतें तो इन बीमारियों से बचा जा सकता है।गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर धूप में घूमनेवालों, खिलाड़ियों, बच्चों, बूढ़े और बीमारों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम लू से बचे रहें यानी बचाव इलाज से बेहतर है।
*चश्मा पहनकर बाहर जाएं। चेहरे को कपड़े से ढक लें।
*घर से पानी या कोई ठंडा शरबत पीकर निकलें, जैसे आम पना, शिकंजी, खस का शर्बत आदि। साथ में भी पानी लेकर चलें।


* बहुत ज्यादा पसीना आया हो तो फौरन ठंडा पानी न पीएं। सादा पानी भी धीरे-धीरे करके पीएं।
* रोजाना नहाएं और शरीर को ठंडा रखें।
*घर को ठंडा रखने की कोशिश करें। खस के पर्दे, कूलर आदि का इस्तेमाल करें।
* बाजार से कटे हुए फल न लें।
*तेज गर्म हवाओं में बाहर जाने से बचें। नंगे बदन और नंगे पैर धूप में न निकलें।
* घर से बाहर पूरे और ढीले कपड़े पहनकर निकलें, ताकि उनमें हवा लगती रहे।
*ज्यादा टाइट और गहरे रंग के कपड़े न पहनें।
* सूती कपड़े पहनें। सिंथेटिक, नायलॉन और पॉलिएस्टर के कपड़े न पहनें।
*खाली पेट बाहर न जाएं और ज्यादा देर भूखे रहने से बचें।
*धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, सिर पर गीला या सादा कपड़ा रखकर चलें।
*आयुर्वेद के अनुसार आमतौर पर लोग कफ, पित्त, वायु या इनमें से कोई दो प्रकृतियों वाले होते हैं। हम ठंडी तासीर या प्रकृति की चीजों का इस्तेमाल करते हैं तो हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म या चयापचय सिस्टम ठंडा होना शुरू हो जाता है और शरीर में ठंडक आने लगती है। चावल, जौ का पानी, केला, छाछ, दही, लस्सी आदि लेने से शरीर को ठंडक मिलती है। दूध की लस्सी भी ले सकते हैं। ज्यादातर सब्जियों की तासीर ठंडक देने वाली होती है। इनमें लौकी और तोरी सबसे ठंडी होती हैं। कफ प्रकृति वालों को लौकी, तोरी या इनका जूस ज्यादा नहीं लेना चाहिए। आम व लीची को छोड़कर ज्यादातर फल ठंडक देनेवाले होते हैं जैसे कि मौसमी, संतरा, आडू, चेरी, शरीफा, तरबूज, खरबूजा आदि। खीरा व ककड़ी भी गर्मियों के लिहाज से अच्छे हैं। सौंफ, इलायची, कच्चा प्याज, आंवला, धनिया, पुदीना और हरी मिर्च की तासीर भी ठंडी होती है। लू से बचाव के लिए कई तरह के पेय पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे कि ठंडाई, आम पना, शिकंजी, लस्सी, नारियल पानी आदि के साथ-साथ खस, ब्राह्मी,चंदन, बेल, फालसा, गुलाब, केवड़ा, सत्तू के शर्बत आदि का सेवन करें।


हीट एग्जाशन गर्मी की एक साधारण बीमारी है जिसके दौरान शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस तक होता है। चक्कर आना, अत्यधिक प्यास लगना, कमजोरी, सिर दर्द और बेचैनी इसके मुख्य लक्षण हैं। इसका इलाज तुरंत ठंडक देना और पानी पीकर पानी की कमी दूर करना है। अगर हीट एग्जॉशन का इलाज तुरंत न किया जाए तो हीट-स्ट्रोक हो सकता है, जो कि जानलेवा भी साबित हो सकता है।
में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जो कि अंदरुनी अंगों की कार्यप्रणाली को नष्ट कर सकता है। हीट-स्ट्रोक के मरीजों को शरीर का तापमान बहुत ज्यादा होता है, त्वचा सूखी और गर्म होती है, शरीर में पानी की कमी, कन्फयूजन, तेज या कमजोर नब्ज, छोटी-धीमी सांस, बेहोशी तक आ जाने की नौबत आ जाती है। हीट-स्ट्रोक से बचने के लिए दिन के सबसे ज्यादा गर्मी वाले समय में घर से बाहर मत निकलें। अत्यधिक मात्रा में पानी और जूस पीएं, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। ढीले-ढाले और हल्के रंग के कपड़े पहने।
*फूड पॉयजनिंग गर्मियों में आम तौर पर हो जाती है। गर्मियों में अगर खाना साफ-सुथरे माहौल में न बनाया जाए तो उसके दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही पीने का पानी भी दूषित हो सकता है। अत्यधिक तापमान की वजह से खाने में बैक्टीरीया बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड पॉयजनिंग हो जाती है। सड़क किनारे बिकने वाले खाने-पीने के सामान भी फूड पॉयजनिंग के कारण बन सकते हैं। फूड पॉयजनिंग से बचने के लिए बाहर जाते वक्त हमेशा अपना पीने का पानी घर से ले के चलें। बाहर खुले में बिक रहे कटे हुए फल खाने से परहेज करें। गर्मी में शरीर में पानी की कमी से बचने के और शरीर में पानी की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने के लिए अत्यधिक मा़त्रा में तरल पदार्थ पिएं। खास तौर खेल-कूद की गतिविधियों के दौरान इस बात का ध्यान रखें। प्यास लगने का इंतजार न करें। हमेशा घर में बना हुआ नींबू पानी और ओआरएस का घोल आस-पास ही रखें। एल्कोहल और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का परहेज करें, इनके सेवन से भी शरीर में पानी की कमी होती है।

15.4.17

एकोनाइट (Aconite Nap ) के लक्षण औषधीय उपयोग

लक्षण 
* शीत से शोथ की प्रथमावस्था में एकाएकपना और प्रबलता
*जलन और उत्ताप
*अत्यन्त प्यास
* शीत द्वारा दर्द-स्नायु-शूल
*भय के कारण बीमारियां
*घबराहट तथा बेचैनी
* खुश्क-शीत को कारण यकायक रोग

लक्षणों में कमी (Better)
* खुली हवा से रोग में कमी


लक्षणों में वृद्धि (Worse)
* बिछौने से उठने पर रोग-वृद्धि
*रोगाक्रान्त अंग की तरफ लेटने से
* शाम तथा आराम के समय
* गर्म कमरे में रोग-वृद्धि
*सड़क पार करने से भय खाता है – इसका रोगी सड़क पार करते हुए डरता हैं कि कहीं मोटर की लपेट में न आ जाय। वैसे तो सब – कोई मोटर की लपेट में आते हुए डरेगा, परन्तु एकोनाइट का रोगी बहुत दूर से आती हुई मोटर से भी भय खा जाता है।
*भीड़ में जाने से डरना – रोगी भीड़ में जाने से, समाज में जाने से डरता है, बाहर निकलने में भय खाता है।
मृत्यु की तारीख बतलाता है – इस रोगी का चेहरा घबराया हुआ रहता है। रोगी अपने रोग से इतना घबरा जाता हैं कि जीवन की आशा छोड़ देता है समझता है कि उसकी मृत्यु निश्चित है। कभी-कभी अपनी मृत्यु की तारीख तक की भविष्यववाणी करता है। डॉक्टर के आने पर कहता है: डाक्टर, तुम्हारा इलाज व्यर्थ है, मैं शीघ्र ही अमुक तारीख को मर जाने वाला हूँ। घड़ी को देख कर कहता है कि जब घड़ी की सूई अमुक स्थान पर आ जायगी तब मैं मर जाऊँगा।


* भय के कारण बीमारियां – एकोनाइट का मुख्य तथा प्रबल लक्षण ‘भय’ है। किसी भी रोग में ‘भय’ अथवा ‘मृत्यु के भय’ के उपस्थित रहने पर इसका प्रयोग आवश्यक हैं। मैटीरिया मैडिका की किसी अन्य औषधि में भय का लक्षण इतना प्रधान नहीं है जितना इस औषधि में। उदाहरणार्थ –
*प्रथम प्रसूति-काल में लड़की डर के मारे रोती है – जब नव-विवाहिता लड़की प्रथम बार गर्भवती होती हैं तब माँ को पकड़ कर रोती है, कहती है: इतने बड़े बच्चे को कैसे जानूंगी, मैं तो मर जाऊंगी। उसे एकोनाइट 200 की एक खुराक देने से ही उसका भय जाता रहता है और चित्त शान्त हो जाता है।
*भय से किसी रोग का श्रीगणेश – जब किसी बीमार का श्रीगणेश भय से हुआ हो तब एकोनाइट लाभप्रद है।
*भूत-प्रेत का डर – बच्चों को अकारण भूत-प्रेत का भय सताया करता है। अन्य कारणों से भी बच्चे, स्त्रियां तथा अनेक पुरुष अकारण भय से परेशान रहते हैं। इन अकारण-भयों को यह औषधि दूर कर देती है।
*भय में एकोनाइट तथा अर्जेन्टम नाइट्रिकम की तुलना – इन दोनों औषधियों में मृत्यु-भय है। दोनों रोगी कभी-कभी अपने मृत्यु-काल की भविष्यवाणी किया करते हैं। दोनों भीड़ से डरते हैं, घर से निकलने से डरते हैं। अर्जेन्टम नाइट्रिकम की विशेषता यह है कि अगर कुछ काम उसे करना हो, तो उससे पहले ही उसका चित्त घबरा उठता है। किसी मित्र को मिलना हो, तो जब तक मिल नहीं लेता तब तक घबड़ाया रहता है: गाड़ी पकड़नी हो तो जब तक गाड़ी पर चढ़ नहीं जाता तब तक परेशान रहता है;  

अगर व्याख्यान देने उसे जाना है तो घबराहट के कारण उसे दस्त आ जाता है, शरीर में पसीना फूट पड़ता है। आगामी आने वाली घटना को सोच कर घबराये रहना, उस कारण दस्त आ जाना, पसीना फूट पड़ना, उस कारण नींद न आना अर्जेन्टम नाइट्रिकम का विशेष लक्षण है। ऊंचे-ऊंचे मकानों को देखकर उसे चक्कर आ जाता है। एकोनाइट ठंड से बचता है, अर्जेन्टम नाइट्रिकम ठंड को पसन्द करता है। अर्जेन्टम नाइट्रिकम ठंडी हवा, ठंडे पेय, बर्फ, आइसक्रीम पसन्द करता है। पल्सेटिला की तरह बन्द कमरे में उसका जी घुटता है, एकोनाइट में ऐसा नहीं होता। अर्जेन्टम का भय ‘पूर्व-कल्पित भय’ (Anticipatory) है, एकोनाइट का भय हर समय रहने वाला भय है।
*भय में एकोनाइट तथा ओपियम की तुलना – भय से किसी रोग का उत्पन्न हो जाना एकोनाइट तथा ओपियम इन दोनों में है, परन्तु भय से उत्पन्न रोगी प्रारंभिक अवस्था में एकोनाइट लाभ करता है, परन्तु जब भय दूर न होकर हृदय में जम जाय और रोगी अनुभव करे कि जब से मैं डर गया हूँ तब से यह रोग मेरा पीछा नहीं छोड़ता, तब ओपयिम अच्छा काम करता है। इस लक्षण के साथ ओपियम के अन्य लक्षणों को भी देख लेना चाहिये।

12.4.17

आयुर्वेदिक अवलेह पाक

   आयुर्वेदिक औषधियों की जानकारी के क्रम में आपका परिचय विभिन्न प्रकार के पाक, घृत व अवलेह से कराया जा रहा है। यहां दी गई सभी प्रकार की दवाएं चाटकर सेवन की जाने वाली हैं।
च्यवनप्राश अवलेह (अष्टवर्गयुक्त) : सप्त धातुओं को बढ़ाकर शरीर का काया कल्प करने की प्रसिद्ध औषधि। फेफेड़े के विकार, पुराना श्वास, खांसी, शारीरिक क्षीणता, पुराना बुखार, खून की कमी, कैल्शियम की कमी, क्षय, रक्तपित्त, रक्त क्षय, मंदाग्नि, धातु क्षय आदि रोगों की प्रसिद्ध औषधि। इसमें स्वाभाविक रूप से विटामिन 'सी' पर्याप्त मात्रा में होता है। बल, वीर्यवर्धक है। मात्रा 10 से 25 ग्राम (2-4 चम्मच) दूध के साथ सुबह-शाम
कुष्मांड (खंड) अवलेह : रक्तपित्त, कांस, श्वास, उल्टी, प्यास व ज्वर, नाशक, मुंह, नाक, गुदा इन्द्रियों आदि से खून आने पर लाभकारी। नेत्रों को हितकारी, बल, वीर्यवर्धक एवं पौष्टिक। स्वर शुद्ध करता है। मात्रा 15 ग्राम सुबह-शाम चाटना चाहिए।
 
बादाम पाक (केशर व भस्मयुक्त) : दिल और दिमाग को ताकत देता है। नेत्रों को हितकारी तथा शिरा रोग में लाभकारी। शरीर को पुष्ट करता है और वजन बढ़ाता है। सर्दियों में सेवन करने योग्य उत्तम पुष्टि दायक है। सभी आयु वालों के लिए पौष्टिक आहार। मात्रा 10 से 20 ग्राम प्रातः-सायं दूध से।
चित्रक हरीतिकी : पुराने और बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम (नजला) की अनुभूत दवा है। पीनस, श्वास, कास तथा उदर रोगों में गुणकारी एवं अग्निवर्धक। मात्रा 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम।
वासावलेह : सभी प्रकार की खांसी, श्वास, दमा, क्षय, रक्तपित्त, पुरानी खांसी के साथ खून आना, फेफेड़ों की कमजोरी आदि रोगों को नष्ट करता है। मात्रा 10 से 25 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ।
मूसली पाक (केशरयुक्त) : अत्यंत पौष्टिक है। असंयमजनित रोगों को दूर कर शरीर को पुष्ट बनाता है। बल, वीर्यवर्धक, बाजीकारक एवं शक्तिदायक। शरद ऋतु में शक्ति संचय हेतु उपयुक्त। मात्रा 10 से 15 ग्राम प्रातः-सायं दूध से।
ब्रह्म रसायन : शारीरिक व मानसिक दुर्बलता दूर कर नवशक्ति का संचार करने वाला अपूर्व रसायन। श्वास, कास में लाभप्रद तथा दिमागी कार्य करने वालों के लिए उपयुक्त। मात्रा 3 से 10 ग्राम गर्म दूध के साथ सुबह-शाम लेना चाहिए।