1.12.16

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी: Shankpushpi Makes sharp mind


शंखपुष्पी के गुण:-
यह दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन (chemical) ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति (memory power), कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली (increase the sweetness in voice), मंगलकारी , अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट (destroying the mental problems) करने वाली होती है l
परिचय : —-मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l
फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (1) सफ़ेद फूल वाली (2) लाल फूल (red flowers) वाली और (3) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है |
दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी:–प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी एक्ससी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l
इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l
 शुक्रमेह :—-शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च (black pepper powder) आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानीके साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l
(3) ज्वर में प्रलाप :—तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थितिमें शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभहोता है और नींद भी अच्छी आती है l
 उच्च रक्तचाप :–उच्च रक्तचाप के रोगी ] को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l
 बिस्तर में पेशाब :—-कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत (habit) नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहदमें मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें l

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा आज शनिवार (03-12-2016) के चर्चा मंच

"करने मलाल निकले" (चर्चा अंक-2545)

पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'