11.1.17

पेट के रोगों के घरेलू उपचार


   कमजोर पाचन तंत्र के कारण न सिर्फ भोजन पचने में परेशानी आती है, बल्कि शरीर का प्रतिरोध सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। शरीर में विजातीय तत्वों की मात्रा बढ़ने से शरीर कई अनियमितताओं का शिकार होने लगता है। यहाँ पाचन तंत्र के विकारों की जानकारी और उपचार पर लिखते हैं-
गैस की समस्या
जिनका पाचन अक्सर खराब रहता है और जो कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमें गैस की समस्या अधिक होती है। आरामतलब जीवनशैली व खान-पान की गलत आदतों के कारण यह समस्या अधिक बढ़ रही है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ भी शरीर में उन एंजाइम का स्तर कम हो जाता है, जो भोजन पचाने में मदद करते हैं। लंबे समय तक एसिडिटी से अल्सर का खतरा बढ़ता है।
कारण: वसा और प्रोटीनयुक्त भोजन की तुलना में काबरेहाइड्रेटयुक्त भोजन ज्यादा गैस बनाता है। कब्ज होने पर चूंकि भोजन अधिक देर तक बड़ी आंत में रहता है, इसलिए एसिड इसोफैगस में चला जाता है। तनाव भी एसिडिटी का एक बड़ा कारण है।
कैसे बचें: -शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से व्यायाम करें। -खाने को धीरे-धीरे और चबा कर खाएं। -दिन में तीन बार अधिक खाने की बजाए कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर खाएं।
क्या खाएं: -मौसमी फल और सब्जियां। -ऐसा भोजन जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक हो। -संतुलित और ताजा भोजन। रात्रि में गरिष्ठ व कम वसायुक्त आहार करें।
घरेलू उपचार : -लहसुन की तीन कलियों और अदरक के कुछ टुकड़ो को खाली पेट खाएं। -प्रतिदिन खाने के साथ टमाटर खाएं। टमाटर सेंधा नमक के साथ खाएं।
*खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं। खासतौर पर जिन्हें कब्ज रहता है, वे गुनगना पानी पिएं। -इलायची के पाउडर को एक गिलास पानी में उबालें। इसे खाना खाने से पहले गुनगुना पिएं।


गैस्ट्रो इसोफैगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी)
पेट की अंदरूनी परत भोजन को पचाने के लिए कई पाचक उत्पाद बनाती है, जिसमें से एक स्टमक एसिड है। कई लोगों में लोअर इसोफैगियल स्फिंक्टर (एलईएस) ठीक से बंद नहीं होता, जिससे पेट का एसिड बह कर वापस इसोफैगस में चला जाता है। इससे छाती में दर्द और तेज जलन होती है। इसे ही जीईआरडी कहते हैं। हार्ट बर्न जीईआरडी का सबसे सामान्य लक्षण है।
इसमें छाती की हड्डियों के पीछे जलन होती है और वहां से ऊपर गले तक उठती है। मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है। कई बार खाना खाने के बाद यह समस्या और बढ़ जाती है।
कारण: -शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, नियत समय पर खाना न खाना और मोटापा -गर्भावस्था और तंग कपड़े पहनने से पेट पर पड़ने वाला दबाव -मसालेदार भोजन, जूस, सॉस, खट्टे फल, लहसुन, टमाटर आदि का अधिक मात्रा में सेवन -धूम्रपान और तनाव -हर्निया, स्क्लेरोडर्मा के अलावा कुछ दवाएं जैसे एस्प्रिन, नींद की गोलियां और दर्द निवारक दवाओं का सेवन।
कैसे बचें: प्रतिदिन सुबह एक गिलास कुनकुना पानी अवश्य पिएं। भोजन के बीच लंबा अंतराल न रखें। तंग कपड़े न पहनें। रात में सोने से 2 घंटे पहले भोजन कर लें।
क्या खाएं: फलियां, कद्दू, गोभी, गाजर और लौकी जैसी सब्जियों का सेवन करें। भोजन में केला और तरबूज जरूर शामिल करें। तरबूज का रस एसिडिटी दूर करने में कारगर है। गुड़, नींबू, केला, बादाम और दही इसमें राहत देते हैं।
पेट फूलना
पेट फूलने के कई कारण हैं। गैस, बड़ी आंत का कैंसर, हर्निया पेट को फुलाते हैं। ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है, जो बेचैनी भी उत्पन्न करता है। कई बार गर्म मौसम और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण भी पेट में तरल रुक जाता है, जो पेट फुलाता है। नमक और कई दवाएं भी तरल पदार्थो को रोक कर रखती हैं, जो पेट को फुलाता है।
कैसे बचें: पोषक भोजन खाएं, जिसमें चीनी की मात्रा कम हो। ढेर सारा पानी पिएं। नमक का सेवन कम करें। खाने के तुरंत बाद न सोएं।
हमारा अच्छा स्वास्थ्य केवल पौष्टिक भोजन खाने पर निर्भर नहीं करता। यह इस पर भी निर्भर करता है कि हमारा शरीर उस भोजन को कितना पचा पाता है। अच्छी सेहत के लिए चुस्त-दुरुस्त पाचन तंत्र का होना जरूरी है। पाचन वह प्रकिया है, जिसके द्वारा शरीर ग्रहण किए गए भोजन और पेय पदार्थ को ऊर्जा में बदलता है। पाचन तंत्र के ठीक काम न करने पर भोजन बिना पचा रह जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालता है।
कब्ज
  कब्ज यानी बड़ी आंत से शरीर के बाहर मल निकालने में कठिनाई आना। यह समस्या गंभीर होकर बड़ी आंत को अवरुद्ध कर जीवन के लिए घातक हो सकती है। कब्ज एक लक्षण है, जिसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे खानपान की गलत आदतें, हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट आदि। उपचार के लिए जरूरी है पहले कारण जानें। लगातार तीन महीने तक कब्ज को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) कहते हैं।
कारण: -डाइटिंग -शरीर द्वारा मल त्यागने के संकेत को नजरअंदाज करना -हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां -थाइरॉयड हार्मोन की कमी या अधिकता से रक्त में कैल्शियम का बढ़ना -पीरियड्स या गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन का स्तर बढ़ना -मधुमेह, स्क्लेरोडर्मा और कई कैंसर -आंत की मांसपेशियों का कमजोर पड़ना।
कैसे बचें: सर्वागासन, उत्तानपादासन, भुजंगासन जैसे आसन पाचन संबंधी विकारों को दूर करते हैं। प्रतिदिन आहार में नीबू का रस शामिल करें। इससे लिवर स्वस्थ रहता है। बायोलॉजिकल क्लॉक को दुरुस्त रखने के लिए निश्चित समय पर खाना खाएं। तनावमुक्त रहें।
क्या खाएं: ज्यादा पानी पिएं। खाने में फाइबर अधिक लें। प्रोबायोटिक भोजन जैसे दही नियमित खाएं। लहसुन, केला अमरूद, अंगूर व पपीता खाएं।
घरेलू उपचार : -20 किशमिश रात भर के लिए पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट किशमिशों को चबा कर खाएं। उस पानी को भी पी लें। -सोने से पूर्व एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच ईसबगोल घोल कर पिएं। कब्ज अधिक होने पर गुनगुने दूध में दो चम्मच अरंडी का तेल मिला कर पिएं।


महत्वपूर्ण तथ्य-
*भारत में करीब 32% लोग एसिडिटी से पीड़ित हैं।
*जीईआरडी के लगभग 10% मामले ही गंभीर होते हैं, बाकी 90% से जीवनशैली में परिवर्तन लाकर छुटकारा पाया जा सकता है।
*मानव शरीर को अधिक वसायुक्त भोजन पचाने में 6 घंटे और काबरेहाइड्रेट को पचाने में 2 घंटे लगते हैं।
*उम्रदराज लोगों में युवाओं के मुकाबले कब्ज की समस्या पांच गुना होती है। बैक्टीरिया का संतुलन ना गड़बड़ाने दें हमारे पाचन तंत्र में 500 से अधिक तरह के बैक्टीरिया होते हैं, जो आहारनाल को स्वस्थ रखते हैं। तनाव, विभिन्न बीमारियां, एंटिबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल, अस्वस्थ जीवनशैली, उम्र का बढ़ना, अधिक यात्रा करना व नींद की कमी आदि कई कारण ऐसे हैं, जो शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिससे शरीर में बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं।
*एक अनुमान के अनुसार महानगरों में आरामतलबी की जिंदगी बिताने के कारण करीब 30 प्रतिशत लोगों का पेट साफ नहीं रहता।
*कब्ज की समस्या महिलाओं में अधिक होती है।
*हाल ही में हुए एक अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि जो लोग लगातार एसिडिटी कम करने वाली दवाएं लेते हैं, उनमें कूल्हे में फ्रैक्चर की आशंका 25% बढ़ जाती है।
अच्छे पाचन के लिए इन्हें कहें ना
*अधिक तले-भुने व मसालेदार भोजन का सेवन कम करें। जंक फूड व स्ट्रीट फूड आसानी से पचता नहीं है। इन्हें ढंग से चबा कर नहीं खाया जाता, जिससे पेट पर दबाव बना रहता है।
*अधिक धूम्रपान भी पाचन तंत्र में गड़बड़ी करता है।
*अधिक मसालेदार, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, टमाटर, सॉस, अचार, चटनी, सिरका आदि।
*अत्यधिक कॉफी, काबरेनेटेड ड्रिंक्स, चाय और अल्कोहल का सेवन कम करें। ये शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं।

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