28.2.16

गाजर खाने के फायदे :Benefits of carrots


*मासिक धर्म के दिन  हर महिला के लिए बहुत तकलीफदेह होते हैं. ज्यादातर महिलाओं को मासिक  के दौरान तेज दर्द, चिड़चिड़ेपन और अनियमित स्त्राव की शिकायत रहती है.इसके साथ ही कई स्त्रियों को पीठ दर्द और पैर दर्द भी होता है|
*गाजर के जूस से मिलेगी राहत पीरियड्स के दौरान अगर आपको भी इन तकलीफों का सामना करना पड़ता है तो गाजर का जूस पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा| गाजर का जूस काफी आसानी से मिल भी जाता है| अगर जूस न पीना चाहें तो गाजर खाना भी उतना ही फायदा देगा| किसी भी रूप में गाजर का सेवन करना पीरियड्स के दौरान फायदेमंद रहता है| गाजर रक्त परिसंचरण  को ठीक रखता है, दर्द में राहत देता है और चिड़चिड़ाहट को भी कम करता है|आयरन से भरपूर मासिक  के दौरान खून निकलने से अनीमिया की समस्या भी हो सकती है|ऐसे में आयरन की मात्रा लेते रहना फायदेमंद रहेगा| यह एक सबसे प्रमुख कारण है जिसकी वजह से पीरियड्स में गाजर खाने की सलाह दी जाती है|
le = window.adsbygoogle || []).push({}); * गाज़र के मीठेपन को लेकर आपको कैलोरी की चिंता करने की भी ज़रूरत नहीं क्योंकि इसमें बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है। गाज़र के जूस में खनिज तत्व , विटामिन्स और विटामिन ए पाया जाता है, इसलिए इसे त्वचा और आंखों के लिए अच्छा माना जाता है। गाज़र का प्रयोग आप सूप बनाने, सब्जि़यों, हल्वे और सलाद के रूप में भी कर सकते हैं।
*त्वचा निखार के लिए: प्रतिदिन गाजर का सलाद खाने से या गाज़र का जूस पीने से चेहरे पर चमक आती है।
* गाजर रक्त की विषाक्तता कम करता है और इसके सेवन से कील-मुहासों से भी छुटकारा मिलता है।
*नजर तेज करने के लिए-: गाजर में विटामिन ए प्रचूर मात्रा में होता है इसलिए इसके सेवन से आंखों की रोशनी ठीक होती है। आंखों से संबंधी सामान्य समस्याओं का कारण है विटामिन ए की कमी।
*पुरुषों को भी अपने खून की सफाई करनी जरुरी है। गाजर का जूस पीने से खून की सफाइ होती है।
हृदय रोगी भी खा सकते हैं गाजर: गाजर में कैरोटीनायड होता है, जो हृदय रोगियों के लिए अच्छा होता है। यह माना जाता है कि गाजर का प्रतिदिन सेवन कालेस्ट्राल के स्तर को कम करता है।
* डायबीटीज़  के मरीजों के लिए- गाज़र के प्रतिदिन सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर ठीक रहता है।
 *गाजऱ में बीटा कैरोटीन होती है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छा होता है।
 *बीटा कैरोटीन से भरपूर- मासिक  के दौरान बीटा कैरोटीन से भरपूर चीजों का सेवन करना फायदेमंद रहता है| ये हैवी ब्लड फ्लो को नियंत्रित करने का काम करता है. दर्द से आराम दिलाने में गाजर न केवल रक्त बहाव  को नियंत्रित करने का काम करता है बल्क‍ि इस दौरान होने वाले दर्द में भी राहत दिलाता है| साथ ही मूड को भी ठीक रखता है.
 *कैंसर से बचने के लिए: गाज़र खाने से, पेट और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कम होता है।
*कैसे करें सेवन -आप चाहें तो गाजर को चबा-चबाकर खा सकती हैं लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा है और आप कुछ भी करने की हालत में नहीं हैं तो इसका जूस फायदेमंद रहेगा. दिन में एक या दो गिलास गाजर का जूस पीने से दर्द में राहत मिलेगी.

23.2.16

अखरोट खाने के फायदे; Health benefits of walnut




अखरोट हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। एक तरह यह हमारी फिटनेस बरकरार रखता है वहीं यह हमें गंभीर बीमारियों से भी बचाता है।अखरोट के स्वास्थ्य लाभ जानते हैं-
1) नट्स में वसा की मात्रा मानी जाती है और इसलिए इन्हें वजन बढ़ाने वाला माना जाता है। लेकिन, हकीकत इससे जरा अलग है। अखरोट भी ऐसा ही नट' है। इसमें कई पौष्टि‍क तत्व होते हैं।
2) अखरोट में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और ओमेगा थ्री फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जो इसे दिल की बीमारियों से लड़ने में काफी असरदार बनाता है। इसके साथ ही यह बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल में इजाफा करने का भी काम करता है, जो इसे आपके दिल के लिए और भी उपयोगी बनाता है।
3) एक शोध के मुताबिक जो महिलायें सप्ताह में दो बार 28 ग्राम अखरोट खाती हैं, उन्हें टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा 24 फीसदी कम होता है। जर्नल ऑफ न्यूट्रीश‍न में प्रकाश‍ित इस शोध में यह भी कहा गया कि हालांकि यह शोध महिलाओं पर किया गया था, लेकिन विशेषज्ञों का यह मानना है कि पुरुषों को भी अखरोट के इसी प्रकार के लाभ मिलने की उम्मीद है।
4) अखरोट आपके बालों के लिए भी फायदेमंद होता है। अखरोट में मौजूद विटामिन बी7 होता है जो आपके बालों को मजबूत बनाने का काम करता है। विटामिन बी7 बालों का गिरना रोककर उन्हें बढ़ाने में मदद करता है।
5) अखरोट वजन कम करने में मदद करता है। एक औंस यानी करीब 28 ग्राम अखरोट में 2.5 ग्राम ओमेगा थ्री फैटी एसिड, 4 ग्राम प्रोटीन और 2 ग्राम फाइबर होता है जिससे लंबे समय तक तृप्त‍ि की भावना बनी रहती है। वजन कम करने के लिए जरूरी है कि आपका पेट भरा रहे। तो अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आपको अखरोट को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।
6) अखरोट में बी-विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आपकी त्वचा को फ्री-रेडिकल्स से बचाते हैं। इससे आपकी त्वचा को उम्र के निशान और झुर्रियों के प्रभाव से भी बचाया जा सकता है। तो अगर आप मिडिल एज में चमकदार त्वचा पाना चाहते हैं तो अखरोट का सेवन कीजिए।
7) रोजाना  करीब 75 ग्राम अखरोट रोजाना खाने से स्वस्थ युवा पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार होता है। यूसीएल के शोधकर्ताओं का कहना है रोजाना अखरोट का पर्याप्त सेवन करने से 21 से 35 वर्ष की आयु के पुरुषों के शुक्राणुओं में अध‍िक जीवनशक्ति और गतिशीलता आती है।
8) हाल ही में हुए एक सर्वे से पता चला है कि अखरोट के सेवन से तनाव का स्टार  घट जाता है। इसके सेवन से ब्लड  प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर को पर्याप्‍त ऊर्जा मिलती रहती है। 9) नट्स आपकी नींद सुधार सकते हैं, इनमें मेsलाटोनिन हॉरमोन होता है, जो नींद के लिए प्रेरित करना और नींद को नियंत्रित करता है। अगर आप शाम को या सोने से पहले अखरोट खायें तो इससे आपकी नींद में सुधार आए।
10) गर्भवती महिलायें जो अखरोट जैसे फैटी एसिड युक्त आहार का सेवन करती हैं, उनके बच्चों को फूड एलर्जी होने की आशंका बहुत कम होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि माताओं के आहार में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (पूफा) होता है उनके बच्चे का विकास अच्छी तरह होता है। पूफा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली कोश‍िकाओं को मजबूत बनाता है।
11) सुखद लंबी आयु के लिए अखरोट का सेवन अच्छा रहता है। इसक नियमित सेवन से जीवनकाल बढ़ता है और आपका जीवन ऊर्जा से भरपूर रहता है।
12) जो पुरूष पिता बनने की लालसा रखते हैं उनके लिए अखरोट काफी लाभकारी होता है। इसके सेवन से स्पर्म काउंट बढ़ता है।
13) अगर आपको अपने स्तन को सुडौल और स्वस्थ बनाएं रखना है तो अखरोट का दैनिक रूप से सेवन करें। इससे आपको काफी लाभ मिलेगा।
14) अखरोट का नियमित रूप से सेवन, दिमाग को तेज बनाता है इसीलिए इसे ब्रेन फूड के नाम से भी जाना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ई होने ही वजह से यह दिमाग को तेज और स्वस्थ बनाएं रखता है।





19.2.16

बुद्धि तेज करने के उपाय How to improve memory power ?








अच्छी और तीव्र स्मरण शक्ति के लिए हमें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ, सबल और निरोग रहना होगा | जब तक हम पूरी तरह से स्वस्थ और सबल नहीं रहेंगे हमारी स्मरण शक्ति कभी भी तेज नहीं हो सकती हैं | 
ध्यान रहे कि स्मरण शक्ति हमेशा ध्यान और मन की एकाग्रता पर ही निर्भर होती हैं | हम जिस तरफ जितना अधिक ध्यान केन्द्रित करेंगे उस तरफ हमारी विचार शक्ति उतनी ही अधिक तीव्र हो जायेगी | आप जिस भी कार्य पर जितना अधिक तीव्रता और ध्यान के साथ, स्थिरिता के साथ मन लगायेंगे वह चीज उतनी ही जल्दी हमारे मानस पटल पर, हमारे स्मृति पटल पर अंकित हो जायेगा |

याद शक्ति को बढ़ाने के कारगर और आसान तरीके:
1). सौंफ को मोटा कूट कर उसे छान लें और इसे एक-एक चम्मच सुबह शाम दो बार पानी या दूध के साथ फंकी लें।

2) जीरा, अदरक, और मिश्री को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर खाने से याददाशत की कमजोरी दूर होती है।

3)  गुलकन्द को रोज दिन में दो से तीन बार खाने से स्मरण शक्ति को लाभ मिलता है।

4) शहद में 10 ग्राम दालचीनी को मिलाकर चाटने से दिमाग तेज होता है।

5)  6 से 7 काली मिर्च  में 25 से 30 ग्राम मक्खन और शक्कर मिलाकर रोज खाने से दिमाक तेज होता है और भूलने की बीमारी दूर होती है।
6) गेहूं के पौधे जवारे का रस कुछ दिनों तक रोज पीने से भूलने की बीमारी दूर होती है
7)  गाय के घी से सिर पर कुछ दिनों तक मालिश करने से आपकी स्मर्ण शक्ति बढ़ती है। 
8) यदि आप अखरोट खाते हैं तो भी आपकी याददाश बढ़ती है। 10 ग्राम किशमिश के साथ 20 ग्राम अखरोट खायें। इससे मानसिक तनाव भी दूर होता है।

9) गाजर का हलुआ खाते रहने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है।

10). सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाने से दिमागी विकार दूर होता है।

11) रात को 10 बादामों को पानी में भिगोकर सुबह उनका छिलका उतार लें और इसे 10 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है।

12)  रात को उड़द की दाल को भिगोकर सुबह पीस लें और इसे दूध और मिश्री के साथ खायें। एैसा करने से दिमाग तेज होता है।


एक गाजर लें और लगभग 50-60 ग्राम पत्ता गोभी अर्थात 10-12 पत्ते पत्ता गोभी के अच्छी तरह से काटकर एक प्लेट में रख लें और इस पर हरी धनिया काटकर डाल दें , फिर उसके ऊपर से सेंधा नमक, काली मिर्च कर चूर्ण और नीम्बू का रस डाल कर अच्छी तरह से मिला लें फिर इसे नास्ते में खाए, खूब चबाकर कर खाए और भोजन के साथ एक गिलास छाछ भी पिया करें |
ऐसा करने से आपकी स्मरणशक्ति बहुत अधिक बढ़ेगी, और इसका असर आपको बहुत ही जल्द देखने को मिलेगा |
आवश्यक सामग्री – शंखावली (शंखपुष्पी) को अच्छी तरह से कूट-पीसकर एक शीशी में भर कर रख ले I 2 बादाम, खरबूजा, तरबूज, पतली ककड़ी, खीरा इन सभी के बीज 5-5 ग्राम लें साथ में 2 पिस्ता, 1छुहारा, 4 छोटी इलायची, 5 ग्राम सौंफ, 1 चमच्च मक्खन, 1 गिलास दूध ले |

विधि – रात में बादाम, पिस्ता, छुहारा और चारों फलों के बीजों को 1 कप पानी में डालकर रख दें I प्रातःकाल बादाम को 2-4 बूँद पानी में छिलका हटाकर अच्छी तरह से घिस लें और उस लेप को कटोरी में रख लें I फिर बाकी बचे पिस्ता, इलायची के दानों व छुहारे को बारीक काट कर पीस लें और फिर उसे भी बादाम के लेप में मिला लें और चारों बीज भी उसमें ही डाल लें I अब इन्हें खूब अच्छी तरह से चबा-चबा कर खा लें उसके बाद 3 ग्राम शंखावली के महीन चूर्ण को मक्खन में मिलाकर कर चाट लें और ऊपर से एक गिलास गुनगुना दूध धीरे-धीरे पी लें . अंत में बचे हुए सौंफ को मुंह में डालकर धीरे-धीरे 15-20 मिनट तक चूस ले और फिर उसे चबा ले I
लाभ – यह प्रयोग करने से आपके दिमाग की ताकत, तरावट और स्मरण शक्ति को बढाने के लिए बहुत ही बेजोड़ उपाय हैं | साथ ही साथ यह शरीर में शक्ति और स्फूर्ति भी पैदा करता हैं I इसे लगातार 40 दिनों तक प्रतिदिन सुबह नित्यकर्मों से निवृत होकर खाली पेट प्रयोग में लाने से आपको चमत्कारिक लाभ देखने को मिल सकते हैं |
 पढ़ते समय सावधानी बरतें –
पढ़ते समय आप हमेशा ध्यान रखे कि आपकी कमर झुकी हुई नहीं होनी चाहिए या फिर आप कभी लेट कर या फिर झुक कर अगर पढने की सोच रहे हैं या फिर आप अगर ऐसा कर रहे हैं तो यह बहुत ही गलत हैं |
अगर आप रात के 9 बजे के बाद भी पढ़ रहे हैं या फिर आपको देर रात तक पढ़ना पड़ता हैं तो आप हर आधे घंटे पर आधा –आधा गिलास ठंडा पानी पीते रहे हैं  इससे रात में जागने के कारण होने वाला वात प्रकोप नहीं होगा .| वैसे तो कहा जाता हैं कि रात में 11 बजे से पहले सो जाना चाहिए और सुबह जल्दी उठकर पढायी करनी चाहिए |
पढ़ते समय आलस्य लगने पर चाय या फिर सिगरेट का सेवन कभी न करें यह थोड़ी देर के आलस्य को भगाने के लिए आपको जीवन भर के लिए दिक्कत दे सकती हैं|

 >धार्मिक उपायों में ज्ञान, बुद्धि, विद्या, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती की उपासना न केवल मानसिक शक्ति को मजबूत बनाने वाली, बल्कि उसके बूते मिली दक्षता, निर्णय क्षमता व कला सफलता की नई-नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाली मानी गई है।

देवी पूजा के विशेष दिन शुक्रवार को माता सरस्वती की उपासना बहुत शुभ मानी गई है। बुद्धि और सफलता की कामना से हर सुबह भी एक विशेष व छोटा-सा मंत्र द्वारा माता सरस्वती का ध्यान बड़ा मंगलकारी सिद्ध होता है। प्रस्तुत है  वह मंत्र और पूजा उपाय -

- सुबह स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहन माता सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर की केसरिया या सफेद चंदन, अक्षत, केसरिया या पीले फूल माता सरस्वती को अर्पित करें।

- माता को दूध की खीर, तिल्ली या सूखे मेवों से बने पकवानों का भोग लगाएं। सुगंधित धूप व दीप जलाकर महासरस्वती के नीचे लिखे बीज मंत्र 'ऐं' युक्त इस असरदार मंत्र को आसन पर बैठकर यथाशक्ति अधिक से अधिक बार तुलसी या चंदन की माला से बुद्धि व विवेक से सफलता की कामना के साथ करें -

ॐ ऐं नम: 

- पूजा व मंत्र जप के बाद आरती कर देवी को चढ़ाया प्रसाद स्वयं व परिजनों का खिलाएं।

11.2.16

डायबीटीज़ मे उपकारी योग Yoga is helpful in diabetes



डायबटीज ऐसी बीमारी है जिससे निजात पाना बहुत कठिन है। इसलिए बेहतर है कि पहले से ही शरीर को इतना चुस्त रखें कि बीमारी छू भी न पाए। ऐसे में ये योगासन बहुत फायदेमंद हैं। अगर डायबीटीज के मरीज हैं भी तो ये योगा करने से सेहत ठीक रहेगी। ब्लड शुगर नियंत्रित रहेगी और तनाव, थकान जैसी परेशानियां दूर होंगी। जानते हैं  किन योगासन से आप डॉयबटीज को दूर कर सकते हैं।
 बालासन- एढ़ियों के बल बैठें, सांस अंदर लेते हुए हाथ को ऊपर उठाएं और पीठ को पीछे की तरफ झुकाएं। फिर सांस छोड़ते हुए हाथों और शरीर को आगे की तरफ झुकाएं जैसे कि तस्वीर में बना है। यह आसन करने से तनाव दूर होता है औऱ थकान दूर होती है। तनाव डायबटीज के लिए बुरा है।

सर्वांगासन - जमीन पर पैर सीधे कर के लेट जाएं। फिर घुठनों को मोड़ते हुए उन्हें ऊपर छत की तरफ उठाएं। हाथों को पीठ पर रखें ताकि कूल्हों को सहारा मिलता रहे। आपका सारा वजन कंधों पर होना चाहिए। इस मुद्रा में थोड़ी देर रहें। फिर धीरे धीरे शरीर को नीचें लाएं, एकदम से न करें वरना पीठ में चोट  लग सकती है।
वज्रासन-यह बहुत आसान और फायदेमंद आसन है। जैसे तस्वीर में दिखाया है, इसी तरह बैठें। घुठने के बल तलवों के ऊपरी हिस्से को जमीन की तरफ कर के बैठें। कूल्हों को एढ़ियों पर टिकाएं, हथेलियों को घुठनों पर इसी तरह रखें। आंखें बंद कर के गहरी सांस अंदर-बाहर करें। इसे करने से आपको सुकून मिलेगा, पाचन सुधरेगा और दिमाग शांत होगा।

हलासन- यह आसन उनके लिए अच्छा है जो घंटों कुर्सी पर बैठ कर काम करते हैं और उनकी पीठ में दर्द होता है। इसके लिए पीठ के बल, पैर फैला कर सीधे लेट जाएं और हाथों को शरीर के साइड में रखें। इसके बाद घुठनों को उठाएं ताकि तलवे जमीन पर टिके रहें। धीरे धीरे पैरों को उठाएं और हाथों के सहयोग से कूल्हों को उठाएं। इस तरह पैरों को सिर के ऊपर से ले जाते हुए जमीन छूने की कोशिश करें। हाथ छोड़ कर सीधे कर लें और कमर सीधी रखें।

 प्राणायाम- इसके लिए रीढ़ की हद्दी सीधी कर के बैठें, तेजी से सांस अंदर लें और पांस सेकेंड तक रोके फिर धीरे धीरे सांस छोड़ें। ऐसा कम से कम 10 बार करें। यह आसन शरीर में खून का बहाव सुधारता है और दिमाग को शांत करता है।

सेतूबंधासन-सांस छोड़ें और धीरे धीरे पीठ से शरीर को ऊपर उठाएं जैसे कि तस्वीर में बना है। हाश, सिर और तलवे जमीन पर ही टिके रहें। इसी तरह धीरे धीरे शरीर को नीचें लाएं। यह आसन पाचन सुधारता है और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है। ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखता है। लेकिन अगर आपके गले या पीठ का कोई ऑपरेशन हुआ है तो इस आसन को न करें।

8.2.16

शकरकंद खाने के फायदे : Benefits of eating sweet potato


शकरकंद को स्वीट पोटैटो के नाम से भी जाना जाता है और इसमें ऊर्जा का खजाना होता है. अक्सर लोग इसे आलू से जोड़कर देखते हैं लेकिन पोषक तत्वों और स्वास्थ्य के लिहाज से इसके कई फायदे हैं.- . 
1) शकरकंद में भरपूर मात्रा में आयरन होता है. आयरन की कमी से हमारे शरीर में एनर्जी नहीं रहती, रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और ब्लड सेल्स का निर्माण भी ठीक से नहीं होता. शकरकंद आयरन की कमी को दूर करने में मददगार रहता है|.

 2) शकरकंद में कैरोटीनॉयड नामक तत्व पाया जाता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है. वहीं इसमें मौजूद विटामिन बी6 डायबिटिक हार्ट डिजीज में भी फायदेमंद होता है.|
 3) शकरकंद विटामिन ए का बहुत अच्छा माध्यम है. इसके सेवन से शरीर की 90 प्रतिशत तक विटामिन ए की पूर्ति हो जाती है.|
 4) शकरकंद पोटैशियम का एक बहुत अच्छा माध्यम है. यह नर्वस सिस्टम की सक्रियता को सही बनाए रखने के लिए आवश्यक है. साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है.|
5) शकरकंद में कैलोरी और स्टार्च की सामान्य मात्रा होती है. वहीं, सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा इसमें न के बराबर रहती है. इसमें फाइबर, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन और लवण भरपूर पाए जाते हैं.|
6) शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन बी6 पाया जाता है, जो शरीर में होमोसिस्टीन नाम के अमीनो एसिड के स्तर को कम करने में सहायक होता है. अगर इस अमीनो एसिड की मात्रा बढ़ने पर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.|

7) शकरकंद विटामिन डी का एक बहुत अच्छा सोर्स है. यह विटामिन दांतों, हड्ड‍ियों, त्वचा और नसों की ग्रोथ व मजबूती के लिए आवश्यक होता है.|
8) तनाव से राहत दिलाए - इसमें हाई पोटैशियम पाया जाता है जिससे तनाव में आने के बाद शरीर प्रयोग कर लेता है, इसलिये शकरकंद को जरुर खाना चाहिये। साथ ही यह मासपेशियों की ऐठन कम करता है जो कि पोटैशियम की कमी से होता है।
9) दिल की बीमारी से बचाए- शकरकंद में विटामिन बी6 होता है जो शरीर में रासायनिक होमोसिस्टीन बनने से रोकता है और हार्ट अटैक से बचाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्ब्लड  प्रेशर और दिन के कार्य को मेंटेन करता है।
10) त्वचा की देखभाल और एंटी एजिंग तत्वों से भरा- शकरकंद के सेवन से आंखों की रौशनी बढती है और इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत होता है। इसके साथ ही इसमें बीटा कैरोटीन होता है जो शरीर में फ्री रेडिक्ल्स  से लड़ता है और जल्द  बुढापा नहीं आने देता। इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो कि त्वचा  में कोलाजिन का निर्माण कर के त्वचा की जवानी बनाए रखता है। 11) ब्लड शुगर कंट्रोल करे- अगर आपको का ब्लड शुगर लेवल कुछ भी खाने से तुरंत ही बढ जाता है तो, शकरकंद खाना लाभप्रद होता है। इसे खाने से ब्लड  शुगर हमेशा नियंत्रित  रहता है और इंसुलिन को बढने नहीं देता।
12) कैंसर से बचाए- शकरकंद की गहरे रंग की प्रजाति में अधिक  मात्रा में कैरोटिनॉयड जैसे, बीटा कैरोटीन और विटामिन ए अधिक मात्रा में होता है। ऐसे आहार जिसमें अधिक कैरोटिनॉयड पाया जाता है, वह फेफड़े और मुंह के कैंसर से बचाता है।


शकरकंद (मीठे आलू ) के फायदे -
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5.2.16

कद्दू के स्वास्थ्यकारी गुण, लाभ : Benefits of Pumpkin


कद्दू को सब्जी एवं अनेक प्रकार के व्यंजन बनाने के काम में लिया जाता है। यह अनेक पौष्टिक गुणों से भरपूर फल है, जिसका आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति में कई रोगों की चिकित्सा करने में प्रयोग किया जाता है। हिन्दी में इसको काशीफल, कद्दू, रामकोहला, तथा संस्कृत में कुष्मांड, पुष्पफल, वृहत फल, वल्लीफल कहते हैं।



पौष्टिक तत्व-

कद्दू में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। इसमें श्वेतसार, कुकुर्बिटान नामक क्षाराभ, एकतिक्तराल, प्रोटीन-मायोसिन, वाईटेलिन शर्करा क्षार आदि पाए जाते हैं।
आहार विशेषज्ञों का कहना है कि कद्दू हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और फायदेमंद होता है।
कद्दू बलवर्धक है, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। कद्दू के बीज भी आयरन, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं। इसमे खूब रेशा यानी की फाइबर होता है जिससे पेट हमेशा साफ रहता है। शायद इन्हीं खूबियों के कारण कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है। यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह देते हैं।
आयुर्वेदिक प्रयोग-

अग्नि से जल जाने पर (अग्निदग्ध) इसके पत्तों का रस निकालकर लगाने से काफी लाभ मिलता है,  उन्माद,मिर्गी आदि मानसिक रोगों में यह अच्छा लाभ करता है तथा स्मरण शक्ति  व मस्तिष्क व ह्रदय की दुर्बलता को दूर करता है। मानस रोगों में पका कद्दू विशेष लाभदायक होता है। यह शरीर को पुष्ट बनाता है। यह उरःक्षत, रक्तपित्त, मूत्र, कृच्छ, मूत्राघात, अश्मरी, राजयक्ष्मा क्षय आदि में भी सहायक रूप से लाभ करता है। शरीर में जलन की शान्ति के लिए इसके बीजों को पीसकर मिश्री मिलाकर ठण्डाई के रूप में प्रयोग करते हैं। गर्मियों में इसका अवलेह व मुरब्बा भी प्रयोग किया जाता है तथा इसके अनेक व्यंजन, बर्फी, खीर, हलवा, रायता, पकौड़े आदि के रूप में भी प्रयोग करते हैं। 
घरेलू नुस्खे-

कद्दू लंबे समय के बुखार में असरकारी होता है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास दूर होता है।

आहार विशेषज्ञों का कहना है कि कद्दू हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और मूत्रवर्धक होता है।

मधुमेह रोगियों के लिये- कद्दू रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण चिकित्सक मधुमेह रोगियों को कद्दू खाने की सलाह देते हैं। इसका रस भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।

लोहे की कमी या एनीमिया में कद्दू लाभदायक सिद्ध होता है। 

इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में इजाफा होता है। ऐसा होने से आपकी स्किन और बालों की सेहत बेहतर रहती है। 

प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। शायद इन्हीं खूबियों की वजह से कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।
 
कद्दू मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है। यह निद्राजनक है। इसलिए अनेक मनोविकार जैसे मिर्गी(एपिलेप्सी), अनिद्रा, गुस्सा, डिप्रेशन, असंतुलन तथा मस्तिष्क की दुर्बलता में अत्यन्त लाभदायी है। 

इससे बुद्धि की क्षमता बढ़ती है। चंचलता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा आदि दूर होकर मन शांत हो जाता है।
कुम्हड़ा रक्तवाहिनियों व हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और अच्छे रक्त का निर्माण करता है। आंतरिक जलन, अत्यधिक प्यास, एसिडिटी, पुराना बुखार आदि में कद्दू का रस और सब्जी दोनो उपयोगी हैं।
कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।


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