20.1.17

नजला-जुकाम: कारण और उपाय:Catarrh cold: Causes and Remedy

    

    नजला या जुकाम ऐसा रोग है जो किसी भी दिन किसी भी स्त्री या पुरुष को हो सकता है| यह रोग वैसे तो ऋतुओं के आने-जाने के समय होता है लेकिन वर्षा, जाड़े और दो ऋतुओं के बीच के दिनों में ज्यादातर होता है|नजला-जुकाम एक बहुत ही आम और हमेशा परेशान करने वाला रोग है। वास्तव में यह रोग नहीं, शरीर की एक सांवेदनिक प्रतिक्रिया है, जो मौसम बदलने, नाक में धूल कण जाने आदि से उत्पन्न होती है। पूरे विश्व के लोग कभी न कभी, इसके शिकार होते ही हैं। नज़ला-जुकाम शीत के कारण होने वाला एक ऐसा रोग है, जिसमें नाक से पानी बहने लगता है। मामूली- सा दिखने वाला यह रोग, कफ की अधिकता के कारण अधिक कष्टदायक हो जाता है। यों तो ऋतु आदि के प्रभाव से दोष संचय काल में संचित हो कर अपने प्रकोप काल में ही कुपित होते हैं, परंतु दोषों के प्रकोपक कारणों की अधिकता, या प्रबलता के कारण तत्काल भी कुपित हो जाते हैं, जिससे जुकाम हो जाता है; अर्थात नज़ला-जुकाम शीत काल के अतिरिक्त भी हो सकता है।
आयुर्वेद में नजला-जुकाम 6 प्रकार के बताये गये हैं। आचार्य चरक ने इसके चार प्रकार बताये हैं, जबकि आचार्य सुश्रुत ने पांच प्रकार माने हैं।
वायुजन्य (वातज) : वायु से उत्पन्न जुकाम में नाक में वेदना, सुंई चुभने जैसी पीड़ा, छींक आना, नाक से पतला स्राव आना, गला, तालु और होठों का सूख जाना, सिर दर्द और आवाज बैठ जाना आदि लक्षण होते हैं।
पित्तजन्य (पित्तज) : नाक से गर्म और पीले रंग का स्राव आना, नाक का अगला भाग पक जाना, ज्वर, मुख शुष्क हो जाना, बार-बार प्यास लगना, शरीर दुबला और त्वचा चमकरहित होना इसके लक्षण हैं। नाक से धुंआ निकलता महसूस होता है।

कारण-
आमतौर पर कब्ज होने पर सर्दी लग जाने से होता है. पानी में निरंतर भीगने, एकाएक पसीना बंद हो जाने से, ठंडे पदार्थों का सेवन ज्यादा करने से, प्राक्रतिक आवेगों को रोकने प्रदूषित वातावरण में रहने से, या तम्बाकू का अधिक सेवन करने से हो जाता है. यह एक संक्रमण रोग है. इससे नाक की श्लेष्मा झिल्ली में शोध हो जाता है. इस रोग की सुरूआत में नाक में श्लेष्मा का बहना या बिलकुल खुश्क हो कर नाक बंद हो जाना, छींकें आना, नाक में खुश्की, सिर दर्द, नाक में जलन, आखें लाल होना, कान बंद होना खांसी के साथ कफ का आना, नाक में खुजली होना आदि नजला जुकाम के लक्षण होते हैं.
खाने मे खराबी, ठंड से, सु-बह उठने के साथ ठंडा पानी से मूह धोना या पीना , ज्यादा शराब पीने , ओर किसी नजले जुखाम के मरीज के साथ रहने पर
लक्षण
बार बार छींके आना, नाक मे खुजली, नाक का बहाना, गले मे खरास, बार बार नाक बंद होना, आंखो मे पानी बहाना और खांसी
नजला (जुकाम) की पहचान-
शुरू में नाक में खुश्की मालूम पड़ती है| बाद में छींकें आने लगती हैं| आंख-नाक से पानी निकलना शुरू हो जाता है| जब श्लेष्मा (पानी) गले से नीचे उतरकर पेट में चला जाता है तो खांसी बन जाती है| कफ आने लगता है| कान बंद-से हो जाते हैं| माथा भारी और आंखें लाल हो जाती हैं| बार-बार नाक बंद होने के कारण सांस लेने में परेशानी होती है| रात में नींद नहीं आती| रोगी को मुंह से सांस लेनी पड़ती है|
घरेलू उपचार हल्दी से -
-100 ग्राम साबुत हल्दी लें।
-घुन लगे टुकड़ों को निकाल दे।
- अच्छा होगा कि कच्ची हल्दी जो बाजार मे सब्जी बेचने वाले बेचते हैं वह ले।उसके छोटे छोटे टुकड़े काट कर सूखा ले।
- पीसी हुई हल्दी ना ले।
- साबुत हल्दी के छोटे छोटे (गेहूं या चने के समान) टुकड़े कर ले।
- एक लौहे की या पीतल की कड़ाही ले। ना मिले तो एल्यूमिनियम की कड़ाही ले।
स्टील या नॉन स्टिक की ना ले।
-उसमे लगभग 25 ग्राम देशी घी डालकर हल्दी के टुकड़े धीमी आग पर भुने।
- यदि किसी को घी नहीं खाना है तो वह बिना घी के भून सकता है।
 -हल्दी को इस प्रकार गरम करे कि ना तो वह जले और ना ही कच्ची रहे।
-अब इसे आग से उतार कर पीस कर रख ले।


प्रयोग विधि—
- 1 छोटा चम्मच यह भुनी हुई हल्दी और  10 ग्राम गुड प्रतिदिन सुबह या शाम गरम दूध से ले।
- जो अक्सर यात्रा करते हैं वह यह करे।
-हल्दी और गुड बराबर मिलाकर रख ले।
- 2 चम्मच यह दवाई गरम पानी से ले।
- साथ मे बर्फी या पेड़ा खाए।
- चाय से ना ले। चाय से कोई लाभ नहीं होगा।
 -लेने के 1 घण्टे तक ठंडा पानी ना पिए।
 -यह दवाई धीरे काम करती है।
-लगभग 1 सप्ताह प्रयोग से कुछ लाभ होता है।
- स्थायी लाभ के लिए कम से कम 3 महीने प्रयोग करे।
- जो अधिक परेशान हैं वह सुबह और शाम प्रयोग करे।
 -बच्चो को आयु के अनुसार कम मात्रा दे।
- गर्भवती स्त्री को भी दे सकते हैं।
- नाक की एलर्जी इस्नोफिलिया आदि सभी ठीक हो जाते हैं।
नजला जुकाम (Influenza Cold) के अन्य  उपाय
 
*अदरक और देशी घी
अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को देशी घी में भून लें| फिर उसे दिन में चार-पांच बार कुचलकर खा जाएं| इससे जुकाम बह जाएगा और रोगी को शान्ति मिलेगी|
* तुलसी के पत्ते, सौंठ, छोटी इलायची 6-6 ग्राम और दालचीनी 1 ग्राम ले कर पीस लें. और 100 ग्राम पानी में उबालें आधा पानी रह जाने पर छान कर पियें ऐसा काढ़ा दिन में 3 बार पीने से नजला जुकाम ठीक हो जाता है|
*हल्दी, अजवायन, पानी और गुड़-
10 ग्राम हल्दी का चूर्ण और 10 ग्राम अजवायन को एक कप पानी में आंच पर पकाएं| जब पानी जलकर आधा रह जाए तो उसमें जरा-सा गुड़ मिला लें| इसे छानकर दिन में तीन बार पिएं| दो दिन में जुकाम छूमंतर हो जाएगा|
* तुलसी के पत्ते छाया में सुखा कर पीस लें और नसवार की तरह सूंघें इससे छींकें आती हैं और जुकाम ठीक हो जाता है|
* छोटी इलायची, सौंठ, दालचीनी सभी को एक- एक ग्राम लें और तुलसी दल 6 ग्राम सब को कूट कर दिन में 3-4 बार चाय बना कर पीने से नजला जुकाम से छुटकारा मिलता है\
* तुलसी का रस शहद के साथ दिन में 4 बार चाटने से जुकाम ठीक हो जाता है साथ ही बुखार भी ठीक हो जाता है|
*लहसुन, शहद और कलौंजी-
लहसुन की दो पूतियों को आग में भूनकर पीस लें| फिर चूर्ण को शहद के साथ चाटें| कलौंजी का चूर्ण बनाकर पोटली में बांध लें| फिर इसे बार-बार सूंघें| नाक से पानी आना रुक जाएगा|

*दालचीनी और जायफल-
दालचीनी तथा जायफल  दोंनो एक चम्मच की मात्रा में चूर्ण के रूप में लेने से जुकाम फूर्र हो जाता है|

* 3 ग्राम तुलसी के पत्ते, 2 ग्राम दालचीनी, डेढ ग्राम सौंठ 1 ग्राम केसर, 2 ग्राम जावित्त्री, डेढ़ ग्राम लौंग, इन सब को पोटली में बांध कर 500 ग्राम पानी में पकाएं आधा पानी रहने पर इस में 250 ग्राम दूध मिला कर पीने से नजला जुकाम वह वदन दर्द दोनों मिट जाते हैं|
* तुलसी के बीज, गिलोय और कटेली की जड़ समान मात्रा में ले कर पीस लें और 4 रत्ती चूर्ण 1 चम्मच शहद में मिला कर सुबह शाम तीन दिन खाने से नजला जुकाम मिट जाता है|
*सरसों का तेल*
नाक के बाहर तथा नथुनों के भीतर सरसों-का तेल थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगाएं| जुकाम का पानी बह जाएगा|
*सौंठ-
एक चम्मच पिसी सोंठ की फंकी लगाकर ऊपर से गुनगुना पानी पी लें|

*गोमूत्र-
दोंनो नथुनों में गोमूत्र (ताजा) की दो-दो बूंदें सुबह-शाम टपकाएं
|*अदरक, प्याज, और तुलसी का रस समान मात्रा में मिला कर शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम आता है|
*अदरक और शहद-
एक चम्मच अदरक के रस में आधा चमच शहद मिलाकर चाट लें|


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