18.12.15

ग्रीन टी के लाभ और तैयार करने की विधि : Benefits of Green Tea.




ग्रीन टी में अधिक मात्रा में पौषक तत्व पाये जाते है जो हमारे शरीर के प्रतिरक्षातन्त्र को ताकतवर बनाते है| इससे हमारा शरीर विभिन्न तरह के रोगों से लड़ने लिये मजबूत हो जाता है, ग्रीन टी को मॉर्निंग ड्रिंक की तरह उपयोग करने के अलावा इसे हम अलग-अलग के तरह घरेलू नुस्खों और सौंदर्य संबंधी नुस्खों में भी इस्तेमाल करते है--आज हम भी आपसे घर पर ग्रीन टी बनाने की विधि बता रहे हैं जिससे आप भी इसे आसानी से बनाकर तैयार कर सकें तो आईये आज हम स्वादिष्ट और पौष्टिक ग्रीन टी (Green Tea) बनायेंगें-
सामग्री :-
ग्रीन टी की पत्ती एक चम्मच या 5 ग्राम
पानी डेढ कप पावडर 1-2 चुटकी भर
शकर या शहद एक चम्मच या स्वाद के मुताबिक
ईलायची
विधि :-
ग्रीन टी बनाने के लिये सबसे पहले चाय बनाने की एक तपेली में पानी डालकर गरम करने के लिये गैस पर रखें, जब पानी में उबाल आ जाए तब उबलते हुये पानी में ग्रीन टी पाउडर डालकर गैस बंद दें और तपेली को
एक प्लेट से ढक दें जिससे ग्रीन टी पाउडर फ्लेवर पानी में अच्छी तरह से आ जाये। करीब 2 मिनट के बाद ग्रीन टी को एक छन्नी की सहायता से एक कप में छानकर निकाल लें और अब इस छनी हुई चाय में अपने स्वाद के अनुसार चीनी या फिर शहद और इलाइची पाउडर को डालकर चम्मच से अच्छी तरह मिला लें । स्वादिष्ट और पौष्टिक ग्रीन टी बनकर तैयार गयी है, आप ग्रीन टी को हल्का गुनगुना या फिर ठंडा करके सर्विंग कप में निकालकर सर्व करें। ग्रीन टी एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करती है|
व्यायाम से भी आपको लग रहा है कि आपका वज़न कम नहीं हो रहा, तो आप दिन में ग्रीन टी पीना शुरू करें। ग्रीन टी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होने की वजह से यह शरीर की चर्बी को खत्म करती है। एक अध्ययन के अनुसार, ग्रीन टी शरीर के वज़न को स्थिर रखती है। ग्रीन टी सिर्फ चर्बी ही कम नहीं होती बल्कि मेटाबॉल्ज़िम भी सुधरता है और पाचक संस्थान की परेशानियां भी खत्म होती हैं। यह मोटापा कम करने के लिये काफी सहायक सिद्ध होती है, इसलिये ग्रीन टी को रोजाना कम से कम एक बार अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें|
फ्रेश तैयार हरी चाय शरीर के लिए अच्छी और स्वस्थ्य वर्धक होती है। आप इसे या तो गर्म या ठंडा कर के पी सकते हैं, लेकिन इस बात का यकीन हो कि चाय एक घंटे से अधिक समय की पुरानी ना हो। ज्यादा खौलती गर्म चाय गले के कैंसर को आमंत्रित कर सकती है, तो बेहद गर्म चाय भी ना पिएं। यदि आप चाय को लंबे समय के लिए स्टोर कर के रखेंगे तो, इसके एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स खत्म हो जाएँगे| इसके अलावा, इसमें मौजूद जीवाणुरोधी गुण भी समय के साथ कम हो जाते हैं। वास्तव में, अगर चाय अधिक देर के लिये रखी रही तो यह बैक्टीरिया को शरण देना शुरू कर देगी। इसलिये हमेशा ताजी ग्रीन टी ही पिएं|
*ग्रीन टी को भोजन से एक घंटा पहले पीने से वजन कम होता है। इसे पीने से भूख देर से लगती है दरअसल यह हमारी भूख को नियंत्रित करती है। ग्रीन टी को सुबह-सुबह खाली पेट बिल्‍कुल भी नहीं पीनी चाहिये|
दवाई के साथ ग्रीन टी लेना वर्जित है | दवाई को हमेशा पानी के साथ ही लेना चाहिये|
*ग्रीन टी में गुलाब जल मिलाने से इसमें मौजूद एंटी एजिंग और एंटी कार्सिनोजेनिक (कैंसर विरोधी तत्‍व) लाभ डबल हो जाते हैं। और शरीर में जमा अतिरिक्त टॉक्सिन निकल जाते है। इसे बनाने के लिए ग्रीन टी में एक बड़ा चम्‍मच गुलाब जल का मिलाये। 
*ज्यादा  तेज ग्रीन टी में कैफीन और पोलीफिनॉल की मात्रा बहुत अधिक  होती है। ग्रीन टी में इन सब सामग्री से शरीर पर खराब प्रभाव पड़ता है। तेज और कड़वी ग्रीन टी पीने से पेट की खराबी, अनिद्रा और चक्‍कर आने जैसी प्राबलेंम  पैदा हो सकती है|
*ज्यादा  चाय नुक्‍सानदायक हो सकती है। इसी तरह से अगर आप रोजाना 2-3 कप से ज्‍यादा ग्रीन टी पिएंगे तो यह नुक्‍सान करेगी। क्‍योंकि इसमें कैफीन होती है इसलिये तीन कप से ज्‍यादा चाय ना पिएं|
ग्रीन टी सेवन करने के लाभ 
*ग्रीन टी (Green Tea) मृत्यु दर को कम करने में सहायक होती हैं -
*शोध द्वारा ज्ञात हुआ कि ग्रीन टी (Green Tea) पीने वालों को मृत्यु का खतरा अन्य की अपेक्षा कम रहता हैं |*ग्रीन टी (Green Tea) से हृदय रोगियों को राहत मिलती हैं इससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता हैं | और आज के समय में हार्ट अटैक से ही अधिक मृत्यु होती हैं जिस पर उम्र का कोई बंधन नहीं रह गया हैं | इस तरह ग्रीन टी मृत्यु दर को कम करती हैं |
ग्रीन टी कैंसर में भी फायदेमंद होती हैं -
*एक शौध के अनुसार ग्रीन टी से ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी का खतरा 25 % तक कम होता हैं |यह कैंसर विषाणुओं को मारता हैं और शरीर के लिए आवश्यक तत्व को शरीर में बनाये रखता हैं |



*ग्रीन टी से वजन कम होता हैं :
ग्रीन टी से शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ता हैं जिससे उपापचय की क्रिया संतुलित होती हैं और शरीर का एक्स्ट्रा वसा कम होता हैं | और इससे वजन कम होता हैं और साथ ही उर्जा मिलती हैं |
ग्रीन टी मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद हैं :ग्रीन टी के सेवन से मधुमेह रोगी के रक्त में शर्करा का स्तर कम होता हैं | मधुमेह रोगी जैसे ही भोजन करता हैं | उसके शर्करा का स्तर बढ़ता हैं इसी लेवल को ग्रीन टी संतुलित करने में सहायक होती हैं |
ग्रीन टी से रक्त का कॉलेस्ट्रोल कम होता हैं :
ग्रीन टी से शरीर का हानिकारक कॉलेस्ट्रोल कम होता हैं और लाभकारी कॉलेस्ट्रोल का लेवल बनाये रखता हैं |ग्रीन टी ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए फायदेमंद हैं :
ग्रीन टी के सेवन से शरीर का ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता हैं क्यूंकि यह कॉलेस्ट्रोल के लेवल को बनाये रखता हैं |अल्जाईमर एवम पार्किन्सन जैसे रोगियों के लिए ग्रीन टी फायदेमंद होती हैं - ग्रीन टी के सेवन से अल्जाईमर एवम पार्किन्सन जैसी बीमारियाँ धीरे-धीरे बढ़ती हैं |ग्रीन टी ब्रेन सेल्स को बचाती हैं |और डैमेज सेल्स को रिकवर करते हैं |
ग्रीन टी दांत के लिए भी फायदेमंद होती हैं -
ग्रीन टी में केफीन होता हैं जो दांतों में लगे कीटाणुओं को मारता हैं, बेक्टेरिया को कम करता हैं | इससे दांत सुरक्षित होते हैं |ग्रीन टी (Green Tea)के सेवन से मानसिक शांति मिलती हैं :
ग्रीन टी (Green Tea)में थेनाइन होता हैं जिससे एमिनो एसिड बनता हैं जो शरीर में ताजगी बनाये रखता हैं इससे थकावट दूर होती हैं और मानसिक शांति मिलती हैं |
ग्रीन टी (Green Tea)से स्किन की केयर होती हैं : ग्रीन टी में एंटीएजिंग तत्व होते हैं जिससे चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं | और चेहरे पर चमक और ताजगी बनी रहती हैं |इससे सन बर्न ने भी राहत मिलती हैं | स्किन पर सूर्य की तेज किरणों का प्रभाव नहीं पड़ता |
ग्रीन टी में केफीन की मात्रा अधिक होती हैं अतः इसका अत्यधिक सेवन हानिकारक हो सकता हैं | केफीन की अधिक मात्रा मेटाबोलिज्म बढाती हैं जिससे कई लाभ मिलते हैं जो उपर दिए गये हैं लेकिन अधिक मात्रा में केफीन भी शरीर के लिए गलत हो सकता हैं | खासतौर पर गर्भवती महिला या जो महिलायें गर्भ धारण करना चाहती हैं उनके लिए ग्रीन टी सही नहीं हैं कारण इससे आयरन और फोलिक एसिड कम होता हैं |ग्रीन टी को अदरक, नींबू एवम तुलसी के साथ लेना और भी फायदेमंद होता हैं | ऐसा नहीं हैं कि ग्रीन टी में केफीन होने से इसके सारे गुण अवगुण हो जाए लेकिन किसी भी चीज की अधिकता नुकसान का रूप ले लेती हैं |गर्भावस्था में हरी चाय के फायदे
ग्रीन चाय गर्भावस्था के दौरान शरीर में लौह, कैल्शियम और मैग्नेशियम की मात्रा की पूर्ती करती है।
आमतौर पर रात को सोते समय और भूख लगने पर कैफीन नहीं पीना चाहिये। रात को पीने से यह भूख बढ़ाता है और नींद भी ठीक से नहीं आती लेकिन इसके विपरीत गर्भावस्था के दौरान भी रात में हरी चाय पी सकते हैं, क्योंकि इसमें कैफीन की मात्रा कम होती है।
हाल में हुए शोधों से पता चला है कि हरी चाय बहुत सी कैंसर जैसी भयावह बीमारियों से भी बचाती हैं।
गर्भावस्था के दौरान हरी चाय रोगों से लड़ने का ना सिर्फ एक अच्छा उपाय है बल्कि इसमें सम्भावित रोगों से लड़ने की शक्ति भी है। यानी गर्भावस्था के दौरान होने वाली किसी भी संक्रमित बीमारी से बचाने का काम हरी चाय करती है।
गर्भावस्था के दौरान दांतों और मसूड़ों की कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं और कई अध्ययनों के अनुसार दांतों के लिए ग्रीन-टी काफी लाभदायक है।गर्भावस्था के दौरान तरोताजा महसूस करवाने और चुस्त-दुरूस्त रखने में हरी चाय फायदेमंद है|

8.12.15

मोटे अनाज के फायदे

 हमारे रोजमर्रा के भोजन में ज्यादातर यही दोनों मोटे अनाज गेहूं और चावल  विभिन्न रूपों में मौजूद होते हैं। जबकि हमें तमाम मोटे अनाज खाने चाहिए जो इससे इतर भी हों। मसलन, जई, बाजरा, ज्वार, रागी, जौ आदि। लेकिन शहरी भारत के ज्यादातर लोगों को इन तमाम मोटे अनाजों के बारे में या तो पता नहीं है या इनका इस्तेमाल उनकी आदत का हिस्सा नहीं हैं। यही वजह है कि मोटे अनाज के तौर पर हम सिर्फ और सिर्फ गेहूं और चावल के तमाम उत्पाद खाते रहते हैं और सोचते हैं कि मोटे अनाज खाने की हमारी जरूरत पूरी हो गई। जबकि खुराक विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपको  स्वस्थ  रहना है  तो अपने खाने में सभी तरह  के मोटे अनाजों को  शामिल करने की चिंता होनी  चाहिए| 

ओट्स
ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है। ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए। ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है। ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है। ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, लोहा और विटामिन-बी व ई भरपूर मात्रा में होते हैं। जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीडि़त हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए।
जौ
जौ वह अनाज है जिसमें सबसे ज्यादा अल्कोहल पाया जाता है। यह पच जाने वाले फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। यह ब्लड कोलेस्ट्रोल को कम करता है। यह ब्लड ग्लूकोज को बढ़ाता है। जौ मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत और एंटीऑक्सीडेंट है। अल्कोहल से भरे होने के कारण यह डायूरेटिक है इस कारण हाइपर टेंशन से पीडि़त लोगों के लिए फायदेमंद है।
रागी
रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसलिए जो लोग ऑस्टेपेनिया के शिकार हैं और ऑस्टेपोरेसिस के भी, ऐसे दोनों लोगों के लिए यह फायदेमंद है। यह मोनोपोज के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। जो लोग लेक्टोज की समस्या से पीडि़त होते हैं उनके लिए रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसीलिए रागी का इस्तेमाल छोटे बच्चों के भोजन में भी होता है।
बाजरा
बाजरा एक गर्म अनाज है। इसलिए आमतौर पर इसका स्वागत जाड़ों के दिनों में ही किया जाता है। बाजरा प्रोटीन का भंडार है। बाजरे में मैथाइन, ट्राइप्टोफान और इनलिसाइन बड़ी मात्रा में पाया जाता है। यह थायमीन अथवा विटामिन-बी का अच्छा स्रोत है और आयरन तथा कैल्शियम का भी भंडार है। यह उन लोगों के लिए तो बहुत ही फायदेमंद है जो गेहूं नहीं खा सकते। लेकिन बाजरे को किसी और अनाज के साथ मिलाकर खाना चाहिए। 


ज्वार    ज्वार भी एक तरह से जाड़ों में पसंद किया जाने वाला अनाज है। इसमें बहुत कम वसा होती है और ये कार्बोहाइडेट का जबरदस्त भंडार है।इसमें भी आयरन, कैल्शियम का उपयोगी भंडार होता है। यह उनके लिए सही रहता है जो पोलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीडि़त हैं।
    यह मूत्र प्रक्रिया को सुचारू रूप से बनाए रखने में सहायक है। जिससे हाइपर टेंशन रोगी परेशान रहते हैं।
सारांश यह कि तमाम तरह के मोटे अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। अगर हम मोटे अनाजों के नाम पर सिर्फ गेहूं और चावल न खाकर अपने रोजमर्रा के भोजन में इन मोटे अनाजों को भी शामिल करें तो इनसे होने वाले फायदे 
बेशुमार होंगे| 
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11.11.15

परवल के लाभ Benefits of Parval


 
  परवल भारत के लगभग हर प्रदेश में सब्जी के तौर पर खाया जाता है, दिखने में यह कुंदरू की तरह होता है, लेकिन आकार में कुछ बड़ा सा होता है। सब्जी बाजार में परवल लगभग सभी मौसम में बिकते हुए देखा जा सकता है। भले ही शहरी लोग शायद इसके औषधीय गुणों से परिचित नहीं हैं, लेकिन सब्जियों के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाला परवल ग्रामीण भारत  के लिए किसी चमत्कारिक असरदार औषधि से कम नहीं है। चलिए आज जानते है किस तरह भारतीय ग्रामीण  परवल को अपने स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए उपयोग में लाते हैं।
    इसका वानस्पतिक नाम ट्रायकोसेन्थस डायोका है और अंग्रेजी भाषा में इसे पोईंटेड गोर्ड कहते हैं। अक्सर कई फलों और सब्जियों का अलग-अलग मौसम में सेवन करना वर्जित माना जाता है, लेकिन सेहत के लिए उत्तम गुणों से भरपूर होने की वजह से आदिवासी परवल को साल भर सेवन करने के लिए अच्छा मानते हैं।
1. परवल और हरा धनिया की पत्तियों की समान मात्रा यानी दोनों 20 ग्राम मात्रा मे लेकर कुचल लें। इसे थोड़े पानी में रातभर के लिए भिगो दें। सुबह छानकर तीन हिस्से कर हर हिस्से में थोड़ा सा शहद डालकर दिन में 3 बार रोगी को देने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

2). परवल का जूस बनाकर उसमें थोड़ी मात्रा में सौंफ और हींग का पाउडर मिला लें। इसे रोजाना थोड़ी मात्रा में पीने से मोटापा दूर होने लगता है।


3). सिर का दर्द होने पर परवल के रस का लेप करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। परवल के फलों को कुचलकर रस निकाल लें और उसे माथे पर लगाएं। ज्यादा दर्द होने पर परवल पत्तियों को तोड़कर उनका भी रस तैयार कर उपयोग में लाया जा सकता है। जड़ों का रस भी सिर दर्द में राहत दिलाने के लिए प्रचलित है।

4) . परवल की सब्जी खाने से पेट की सूजन दूर हो जाती है। जिन लोगों को अक्सर पेट में पानी भर जाने की शिकायत हो उनके लिए परवल वरदान है। हर्बल जानकारों के अनुसार अक्सर परवल की सब्जी खाते रहने से पेट से जुडी अनेक समस्याओं में आराम मिलता है।


5) . परवल के पत्तों को पीसकर मवाद युक्त फोड़ों, फुंसियों और घावों पर लेप करने से ये जल्दी सूख जाते हैं। यदि शरीर में फोड़े -फुंसियां हो जाएं तो कम मसालों से तैयार की गई परवल की सब्जी को पंद्रह दिनों तक लगातार खाने से आराम मिल जाता है। चिकित्सा  विज्ञानियों  के अनुसार परवल खून साफ करने के लिए बेहद कारगर होता है। 

6) अपचन या किसी वजह से पेट की सफाई जरूरी हो तो परवल की जड़ों को पानी में उबाल लें। इसका एक गिलास मात्रा में रस पेट की सफाई के लिए लें। डांग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार इस फार्मुले का सेवन रात को सोने से पहले करना चाहिए।

7.11.15

ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के उपचार : How to contro blood pressure


वर्तमान समय में ब्लड प्रेशर के रोगी  पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। दौड़ती - भागती जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या के कारण यह बीमारी भारत में भी फैल रही है। ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इस बीमारी के रोगी को रोज दवा खानी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ये समस्या है तो पारंपरिक चीजों का उपयोग करें। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही सामान्य चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर हमेशा नियंत्रण  में रहता है।


1. लहसुन
लहसुन एक ऐसी औषधि है, जो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अमृत के समान है। लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर के डायस्टोलिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली निगलने की सलाह दी जाती है।
3. मूली
यह एक साधारण सब्जी है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे पकाकर या कच्चा खाने से बॉडी को मिनरल्स व सही मात्रा में पोटैशियम मिलता है। यह हाइ-सोडियम डाइट के कारण बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है।

4. तिल
तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह ब्लड प्रेशर कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर होता है।
5. अलसी
अलसी में एल्फा लिनोनेलिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का महत्वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने भोजन में अलसी का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कम हो जाता है।

6. इलायची
एक रिसर्च के अनुसार इलायची के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावी ढंग से कम होता है। इसे खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है।
7. प्याज
प्याज के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें क्योरसेटिन होता है। यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है।


  • 8. दालचीनी
दालचीनी के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। ओहाई के अप्लाइड हेल्थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी दी गई, जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा थी और ब्लड सर्कुलेशन भी सही था।

17.10.15

पेट की चर्बी कम करने के उपचार : Home remedies to reduce belly fat




बाहर निकले हुए पेट को अन्दर करने के  उपाय 





ऊपर  चित्र में दिए गए उपचारों   के अलावा नीचे  पेट की चर्बी कम करने में मददगार कुछ और  उपाय  दिए जा रहे हैं-

1)  दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पिएं। ऐसा करने से पेट की चर्बी कम होकर  मोटापा कम होने लगेगा।





2) खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।

3) ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें न खाएं। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।

4) सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन पर्याप्त  मात्रा में करें।लेकिन  केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है।



5)  खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन नियंत्रित  करने में मदद मिलती है|

6)  केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।

7) आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं।  यह उपाय चर्बी कम करने  में अक्सीर है| 

8) पुदीने की ताजी हरी पत्तियों की चटनी बनाकर चपाती के साथ खाएं। पुदीने वाली चाय पीने से भी वजन नियंत्रण में रहता है।

9) आधा चम्मच सौंफ को एक कप खौलते पानी में डाल दें। 10 मिनट तक इसे ढककर रखें। ठंडा होने पर इस पानी को पिएं। ऐसा लगातार करते रहने से वजन कम होने लगता है।

10) पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।



 11) छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।

12) दही  खाने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।

9.10.15

पायरिया का सरल ईलाज :Pyorrhea tips


   


    दांतों की साफ सफाई में कमी होने से जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया। सांसों की बदबू, मसूड़ों में खून और दूसरी तरह की कई परेशानियां। जाड़े के मौसम में पायरिया की वजह से ठंडा पानी पीना मुहाल हो जाता है। पानी ही क्यों कभी-कभी तो हवा भी दांतों  में सिहरन  पैदा कर देती है|


  पायरिया के बारे में एक गलत धारणा ये है कि इसका इलाज मुमकिन नहीं जबकि हकीकत ये है कि इसका इलाज मुमकिन है। पायरिया की वजह से हिलते दांतों को भी पक्का किया जा सकता है। अच्छी तरह से मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई से ये बीमारी दूर हो सकती है|

 1)   नीम के पत्ते साफ कर के छाया में सुखा लें। अच्छी तरह सूख जाएँ तब एक बर्तन में रखकर जला दें और बर्तन को तुरंत ढँक दें। पत्ते जलकर काले हो जाएँगे और इसकी राख काली होगी। इसे पीसकर कपड़छान कर लें। जितनी राख हो, उतनी मात्रा में सेंधा नमक पीसकर शीशी में भर लें। इस चूर्ण से तीन-चार बार मंजन कर कुल्ले कर लें। भोजन के बाद दाँतों की ठीक से सफाई कर लें। यह नुस्खा अत्यंत गुणकारी है।

 2)  सादी तम्बाकू, पर्याप्त मात्रा में लेकर तवे पर काला होने तक भूनें। फिर पीसकर कपड़छान कर महीन चूर्ण कर लें। इसके वजन से आधी मात्रा में सेंधा नमक और फिटकरी बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और तीनों को मिलाकर तीन बार छान लें, ताकि ये एक जान हो जाएँ।इस मिश्रण को थोड़ी मात्रा में हथेली पर रखकर इस पर नीबू के रस की 5-6 बूँदें टपका दें। अब इससे दाँतों व मसूढ़ों पर लगाकर हलके-हलके अँगुली से मालिश करें। यह प्रयोग सुबह और रात को सोने से पहले 10 मिनट तक करके पानी से कुल्ला करके मुँह साफ कर लें।दो-तीन माह में मसूड़े स्वस्थ, दाँत मजबूत हो जाते हैं और पायरिया रोग चला जाता है। जो लोग तम्बाकू खाते हैं, उन्हें इस मंजन के प्रयोग में परेशानी नहीं होगी, परंतु जो तम्बाकू का प्रयोग नहीं करते उन्हें इसके प्रयोग में तकलीफ होगी। उन्हें चक्कर आ सकते हैं। अत: सावधानी के साथ कम मात्रा में मंजन लेकर प्रयोग करें। इस मंजन को करते समय थूक कदापि न निगलें, तम्बाकूयुक्त लार पेट में कदापि न जाने पाए। यह नुस्खा लाजवाब सिद्ध होगा।बच्चों के लिए यह प्रयोग निषेध है।





३)  कच्चे अमरुद पर थोडा सा नमक लगाकर खाने से भी पायरिया के उपचार में सहायता मिलती है, क्योंकि यह विटामिन सी का उम्दा स्रोत होता है जो दाँतों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है।

४) पायरिया शरीर में कैल्शियम की कमी होने, मसूड़ों की खराबी और दांत-मुंह की साफ सफाई में कमी रखने से होता है। इस रोग में मसूड़े पिलपिले और खराब हो जाते हैं और उनसे खून आता है। सांसों की बदबू की वजह भी पायरिया को ही माना जाता है।

५) ज्ञातव्य है  की  मुंह में 700 किस्म के बैक्टीरिया होते हैं। इनकी संख्या करोड़ों में होती है। अगर समय पर मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई नहीं की जाए तो ये बैक्टीरिया दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। पायरिया होने पर दांतों को सपोर्ट करने वाले जॉ बोन को नुकसान पहुंचता है।

६)  घी में कपूर मिलाकर दाँतों पर मलने से भी पायरिया मिटाने में सहायता मिलती है।



 ७) काली मिर्च के चूरे में थोडा सा नमक मिलाकर दाँतों पर मलने से भी पायरिया के रोग से छुटकारा पाने के लिए काफी मदद मिलती है।

८)      200 मिलीलीटर अरंडी का तेल, 5 ग्राम कपूर, और 100 मिलीलीटर शहद को अच्छी तरह मिला दें, और इस मिश्रण को एक कटोरी में रखकर उसमे नीम के दातुन को डुबोकर दाँतों पर मलें और ऐसा कई दिनों तक करें। यह भी पायरिया को दूर करने के लिए एक उत्तम उपचार माना जाता है।

९) . आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं,इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें।

१०) खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं। 


 ११) जीरा, सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी  को समान मात्रा में लें, इसे तवे पर जलाकर पीस लें,इस मंजन का नियमित प्रयोग करें।

.१२)  बादाम के छिलके तथा फिटकरी को भूनकर फिर इनको पीसकर एक साथ मिलाकर एक शीशी में भर दीजिए। इस मंजन को दांतों पर रोजाना मलने से पायरिया रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

१३) दशना संस्कार चूर्ण पायरिया के उपचार के लिए एक बहुत ही प्रचलित औषधि है। यह पाउडर मसूड़ों से रक्तस्राव और पस के निर्माण पर नियंत्रण रखता है, और मुँह से दुर्गन्ध हटाने में भी सहायता करता है।
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7.10.15

निम्न रक्त चाप के घरेलू उपचार : Home Remedies for Low Blood Pressure





निम्न रक्त चाप जिसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं , इसमें शरीर में रक्त परिवहन बहुत ही धीमा हो जाता है जिसके कारण सिर घूमना, चक्कर आना, कमजोरी, जी मिचलाना, धुंधला दिखाई देना और सांस लेने में दिक्कत जैसी बहुत सी परेशानियां होने लगती हैं। शरीर का सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 होता है लेकिन अगर बीपी का लेवल 90/60 आ रहा है तो ध्यान देने की जरूरत है। निम्न रक्त चाप का ब्रेन, किडनी और हार्ट पर बुरा असर पड़ता है। जिसके चलते ह्रदय रोग , गर्भावस्था , दिमाग से संबंधित बीमारियों के होने की भी संभावना रहती है।
निम्न रक्त चाप में उपयोगी घरेलू उपचार



नमक वाला पानी-
बीपी लो होने पर सबसे पहले घरेलू उपचार के तौर पर नमक मिला पानी पिएं क्योंकि नमक में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाने का काम करता है। लेकिन ध्यान रहे बहुत ज्यादा मात्रा में भी इसका इस्तेमाल नहीं करना है। नमक की ज्यादा मात्रा शरीर के लिए उचित नहीं है|
अनार-
अनार का जूस भी निम्न रक्त चाप की समस्या को दूर करके का बेहतरीन इलाज है। सिर्फ एक हफ्ते के इस्तेमाल के बाद ही फर्क नजर आने लगता है। इसके अलावा सेब, केला, चीकू भी अच्छा विकल्प होता है।
कॉफी-
एक कप कॉफी, हॉट चाकलेट या कैफीन मिली हुई चीजों खाने या पीने से भी लो बीपी को तुरंत कंट्रोल किया जा सकता है। लो बीपी की प्रॉब्लम काफी वक्त से चल रही है तो सुबह उठते ही एक कप कॉफी पिएं या नाश्ते के साथ जरूर लें। लेकिन कॉफी पीने की आदत न डालें क्योंकि ज्यादा कैफीन भी बॉडी के लिए सही नहीं।
अदरक-
अदरक के टुकड़ों को नींबू और नमक मिलाकर किसी एयर टाइट डिब्बे में रखें। रोजाना खाने से पहले इसके टुकड़ों को अच्छे से चबाएं। बीपी की प्रॉब्लम दूर करने में ये फॉर्मूला भी बहुत ही कारगर है।
गाजर-
गाजर में मौजूद प्रोटीन ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने में कारगर होता है। कच्चा खाने के साथ ही अगर शहद मिले इसके जूस को एक महीने तक दिन में एक बार पिया जाएं तो समस्या दूर हो जाएगी।
तुलसी के पत्ते-
तुलसी की पत्तियों में विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटैशियम और पैंटोथेनिक एसिड पाया जाता है। ये सारे मिनरल्स स्ट्रेस कम करने के साथ ही दिमाग को शांत रखते हैं। तुलसी की 10-15 पत्तियों का रस निकाल लें उसमें लगभग 1 चम्मच शहद की मात्रा मिलाएं। रोजाना खाली पेट इसे पिएं। बहुत जल्द फायदा मिलेगा।


किशमिश-
किशमिश को काफी वक्त से हाइपोटेंशन के लिए इलाज के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। एक महीने तक लगातार इसके इस्तेमाल से लो बीपी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। रात भर किशमिश को पानी में भिंगोकर रखें। सुबह खाली पेट इसे चबाकर खाएं और पानी को छानकर पी लें। बहुत ही कारगर नुस्खा है।
चुकंदर का रस-
चुकंदर का रस हाई ब्लड प्रेशर के साथ ही लो ब्लड प्रेशर होने पर भी इस्तेमाल किया जाता है। लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर एक हफ्ते तक लगातार दिन में दो बार एक कप चुकंदर का जूस पिएं।

बादाम वाला दूध-


दिमागी शक्ति बढ़ाने के साथ ही बादाम मिला दूध ब्लड सर्कुलेशन का लेवल भी सही रखता है। बादाम को रातभर पानी में भिंगोकर रख दें। सुबह इसे छीलकर अच्छे से पीसकर इसका पेस्ट बना लें। पेस्ट को दूध में मिलाकर रोजाना सुबह पीना फायदेमंद होता है।

हींग-
चुटकी भर हींग के इस्तेमाल से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर किया जा सकता है। इससे ब्लड क्लोटिंग नहीं होती जिससे सर्कुलेशन सही तरीके से होता है।
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6.10.15

पेट के कीड़ों का सरल इलाज :Treatment of intestinal worms


१)  छोटे  बच्चों  के पेट के कीड़ों को निकालने के लिए सौंफ का तेल ५ मिली थोड़ी  सी शकर के साथ ३ से  ५ दिन  दें|

२| वयस्क लोगों के पेट के कीड़ों के लिए २० मिली सौंफ का तेल  कुछ शकर के साथ  ४-५ दिन तक दें| 

३)  सोते वक्त  २ चम्मच  अरंडी  का तेल  पिलायें|  सुबह की दस्त में तमाम कीड़े निकल जायेंगे| 

४)  तुलसी के पत्ते का रस  पेट के कीड़े ख़त्म करने का अच्छा उपाय है|  तुलसी के पत्तों  का रस २-३ मिली  ७ दिन तक देना चाहिए| 

५)  मामूली  गरम पानी के साथ  आधा चम्मच  हल्दी की फक्की  लेने से  पेट के कीड़े मर जाते है|  यह उपचार ७ दिन तक करना  उचित है|    

६) बच्चों को यदि पेट में कृमि-कीड़ों की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर  निकल आते हैं।

७) बेल के पके फलों के गूदे का रस या जूस तैयार करके पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।  बेल के फलों के बजाए पत्तों का रस का सेवन किया जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

८) पपीते के फलों की डंठल से निकलने वाले दूध 3 मिली दूध को बच्चों को रात सोते समय देने से पेट के कीड़े मर जाते है और शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

९) जीरा के कच्चे बीजों को दिन में 5 से 6 बार करीब 3 ग्राम की मात्रा चबाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। कच्चा जीरा पाचन  क्रिया  को दुरुस्त भी करता है और गर्म प्रकृति का होने की वजह से कीड़ों को मार देता है और कीड़े शौच के साथ बाहर निकल आते हैं

१०) तेजपान के पत्तियों में कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं। सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन रात में सोने से पहले 2 ग्राम गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिया जाए तो पेट के कृमि मर कर मल के साथ बाहर निकल आते हैं।
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1.9.15

हकलाहट की सरल चिकित्सा :Tips stutter


हकलाहट का नुस्खा -
१) कुछ बच्चे बड़े होने की बाद भी तुतलाकर और अटक- अटक कर बोलते हैं | इस समस्या के निवारण हेतु निम्न नुस्खा बेहद कारगर साबित हुआ है -
बादाम गिरी ५० ग्राम
दालचीनी १० ग्राम
पिश्ता २० ग्राम
केसर ३ ग्राम
अकरकरा १० ग्राम
चांदी का वर्क १० ग्राम
शहद २५० ग्राम
सभी चीजों का चूर्ण बनाकर शहद में मिलादें और किसी कांच के पात्र में भरलें मात्रा ५ से १० ग्राम रोजाना सुबह के वक्त ४० दिन तक सेवन करें| हकलाहट में जरूर लाभ होता है|
२) जब कोइ हकलाकर बोलता है तो लोग अक्सर हंस देते हैं जो हकलाने वाले व्यक्ति के लिए अपमान जनक होता है| उसे स्नेह से समझाना चाहिए| हकलाकर बोलने वाले बच्चे को इस दोष से मुक्ति पाने के लिए बराबर अभ्यास कराना चाहिए| उसे कुंठित होकर बैठ जाने देना उचित नहीं है|
३) हकलाने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे बोलने का अभ्यास कराएं| स्वर और उच्चारण पर ध्यान दें| हकलाने के बावजूद भी उसे खूब बोलने और पढ़ने का अभ्यास कराएं|
४) बच्चे को अनावश्यक सोच विचार में न फंसने दें|
बच्चों में हकलाकर बोलना अक्सर देखा जाता है| यह कोई रोग नहीं बल्कि कुछ पौष्टिक तत्वों की शरीर में कमी की वजह से होता है| हकलाहट में निम्न जडी बूटियाँ लाभ करती हैं-
५) बच्चे को एक हरा आंवला रोज चबाने को दें| इससे जीभ पतली होने में मदद मिलेगी और जीभ की गर्मी भी शांत होगी| अत: बच्चे का हकलाना बंद हो जाएगा|
6) काली मिर्च और बादाम प्रत्येक ७ नग लेकर कुछ बूँद पानी में घिसकर चटनी बनालें| इसमें थौड़ी सी मिश्री मिलाकर बच्चे को चटाते रहें| एक या दो माह में बच्चे का हकलाना बंद हो जाएगा|
7) सुबह सवेरे माखन में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर चटाने से हकलाहट में लाभ होता है|
8) तेजपान को जीभ के नीचे रखने से हकलाना बंद हो जाता है|

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6.7.15

गुर्दों की सेहत के प्रति रहें सतर्क: Be alert to the health of the kidneys



   
  हमारे शरीर का दो तिहाई हिस्सा पानी से बना है,और गुर्दों का काम है शरीर मे पानी का बेलेन्स मेंटेन करना| गुर्दे न सिर्फ शरीर मे नमी की मात्रा सही रखता है बल्कि खून मे ऊर्जा संचार और अपघट्य की मात्रा संतुलित रखने मे मदद करता है| शरीर के विजातीय द्रव्य याने जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने का महत्वपूर्ण कार्य भी गुर्दे ही करते हैं|
आज देश मे किडनी की खराबी के कारण मरने वालों के मामले बढ़ते जा रहे हैं| ईसकी सबसे बड़ी वजह है अस्त व्यस्त जीवन शैली ,गलत खान पान और मधुमेह रोग | गुर्दे खराब होने के पहिले सूचित नहीं करते| कोई खास लक्षण नहीं उभरते | स्वस्थ और पौष्टिक भोजन और प्राकृतिक औषधि गुर्दे को मजबूत करने मे मददगार होती हैं|
दिन भर मे कम से कम 12 गिलास पानी पीएं वरना गुर्दे खराब होने की संभावना बनती है| सुबह की शुरूआत एक गिलास नींबू पानी से करें| दूसरी चीजें जैसे फल,सब्जियाँ ,फलों का जूस ,सेव,संतरा,मोसमी, अंगूर,चुकंदर गुर्दे को स्वस्थ रखते हैं|
  गोखरू एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो गुर्दे के विकारों मे बहुधा प्रयोग की जाती है| इसके प्रयोग से पथरी की समस्या से भी मुक्ति मिल जाती है| गुर्दे मे लगातार होने वाली समस्याओं मे चन्द्र प्रभा वटी उपयोग की जाती है| लेकिन जब तक आप अपने खान पान मे बदलाव नहीं करेंगे इन औषधियों का सीमित प्रभाव पड़ेगा | अंकुरित अनाज ,हल्दी और लहसुन का उचित मात्रा मे इस्तेमाल करते रहें|
ज्यादा चाय,काफी,शराब और गुटखा का सेवन करना गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नही है| इन तमाम विषैली चीजों को शरीर से बाहर निकालने मे गुर्दे को भारी मशक्कत करनी होती है| गुर्दे को फायदा पहुंचाने मे अनार ,तरबूज और पपीता तथा विटामिन बी काम्प्लेक्स और विटामिन सी विशेष महत्वपूर्ण है| भारी प्रोटीन युक्त आहार को पचाने मे गुर्दे आपकी हड्डियो से केल्शियम लेते हैं| इसलिए भोजन मे केल्शियम होना जरूरी है| दूध मे उत्तम क्वालिटी का केलशियम होता है| नींबू गुर्दे के लिए लाभदायक है|

गुर्दे खराब रोगी क्या खाएँ-
रोगी की किडनी कितना फीसदी काम कर रही है, उसी के हिसाब से उसे खाना दिया जाए तो किडनी की आगे और खराब होने से रोका जा सकता है :
1. प्रोटीन : 1 ग्राम प्रोटीन/किलो मरीज के वजन के हिसाब से लिया जा सकता है। नॉनवेज खानेवाले 1 अंडा, 30 ग्राम मछली, 30 ग्राम चिकन और वेज लोग 30 ग्राम पनीर, 1 कप दूध, 1/2 कप दही, 30 ग्राम दाल और 30 ग्राम टोफू रोजाना ले सकते हैं।
2. कैलरी : दिन भर में 7-10 सर्विंग कार्बोहाइड्रेट्स की ले सकते हैं। 1 सर्विंग बराबर होती है - 1 स्लाइस ब्रेड, 1/2 कप चावल या 1/2 कप पास्ता।
3. विटामिन : दिन भर में 2 फल और 1 कप सब्जी लें।
4. सोडियम : एक दिन में 1/4 छोटे चम्मच से ज्यादा नमक न लें। अगर खाने में नमक कम लगे तो नीबू, इलाइची, तुलसी आदि का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए करें। पैकेटबंद चीजें जैसे कि सॉस, आचार, चीज़, चिप्स, नमकीन आदि न लें।इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही लें। डॉक्टर फॉसफोरस बाइंडर्स देते हैं, जिन्हें लेना न भूलें।
6. कैल्शियम : दूध, दही, पनीर, टोफू, फल और सब्जियां उचित मात्रा में लें। ज्यादा कैल्शियम किडनी में पथरी का कारण बन सकता है।
7. पोटैशियम : फल, सब्जियां, दूध, दही, मछली, अंडा, मीट में पोटैशियम काफी होता है। इनकी ज्यादा मात्रा किडनी पर बुरा असर डालती है। इसके लिए केला, संतरा, पपीता, अनार, किशमिश, भिंडी, पालक, टमाटर, मटर न लें। सेब, अंगूर, अनन्नास, तरबूज़, गोभी ,खीरा , मूली, गाजर ले सकते हैं।
8. फैट : खाना बनाने के लिए वेजिटबल या ऑलिव ऑयस का ही इस्तेमाल करें। बटर, घी और तली -भुनी चीजें न लें। फुल क्रीम दूध की जगह स्किम्ड दूध ही लें।
9. तरल चीजें : शुरू में जब किडनी थोड़ी ही खराब होती है तब सामान्य मात्रा में तरल चीजें ली जा सकती हैं, पर जब किडनी काम करना कम कर दे तो तरल चीजों की मात्रा का ध्यान रखें। सोडा, जूस, शराब आदि न लें। किडनी की हालत देखते हुए पूरे दिन में 5-7 कप तरल चीजें ले सकते हैं।
10. सही समय पर उचित मात्रा में जितना खाएं, पौष्टिक खाएं।
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फॉसफोरस :
दूध, दूध से बनी चीजें, मछली, अंडा, मीट, बीन्स, नट्स आदि फॉसफोरस से भरपूर होते हैं


विशिष्ट सलाह-  
  बढे हुए क्रीएटनिन के लेविल  को  नीचे लाने  में हर्बल  औषधि  सर्वाधिक  सफल  होती हैं|  वैध्य  दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है|  दुर्लभ  जड़ी-बूटियों से निर्मित  यह  औषधि कितनी आश्चर्यजनक  रूप  से फलदायी है ,इसकी  एक  केस रिपोर्ट  पाठकों की  सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ
नाम रोगी --  श्रीमती  तारा देवी गुप्ता W/O डॉ.अरविंद कुमार गुप्ता BAMS ,बलिया  उत्तर प्रदेश








1)  जांच की रिपोर्ट  दिनांक  1/6/2015
सीरम  क्रीएटनिन    11.5/ mg/dl












2) जांच  की रिपोर्ट  दिनांक 18/6/2015
सीरम क्रेयटनिन   7.8 / mg/dl

























3)  जांच की रिपोर्ट  दिनांक   22/7/2015
सीरम  क्रीएटनिन   4.09 mg/dl 
































23.6.15

गर्मियों में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खास उपाय: Special measures to keep your heart healthy in summer




गर्मी के मौसम मे बुुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति और खासतौर से हृदय रोग से पीडि़त व्यक्ति को खास ध्यान देने की जरूरत होती है। वे जिन्हें पहले से ही हृदय की समस्या है उन्हें ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित रखने के लिए कुछ प्रकार की दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। अत्यधिक गर्मी और उमस शरीर के संतुलन को बिगाडऩे का काम करती है। खासतौर पर लो ब्लड प्रेशर और हार्ट फेलियर वालों के लिए पानी की कमी और पसीने के कारण इलेक्ट्रोलेट असंतुलन के कारण ब्लड प्रेशर को मेंटेन रखना कठिन होता है साथ ही जो डाइयुरेटिक्स (मूत्र बनाने वाली दवा) लेते हैं उन्हें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और सॉल्ट डिप्लेशन (नमक की कमी) हो जाता है। हमारा शरीर 98.40 फा. (370से) तक के सामान्य बॉडी टेम्प्रेचर कोबनाए रखने के लिये सेट होता है जिससे यह अत्यधिक गर्मी में हार्ड वर्क (कूलिंग इफेक्ट) कर सकता है। जैसा कि हम सभी गर्मियों में सन स्ट्रोक या हीट स्ट्रोक के प्रभाव के बारे में जानते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इसके सामान्य लक्षणों में गर्मी से थकान, (हीट एग्जर्शन), सिर दर्द, बेचैनी, चिढ़चिड़ापन और प्यास का बढऩा नजर आता है। दिल शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो असंतुलन को ठीक करने के लिए कड़ी मेहनत करता है। जैसे-जैसे टेम्प्रेचर बढ़ता है शरीर वासोडिलेटेशन (त्वचा के ब्लड वेसेल्स को ठंडक पहुंचाने वाला) के द्वारा गर्मी को नष्ट करता है जिसकी वजह से पसीना त्वचा के तापमान को ठंडा करता है लेकिन इस वासोडिलेटेशन का असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है जिससे ब्लड प्रेशर को बनाए रखने के लिए हृदय के पम्प करने की गति (हार्ट रेट) बढ़ जाती है। ऐसे रोगी जो हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं उन्हें ब्लड प्रेशर कम करने और हार्ट रेट को नियंत्रित रखने की दवाएं दी जाती हैं। इसलिए इस तरह के परिवर्तन कभी-कभी मुश्किल से दिखते हैं।
इसके लिए सामान्य तौर पर बीटा ब्लॉकस, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, एसीई इनहैबिटर्स आदि दवाएं हैं।
समस्त गंभीर बीमारियों से संबंधित हार्ट स्ट्रोक तब होता है जब टेम्प्रेचर 1050 फा. से ऊपर चला जाता है यह प्राणघातक भी होता है। नीचे दी गई परिस्थिति में फिजिशियन को दिखाना जरूरी है--शरीर का तापमान अत्यधिक (1030फा.) बढ़ जाना, गर्म और रुखी त्वचा (बिना पसीने के),धमक के साथ सिरदर्द,चक्कर आना व भ्रम/बेचैनी।
इस तरह की परिस्थिति में तरल चीजें पर्याप्त नहीं होती, सबसे पहले बॉडी टेम्प्रेचर को ठंडा इलेक्ट्रोलेट के असंतुलन को ठीक करना जरूरी होता है। इससे भी ज्यादा प्रत्येक हृदय रोगी को बदलते मौसम के दौरान अपने दवा को रिएडजेस्ट कराने के लिए नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


गर्मियों में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खास उपाय-
दोपहर में 2 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान गर्मी चरम पर होती है।
बुजुर्ग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या किसी जानकार के साथ अपना नियमित व्यायाम जरूर करें, जिससे किसी इमरर्जेंसी में वे आपकी सहायता कर सकें।
व्यायाम के दौरान कई बार ब्रेक लें या फिर किसी शेड या ठंडी जगह पर सुस्ता लें।
व्यायाम के दौरान अच्छी तरह के हवादार जूते और मोजे पहनें जिससे पसीना कम निकलेगा।
अगर आप हेल्दी भोजन करेंगे तो गर्मी का सामना भी आसानी से कर सकेंगे और आपका हृदय भी स्वस्थ रहेगा। बॉडी टेम्प्रेचर, भूख और प्यास को संतुलित रखने में मस्तिष्क का एक भाग हाइपोथैल्मस मदद करता है। इसलिए हीट स्ट्रोक से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है हाइपोथैल्मस जो एंड्रोसाइन का हिस्सा होता है उसकी कार्य प्रणाली ठीक प्रकार से होती रहे। पत्तेदार हरी सब्जियां, ऑलिव आईल , बादाम और काजू आदि फैटी एसिड्स और मिनरल से भरपूर खाद्य पदार्थ लें, ये खतरनाक गर्मी से बचने में सहायता करेंगे।
तरबूज, नाशपाती और पाईनेपल पानी से भरपूर होते हैं। इन्हें खाने से खेलते वक्त, व्यायाम करते वक्त या गर्मियों के प्रतिदिन के काम करते वक्त डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं। ब्रॉथ, सूप और नट मिल्क के साथ अनाज आदि लेने से शरीर की नमी बनी रहती है। इस तरह के खाद्य पदार्थ आपके जलीयांश के स्तर को बढ़ाते हैं जिससे आपके शरीर को पोषण मिलता है और हाइड्रेट भी रहता है।
कॉफी से बचने का प्रयास करें क्योंकि यह मूत्र वर्धक का काम करता है, जिससे आपको बार-बार पेशाब की आवश्यकता हो सकती है जिससे शरीर का मूल्यवान पानी निकल जाता है।
अगर आप इन सावधानियों का अनुसरण करें तो हीट स्ट्रोक से बच सकते हैं।

2.6.15

गर्मी में विटामिन सी आपको रखता है स्वस्थ Vitamin C keeps you healthy in hot weather



     गर्मियों का मौसम काफी गरम होता है जिस वजह से गरम सूर्य  की ताप शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करती है। इसलिये आपके शरीर को गर्मी से सुरक्षा चाहिये। तेज सूरज की गर्मी आपके शरीर और त्वचा को बुरी तरह से झुलसा देती है, जिस वजह से उसे बचाना आवश्यक है। शरीर पर सनस्क्रीन लगाने और मुंह पर कपड़ा ढांकने के अलावा आपको अंदर से भी सुरक्षा देने की आवश्यकता है। इसलिये जरुरी है कि आप ढेर सारे विटामिन सी वाले आहार का सेवन करें। विटामिन सी आपके शरीर को यूवी किरणों तथा तेज गर्मी से बचाएगा। आपको विटामिन सी हर तरह के साइट्रस फल में जैसे, नींबू, संतरा, अमरूद, मुसम्मी आदि में मिल जाएगा। अब  देखते हैं  गर्मियों में विटामिन सी के सेवन से क्या-क्या लाभ होते हैं-

1.सन बर्न: कई लोगों को नहीं पता कि सन बर्न त्वचा को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कैंसर का भी होने का खतरा रहता है। लेकिन विटामिन सी के अधिक सेवन से आप इस चीज़ को टाल सकते हैं।

2.एंटीऑक्सीडेंट: विटामिन सी में काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। फ्री रैडिकल्स से बचने के लिये आपके शरीर को एंटीऑक्सीडेंट की जरुरत पड़ती है। आप की त्वचा सूरज की तेज किरणों तथा प्रदूषण के खतरे से खुद को बचा सकती है। इसलिये यह जरुरी है कि आप विटामिन सी का सेवन गर्मियों में करें।

3.कोलेजन का उत्पादन: शरीर को विटामिन सी की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि यह कोलेजन का उत्पादन करती है। कोलेजन एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो त्वचा में लचीलापन लाता है और त्वचा को स्मूथनेस प्रदान करता है।

4.त्वचा: अगर आप अपनी त्वचा पर चमक और लचीलापन लाना चाहती हैं तो विटामिन सी का सेवन करें।

5.गरम मौसम: विटामिन सी ज्यादा गर्मी में हमारे शरीर को उसे के समान एडजस्ट कर देता है। जैसे जैसे तापमान बढ़ता जाता है, वैसे ही आपके शरीर को ढलने की आवश्यकता पड़ती है। आप का शरीर जितनी जल्दी तापमान के हिसाब से ढल जाए, उतना ही उसके लिये अच्छा होता है।


6.इलाज: विटामिन सी में रोगों का इलाज करने की शक्ति है। यह सन बर्न और गर्मियों के कई रोगों का इलाज करता है।

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7.5.15

जीरा घटाता है वजन :Cumin reduces weight






जीरा खाने को बेहतरीन स्वाद और खुशबू देने वाला मसाला है| यह केवल एक मसाला मात्र नहीं है बल्कि इसके अन्य कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं| आयुर्वेद में कई रोगों में में इसका उपयोग किया जाता है| भारत ,मेक्सिको और अमेरिका में जीरे का बहुतायत से उपयोग किया जाता है|
मैं अब जीरे से वजन कैसे कम किया जा सकता है ,इस पर लिखना चाहूँगा| एक ताजा मेडिकल स्टडी में पता चला है कि जीरा पावडर मोटापा कम करने में मदद गार है| बात ये है कि जीरा से शरीर में वसा का अवशोषण कम होता है| फल स्वरूप मोटापा घटाने में सहायक है|
एक बड़ा चम्मच जीरा एक गिलास पानी में डालकर रात भर के लिए रख दें| सुबह इसे उबाल लें और गरम गरम चाय की तरह पियें| बचा हुआ जीरा भी चबा कर खालें|
इसके नियमित इस्तेमाल से शरीर के किसी भी कौने की चर्बी घुलकर बाहर निकल जाती है| यह प्रक्रिया करने के बाद एक घंटे तक कुछ ना खाएँ\दूसरी विधि ये है कि भूनी हुई हींग ,काला नमक और जीरा बराबर  मात्रा में लेकर  चूर्ण बनालें|  मात्रा १ से ३ ग्राम, दही के साथ दिन में दो बार सेवन करने से  शरीर की अनावश्यक चर्बी  दूर  होती है|  साथ ही रक्त परिसंचरण  भी सुधरता है और शरीर का कोलेस्ट्रोल भी घटता  है|
यह नुस्खा लेने के बाद रात्री में कोई दूसरी भोजन सामग्री ना खाएं| धूम्र पान करने वाले और मसाला गुटखा खाने वालों पर इस नुस्खे का प्रभाव न के बराबर होता है| इसलिए दवा से लाभ प्राप्त करने के लिए धूम्र पान ,गुटखा, तम्बाखू त्याग दें| | दवा शाम के भोजन के दो घंटे बाद लेना कर्तव्य है| जीरा हमारे पाचन तंत्र को चुस्त दुरुस्त रखते हुए शरीर को उर्जावान बनाता है| जीरा हमारे इम्यून सिस्टम को ताकत देता है| फेट बर्न की गति तेज करता है| पेट की लगभग सभी समस्याओं में जीरे का प्रयोग हितकारी होता है| जीरे से शरीर की शोधन प्रक्रिया बलवान होती है \ यह न केवल मोटापा घटाता है बल्कि कई अन्य बीमारियों में भी हितकारी है|

7.4.15

गर्मी निवारण के उत्तम पेय :Heat prevention tips


      गर्मी के दिनों में शरीर को शीतल रखने के लिए लोग कोल्ड ड्रिंक्स पीना, एयरकंडीशन या कूलर चलाना शुरू कर देते हैं। क्योंकि गर्मी में तापमान बढऩे के कारण  लोग बेचैन होकर शरीर को ठंडा करने के लिए कृत्रिम तरीकों को अपनाना शुरू कर देते हैं जो स्वास्थ्य के दृष्टि से हानिकारक साबित होता है। गर्मी के दिनों में प्यास भी बहुत लगती है और लोग प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते है। ये ड्रिंक्स कुछ देर के लिए तो शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं लेकिन साथ में अनेक बीमारियाँ सौगात में लेकर आते हैं, जैसे- मोटापा, डाइबीटिज, कैंसर,तनाव, थाइरॉयड आदि।  लोग यह भूल जाते हैं कि प्रकृति में ही कुछ ऐसे शीतल पेय हैं जो शरीर को शीतलता प्रदान करने के साथ-साथ हेल्दी रखने में भी बहुत मदद करते हैं। ये शीतल पेय गर्मी के दिनों में त्वचा और पेट संबंधी कई रोगों से लडऩे में या संभावना को कम करने में मदद करता है। जैसे-


नारियल पानी-


गर्मी के दिनों में कृत्रिम कोल्ड ड्रिंक के जगह पर नारियल पानी सबसे अच्छा विकल्प होता है। नारियल पानी गर्मी के दिनों में होने वाले रोगों के खतरे को कुछ हद तक कम करने में मदद करता ही है साथ ही शरीर को ठंडा करके घमौरियों को आने से कुछ हद तक रोकता है। सुबह नारियल के पानी में नींबू के कुछ बूंद मिलाकर चाय के जगह पर पीने से मूत्र के द्वारा शरीर की गर्मी बाहर निकल जाती है। लेकिन नारियल पानी हमेशा ताजा ही पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।



अनन्नास का रस-







यह एक ऐसा फल है जो शरीर को पोषकता प्रदान करने के साथ-साथ शीतलता प्रदान करता है। इसमें लगभग 85.5त्न जल होता है।यह गर्मीनाशक, स्वादिष्ट, पेट के वायु विकार को कम करनेवाला होता है।साथ ही  इसका रस प्रोटीन से भरपूर होता है जो खाना को हजम करने में बहुत मदद करता है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसके नियमित सेवन से दिल की बीमारी होने की संभावना कुछ हद तक कम हो जाती है।




गन्ने का रस- गन्ने के रस में विटामिन ए, बी ,सी, मैग्नेशियम, फॉस्फोरस और कैल्सियम भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं जो गर्मी के दिनों में शीतलता प्रदान करने के साथ-साथ अनेक रोगों में लाभकारी होता है। लेकिन इसको हमेशा ताजा ही पीना चाहिए। गर्मी के दिनों में मूत्र में जलन होना या नाक से खून आना जैसी आम बीमारियों से राहत दिलाने में गन्ने का रस बहुत लाभकारी होता है। आयुर्वेद के अनुसार यह शीतल, बलवर्द्धक, थकान दूर करने वाला, शरीर के गर्मी को शांत करने वाला रस होता है।











बेल का शर्बत-






बेल का शर्बत एक ऐसा शीतल पेय है जो अतिसार रोग में बहुत लाभकारी होता है। यह गर्मी के दिनों के लिए अमृत के समान शरीर को लाभ पहुँचाता है। यह पाचन शक्ति को उन्नत करने के साथ-साथ मस्तिष्क  की गर्मी  भी दूर करता है|







अनार का रस-
अनार का रस शरीर को निरोग रखने में बहुत मदद करता है। इसकी पौष्टिकता गर्मी के दिनों में प्यास, वमनेच्छा, मूत्र का कम होना, मूत्र में रक्त आना, पेट संबंधी समस्या आदि को दूर करने में बहुत मदद करता है।






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