28.10.16

ब्लड शुगर (Diabetes) और मोटापे का काल है आक का पत्ता



   इसके पत्ते के इस्तेमाल से आप सिर्फ 7 दिन से 3 महीने के भीतर शुगर से मुक्त हो सकते हैं यह बिलकुल सच है कि आक का पत्ता मोटापे और डायबिटीज का काल बन सकता है बहुत सारे लोग इस उपाय से फायदा उठा चुके है तो देर किस बात की है आप भी इस आक के पत्ते या आकडे के पत्ते का प्रयोग करके इससे फायदा उठा सकते है आप इस आक के पत्ते का प्रयोग करके 5 दिन से लेकर 2 महीने के अंदर ब्लड शुगर को कण्ट्रोल कर सकते है यह प्रयोग न केवल शुगर बल्कि मोटापे को कम करने को लेकर भी काफी असरदार है कुछ लोगो ने तो इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में फायदा पाया है
प्रयोग की विधि :-
आपको करना बस इतना है की इस आकडे के पत्ते को लेकर उल्टा करके यानि की खुरदरा भाग पैर के तलवे पर लपेटकर ऊपर से मोजा पहन ले आप पूरा दिन इसको ऐसे ही लगा रहने दे और रात को सोते समय इसको निकाल दे थोड़ी देर अपने पैर को हवा लगाकर फिर दोबारा दूसरा पत्ता लेकर बांध ले कुछ ही दिनों में आपका शुगर लेवल कम हो जायेगा यह पोधा आपको हर जगह आसानी से मिल जायेगा इस पोधे के प्रयोग करने से आपका मोटाप भी कम होगा
सावधानी :-
इस प्रयोग को करने में एक सावधानी बरतनी है जब भी आप आकडे के पत्ते को तोड़े तो इससे दूध निकलता है आप उसको हाथ न लगाये क्योकि वो दूध अगर आँख में चला जाता है तो नुकसान करता है तो आप यह प्रयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे|
तो मित्रों , आप भी इस प्रयोग को आज से ही शुरू करे और इससे फायदा उठाये लेकिन  आप इसके साथ साथ अपने खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखे क्योकि किसी भी रोग को दूर करने में इनका अहम रोल होता है आपको स्वस्थ रखने में |

20.10.16

मूत्र रोगों की रामबाण होम्योपैथिक चिकित्सा



इस लेख मे मूत्र रोग और इसके होमियोपैथिक चिकित्सा निदान पर चर्चा करेंगे।
मूत्र का रोग भी हो सकता है, ऐसा कोई निरोग व्यक्ति नही सोच सकता है, लेकिन जिसे यह रोग हो जाता है वहीं काफी परेशान हो जाता है। मूत्र विकार के अंतर्गत कई रोग आते हैं जिनमें मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना, मूत्रकृच्छ और बहुमूत्र प्रमुख हैं| यह सभी रोग बड़े कष्टदायी होते हैं। यदि इनका यथाशीघ्र उपचार न किया जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं। भागदौड की जिन्दगी जीनेवाले लोगों में मूत्र रोग की समस्या होती है। जीवन शैली से यह बीमारी जुड़ गयी है। इसके कारण न सिर्फ मूत्र रोग बल्कि नपुंसकता की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि यौन मार्ग की सफाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सफाई के अभाव में संक्रमण होने की संभावना रहती है। ऐसे रोगी जिनके मूत्र मार्ग में 5 मि.मी.से कम आकार की पथरी कोई परेशानी नहीं कर रही है तो चिंता करने की बात नहीं है। ऐसे लोगों को 24 घंटे में इतना पानी पीना चाहिए जिससे कि दो-तीन लीटर पेशाब हो सके।
कारण:
यदि मूत्राशय में पेशाब इकट्ठा होने के बाद किसी रुकावट की वजह से बाहर न निकले तो उसे मूत्रावरोध कहते हैं| स्त्रियों में किसी बाहरी चीज के कारण तथा पुरुषों में सूजाक, गरमी आदि से मूत्राशय एवं मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे पेशाब रुक जाता है| वृद्ध पुरुषों की पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट ग्लैंड) बढ़ जाती है जिसके कारण उनका मूत्र रुक जाता है|
मूत्रकृच्छ में पेशाब करते समय दर्द होता है| जब मूत्राशय में दर्द उत्पन्न होता है तो पेशाब रुक जाता है| इसी प्रकार हिस्टीरिया (स्त्री रोग), चिन्ता, सिर में चोट लग जाना, आमाशय का विकार, खराब पीना, आतशक, कब्ज, पौष्टिक भोजन की कमी आदि के कारण भी बार-बार पेशाब आता है|मूत्र पथ का संक्रमण समुदाय-प्राप्त हो सकता है या अस्पताल में मूत्र पथ में उपयोग किये जानेवाले उपकरण (मूत्राशय कैथीटेराइजेशन) के जरिये भी प्राप्त हो सकता है। समुदाय-प्राप्त संक्रमण बैक्टीरिया के द्वारा होते है। इनमें सबसे सामान्य जन्तु ‘ई. कोलई’ कहा जाता है। प्रतिरोधी बैक्टीरिया और फंगस (कवक) से अस्पताल-प्राप्त संक्रमण हो सकते हैं।


पहचान:
मूत्र की कमी या न निकलने से मूत्राशय फूल जाता है| रोगी को बड़ी बेचैनी होती है| मूत्र बड़े कष्ट के साथ बूंद-बूंद करके निकलता है| कब्ज, मन्दाग्नि, अधिक प्यास, पेशाब अधिक आने, मूत्र पीला होने आदि के कारण रोगी को नींद नहीं आती| वह दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाता है| कमर, जांघों तथा पिंडलियों में दर्द होता है|
निदान:
इस संक्रमण का पता करने के लिए कई प्रकार के परीक्षण हैं, इनमें सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है मूत्र का विश्लेषण करना। जाँच के लिए मूत्र का नमूना भेजा जाता है। उसमें अगर बैक्टीरिया और श्वेत रक्त कोशिकाओं की मौजूदगी से मरीज़ के संक्रमण से ग्रसित होने का पता लगता है। इसके अलावा भी कई जाँचें कराई जा सकती हैं जैसे टोटल ब्लड काउंट, इंट्रावीनस पायलोग्राम (आईवीपी), सीटी स्कैन और ब्लड कल्चर।
लक्षण अनुसार होमियोपैथिक चिकित्सा:
१. डायबिटीज-इसीपीड्स(इसमें चीनी विल्कुल नही रहती) अधिक मात्र में और जल्दी जल्दी पेशाब होने के साथ पेशाब में यूरिया निकलना, उसके साथ प्यास, शीर्णता और बेचैनी रहना। इस तरह के मूत्र सबंधी बीमारी में हेलोनियस ३०,२०० काफी लाभप्रद है।
२. रात के समय पेशाब का बढ़ना,अधिक मात्रा में पेशाब का होना, दिन में भी बार बार पेशाब का होना साथ ही अधिक प्यास का लगाना आदि लक्षणों में प्लैण्टेगो Q,2X, 3Xशक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।
३. पेशाब होने के पहले और बाद में मूत्र नली में जलन होने पर रोग कोई भी होवल्गेरिस Q पाँच बून्द दो ५० मिली पानी में मिला कर तीन समय लें, शर्तिया लाभप्रद है।
४. पेशाब रुक रुक कर होना, मानो मूत्र यंत्र में पक्षाघात हो गया हो। प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि हो गयी हो तो इसके लिए कोनायम ३० का सेवन दिन में तीन बार करने से बीमारी में राहत मिल जाती है। इस तरह की बीमारी में सेबलसेरु ३० भी काफी लाभप्रद है।
५. पेशाब करते वक्त नही बल्कि अन्य समय में मूत्राशय में जलन होने परस्टेफिसेग्रिया ३० रामबाण अौषधी का काम करता है।
६. काइल्यूरिया की बीमारी में पेशाब या तो पानी की तरह बिलकुल साफ रहता है या फिर मैदे की बुकनी की तरह खूब गाढ़ा, दूध या चाय की तरह के रंग वाला होता है। इस तरह की बीमारी में सिट्लिंजिया Q,३,६ शक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।
७. पेशाब का वेग बना रहना, रात के समय ही यह वेग ज्यादा रहना। वेग रहने पर भी मूत्राशय की शक्ति घट जाना, जिस कारण बहुत देर बैठने पर भी पेशाब का धीरे धीरे होना,पेशाब होने के बाद भी बूंद बूंद पेशाब टपका करना, आग की तरह पेशाब का गरम होना लक्षणों में केलि कार्ब ३० शक्ति की दवा का तीन बार चार चार गोली का सेवन करना चाहिए।
८. पेशाब करते समय जोर लगाना, मूत्रावरोध, जलन, मूत्राशय ग्रीवा में दर्द,मूत्र पथरी निकलने के समय भयंकर दर्द, इसमें बायोकेमिक दवा मैग्नेशिया फास १२X काफी लाभप्रद है। चार चार गोली ग्राम पानी के साथ लेने से रोग की तीव्रता में लाभदायक सिद्ध होती है।
९. बहुमूत्र रोग की प्रधान परिक्षित दवा नेट्रम फास १२X है। १०. बहुत मात्रा में पीले रंग का पेशाब का होना, छीकते या खांसते समय, या अनजाने में चलते चलते पेशाब का निकलना, पेशाब करते समय किसी के अगल बगल रहने पर पेशाब का न उतरना, ऐसी परिस्थिति में नेट्रम म्यूर ३X से उच्च शक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।


११. पेशाब में रक्तस्राव, पेशाब में लाल रंग की तलछट, पेशाब में चीनी का होना, आपेक्षिक गुरुत्व घट जाना, मूत्राशय में प्रदाह और स्फीति, सुई चभने सा दर्द रहने पर केलि फास ३X से उच्च शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए।
१२. सर्जिकल आपरेशन होने के बाद पेशाब के बंद होने पर कास्टिकम ३० लाभप्रद है।
१३. मूत्राशय के भीतर एक प्रकार का दर्द होता है,मानो मूत्राशय फूल उठा हो बार बार और जल्दी जल्दी पेशाब का होना, पेशाब में बदबू रहती है, रोगी के शरीर पर सूजन आ जाती है और वह सो नही पाता है, इस तरह की बीमारी में मैजलिस क्यू या ३ शक्ति की दवा का प्रयोग करें चाहिए।
१४. गर्भवती स्त्रियों के पेशाब में या साधारण पेशाब में एल्बुमेन या फास्फेट रहने पर हेलोनियस ३०, २०० की शक्ति फायदा करती है।
१५. रात में बार बार पेशाब बहुत मात्र में होना,एकाएक इतने जोर से पेशाब का लगना मानों कपड़े में हो जायेगा,, बिछोने में ही पेशाब का हो जाना और ऐसा समझना की ठीक पेशाब की जगह पर ही पेशाब कर रहें हैं; किन्तु नींद खुलने पर मालूम होना की था ऐसी स्थिति में क्रियोजोटम ६X शक्ति से १००० शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए।
१६. रोगी को तेज प्यास,शरीर का चमड़ा फीका और सुखा, शरीर में भयानक दाह, रह रह कर पसीना होना, साफ पानी की तरह बार बार पेशाब होना और उसके साथ पतले डीएसटी आना, वमन शोथ इत्यादि लक्षण रहने पर एसिड एसेटिक ३० शक्ति की दवा लाभप्रद है।
१७. चीनी मिला बहुमूत्र बार बार होना अधिक भूख-प्यास, रोगी का दिन पर दिन दुबला होते जाना पेट में वायु इकठा होना पाकस्थली में जलन रहने पर यूरेनियम नाइट्रिकम२X,६X, ३० शक्ति की दवा लाभकारी होती है।
१८. सिजिजियम जम्बोलिनम क्यू और २X शक्ति की दवा चीनी मिले बहुमूत्र की प्रधान दवा है। ड़ॉ बोरिक का कथन है- "पेशाब से चीनी का परिणाम घटाने या दूर करनेवाली इसके जोड़ की प्राय कोई दूसरी दवा नही दिखाई देती।"
१९. बहुत चीनी मिला पेशाब, उसके साथ ही अत्यंत पसीना मनो नहा लिया हो इसमें ऐमोन एसेटिक फायदा करती है। २०. पेशाब में घोड़े की पेशाब की तरह गंध हो, अनजाने में पेशाब हो जाता हो, वाट गठिया की बीमारी हो तो एसिड नाइट्रिक विशेष रूप से लाभप्रद है।
२१. खून का पेशाब या खून मिला पेशाब होने पर टेरेबिएन्था लाभप्रद है।

17.10.16

प्याज से रात भर बिस्तर पर मचाएँ धूम!



आहार विशेषज्ञों एवं सेक्सुअल रोगों के विशेषज्ञों क़ी मानें तो प्याज भोजन में रूचि को तो बढाता ही है, साथ ही सेक्सुअल दुर्बलता को दूर करने में भी काफी उपयोगी पाया जाता है I सुखी एवं संतुष्ट वैवाहिक जीवन के लिए सम्भोग शक्ति का प्रबल होना भी एक आवश्यक पहलू है और इनकी प्राप्ति हेतु प्याज एक सरल उपाय हैI अतः यौन शक्ति के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए प्याज एक सस्ता एवं सुलभ विकल्प है..!
* सफ़ेद प्याज के रस को अदरख के रस के साथ मिलाकर शुद्ध शहद तथा देशी घी प्रत्येक क़ी पांच-पांच ग्राम क़ी मात्रा लेकर एक साथ मिलाकर सुबह नियम से एक माह तक सेवन करें और लाभ देखें इससे यौन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जाती है I
*प्याज का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर एक शरबत जैसा गाढा द्रव्य प्राप्त करें ..अब इसे दस से पंद्रह ग्राम क़ी मात्रा में नियमित सेवन करें |यह योग आपको निश्चत ही यौन स्फूर्ति प्रदान करेगा !
*कामशक्ति को बढाने हेतु प्याज का एक और प्रयोग निम्नवत है :-




 लाल प्याज पचास ग्राम क़ी मात्रा में लेकर इसे देशी घी पचास ग्राम और ढाई सौ ग्राम दूध मिलाकर गर्म कर नियमित चाटना चाहिए ...शीत ऋतु में इस योग को नियमित रूप से दो से तीन बार लिया जाना चाहिए I गर्मीयों में इस योग सूर्योदय से पूर्व केवल एक बार करें तो बेहतर है I
*जिन्हें शीघ्रपतन (प्री-मेच्युर इजेकुलेशन) क़ी समस्या है ,उन्हें ढाई ग्राम शहद एवं इतना ही प्याज का रस मिलाकर चाटना चाहिए| इस प्रयोग को शीत ऋतु में दो से तीन बार किया जाना चाहिए|.ध्यान रहे क़ि गर्मीयों में इस प्रयोग को सूर्योदय से पूर्व केवल एक बार ही किया जाय तो बेहतर है I
*प्याज को पीसकर गुड मिलाकर खाने से वीर्य (सीमन ) वृद्धि देखी जाती है I
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शीघ्रपतन रोगियों के लिए एक और प्रयोग काफी लाभकारी होता है :- सौ ग्राम अजवाइन लेकर सफ़ेद प्याज के रस में भिंगोकर सुखा लें,सूख जाने पर पुनः पुनः प्याज के रस में भिंगोकर तीन बार सुखाएं I अब अच्छी तरह सूख जाने पर इसका बारीक पाउडर बना लें,अब इस पाउडर को पांच ग्राम की मात्रा में घी और शक्कर की लगभग पांच ग्राम की मात्रा से सेवन करें I इस योग को इक्कीस दिन तक लेने पर शीघ्रपतन में लाभ मिलता है
*एक किलो प्याज के रस में आधा किलो उड़द की काली दाल मिलाकर पीस कर पीठी बना लें और इसे सुखा लें, सूख जाने पर पीठी को एक किलो प्याज के रस में पुनः दुबारा पीसें और पुनः दुबारा पीस कर लिख लें Iअब इस पीठी को दस ग्राम की मात्रा में लेकर भैंस की दूध में पुनः पकायें और इच्छानुसार शक्कर डाल कर पी जाएँ, इस योग का सेवन लगातार तीस दिन तक सुबह शाम सेवन करने से सेक्स स्तम्भन शक्ति बढ़ जाती है !
*एक किलो प्याज का रस ,एक किलो शहद के साथ लेकर उसमें आधा किलो शक्कर मिलाकर किसी साफ़ सुथरे डिब्बे में पैक कर लें ..अब इसे पंद्रह ग्राम की मात्रा में एक माह तक रोज नियमित सेवन करें I इस योग के प्रयोग से सेक्सुअल डिजायर में वृद्धि देखी जाती है I
*प्याज का रस एक चम्मच,आधा चम्मच शहद मिलाकर पीने से वीर्य की वृद्धि होती है I

*प्याज एक प्राकृतिक यौन शक्ति वर्धक और शीघ्रपतन को दूर कर स्तम्भन बढ़ाने वाला हैं। इसके हमने अनेक यौन शक्ति वर्धक प्रयोग आपको बताये। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सफ़ेद प्याज या लाल प्याज का एक ऐसा प्रयोग जो बिलकुल सस्ता सा हैं और जिसको आप हर रोज़ करेंगे तो 100 साल की आयु में भी अनेको स्त्रियों के साथ रमण कर सकेंगे। कमज़ोरी नाम क्या होता हैं सब भूल जायेंगे।
योग-
सामान
सफ़ेद प्याज अथवा लाल प्याज माध्यम आकार के 30 नग
शुद्ध शहद – आवश्यकतानुसार
विधि
सर्वप्रथम सफ़ेद प्याज का छिलका उतार लीजिये, अब इन प्याज में किसी सलाई की मदद से बीच बीच में 8-10 छेद कर दीजिये। सभी प्याज में ऐसे छेद कर लीजिये। और इन सब प्याज को एक कांच के बर्तन में डालकर रख लीजिये। कांच का बर्तन तीन चौथाई तक भरे। अब इस बर्तन को शुद्ध शहद से पूरा भर दीजिये। इसको 45 दिन तक किसी ठन्डे स्थान पर हल्का ढक कर रख लीजिये, ताकि इस पर फफूंद ना लगे । 45 दिन बाद आपका बेजोड़ यौन शक्ति वर्धक उपाय तैयार हो जायेगा।






विशेष
ध्यान रहे के बर्तन पूरा भरना है – अगर बर्तन खाली रहा तो ये खराब होने का खतरा है. और अगर सफ़ेद प्याज ना मिले तो इसकी जगह लाल प्याज भी काम में लिया जा सकता है. और इसको बनने के बाद इसको 45 दिन में खत्म करना ही हैं नहीं तो ये ख़राब हो जायेगा. और बनने के बाद इसको आप फ्रिज वगरह में रख दीजिये|
नियमित सेवन के लिए 45 दिन बाद आप ऐसा ही नया जार तैयार कर लीजिये।सेवन विधि
अभी हर रोज़ रात को सोने से १ घंटा पहले ये बना हुआ मुरब्बा एक नग खा लीजिये। इसको निरंतर खाने से आप में घोड़े से भी ज़्यादा बल आ जाएगा। शरीर में खून की आपूर्ति हो जाएगी। चेहरा लाल टमाटर जैसा खिल जायेगा। और बुढ़ापे का अनुभव तो कभी नहीं होगा। सदा जवान रहेंगे।
सावधानी
खट्टी चीजो, फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, धूम्रपान, शराब आदि का सेवन ना करे। इस प्रयोग का सम्पूर्ण फायदा लेने के लिए प्रयोग काल के प्रथम 25 दिन सम्भोग नहीं करना। उसके बाद भले निरंतर सम्भोग करते रहे। इस से ऐसी ताक़त मिलेगी जिसके आगे सब दवाये फेल हैं। और मन सदैव शांत रखे, हमेशा स्त्री गमण के बारे में सोचने से धातु कमज़ोर होती हैं और शक्ति का नाश होता हैं। अधिक सहवास करना सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। शरीर से ओज तेज़ का नाश होता हैं। ये प्रयोग उन लोगो के लिए ही बताया हैं जो लोग अपनी शादी शुदा ज़िंदगी से परेशान हैं और बचपन की गलतियों की वजह से अपना जीवन नरक समान बना लिया हैं।

16.10.16

अनिद्रा का चमत्कारी ईलाज




रात को सोने से पहले इस जादुई औषधि का एक चमच मुह में रखिये और फिर इसका कमाल देखें !
रात को सोने से पहले इस जादुई औषधि का एक चमच मुह में रखिये और फिर इसका कमाल देखें 

आधी रात में नींद खुल जाना या नींद न आना बहुत ही कष्टदायक और निराशा जनक होता है और दुःख की बात ये है कि आज कल हर कोई इस बीमारी से पीड़ित है आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इतना ज्यादा दिमागी तनाव बढ़ गया है की दिमाग को रिलेक्स करने का मौका नही मिलता जिसकी वजह से बहुत सी बीमारिया पैदा हो जाती है इन्ही में से एक है अनिद्रा या नींद न आने की बीमारी
तो इसलिए आज हम आप के लिए एक ऐसा नुस्खा लेकर आये है जो आपको इस बीमारी से मुक्ति दिल सकता है और आप आराम से सो सकते है और इसमे जो चीजो का इस्तेमाल होता है वो आपकी रसोई में आसानी से उपलब्ध है वो है नमक और चीनी
 


ये दोनों शरीर में हार्मोन्स को नियंत्रित करते है और कोशिकाओं द्वारा भोजन के पाचन में मदद करते है ये सेल चार्ज के रूप में कार्य के रूप में गुल्कोज माइटोकांडिरया के लिए आवश्यक है ये शरीर को ऊर्जा और सोडियम बैलेंस करने में मददगार है
इसके आलावा शकर शरीर के लिए एक संदेश भेजता है की यह अब तनाव हार्मोन्स रिलीज करने की जरूरत नही है और नामक एक होम्योस्टेटिक स्थिति को बनाये रखते है एर्डेनाइल के नियंत्रण के द्वारा

आइये अब जानते है इस मिश्रण को बनाने का तरीका
सामग्री
2 Tablespoons Pure Pink Himalayan Sea Salt
2 Tablespoons Organic Brown sugar
5 Tablespoons Honey

विधि
इन सभी औषधियों को एक कांच की बर्तन में भरकर अच्छी तरह मिला लीजिये और सोने से पहले एक चम्मच अपने मुँह में डाल ले आपको अच्छी नींद आएगी

नोट :- जिन लोगो को शुगर या बी पी की प्रोब्लेम्स है वो इसका सेवन ना करे