28.12.14

हर्बल इलाज के दोहे ;dohe of herbal remedy

* शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम, 
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

*दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय, 
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

*ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल, 
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

*बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल, 
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..



*अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय, 
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

* अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय, 
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..



*अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम, 
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

.

*अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग, 
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..



*रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..












*गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम, 
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..













*
*चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय, 
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..











*लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..






*प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह , 
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

*सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, 
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

*सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार, 
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..




*तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल, 
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..







* थोड़ा सा गुड़ लीजिए,दूर रहें सब रोग, 
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.

*अजवाइन और हींग लें,लहसुन तेल पकाय, 
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..



*ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि, 
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..












*दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ, 
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..





* मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल, 
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

*कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट, 
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

*बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग, 
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..


*बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम, 
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..










*नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय, 
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..



*मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय, 
कंठ सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय.











*पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज, 
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..




* ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम, 
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

*कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय, 
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

*अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम, 
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

*छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग, 
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

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19.12.14

पालक में हैं भरपूर औषधीय गुण:Spinach are rich in medicinal properties


पालक में विटामिन ए,बी,,सी और इ  एवं प्रोटीन,सोडियम,,केल्शियम ,फास्फोरस  और लोह तत्व पाया जाता है| यह रक्त  की शुद्धि  करता है और रक्ताणुओं  में वृद्धि करता है| पालक में  प्रोटीन  उत्पादक  एमिनो एसीड  पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है|
इसके हरे पत्तों में ऐसा तत्त्व होता है जो प्राणी मात्र   का  विकास और वृद्धि करता है| पालक बुद्धि बढ़ाने में सहायक है|

   पालक कफ  एवं श्वास  रोगों में हितकर है| पालक आँतों को क्रिया शील रखता है और आँतों में मौजूद  मल  को बाहर निकालने में सहायता  करता है| मधुमेह रोग में भी पालक की उपयोगिता  साबित हो चुकी है| इसके बीज पीलिया और पित्त प्रकोप  से निजात दिलाने में सहायक हैं| कच्चा पलक खाने में खारा और  थौड़ा कड़वा होता है  लेकिन बहुत लाभ कारी है| दही के साथ कच्चे  पालक का रायता  स्वादिष्ट और गुणकारी होता है| सम्पूर्ण पाचन संस्थान के लिए पालक  अति उपयोगी है|

    पालक निम्न रोगों में हितकर है-  रक्त वृद्धि के लिए पालक का रस आधा गिलास में दो चम्मच शहद  मिलाकर  रोजाना  दो  माह तक पीने से शरीर  में खून की वृद्धि होती है | 

गले की जलन में पलक के रस  से कुल्ले करने से लाभ होता है|
 पालक के पत्तों का रस या क्वाथ  पीने से  पथरी पिघल जाती है| और मूत्र वृद्धि होकर  इसके कण बाहर निकल जाते हैं\ नेत्र ज्योति  बढाने के लिए पालक में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए होता है|

पालक विभिन्न उदर रोगों में लाभ प्रद है| आमाशय के घाव छाले और आँतों के अल्सर में भी




पालक का रस  लाभ प्रद है| कच्चे पालक का रस आधा गिलास नित्य पीते रहने से कब्ज- नाश होता है| पायरिया रोग में कच्ची पालक खूब चबाकर  खाना  और पत्ते का रस पीना हितकर है\

  रक्त की कमी संबंधी विकारों मे पालक का रस १०० मिली  दिन में तीन बार पीने से  चेहरे पर लालिमा ,शक्ति स्फूर्ति का संचार   होता है\ रक्त संचार   प्रक्रिया में तेजी आती है और  चेहरे के रंग में निखार आता है 

7.12.14

सर्दी जुकाम का इलाज घरेलू नुस्खों से household tips for colds



  1. सर्दी का मौसम जैसे ही शुरू होता है उससे जुड़ी न जाने कितनी ही बीमारी भी दस्तक देने लगती है, जिनका हमें पता तक नहीं चलता। रोज-मर्रा की जिंदगी में हम लोग अपनी सेहत का सही से ख्याल भी नहीं रख पाते जिस कारण हम धीरे-धीरे बड़ी बीमारी को बुलावा देते है। जब हमारा शरीर मौसम के अनुसार एडजस्ट नहीं पाता है तो हम मौसमी रोगों के शिकार हो जाते है। मौसम के बदलाने के कारण व्यक्ति का शरीर वातावरण में हो रहे लगातार और तेज बदवाल को नहीं झेल पाता है जिससे सर्दि और गर्मी का असर सर्दी-जुकाम जैसी बीमारी से ग्रसित हो जाता है| जुकाम की शुरुआत ही नाक से होती है लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर होता है। जुकाम की कोई दवाई नहीं है। इससे निपटने के लिए ज्यादातर घरुलु नुस्खे ही काम आते है, इससे बचने के लिए हम
    आपको कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं जो आपके बहुत काम आएंगे।
    अगर आपके गले में खराश हो और आपकी नाक सर्दी के कारण बंद हो जाए, तो आप घबराएं नहीं बल्कि एक गिलास गर्म पानी में थोड़ा सा नमक डालकर गरारे करें। ऐसा करने से आपका गला साफ हो जाएगा और यह इस बीमारी को भी आपसे दूर रखने में मदद करेंगा।
    सर्दी होने पर आप एक चम्मच शहद के साथ अदरक खा सकते हैं। यह प्रक्रिया आपको सुबह शाम करनी होगी जिससे सर्दी जुकाम में जल्दी आराम मिलेगा।




आप जुकाम से निपटने के लिए भाप  भी ले सकते हैं। बंद नाक और बलगम से आपको छुटकारा मिल जाएगा।
अगर आप जुकाम से ज्यादा ही परेशान है तो आप हल्‍दी को गर्म दूध के साथ लें, ऐसा करने से जुकाम में बहुत राहत पहुंचाती है।


विडियो-

6.12.14

पत्ता गोभी के स्वास्थ्य वर्धक गुण : Health benefits of Cabbage


पत्तागोभी में न घुलने वाला फायबर, बिटा केरोटिन, विटामिंस B1, B6, K, E, C के अलावा और भी कई विटामिंस भरपूर मात्रा में होते हैं। पत्तागोभी में मिनरल्स आयरन और सल्फर भी काफी ज्यादा होते हैं।
पत्तागोभी आपके स्वास्थ्य, त्वचा और बालों के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें पाए जाने वाले खास गुणों के कारण इसे सुपर फुड भी माना जाता है। अगर आप अपने स्वास्थ्य को बिल्कुल दुरुस्त रखना चाहते हैं तो पत्तागोभी को अपने डाइट का हिस्सा बनाना सबसे बेहतर कदम है।

1. मेडिकल विशेषज्ञ मानते हैं कि कच्चे पत्तागोभी के ज्यूस में आइसोसाइनेट्स होते हैं जो कि एक प्रकार के केमिकल कंपाउड्स होते हैं जो आपके शरीर में एस्ट्रोजिन मेटाबोलिज्म की प्रकिया को तेज करते हैं और आपको स्तन कैंसर, फेफडों के कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट के कैंसर और कोलोन कैंसर से बचाए रखते हैं। इसके उपयोग से कैंसर के ठीक होने की प्रकिया को भी गति मिलती है।
2. पत्तागोभी पेट को साफ रखने में बहुत कारगर है। इसमें क्लोरीन और सल्फर नाम के दो बहुत जरुरी मिनरल्स होते हैं। आप पत्तागोभी का ज्यूस पीने के बाद एक तरह की गैस महसूस करेंगे और यह गैस इस बात का इशारा होता है कि ज्यूस ने अपना काम करना शुरु कर दिया है।
3. क्या आप कुछ किलो वजन कम करने की बहुत कोशिश कर रहे हैं? आप एक बार पत्तागोभी के ज्यूस को भी आजमाइए। पत्तागोभी को वजन कम करने के लिए बहुत ही कारगर उपाय समझा जाता है। यह आपके पाचन को दुरुस्त करता है और इसमें कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है। यह पेट से जुडी हर प्रकार की समस्या से आपको निजात दिलाता है और अल्सर के इलाज में तो इसे अचूक उपाय समझा जाता है।
4. पत्तागोभी में फोलिक एसिड होता है जिसमें एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने का खास गुण होता है। फोलिक एसिड में नए ब्लड सेल्स का निर्माण करता है।
5. पत्तागोभी आपको त्वचा संबंधी सभी समस्याओं को भुला देगा। इस बात से कोई प्रभाव नही पड़ता कि आपकी त्वचा कितनी खराब हो चुकी है क्योंकि पतागोभी में त्वचा की प्राकृतिक चमक को वापस लाने का गुण होता है।
6. पत्तागोभी एंटीआक्सीडेंट्स और फेटोकेमिकल्स से भरपूर होता है और इस तरह यह त्वचा संबंधी परेशानियों जैसे एक्ने, पिंपल्स और ब्लैक हेड्स से आपको सुरक्षित रखता है।

7. पत्तागोभी में पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट्स त्वचा में नमी लाते हैं और उम्र का असर खत्म कर देते हैं। आप पत्तागोभी का ज्यूस अपने रोज के नाश्ते में लीजिए और रिंकल्स को गायब होते देखिए।
8. पत्तागोभी को रंग साफ करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पोटेशियम (जिसमें आपके शरीर को साफ करने का गुण होता है) के अलावा विटामिन A और विटामिन E होते हैं। यह दोनों विटामिन स्किन टीशुज को ताजगी देकर आपकी त्वचा को गोरा, नर्म और आकर्षक बनाते हैं।




9. पत्तागोभी के फायदों में अगला क्रम बालों के स्वास्थ्य का आता है। इसके बालों पर होने वाले फायदे आश्चर्यजनक हैं। पत्तागोभी का ज्यूस आपके शरीर में सल्फर की पूर्ति करता है और आपके बालों को मजबूती प्रदान कर उनका झड़ना रोकता है।
10. पत्तागोभी के ज्यूस में पाया जाने वाले विटामिन E और सिलीकॉन से नए बाल उग आते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से आप काले और घने बाल पा सकते हैं।

3.12.14

करेले के स्वास्थ्य वर्धक गुण : Bitter gaurd for health



कड़वे करेले में बीमारियोंं से लड़ने की उम्दा शक्ति है| प्रति 100 ग्राम करेले में लगभग
92 ग्राम नमी होती है। साथ ही इसमें लगभग 4 ग्राम कार्बोहाइडेट, 15 ग्राम प्रोटीन, 20 मिलीग्राम
कैल्शियम, 70 मिलीग्राम फस्फोरस, 18 मिलीग्राम, आयरन तथा बहुत थोड़ी मात्रा में वसा भी
होती है। इसमें विटामिन ए तथा सी भी होती है जिनकी मात्रा प्रति 100 ग्राम में क्रमश:
126 मिलीग्राम तथा 88 मिलीग्राम होती है।
२) करेला मधुमेह में रामबाण औषधि का कार्य करता है, छाया में सुखाए हुए करेला का एक
चम्मच पावडर प्रतिदिन सेवनकरने से डायबिटीज में चमत्कारिक लाभ मिलता है क्योंकि करेला
पेंक्रियाज को उत्तेजित कर इंसुलिन के स्रवण को बढ़ाता है|




३) विटामिन ए की उपस्थिति के कारण इसकी सब्जी खाने से रतौंधी रोग नहीं होता है। 
जोड़ों के दर्द में करेले की सब्जी का सेवन व जोड़ों पर करेले के पत्तों का रस लगाने से
आराम मिलता है।
४) करेले के तीन बीज और तीन कालीमिर्च को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर बच्चों को पिलाने
से उल्टी-दस्त बंद होते हैं।करेले के पत्तों को सेंककर सेंधा नमक मिलाकर खाने से अम्लपित्त के
रोगियों को भोजन से पहले होने वाली उल्टी बंद होती है।
५) करेला खाने वाले को कफ की शिकायत नहीं होने पाती। इसमें प्रोटीन तो भरपूर पाया जाता है।
इसके अलावा करेले मेंकैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन पाए जाते हैं। करेले की छोटी और बड़ी
दो प्रकार की प्रजाति होती है, जिससे इनकेकसैलेपन में भी अंतर आता है।






6. करेले का रस और 1 नींबू का रस मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर की चर्बी कम होती है
और मोटापा कम होता है।पथरी रोगी को 2 करेले का रस प्रतिदिन पीना चाहिए और इसकी सब्जी
खाना चाहिए। इससे पथरी गलकर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।











7. लकवे के रोगियों को करेला जबरदस्त फायदा पहुंचाता है। दस्त और उल्टी की शिकायत की
सूरत में करेले का रसनिकालकर उसमें काला नमक और थोड़ा पानी मिलाकर पीने से फायदा देखा गया है।


करेले के लाभ का विडियो-

27.11.14

सहजन के पेड़ से करें कई बीमारियों के उपचार :Benifits of drumstick tree.

; सहजन या मुनगा जड़ से लेकर फूल-पत्तियों तक सेहत का खजाना है। इसके ताजे फूल से हर्बल टॉनिक बनाया जाता है और इसकी पट्टी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। भारत में खासकर दक्षिण भारत में इसका उपयोग विभिन्न व्यंजनो में खूब किया जाता है। इसका तेल भी निकाला जाता है और इसकी छाल पत्ती गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है।








  










१) . सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच ,शियाटिका ,गठिया आदि में उपयोगी है।
२) सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका ,गठिया,,यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।
३) . सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है
४) . सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है\ साईं टिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है .
५) सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है।
६) सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।
७) सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व् वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।
८) सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है।
९) .सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।
१०) . सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
११) . सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है।
१२) सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से






उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।
१३) सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है।
१४) . सहजन. की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।
१५) . सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।
१६) सहजन. की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।
१७) . सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है।
१८) सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है .
१९) सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।
२०) . सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तोए आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। ईससे जकड़न कम होगी।
२१) . सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है।
२२) .सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।
२३) सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।
२४) सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।
२५) . सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं।
२६) . सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है।मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है।


देखें विडियो -



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24.10.14

वायरल बुखार की सरल चिकित्सा

     
मौसम में बदलाव के साथ ही शरीर में भी कई प्रकार के बदलाव शुरू हो जाते हैं और गर्मी में मौसम नमीयुक्त और चिपचिपा होने लगता है। इस मौसम में वायरल बुखार से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। वायरस से होने वाला बुखार, गला दर्द व नाक बहने की समस्याएं ज्यादा लेकर आता है।



    वायरल बुखार बच्चों व बड़ों को समान रूप से प्रभावित करता है। वायरल में संक्रमण की स्थिति कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है। वायरल में कई लोग खाना-पीना छोड़ देते हैं। लेकिन खाना छोडऩे से बीमारी और बढ सकती है। इसलिए जहा तक संभव हो वायरल में खूब खाना खाएं और डिहाइडेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं।

वायरल बुखार में खाने के फायदे

      वायरल बुखार तभी होता है जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए खान-पान का उचित ध्यान रखना चाहिए। अगर सेहतमंद ओर प्रोटीन युक्त खाना खाया जाए तो शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता खुद निर्मित हो जाती है। सादा, ताजा खाना ही खाएं क्योंकि हैवी फूड आसानी से पच नहीं सकते हैं। रखे हुए खाने को गर्म करके ही खाएं क्योंकि इससे सभी बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं। खाने में अदरक, लहसुन, हींग, जीरा, काली मिर्च, हल्दी और धनिये का प्रयोग अवश्य करें क्योंकि इनमें पाए जाने वाले तत्व पाचन शक्ति को बढाते हैं और वायरल के कीटाणुओं से लडते हैं।

वायरल बुखार में क्या-क्या खाएं

मौसमी संतरा व नीबूं खाएं जिसमें विटामिन-सी और बीटा कैरोटींस होता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढती है। वायरल फीवर होने पर डाई फूड खूब खाना चाहिए। डाई फूड में जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लहसुन में कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हैं। इससे



सर्दी, जुकाम, दर्द, सूजन और त्वचा से संबंधित बीमारिया नहीं होती हैं। लहसुन घी या तेल में तलकर चटनी के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। खूब पानी पियें। इससे डिहाइडेशन के अलावा शरीर पर हमला करने वाले माईक्रों ओर्गेनिज्म को बाहर निकालने में मदद मिलती है।


तुलसी के पत्ते में खासी, जुकाम, बुखार और सांस  संबंधी रोगों से लडने की शक्ति है। बदलते मौसम में तुलसी के पत्तियों को उबालकर या चाय में डालकर पीने से नाक और गले के इंफेक्शन से बचाव होता है।







वायरल बुखार में हरी और पत्तेदार सब्जियों का अधिक मात्रा में प्रयोग करें। क्योंकि
हरी सब्जियों में पानी की मात्रा ज्यादा होती है जिससे डिहाइडेशन नहीं होता है। टमाटर, आलू और संतरा खाएं। इनमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। वायरल में दही खाना बंद न करें क्योंकि दही खाने से बैक्टीरिया से लडने में सहायता मिलती साथ ही यह पाचन क्रिया  को  सही रखता है। पेट खराब, आलसपन और बुखार को दूर करता है।

वायरल में गाजर खाएं, इसमें केरोटीन पाया जाता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढती है और कीटाणुओं से लडने में मदद मिलती है। अधिक मात्रा में केले और सेब का सेवन करें। इन दोनों ही में अधिक मात्रा में पोटेशियम  पाई जाती है जो ऐसा इलेक्ट्रोलाइट है जिससे दस्त नियंत्रित   होती है।

वायरल बुखार में खाना खूब खाएं लेकिन खाने का गलत कंबीनेशन कभी ना लें। मसलन अगर आप दही खा रहे हैं तो हैवी नॉनवेज या नींबू अथवा कोई खटटी चीज ना खाएं। ठंडे और तरल पेय पदाथरें का सेवन न करें क्योंकि वे शरीर में पानी रोकते हैं और असंतुलन होता है। वायरल होने पर दिमाग पर बिलकुल जोर ना लगाएं क्योंकि ऐसा करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होगी और वायरल ज्यादा दिनों तक रह सकता है।
वायरल फीवर का उपचार का विडियो-


 

19.10.14

कब्ज मिटाने के सरल उपचार

 
रोगी आहार-विहार में असंयम के कारण कब्ज का शिकार होता है। कब्ज से ही दुनिया-भर की बीमारियाँ होती हैं। अपना आहार विहार सुसंयमित कर लें तो कभी कोई बीमारी नहीं होगी। असंयम के कारण कभी कोई रोग हो भी जाये तो प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से उसका धैर्यपूर्वक इलाज कराना चाहिए। ऐसा कोई रोग नहीं जो प्राकृतिक चिकित्सा से अच्छा नहीं किया जा सकता हो। प्राकृतिक चिकित्सा प्राणीमात्र के लिए वरदान है। अत: पहले संयम से रहकर कब्ज मिटाइए।

* रात का रखा हुआ सवा लीटर पानी हर रोज सुबह सूर्योदय से पूर्व बासी मुँह पीने से कभी कब्जियत नहीं होगी तथा अन्य रोगों से सुरक्षा होगी।

* रात्रि में पानी के साथ  2 से 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से अथवा 3-4 तोला (40-50 ग्राम) मुनक्का (काली द्राक्ष) को रात्रि में ठण्डे पानी में भीगोकर सुबह उन्हें मसलकर, छानकर थोड़े दिन पीने से कब्जियत मिटती है।

* एक हरड़ खाने अथवा 2 से 5 ग्राम हरड़ के चूर्ण को गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज मिटती है।
चौथी प्रयोग: गुडुच का सेवन लंबे समय तक करने से कब्ज के रोगी को लाभ होता है।

*  कड़ा मल होने व गुदाविकार की तकलीफ में जात्यादि तेल या मलहम को शौच जाने के बाद अंगुली से गुदा पर लगायें।
इससे 7 दिन में ही रोग ठीक हो जायगा। साथ में पाचन ठीक से हो ऐसा ही आहार लें। छोटी हरड़ चबाकर खायें।








*एक गिलास सादे पानी में एक नींबू का रस एवं
दो-तीन चम्मच शहद डालकर पीने कब्ज मिट जाता है।














* एक चम्मच सौंफ का चूर्ण और 2-3 चम्मच गुलकन्द प्रतिदिन दोपहर के भोजन के कुछ समय पश्चात् लेने से कब्ज दूर होने में सहायता मिलती है।


 कब्ज सब रोगों का मूल है। अत: पेट को सदैव साफ रखना चाहिए। रात को देर से कुछ भी न खायें तथा भोजन के बाद दो घंटे तक न सोयें। मैदे से बनी वस्तुएँ एवं दही अधिक न खायें। बिना छने (चोकरयुक्त) आटे का सेवन, खूब पके पपीते का सेवन एवं भोजन के पश्चात् छाछ का सेवन करने से कब्जियत मिटती है।

कब्ज मिटाने के उपचार का विडियो-

स्वस्थ रहने के आसान उपाय


1.सुबह जल्दी उठो और 4-; 6 किलोमीटर रोज टहलो। संभव हो तो शाम को भी थोड़ा टहलो।
2. टहलते समय नाक से लम्बी- लम्बी सांसें लो तथा यह भावना करो कि टहलने से आप अपने स्वास्थ्य को संवार रहे हैं।
3. टहलने के अलावा, दौडऩा, साइकिल चलाना, घुड़सवारी, तैरना या कोई भी खेलकूद, व्यायाम के अच्छे उपाय
हैं। स्त्रियां चक्की पीसना,,रस्सीकूदना, पानी भरना, झाड़ू- पोछा लगाना आदि घर के कामों में भी अच्छा
व्यायाम कर सकती हैं। रोज थोड़े समय छोटे बच्चों के साथ खेलना, 10- 15 मिनट खुलकर हंसना भी अच्छे व्यायाम के अंग हैं।
4. प्रात: टहलने के बाद भूख अच्छी लगती है। इस समय पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें।




  • अंकुरित अन्न, भीगी मूंगफली, आंवला या इससे बना कोई पदार्थ, संतरा या मौसम्मी का रस अच्छे नाश्ता का अंग होते हैं।
    5. भोजन सादा करो एवं उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करो, शांत, प्रसन्न और निश्चिन्तता पूर्वक करो और उसे
    अच्छी तरह चबाचबा कर खाओ। खाते समय न बात करो और न हंसो। एकाग्र चित्त होकर भोजन करना
    चाहिए।
    6. भूख से कम खाओ अथवा आधा पेट खाओ, चौथाई पानी के लिए एवं चौथाई पेट हवा के लिए खाली छोड़ो।
    7. भोजन में रोज अंकुरित अन्न अवश्य शामिल करो। अंकुरित अन्न में पौष्टिकता एवं खनिज लवण गुणात्मक मात्रा में बढ़ जाते हैं। इनमें मूंग सर्वोत्तम है। चना, अंकुरित या भीगी मूंगफली इसमें थोड़ी मेथी दाना एवं चुटकी भर- अजवायन मिला लें तो यह कई रोगों का प्रतिरोधक एवं प्रभावी ईलाज है।
    8. मौसम की ताजा हरी सब्जी और ताजे फल खूब खाओ। जितना हो सके कच्चे खाओ अन्यथा आधी उबली/ उबली तथा कम मिर्च- मसाले, खटाई की सब्जियां खाओ। एक ग्रास रोटी के साथ चार ग्रास सब्जी के अनुपात
    का प्रयास रखो।
    9. आटा चोकर समेत खाओ, सम्भव हो तो हाथ का पिसा हुआ खाओ। जौ, गेहूं, चना, सोयाबीन का मिस्सी रोटी का आटा सुपाच्य एवं पौष्टिक होता है। पौष्टिकता की दृष्टि से रोटी में हरी सब्जी, पालक, मेथी, बथुआ आदि पत्तीदार सब्जी मिलाकर बनायें / खायें। दलिया / खिचड़ी में भी पत्तीदार एवं हरी सब्जियाँ मिलाकर पौष्टिकता बढ़ाई जा सकती है। सब्जियों के सूप का नित्य सेवन पौष्टिक एवं हलके भोजन का अच्छा अंग हो सकता है।
    10 भोजन के साथ पानी कम से कम पियो। दोपहर के भोजन के घंटे भर बाद पानी पियें । भोजन यदि कड़ा और रूखा हो तो 2- 4 घूंट पानी अवश्य पियें।
    11. प्रात: उठते ही खूब पानी पियो। दोपहर भोजन के थोड़ी देर बाद छाछ और रात को सोने के पहले उष्ण दूध अमृत समान है।
    12. दिन में कम से कम दो-तीन लीटर पानी अवश्य पियो|धूम्रपान, मादक पेय- पदार्थ (जरदा, गुटखा, सॉफ्ट ड्रिंक जैसे कोकाकोला, पेप्सी इत्यादि एवं शराब आदि) सर्वथा छोड़ दो।
    14. चाय- कॉफी आदि के स्थान पर सादा ठंडा या गुनगुना पानी, नींबू पानी, छाछ, गाजर, पालक चुकन्दर, लौकी, टमाटर इत्यादि सब्जियों का एव मौसम्मी या संतरा, पपीता इत्यादि फलों के रस का उपयोग लाभकारी होता है।
    15. डाइबीटीज (शक्कर) के रोगी को शक्कर या उससे बने पदार्थों से पूर्ण परहेज करना चाहिए। फलों में अधिक मीठे फल का सेवन कम करें। फल के रस के बजाय फल खायें।
    16. मैथि दाना और करेला मधुमेह रोग की राम बाण दवा है| मैथी दाना रोज 18/24 घंटे पानी में, जहां तक संभव हो सके मिट्टी के बर्तन में भिगोयें। दूसरे दिन सुबह नाश्ते के पहले या बाद में दानामेथी का पानी पी लें। दानामेथी अंकुरित कर सलाद में या नमक, नींबू लगाकर भी खा सकते हैं
स्वस्थ  रहने के आसान उपाय  विडियो 


    

10.10.14

तन्दुरस्त रहने के सरल उपाय


सेहत मंद रहने के सरल उपचार
*बेसन, मैदा और व्हाइट ब्रेड की जगह सोयाबीन, सूजी और ब्राउन ब्रेड का उपयोग करें।
बाजार में मिलने वाले कृत्रिम व डिब्बाबंद पदार्थों के सेवन से बचें। इनमें उपयोग किए गए 'प्रिजरवेटिव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं ।
*यदि हरी सब्जियों और अंकुरित चीजों का प्रयोग सामान्य तरीके से करने से घर के सदस्यों उसे खाने में रुचि नहीं लेते तो इन्हीं वस्तुओं का प्रयोग अलग तरीके से किया जा सकता है। मसलन-वेजीटेबल पराठा या स्प्राउट चीला या डोसा।
*बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खाँसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है।
शहद ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है।
*एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।
*नींबू को तवे पर रखकर सेंक लें (दो भाग करके)। उस पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है।
*मिशिगन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में कहा गया है कि चॉकलेट का मस्तिष्क पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है, जैसा अफीम का पड़ता है।
*दर्द निवारक दवाइयों के लंबे समय तक इस्तेमाल करने से न सिर्फ लीवर और किडनी के खराब होने का खतरा रहता है बल्कि इनसे दिल के दौरे पडऩे तथा ह्रदय संबंधित समस्याएं होने का खतरा भी हो सकता हैं1
नींद नहीं आने की समस्या मधुमेह और दिल संबंधी बीमारी की आशंका बढ़ा सकती है।
*दिन भर में में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी पिएं। जितना पानी आप पिएंगें उतना ही आपके दांत साफ होंगें। इसके अलावा यह चाय, कॉफी, शराब, सोडा आदि के दागों को भी दांतों से मिटाने में कारगर साबित होगा।
अपने खाने में फल और सब्जी शामिल करें। सेब, खीरा, गाजर आपके दांतों को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं। यह आपके दांतों में फंसे खाने को भी निकालते हैं और मसूड़ों की समस्या दूर होती है। 

*खाने के बाद पनीर का टुकड़ा खाने से आपके दांत चमकदार रहते हैं।
*जूस और सोडा पीने के बाद ब्रश नहीं करना चाहिए। हो सके तो कॉफी और वाइन स्ट्रॉ से पिएं। इससे इनका सीधा संपर्क आपके दांतों से नहीं हो पाएगा और आपके दांत हमेशा चमकते रहेंगें।
*अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।
*प्याज का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से कफ निकल जाता है तथा आंतों में जमे विजातीय द्रव्यों को दूर कर कीड़े नष्ट करता है। इसे पानी में घोलकर एनीमा लेने से लाभ होता है।
*हृदय की धमनी के लिए शहद बड़ा शक्तिवर्द्धक है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है।
*सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है।
अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियां बंद हो जाती हैं।
कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।
*10 मिनट में हो सकते हैं फिट-
कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।
*हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।
दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है।
*सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि *व्यायाम को मौज मस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।
*बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।
*ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।
*व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।
*व्यायाम के समय बातचीत न करें, व्यायाम के समय चुप रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।




11.9.14

शहद का उपयोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए


 
स्वस्थ शरीर के लिए शहद या मधु बहुत ही लाभकारी होता है। यह विस्मयकारी गुणों से भरपूर है। शहद बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए अच्छा होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन बी, सी, लौह, मैगनीयिम, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि गुणकारी तत्व होते हैं।




शहद के लाभ-

     *  शहद में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, अमीनो एसिड, प्रोटीन और खनिज पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। जोकि सेहत के लिए जरूरी होते हैं।
*शहद में ग्लूकोज पाया जाता है। साथ ही शहद में पाए जाने वाले  विटामिन शरीर के भीतर जाते ही कुछ ही समय में घुल जाते  है।
* बच्चों की खांसी दूर करने के लिए अदरक के रस में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है। सूखी खांसी में भी शहद और नींबू का रस लेने से फायदा होता है।
जी मिचला रहा हो या फिर उल्टी आने की शिकायत हो तो शहद लेना चाहिए।
*शहद के सेवन से कब्ज भी दूर होती है। कब्ज की शिकायत होने पर टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से लाभ होता है।
*यदि आप वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो रात में दूध में शहद डालकर पियें\
*मांसपेशी मजबूत करनी हो, ब्लड प्रेशर सामान्य करना हो या हीमोग्लोबिन बढ़ाना हो तो शहद का सेवन अत्यंत हितकर है\
*यदि आप थकान महसूस करते हैं या फिर आपको एनीमिया है तो आप नियमित रूप से शहद का सेवन कर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं

*वजन बढ़ाने और वजन घटाने के लिए भी शहद लाभकारी है। आप यदि गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेंगे तो कुछ ही समय में आप अपना वजन कम होते हुए देख सकते हैं।

*अर्थराइटिस के दर्द से निजात पानी हो या फिर जोड़ों में अधिक दर्द हो तो शहद में दालचीनी का पाउडर मिलाकर मसाज करनी चाहिए।









*जुकाम दूर करने के लिए शहद, अदरक और तुलसी के पतों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर चाटने से राहत मिलती है।
*यदि आपको ठीक तरह से नींद नहीं आती तो रात को दो चम्मच शहद खाकर सोना लाभकारी होता है।
*शहद का नियमित और उचित मात्रा में उपयोग करने से शरीर स्वस्थ, सुंदर, बलवान, स्फूर्तिवान बनता है और दीर्घ जीवन प्रदान करता है।





*गर्भावस्था के दौरान शहद का सेवन करने से होने वाला बच्चा स्वस्थ एवं मानसिक दृष्टि से अन्य शिशुओं से श्रेष्ठ होती है।
*त्वचा के जल जाने, कट जाने या छिल जाने पर भी शहद लगाने से लाभ मिलता है।
*आखों में रोज 1-2 शहद की बूंद डालने से आखों की रोशनी बढ़ती है।
*शहद का रोजाना सेवन करने से दिल और दिमाग की शक्ति बढ़ती है।
*शहद को अनार के रस में मिलाकर लेने से दिमागी कमजोरी, सुस्ती, निराशा तथा थकावट आदि दूर होते हैं।
*हृदय के लिए भी शहद गुणकारी है, मीठी सौंफ के साथ 1-2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दिल को मजबूत तो करता ही है। हृदय को सुचारू रूप से कार्य करने में भी मदद करता है।
*शहद को एक खाद्य एंव प्राकृतिक औषधि माना गया है जो शरीर को स्वस्थ, निरोग और ऊर्जावान बनाये रखने में लाभदायक है।

कैसे करें शुद्ध शहद की जांच ?

*कांच के गिलास में पानी भरकर शहद की एक बूंद टपकाने के बाद सीधी तली तक जाकर बैठ जाए तो शहद शुद्ध होगा। शहद की एक बूंद लकड़ी या किसी प्लेट पर टपका दें, आग लगा दें, असली शहद तत्काल जलेगा, नकली देर से जलेगा।
*शुद्ध शहद सुगंधित होता है, जाड़े में जम जाता है, गर्मी में पिघल जाता है। शुद्ध शहद क दाग नहीं लगता। किसी प्लेट पर चार बूंद टपकाएं को नीचे सांप की कुंडली जैसी बन जाती है।
*शुद्ध शहद में मक्खी के पंख फंसेंगे नहीं। आंख पर लगाने से जलन करेगा, लेकिन चिरमिराहट नहीं करेगा, बल्कि थोड़ी देर बाद ठंड़क देगा। देखने में पारदर्शी व साफ नजर आता है। कुत्ता कभी शुद्ध शहद नहीं खाएगा।

सावधानी बरतें-

* गर्म करके गर्म पदार्थों के साथ  सेवन नहीं करना चाहिए।
*गर्म किया शहद, गर्म पदार्थ एवं जो छूने में गर्म लगे ऐसे पदार्थों के साथ दिया शहद एकदम हानिप्रद साबित होता है।
*दूध व जल के  साथ सेवन करते  समय दोनों वस्तुएं ठंडी होना चाहिए।
*शहद व घी समान मात्रा में मिलाकर कभी भी सेवन नहीं करना चाहिए।
*जल भी समान मात्रा में नहीं होना चाहिए।
*घी की मात्रा 1/4 चौथाई व पानी की चार गुना होना चाहिए।

1.9.14

मालिश से दांत दर्द से मुक्ति


एक्यूप्रेशर तकनीक से शरीर के कुछ अंगों पर मसाज करके दांतों के दर्द और इनसे जुड़ी कई समस्याओं में आराम पाया जा सकता है। जानिए, शरीर के किन अंगों की मसाज करके आप दांतों के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं।

चेहरे पर मसाज
चीकबोन के निचले प्वाइंट को हाथों से टटोलें और आंखों की पुतली के ठीक नीचे वाले दोनों प्वाइंट्स पर दबाव बनाएं। पहले धीरे-धीरे और फिर तेज दबाव बनाएं। इससे दांतों के दर्द में आराम तो होगा ही, साथ ही सिर दर्द और साइनस के दर्द से भी राहत मिलेगी।

जबड़े पर मसाज
जबड़े के ऊपर और नीचे के हिस्से को जोड़ने वाले प्वाइंट पर उंगलियों से दबाव बनाएं। पहले उस हिस्से पर हल्का दबाव बनाएं और फिर तेज करें। इससे जबड़ों और दांतों के दर्द में आराम होता है। इसके अलावा, यह गले की खराश से भी आराम दिलाता है।

दांत दर्द में तुरंत राहत पहुचाए ये उपाय - 



कंधे पर मसाज
कंधों पर हाथ से हल्की मसाज करें फिर कंधे की सीध में बाजू पर दो उंगलियों से दबाव बनाएं। चार से पांच सेकंड बाद दबाव छोड़ दें। इससे दांतो के दर्द, कंधे के दर्द, कोहनी के दर्द आदि में आराम मिलता है।

हथेली पर मसाज
गर्भवती महिलाएं इस प्वाइंट पर मसाज न करें।अंगूठे और उंगली के बीच के हिस्से पर उंगली से दबाव बनाएं और पांच से छह सेकंड बाद छोड़ दें।

पेट-कमर कैसे कम करें






गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है । इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढऩा मोटापे के मोटे लक्षण हैं।
मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं।


हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है। प्राय: प्रसूति के बाद की असावधानी और गलत आहार-विहार करने से स्त्रियों का पेट बढ़ जाया करता है।

भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।
आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।
भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक-सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।
सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।
पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।
सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रात: 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।
भुजंगासन,






शलभासन,




उत्तानपादासन,

सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पाँच बार करें तो पाँच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे।
भोजन में गेहूँ के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएँ। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
प्रात: एक गिलास ठण्डे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है।
दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी।ऊपर बताए गए उपाय करते हुए घी-दूध खाते रहिए, मोटापा नहीं बढ़ेगा। इस प्रकार उपाय करके पेट और कमर का मोटापा निश्चित रूप से घटाया जा सकता है। ये सब उपाय सफल सिद्ध हुए हैं।ं



नारियल के औषधीय गुणों पर एक नजऱ

      




स्वादिष्ट भोजन-मिष्टान्न में सूखे कटे एवं पिसे हुए नारियल के प्रयोग के अतिरिक्त शुध्दता के कारण धार्मिक कार्यों और प्रसाद वितरण में यह शुभ माना जाता है। इस प्रकार नारियल के विभिन्न उपयोगों से प्रमाणित हो जाता है कि नारियल अनेक गुणों का धारक है, जिसका अन्य कोई विकल्प नहीं है।
कच्चे नारियल के गूदे के प्रयोग से अपच ठीक हो जाती है, जिससे पाचन क्रिया ठीक-ठाक बनी रहती है। पौष्टिक तत्वों एवं औषधीय गुणों का भंडार नारियल तेल, चेहरे के दाग-धब्बे मिटाने में गुणकारी प्रमाणित हो रहा है। नारियल तेल लगाने से शरीर पर होने वाली पित्त ठीक हो जाती है। नारियल तेल में बना भोजन करने से वजन में आश्चर्यजनक रूप से कमी आई है।
नारियल से बनी खाद्य सामग्री स्वादिष्ट एवं पौष्टिक तत्वों से भरपूर होती है। नारियल की चटनी दक्षिण भारतीय भोजन इडली-डोसा को पूर्णता प्रदान करती है। नारियल का पानी पीकर,कच्चा नारियल खाने से कृमि निकल जाते है।
एक नारियल का पानी गर्भावस्था में पीते रहने से सुन्दर सन्तान का जन्म होता है। नारियल मूत्र साफ़ करता है। कामोत्तेजक है। मासिक धर्म खोलता है। यह शरीर को मोटा करता है। मस्तिष्क की दूर्बलता दूर करता है। खांसी और दमा वालों को नारियल नहीं खाना चाहिये।