18.1.17

मानसिक रोगों के इलाज में मददगार है स्वप्न चिकित्सा: Dream therapy is helpful in the treatment of mental diseases::


   आधुनिक मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सोते समय की चेतना की अनुभूतियों को स्वप्न कहते हैं। स्वप्न के अनुभव की तुलना मृगतृष्णा के अनुभवों से की गई है। यह एक प्रकार का विभ्रम है। स्वप्न में सभी वस्तुओं के अभाव में विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ दिखाई देती हैं। स्वप्न की कुछ समानता दिवास्वप्न से की जा सकती है। परंतु दिवास्वप्न में विशेष प्रकार के अनुभव करनेवाला व्यक्ति जानता है कि वह अमुक प्रकार का अनुभव कर रहा है। स्वप्न अवस्था में अनुभवकर्ता जानता नहीं कि वह स्वप्न देख रहा है। स्वप्न की घटनाएँ वर्तमान काल से संबंध रखती हैं। दिवास्वप्न की घटनाएँ भूतकाल तथा भविष्यकाल से संबंध रखती हैं।
     भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार स्वप्न चेतना की चार अवस्थाओं में से एक विशेष अवस्था है। बाकी तीन अवस्थाएँ जाग्रतावस्था, सुषुप्ति अवस्था और तुरीय अवस्था हैं। स्वप्न और जाग्रताअवस्था में अनेक प्रकार की समानताएँ हैं। अतएव जाग्रतावस्था के आधार पर स्वप्न अनुभवों को समझाया जाता है। इसी प्रकार स्वप्न अनुभवों के आधार पर जाग्रताअवस्था के अनुभवों को भी समझाया जाता है।



स्वप्नों का अध्ययन चिकित्सा दृष्टि से भी किया गया है। साधारणत: रोग की बढ़ी चढ़ी अवस्था में रोगी भयानक स्वप्न देखता है और जब वह अच्छा होने लगता है तो वह स्वप्नों में सौम्य दृश्य देखता है।
   एक यूरोपीय साइंस फाउंडेशन (ESF) कार्यशाला ने स्पष्ट अर्थ वाले स्वप्न के दैरान मस्तिष्क की गतिविधियों और मानसिक स्थितियों में समानता पायी है, जो मानसिक रोगों के इलाज में उपयोगी हो सकती है।
  जब कोई व्यक्ति इस बारे में अवगत है कि वह सपना देख रहा है तो स्पष्ट अर्थ वाला स्वप्न सोने और जागने के बीच एक संकर अवस्था है। यह मस्तिष्क में वैद्युत गतिविधियों का एक विशिष्ट पैटर्न बनाती है जिसमें सिज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक विकृति की अवस्था द्वारा बनाए गए पैटर्न से समानता होती है।
जर्मनी में फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय के उर्सुला वॉस इशारा करते हैं कि स्पष्ट अर्थ वाले स्वप्न और मानसिक स्थितियों के बीच संबंधों की पुष्टि करने से इस बात पर आधारित नए चिकित्सकीय रास्तों की संभावना होती है कि स्वस्थ रूप से सपना देखना तंत्रिका विज्ञान और मनोरोग विकारों के साथ जुड़ी अस्थिर अवस्थाओं से किस प्रकार अलग है।
 

कार्यशाला के दौरान प्राप्त नए आंकड़ों से पता चलता है कि स्पष्टतापूर्वक सपना देखने से मस्तिष्क एक असंबद्धता की अवस्था में होता है, ऐसा कुछ जो संबंद्धता की पुष्टि करता है।
वॉस के अनुसार, असंबद्धता में मानसिक प्रक्रियाओं, जैसे कि तार्किक सोच या भावनात्मक प्रतिक्रिया पर नियंत्रण खोना शामिल है।
वॉस कहते हैं कि कुछ मानसिक स्थितियों में इस अवस्था को उस समय भी होने का पता चला है, जब लोग जागे होते हैं।
इटली के मिलान में यूनिवर्सिटी डेगली स्टडी डी मिलानो में कार्यशाला के संयोजक सिल्वियो स्कारोन का कहना है, "मनोरोग विज्ञान के क्षेत्र में, मरीजों के सपनों में रूचि उत्तरोत्तर नैदानिक ​​अभ्यास और अनुसंधान दोनों से बाहर हो गयी है। लेकिन यह नया काम दिखाता हुआ प्रतीत होता है कि हम स्पष्ट अर्थ वाले सपने और उन कुछ मानसिक स्थितियों के बीच तुलना करने में सक्षम हो सकते हैं जिसमें हमारे जगे होने पर चेतना की असामान्य असंबद्धता जैसे मनोरोग, अवैयक्तिकीकरण और छद्मआघात शामिल होते हैं।"
   नए निष्कर्षों ने स्वप्न चिकित्सा के द्वारा कुछ दशाओं का उपचार करने के बदनाम विचार में फिर से चिकित्सकों की रूचि को पुनर्जीवित किया है, जैसे कि उदाहरण के लिए बुरे सपने से पीड़ित लोगों का इलाज उनके स्पष्ट अर्थ वाले सपने द्वारा किया जा सकता है ताकि वे होश में जाग सकें।
   सेक्रोन का कहना है, "एक तरफ, बुनियादी सपना शोधकर्ता अपने ज्ञान को अब मानसिक रोगियों पर इस लक्ष्य के साथ लागू कर सकते हैं कि मनोरोग विज्ञान के लिए एक उपयोगी उपकरण का निर्माण हो सकेगा, रोगियों के स्वप्नों में रूचि पैदा हो सकेगी। दूसरी ओर, तंत्रिका विज्ञान शोधकर्ता पता लगा सकते हैं कि अपने काम को सुप्त शोध से तीव्र मानसिक और मस्तिष्क-दिमाग की असंबद्ध अवस्थाओं के डेटा का मतलब निकालने के लिए मनोरोग की दशाओं तक कैसे फैलाया जाए।''
शोध टीम ने उस विचार का भी अध्ययन किया जिसमें पागल भ्रम और अन्य भ्रमात्मक घटनाएं होती हैं, जब असंबद्ध स्वप्न देखने की अवस्था में धमकीपूर्ण स्थितियों से लेकर जागने की अवस्था में आने की पुनरावृत्ति होती है।
  सेक्रोन का कहना है, "वास्तविक धमकीपूर्ण घटनाएं शायद स्वप्न प्रणाली को सक्रिय कर देती हैं, ताकि उन सिमुलेशनों का उत्पादन करें जो धारणा और व्यवहार के संदर्भ में धमकीपूर्ण घटनाओं के यथार्थवादी रिहर्सल हैं। यह सिद्धांत इस आधार पर काम करता है कि वह वातावरण जिसमें मानव मस्तिष्क विकसित हुआ, उसमें वे लगातार खतरनाक घटनाएं शामिल थीं जिसने मानव प्रजनन के लिए खतरा पैदा किया। ये पैतृक मानव आबादी पर एक गंभीर चयन दबाव होता है और शायद धमकी सिमुलेशन तंत्र को पूरी तरह से सक्रिय कर देती।"
अमेरिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए मनोचिकित्सक और सपना शोधकर्ता एलन हॉबस्न जोर देकर कहते हैं कि हालांकि, सपना देखने से धमकियों के पूरी तरह से फिर से पैदा करने की संभावना नहीं है, पर इनकी सीखने की प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है।
  जब आप जागे होते हैं तो सामग्री जुड़ जाती है और सोने के दौरान स्वप्न चेतना के स्वत: कार्यक्रम के साथ एकीकृत हो जाती है। यह उस प्रेक्षण के साथ काम करता है कि दिन के समय में सीखना रात में सोने के समय सुदृढ़ हो जाती है, जिससे वह घटना होती है जिसमें लोग उन तथ्यों को दिन में उस समय की तुलना में बेहतर याद रखते हैं जब उन्होंने उनको सीखा है।

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