31.12.16

लकवा रोग की जानकारी और घरेलू उपचार : Paralysis disease information and home remedies




लकवा (Paralysis)
मस्तिष्क की धमनी में किसी रुकावट के कारण उसके जिस भाग को खून नहीं मिल पाता है मस्तिष्क का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है अर्थात मस्तिष्क का वह भाग शरीर के जिन अंगों को अपना आदेश नहीं भेज पाता वे अंग हिलडुल नहीं सकते और मस्तिष्क (दिमाग) का बायां भाग शरीर के दाएं अंगों पर तथा मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं अंगों पर नियंत्रण रखता है। यह स्नायुविक रोग है तथा इसका संबध रीढ़ की हड्डी से भी है।
लकवा रोग निम्नलिखित प्रकार का होता है-
निम्नांग का लकवा- इस प्रकार के लकवा रोग में शरीर के नीचे का भाग अर्थात कमर से नीचे का भाग काम करना बंद कर देता है। इस रोग के कारण रोगी के पैर तथा पैरों की उंगुलियां अपना कार्य करना बंद कर देती हैं।
अर्द्धाग का लकवा- इस प्रकार के लकवा रोग में शरीर का आधा भाग कार्य करना बंद कर देता है अर्थात शरीर का दायां या बायां भाग कार्य करना बंद कर देता है।
एकांग का लकवा- इस प्रकार के लकवा रोग में मनुष्य के शरीर का केवल एक हाथ या एक पैर अपना कार्य करना बंद कर देता है।
पूर्णांग का लकवा- इस लकवा रोग के कारण रोगी के दोनों हाथ या दोनों पैर कार्य करना बंद कर देते हैं।


मेरूमज्जा-प्रदाहजन्य लकवा- इस लकवा रोग के कारण शरीर का मेरूमज्जा भाग कार्य करना बंद कर देता है। यह रोग अधिक सैक्स क्रिया करके वीर्य को नष्ट करने के कारण होता है।
मुखमंडल का लकवा- इस रोग के कारण रोगी के मुंह का एक भाग टेढ़ा हो जाता है जिसके कारण मुंह का एक ओर का कोना नीचे दिखने लगता है और एक तरफ का गाल ढीला हो जाता है। इस रोग से पीड़ित रोगी के मुंह से अपने आप ही थूक गिरता रहता है।
जीभ का लकवा- इस रोग से पीड़ित रोगी की जीभ में लकवा मार जाता है और रोगी के मुंह से शब्दों का उच्चारण सही तरह से नहीं निकलता है। रोगी की जीभ अकड़ जाती है और रोगी व्यक्ति को बोलने में परेशानी होने लगती है तथा रोगी बोलते समय तुतलाने लगता है।
स्वरयंत्र का लकवा- इस रोग के कारण रोगी के गले के अन्दर के स्वर यंत्र में लकवा मार जाता है जिसके कारण रोगी व्यक्ति की बोलने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
सीसाजन्य लकवा- इस रोग से पीड़ित रोगी के मसूढ़ों के किनारे पर एक नीली लकीर पड़ जाती है। रोगी का दाहिना हाथ या फिर दोनों हाथ नीचे की ओर लटक जाते हैं, रोगी की कलाई की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं तथा कलाई टेढ़ी हो जाती हैं और अन्दर की ओर मुड़ जाती हैं। रोगी की बांह और पीठ की मांसपेशियां भी रोगग्रस्त हो जाती हैं।
लकवा रोग का लक्षण-
लकवा रोग से पीड़ित रोगी के शरीर का एक या अनेकों अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं। इस रोग का प्रभाव अचानक होता है लेकिन लकवा रोग के शरीर में होने की शुरुआत पहले से ही हो जाती है। लकवा रोग से पीड़ित रोगी के बायें अंग में यदि लकवा मार गया हो तो वह बहुत अधिक खतरनाक होता है क्योंकि इसके कारण रोगी के हृदय की गति बंद हो सकती है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है। रोगी के जिस अंग में लकवे का प्रभाव है, उस अंग में चूंटी काटने से उसे कुछ महसूस होता है तो उसका यह रोग मामूली से उपचार से ठीक हो सकता है।
लकवा रोग होने के और भी कुछ लक्षण है जो इस प्रकार है-
*रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
*लकवा रोग के हो जाने के कारण शरीर का कोई भी भाग झनझनाने लगता है तथा उसमें खुजलाहट होने लगती है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
*इस रोग से ग्रस्त रोगी के मन में किसी कार्य को करने के प्रति उत्साह नहीं रहता है।
*शरीर के जिस भाग में लकवे का प्रभाव होता है उस तरफ की नाक के भाग में खुजली होती है।
साध्य लकवा रोग होने के लक्षण-


*इस रोग के कारण रोगी की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है और रोगी जिस भोजन का सेवन करता है वह सही तरीके से नहीं पचता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी को और भी कई अन्य रोग हो जाते हैं।
*इस रोग के कारण शरीर के कई अंग दुबले-पतले हो जाते हैं।
असाध्य लकवा रोग होने के लक्षण इस प्रकार हैं-
*असाध्य लकवा रोग के कारण रोगी के मुहं, नाक तथा आंख से पानी निकलता रहता है।
*असाध्य लकवा रोग के कारण रोगी को देखने, सुनने तथा किसी चीज से स्पर्श करने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
*असाध्य लकवा रोग गर्भवती स्त्री, छोटे बच्चे तथा बूढ़े व्यक्ति को होता है और इस रोग के कारण रोगी की शक्ति काफी कम हो जाती है।
*इस प्रकार के लकवे के कारण कई शरीर के अंगों के रंग बदल जाते हैं तथा वह अंग कमजोर हो जाते हैं।
*असाध्य लकवा रोग से प्रभावित अंगों पर सुई चुभाने या नोचने पर रोगी व्यक्ति को कुछ भी महसूस नहीं होता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी की ज्ञानशक्ति तथा काम करने की क्रिया शक्ति कम हो जाती है।
*असाध्य लकवा रोग से पीड़ित रोगी को और भी कई अन्य रोग हो जाते हैं।
लकवा रोग होने के निम्नलिखित कारण हैं-
*मस्तिष्क तथा रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज चोट लग जाने के कारण लकवा रोग हो सकता है।
*सिर में किसी बीमारी के कारण तेज दर्द होने से लकवा रोग हो सकता है।
*दिमाग से सम्बंधित अनेक बीमारियों के हो जाने के कारण भी लकवा रोग हो सकता है।
*अत्यधिक नशीली दवाईयों के सेवन करने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
*बहुत अधिक मानसिक कार्य करने के कारण लकवा रोग हो सकता है।
*अचानक किसी तरह का सदमा लग जाना, जिसके कारण रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक कष्ट होता है और उसे लकवा रोग हो जाता है।


*गलत तरीके के भोजन का सेवन करने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
*कोई अनुचित सैक्स संबन्धी कार्य करके वीर्य अधिक नष्ट करने के कारण से लकवा रोग हो जाता है।
*अधिक शराब तथा धूम्रपान करने के कारण भी लकवा रोग हो जाता है।
*अधिक पढ़ने-लिखने का कार्य करने तथा मानसिक तनाव अधिक होने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
लकवा रोग के घरेलू उपचार-
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपना उपचार कराते समय अपना मानसिक तनाव दूर कर देना चाहिए तथा शारीरिक रूप से आराम करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को योगनिद्रा का उपयोग करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को पूर्ण रूप से व्यायाम करना चाहिए जिसके फलस्वरूप कई बार दबी हुई नस तथा नाड़ियां व्यायाम करने से उभर आती हैं और वे अंग जो लकवे से प्रभावित होते हैं वे ठीक हो जाते हैं।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए। इसके बाद रोगी का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से कराना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भाप-स्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद *धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
*रोगी व्यक्ति का रक्तचाप अधिक बढ़ गया हो तो भी रोगी को गर्म चीजों को सेवन नहीं करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए अंगूर, नाशपाती तथा सेब के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को कुछ सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से *अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।

*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए उसके पेट पर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए तथा उसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में लकवा रोग ठीक हो जाता है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त पीले रंग की बोतल का ठंडा पानी दिन में कम से कम आधा कप 4-5 बार पीना चाहिए तथा लकवे से प्रभावित अंग पर कुछ देर के लिए लाल रंग का प्रकाश डालना चाहिए और उस पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से रोगी का लकवा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

26.12.16

बेदाग गोरेपन के लिए आसान उपाय :Immaculate easy solution for fairness



   क्‍या आप अपने चेहरे को गोरा बनाने के लिये विभिन्न बाजारू उत्‍पादों का प्रयोग करते हैं? अगर ऐसा है तो, अब आपको ऐसा करने की आवश्‍यकता नहीं है क्‍योंकि हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्‍खे और उपाय बताएंगे जिनसे आप गोरापन बरकरार रख सकते है।
सर्दियों में हमारी त्वचा अतिरिक्त देखभाल चाहती है लेकिन इसके लिए ब्यूटी पार्लर जाने का न तो अधिक समय होता है और न ही बजट। फिर त्योहारों और शादियों के मौसम में त्वचा दमके ऐसी ख्वाहिश भला किसकी नहीं होगी। तो अगर आप भी इस मौसम में अपनी त्वचा का खास ध्यान रखना चाहती हैं तो क्यों न अपने घर पर ही कुछ ऐसे नुस्खे ट्राइ करें जिससे आपकी त्वचा भी दमके और जेब भी ज्यादा ढीली न हो।
चेहरे से ब्लैकहेड्स और डेड सेल हटाने के लिए चेहरे की स्क्रबिंग बहुत जरूरी है। ऐसे में बेसन से आप अपनी जरूरत के हिसाब से मनचाहा स्क्रब तैयार कर सकती हैं। अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो बेसन में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर हल्की और स‌र्कुलर मसाज करें। वहीं अगर आपकी त्वचा ड्राइ है तो बेसन में थोड़ी मलाई मिलाकर चेहरे की स्क्रबिंग करें। झुर्रियों और झा‌इयों से छुटकारे के लिए बेसन में सेब का रस मिलाकर स्क्र
हल्दी पैक
त्वचा की रंगत को निखारने के लिए हल्दी एक अच्छा तरीका है। पेस्ट बनाने के लिए हल्दी और बेसन या फिर आटे का प्रयोग करें। हल्दी में ताजी मलाई, दूध और आटा मिला कर गाढा पेस्ट बनाएं, इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 10 मिनट लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।बिंग करें। संतरे के गूदे से भी चेहरे की स्क्रबिंग कर सकती हैं।
*गाजर का जूस आधा गिलास खाली पेट सुबह लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है।
गुलाब जल
यह आपके चेहरे को टोन कर के पोषण पहुंचाएगा। रोज वॉटर को मिल्‍क के साथ लगाएं। अच्‍छा होगा कि आप इसे रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। इससे त्‍वचा ब्राइट बनेगी।
चिरौंजी का पैक


गोरी रंगत के लिए मजीठ, हल्दी, चिरौंजी का पाउडर लें इसमें थोड़ा सा शहद, नींबू और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बांहों पर लगाएं और एक घंटे के बाद चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का रंग निखर जाएगा।
चंदन
गोरी रंगत देने के अलावा यह एलर्जी और पिंपल को भी दूर करता है। पेस्ट बनाने के लिए चंदन पाउडर में 1 चम्मच नींबू और टमाटर का रस मिलाएं और पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन में अच्छी तरह से लगाकर थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से धो लें। पेट को हमेशा ठीक रखें, कब्ज न रहने दें।
हनी आल्मड स्क्रब
बादाम भी रंगत निखारने का काम करता है। रात को 10 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उसे छील कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में थोड़ा सा शहद मिलाएं और इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाकर स्क्रब करें।
*अधिक से अधिक पानी पीएं।
बेसन का उबटन
बेसन 2 चम्मच, सरसों का तेल 1 चम्मच और थोड़ा सा दूध मिला कर पेस्ट बना लें। पूरे शरीर पर इस उबटन को लगा लें। कुछ देर बाद हाथ से रगड कर छुडाएं और स्नान करें। त्वचा गोरी व मुलायम हो जाएगी।
मसूर दाल पैक
मसूर की दाल का पाउडर लें इसमें अंडे की जर्दी, नीबू का रस व कच्चा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। रोज इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं, सूखने पर ठंडे पानी से धो लें। चेहरे का रंग निखर जाएगा।
*चाय कॉफी का सेवन कम करें।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा और पानी मिला कर पेस्‍ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट के लिये लगाएं। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाने से पहले मुंह को फेस वॉश से धो लें।
रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सोंफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है।
*चेहरे को बेदाग बनाने और सर्दियों में निखार के लिए कुछ फलों और घरेलू चीजों का उपयोग कर सकते हैं। आलू उबालकर उसमें नींबू या आलूबुखारे के रस को मिलाकर अपना फ्रूट पैक तैयार कर लें। इसकी मसाज से चेहरे के दाग कम होंगे और त्वचा का रंग निखरेगा।
एलोवेरा जैल
ऐलोवेरा जैल आपकी त्‍वचा को गोरा, साफ और नम बनाएगा। इसे चेहरे और गर्दन पर 30 मिनट के लिये लगाएं।
आम का छिलका
थोड़े से आम के छिलको को दूध के साथ पीस कर पेस्‍ट बना लें। फिर इसे चेहरे और गर्दन पर 15 मिनट तक लगाने के बाद पानी से धो लें। इससे सन टैन मिट जाएगा और चेहरा गोरा बन जाएगा।


*एक बाल्टी गुनगुने पानी में कुछ ठण्डे या दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है।
अनार का रस फायदेमंद
अगर आपकी त्वचा ड्राइ या नॉर्मल है तो दो छोटे चम्मच अनार के रस व चुटकी भर हल्की को मलाई में मिलाकर फेंट लें। इसे चेहरे पर लगाकर 15 से 20 मिनट तक छोड़ दें। फिर पानी से साफ करें। त्वचा यकीनन दमकेगी।
दूध-केला
पके हुए केले को थोड़े से दूध के साथ पेस्‍ट बना कर चेहरे पर लगाएं। 20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें।
तैलीय त्वचा के लिए ऑरेंज पैक
ऑयली स्किन के लिए ऑरेंज पैक अच्छा ऑप्शन है। संतरे के छिलकों को सुखाकर मिक्सर में पीस लें। इस पाउडर को गुलाबजल के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर छोड़ दें। अब चेहरा धोकर हल्का मॉश्चुयराइजर लगाएं।
आंवले का मुरब्बा रोज खाने से दो-तीन महीने में ही रंग निखरने लगता है।
सूरजमुखी बीज
थोड़े से सूरजमुखी बीज को रातभर दूध में भिगो कर रख दें। फिर सुबह इसमें हल्‍दी और केसर के कुछ धागे डाल कर पेस्‍ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा गोरा बन जाएगा।

16.12.16

पेट की फालतू चर्बी से कुछ ही दिन मे मुक्ति पाएँ ::Get rid of the surplus fat in the stomach in a few days

   

अगर हमारे शरीर पर अतिरिक्त  चर्बी या एक्स्ट्रा फेट होती है तो इससे हमारे पूरे शरीर की लुक ही खराब हो जाती है और यह न केवल आपके शरीर की सुंदरता को खराब करती है बल्कि बहुत सारी बीमारियों को भी बुलावा देती है|आज के समय में हमारी लगभग सभी बीमारियों का कारण हमारा मोटापा ही है क्योकि आप ये भली भांति जानते है कि सभी बीमारियों की जड़ हमारा पेट होता है और अगर हमारा पेट मोटा होगा या उस पर चर्बी अधिक होगी तो विभिन्न प्रकार की बीमारिया जन्म लेती है| इसीलिए हमे हमारे पेट की चर्बी का तुरन्त इलाज करना चाहिए जिससे हम सब बीमारियों से बच सके |
    समझने वाली बात है कि हमारे पेट के ऊपर चर्बी या मोटापे का मुख्य कारण है शारीरिक काम का कम होना है आज के समय में हमारा लगभग सब प्रकार का काम मशीनों से हो जाता है तो शरीरिक गतिविधि बहुत ही कम हो गयी है अगर हम खुद को फिट रखना चाहते है तो हमे सक्रिय रहना चाहिए और हर रोज व्यायाम करना चाहिए जिससे की हम फिट रह सके I
    व्यायाम करने के साथ साथ हमे अपने खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए जंक फ़ूड का सेवन नहीं  करना चाहिए और हर रोज 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए जिससे की हम हमेशा फिट रह सके और सभी प्रकार की बीमारियों से बचे रहे| 
हम बताते हैं  एक अचूक असर नुस्खे के बारे में जो आपके पेट की चर्बी को समाप्त  कर देगा| 


इस औषधि को तैयार करने मैं हम जिस सामग्री का प्रयोग कर रहे है सभी  आपको आसानी से अपने घर पर ही मिल जाएगी आपको  बाहर जाने की आवश्यकता नही है
सामग्री- 
1. शहद एक टेबल स्पून
2. धनियाँ एक पाव
3. अदरक का पेस्ट एक टेबल स्पून
4. खीरा एक
5. एलो वेरा जैल एक टेबल स्पून
6. निम्बू का रस एक टेबल स्पून
7. पानी गिलास
तैयार करने की विधि
इस औषधि को तैयार करना बिलकुल ही आसान है आपको करना बस इतना है की सबसे पहले सभी सामग्री को लेकर अच्छी तरह से साफ़ कर ले अब कोई ब्लेंडर ले या आप मिक्सी का यूज़ भी कर सकते है अब सारी सामग्री को ब्लेंडर में डाल कर ब्लेंड कर लें | अब आपकी औषधि तैयार है आपके सेवन करने के लिए I
सेवन विधि- 
इस ड्रिंक का सेवन आपको रात को सोने से पहले करना है

12.12.16

हरी मटर खाने के स्वास्थ्य और सौन्दर्य लाभ: Health and beauty benefits of eating green peas

   

सर्दियां आते ही हरी सब्जियों का मौसम शुरू हो जाता है जो पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर होती है। हरी फलियों और हरी मटर की पैदावार सर्दियों में सबसे ज्‍यादा होती है। कई लोगों को भ्रम होता है कि मटर में पोषक तत्‍व नहीं होते है लेकिन यह गलत है। हरी मटर, पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर होती है
हरी मटर काफी स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों में से एक है और यह कच्चा खाने में भी काफी स्वादिष्ट लगते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंटस, विटामिन्स, मिनरल्स (anti-oxidants, vitamins, minerals) और अन्य कई स्वास्थ्यवर्धक तत्व भरे हुए हैं जो रोगों का निदान करते हैं और आपके स्वास्थ्य में निखार लाते हैं। आप हमेशा ही स्वाद तथा पोषक मूल्य बढ़ाने के लिए अपने भोजन में हरे मटर डाल सकती हैं, पर इसे कच्चा खाना और भी ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक साबित होता है। जब मटर ताज़े और कच्चे होते हैं, तब ये ज्यादा स्वास्थ्यकर होते हैं। अतः आप इनका कच्चा सेवन करके भी स्वस्थ रह सकते हैं
शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाता है



मटर शरीर में मौजूद आयरन, जिंक, मैगनीज और तांबा शरीर को बीमारियों से बचाता है। मटर में एंटीआॅक्सीडेंट होता है। जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ताकि शरीर बीमारियों से मुक्त रह सके
मटर वजन निंयत्रित करता है
मटर में मौजूद गुण वजन को नियंत्रित करते हैं। मटर में लो कैलोरी और लो फैट होता है। हरी मटर में हाई फाइबर होता है जो वजन को बढ़ने से रोकता है। यदि वजन कम करना चाहते हैं तो अपने भोजन में हरी मटर का इस्तेमाल अधिक से अधिक करें।
आजकल कई डायटीशियन भी फूड चार्ट में हरी मटर को शामिल करने की सलाह देते है। एक शोध में पता चला है कि हरी मटर में काउमेस्‍ट्रोल होता है जो कि एक प्रकार का फाइटोन्‍यूट्रीयन्‍ट होता है, अगर शरीर में इसकी संतुलित मात्रा होती है तो कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि अगर आप हर दिन हरी मटर का सेवन करें तो पेट का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
बढ़ाए चेहरे की चमक
मटर का प्रयोग चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यह प्राकृतिक स्क्रब है। पानी में थोड़े से मटरों को उबाल लें और फिर उन्हें कूट पीसकर उनका लेप यानि पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर रगडें और 15 से 20 मिनट के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। यह चेहरे की खोई हुई चमक को वापस लाता है। और चेहरे की गंदगी को दूर करता है। मटर का उबटन चेहरे से झांई और धब्बों को मिटाता है।
दूध में भुनी हुई मटर के दानों और नारंगी के छिलकों को पीसकर उबटन तैयार करें और इसे चेहरे पर मलें। यह आपके रंग और रूप को संवारेगा।
भूल जाने की बीमारी को घटाएं :
कई लोगों को अल्‍जाइमर की समस्‍या होती है, ऐसे में वह रोजमर्रा की बातें भी भूल जाते है। हरी मटर के नियमित सेवन से यह समस्‍या दूर हो जाती है। हरी मटर को खाने से ऑस्ट्रियोपोरोसिस और ब्रोंकाइटिस आदि से लड़ने में सहायता मिलती है।
दिल की देखभाल करें :
हरी मटर के स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक गुणों में एक गुण यह भी है कि इसके सेवन से हार्ट की बीमरियां कम होती है। इसमें एंटी - इनफ्लैमेट्टरी कम्‍पाउंड होते है और एंटी - ऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होता है। इन दोनों ही कम्‍पाउंड के कॉम्‍बीनेशन से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।



ज्यादा उम्र  मे भी जवां रखे :
हरी मटर में भरपूर मात्रा में एंटी - ऑक्‍सीडेंट होते है जो शरीर को चुस्‍त - दुरूस्‍त रखने में सहायक होते है। इसके अलावा, हरी मटर में फ्लैवानॉड्स, फाइटोन्‍यूटिंस, कैरोटिन आदि होते है जो शरीर को हमेशा यंग और एनर्जी से भरपूर बनाएं रखता है। ये वाकई में हरी मटर का सबसे दिलचस्‍प गुण है।
गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद
मटर में मौजूद फालोक एसिड जो पेट में भू्रणं की समस्याओं को दूर करता है साथ ही गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषण देता है। गर्भवती महिलाओं को अपने खाने में हरी मटर को जरूर शामिल करना चाहिए।
ब्‍लड़ शुगर लेवल को कंट्रोल में करना :
हरी मटर में उच्‍च फाइबर और प्रोटीन तत्‍व होते है जो शरीर में ब्‍लड़ सुगर की मात्रा को नियंत्रित करते है।
दे सूजन और जलन में राहत
सर्दियों के समय में हाथों में होने वाली सूजन में मटर के काढ़े को हल्का गरम करके उसमें थोडी देर के लिए उंगलियों को डालकर रखने से सूजन कम होती है।
यदि सूजन शरीर में है तो मटर के उबले हुए पानी से नहाने से शरीर की सूजन खत्म होती है।
यदि किसी वजह से त्वचा जल गई हो तो हरी मटर का पेस्ट लगा लें। यह तुरंत राहत देती है।


1.12.16

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी: Shankpushpi Makes sharp mind


शंखपुष्पी के गुण:-
यह दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन (chemical) ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति (memory power), कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली (increase the sweetness in voice), मंगलकारी , अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट (destroying the mental problems) करने वाली होती है l
परिचय : —-मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l
फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (1) सफ़ेद फूल वाली (2) लाल फूल (red flowers) वाली और (3) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है |
दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी:–प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी एक्ससी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l
इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l
   
शुक्रमेह :—-शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च (black pepper powder) आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानीके साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l
(3) ज्वर में प्रलाप :—तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थितिमें शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभहोता है और नींद भी अच्छी आती है l
 उच्च रक्तचाप :–उच्च रक्तचाप के रोगी ] को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l
 बिस्तर में पेशाब :—-कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत (habit) नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहदमें मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें l