30.11.13

अदरक लाभ कारी है प्रोस्टेट और ओवेरियन केन्सर में

अदरक  की केन्सर में उपयोगिता



                                                             



              अदरक के  सामान्य गुणों  से अधिकाँश लोग परिचित   हैं |सूखी खांसी,  सर्दी ,जुकाम,भूख न लगना जैसी समस्याओं  से निजात पाने के लिए अदरक का उपयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है| लेकिन इस जानकारी  को  आगे  बढाते  हुए  अमेरिका की मिशीगन  यूनिवर्सिटी  के  वेज्ञानिकों  द्वारा  किये गए एक शौध के परिणाम  केन्सर  चिकित्सा में  बेहद उत्साह्कारी हैं| शौध के मुताबिक़ अदरक ओवेरियन केन्सर की कोशिकाओं को नष्ट करने में सफल हुई है| 




   
 पुरुषों में प्रोस्टेट केन्सर की कोशिकाएं  अदरक के प्रयोग से नष्ट हो जाती हैं| वज्ञानिकों का कहना है कि प्रोस्टेट केन्सर और ओवेरियन केन्सर से पीड़ित  लोगों के लिए  अदरक  एक जीरो साईड इफेक्ट  वाली केमो थीरेपी  है|  वैज्ञानिकों ने प्रयोग के दौरान देखा कि जैसे ही केन्सर कोशिकाओं को अदरक के चूर्ण  के संपर्क में लाया गया , केन्सर के सेल्स  नष्ट होते चले गए| वेज्ञानिक भाषा में इसे  एपोप्टीज याने  कोशिकाओं की आत्म ह्त्या कह सकते हैं| यह भी देखा गया कि अदरक की मौजूदगी  में  केन्सर के सेल्स एक दुसरे को खाने लगे|  इसे डाक्टरी भाषा में  ऑटो फिगिज  कहते हैं| 





   ओवेरियन और प्रोस्टेट केन्सर से पीड़ित रोगियों में  अदरक एक प्राकृतिक  कीमो थिराप्यूटिक एजेंट की तरह  काम करता है| ब्रिटिश जनरल आफ  न्युट्रीशन में प्रकाशित  एक शौध  के अनुसार  अदरक का  सत्व    बढे हूए प्रोस्टेट ट्युमर की साईज  ५६% तक कम  कर  देता है|  सबसे अच्छी बात यह कि  अदरक की मात्रा  ज्यादा भी हो जाए तो  इसका दुष्प्रभाव  कीमो थेरपी की तरह नहीं होता है| 
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24.11.13

बादाम खाएं ,मोटापा,कोलेस्ट्रोल घटाएं.

बादाम  खाएं और  रहें तन्दुरस्त 


                                                  

           
अक्सर हम अपने स्वास्थ्य का  भली प्रकार ध्यान नहीं रख पाते हैं | इसकी वजह से हमारा शरीर सुस्ती और कमजोरी महसूस करने लगता है| कोइ काम करने में अनिच्छा  और आलस्य  अनुभव होता है|  इस  स्थिति से रूबरू  होने पर  हम सुस्ती भगाने के लिए व्यायाम  भी शुरू का देते हैं जो अच्छी बात है  लेकिन  अगर आप नियमित रूप से एक मुट्ठी भर बादाम  सेवन  करेंगे  तो आपकी सेहत में काफी बदलाव  आता नजर आएगा|  बादाम हमारे शरीर को सिर्फ तन्दुरस्त ही नहीं रखता बल्कि मोटापा भी कम करता है| 

 
   अगर आप कई दिनों से अपना मोटापा कम करने का प्लान  बना रहे हैं और जिम में जाने का वक्त  नहीं निकाल पा रहे हैं  तो आपको बस एक  मुटठी भर बादाम रोज खाने की सलाह दी जाती है|  यह मेवा शरीर के लिए बेहद फायदेमंद  माना गया है| 

          बादाम  स्वस्थ वसा और उच्च  कोटि के मिनरल्स  और विटामिन्स  से भरपूर पदार्थ है|  एक मुट्ठी भर बादाम खाने से आपका पेट भर जाता है और आपको भूख महसूस नहीं होती है जिससे आपका वजन  घटने लगता है और मोटापा  निवारण में मदद  मिलती है| 

      बादाम में काफी सारे  मिनरल्स पाए जाते है जैसे  मैंगनीज,कापर,मेग्नेशियम | इसके अलावा बी काम्प्लेक्स विटामीन  जैसे नियासीन और बायोटिन  जो शर्रीर  को शक्ति और ऊर्जा देते हैं|  आप अपने शरीर को जितना अधिक चुस्त और एक्टिव  रख पाएंगे  उतनी अधिक आपकी केलोरी खर्च होंगी  जिससे आपकी चर्बी कम होने लगेगी| 


          बादाम हमारे ह्रदय को तन्दुरस्त  रखने में सहायक है| इसमें मोनोसेचुरेटेड  फेट्टी  एसिड होता है  जो  खराब कोलेस्ट्रोल  को शरीर से बाहर करता है|  इससे हमारा दिल कई स्वास्थय  - समस्याओं से  मुक्त रहता है|  बादाम में पाया जाने वाला विटामिन  ई  हमारे कार्डियोवास्कुलर  सिस्टम् को चाक चोबंद रखता है|  हैं न मुट्ठीभर बादाम के ढेर सारे फायदे|
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23.11.13

गेहूं के जवारे हैं अच्छे स्वास्थय की कुंजी.












     गेहूं के जवारे में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स आदि वे सभी पौष्टिक तत्व है जो शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाये रखने के लिए जरूरी है |
लंबे और गहन अनुसंधान के बाद पाया गया है कि शारीरिक कमजोरी, रक्ताल्पता, दमा, खांसी, पीलिया, मधुमेह, वात-व्याधि, बवासीर जैसे रोगों में गेहूं के छोटे-छोटे हरे पौधों के रस का सेवन खासा कारगर साबित हुआ है |
यहां तक कि इसकी मानवीय कोशिकाओं को फिर से पैदा करने की विशिष्ट क्षमता और उच्चकोटि के एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण कैंसर जैसे घातक रोग की प्रारंभिक अवस्था में इसका अच्छा प्रभाव देखा गया है |
गेहूं हमारे आहार का मुख्य घटक है | इसमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है | इस संदर्भ में तमाम महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं. अमेरिका के सुप्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. ए. विग्मोर ने गेहूं के पोषक और औषधीय गुणों पर लंबे शोध और गहन अनुसंधान के बाद पाया है कि शारीरिक कमजोरी, रक्ताल्पता, दमा, खांसी, पीलिया, मधुमेह, वात-व्याधि, बवासीर जैसे रोगों में गेहूं के छोटे-छोटे हरे पौधे के रस का सेवन खासा कारगर साबित हुआ है |


एन्टी आक्सी डेंट  से भरपूर --

यहां तक कि इसकी मानव कोशिकाओं को फिर से पैदा करने की विशिष्ट क्षमता और
उच्चकोटि के एन्टीऑक्सीडेंट होने के कारण कैंसर जैसे घातक रोग की प्रारंभिक
अवस्था में इसका अच्छा असर देखा गया है | यही नहीं, फोड़े-फुंसियों और घावों पर गेहूं के छोटे हरे पौधे की पुल्टिस 'एंटीसेप्टिक'और 'एंटीइन्फ्लेमेटरी' औषधि की तरह काम करती है. डॉ. विग्मोर के अनुसार, किसी भी तरह की शारीरिक कमजोरी दूर करने में गेहूं के जवारे का रस किसी भी उत्तम टॉनिक से बेहतर साबित हुआ है |प्राकृतिक बलवर्धक टॉनिक -
यह ऐसा प्राकृतिक बलवर्धक टॉनिक है जिसे किसी भी आयुवर्ग के स्त्री-पुरुष और
बच्चे जब तक चाहे प्रयोग कर सकते हैं, इसी गुणवत्ता के कारण इसे 'ग्रीन
ब्लड' की संज्ञा दी गयी है |
पोषक तत्वों की अधिकता के कारण गेहूं को खाद्यान्नों में सर्वोपरि माना गया
है. इसमें प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स आदि वे सभी पौष्टिक
तत्व विद्यमान रहता है जो शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाये रखने के लिए
जरूरी है | 
हरिद्वार स्थित 'ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान' के वैज्ञानिकों ने भी गेहूं की गुणवत्ता
का लाभ जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए कई सरल और सस्ते प्रयोग किये हैं |

रोग प्रतिरोधक क्षमता -
इस संस्थान के शोध वैज्ञानिकों के अनुसार, गेहूं के ताजे जवारों (गेहूं के
हरे नवांकुरों) के साथ थोड़ी सी हरी दूब और चार-पांच काली मिर्च को पीसकर
उसका रस निकालकर पिया जाए तो इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
होती है |यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि दूब घास सदैव स्वच्छ स्थानों
जैसे खेत, बाग-बगीचों से ही लेना चाहिए |
संस्थान के वैज्ञानिकों ने गेहूं के जवारे उगाने का सरल तरीका भी बताया है.
इसके लिए मिट्टी के छोटे-छोटे सात गमले लिये जाएं और उन्हें साफ जगह से
मिट्टी से भर ली जाए. मिट्टी भुरभुरी और रासायनिक खाद रहित होनी चाहिए |
अब इन गमलों में क्रम से प्रतिदिन एक-एक गमले में रात में भिगोया हुआ एक-एक
मुट्ठी गेहूं बो दें. दिन में दो बार हल्की सिंचाई कर दे. 6-7 दिन में जब
जवारे थोड़े बड़े हो जाएं तो पहले गमले से आधे गमले के कोमल जवारों को जड़
सहित उखाड़ लें |



सुबह खाली पेट ले -






              

ध्यान रखें, जवारे 7-8 इंच के हों तभी उन्हें उखाड़ें. इससे ज्यादा बड़े होने पर



उनके सेवन से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता. जवारे का रस सुबह खाली पेट लेना ही
उपयोगी होता है |
ख्याल रखें कि जवारे को छाया में ही उगाएं. गमले रोज मात्र आधे घंटे के लिए
हल्की धूप में रखें. जवारों का रस निकालने के लिए 6-7 इंच के पौधे उखाड़कर
उनका जड़वाला हिस्सा काटकर अलग कर दें |
अच्छी तरह धोकर साफ करके सिल पर पीस लें. फिर मुट्ठी से दबाकर रस निकाल लें. ग्रीन ब्लड तैयार है |
 इस रस के सेवन से हीमोग्लोबिन बहुत तेजी से बढ़ता है और नियमित सेवन से शरीर पुष्ट और निरोग हो जाता है.
बुढ़ापा दूर भगाये  -

दूर्वा घास' के बारे में आरोग्य शास्त्रों में लिखा है कि इसमें अमृत भरा है,
इसके नियमित सेवन से लंबे समय तक निरोग रहा जा सकता है | आयुर्वेद के
अनुसार, गेहूं के जवारे के रस के साथ 'मेथीदाने' के रस के सेवन से बुढ़ापा
दूर भगाया जा सकता है |
इसके लिए एक चम्मच मेथी दाना रात में भिगो दें. सुबह छानकर इस रस को जवारे के रस के साथ मिलाकर सेवन करें |

इसके साथ आधा नींबू का रस, आधा छोटा चम्मच सोंठ और दो चम्मच शहद मिला देने से इस पेय की गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है |

इस पेय में विटामिन ई, सी और कोलीन के साथ कई महत्वपूर्ण इंजाइम्स और पोषक तत्व शरीर को प्राप्त हो जाते हैं |


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21.11.13

लहसुन से करें कई रोगों का ईलाज.





               लहसुन सैकडों वर्षों से रसोईघर में मसाले  के तौर पर व्यवहार  में आ रही है|  लेकिन इसका उपयोग  कई तरह के रोगों के इलाज में  प्राचीन काल  से होता आया है|  यह  ह्रदय रोगों और  रक्त परिसंचरण  तंत्र के विकारों  को ठीक करने  में सफलता  से प्रयोग की जा रही है|  उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रोल ,कोरोनरी धमनी संबधित  ह्रदय दोष  और हृदयाघात  जैसी स्थितियों  में इसका उपयोग उत्साहवर्धक परिणाम  प्रस्तुत करता है|  धमनी-काठिन्य रोग में भी  लहसुन लाभदायक है\ लहसुन के प्रयोग विज्ञान सम्मत  होने के दावे किये जा रहे हैं|





   
 कुछ चिकित्सक  लहसुन का प्रयोग  फेफड़े  के केंसर ,बड़ी  आंत  के केंसर ,प्रोस्टेट केंसर ,गुदा के केंसर ,आमाशय के केंसर ,छाती के केंसर  में कर रहे हैं|  मूत्राशय के केंसर में भी प्रयोग हो रही है लहसुन|  लहसुन का प्रयोग पुरुषों में प्रोस्टेट  वृद्धि  की शिकायत में भी  सफतापूर्वक किया जा रहा है|  इसका उपयोग  मधुमेह रोग  अस्थि-वात् व्याथि  में भी करना उचित है| 
   लहसुन का प्रयोग  बेक्टीरियल  और फंगल उपसर्गों में  हितकारी सिद्ध  हुआ है\  ज्वर,सिरदर्द,सर्दी-जुकाम ,खांसी,,गठिया रोग,बवासीर  और दमा रोग में इसके प्रयोग से अच्छा लाभ मिलता है|
 

सांस भरने , निम्न  रक्त चाप, उच्च रक्त शर्करा  जैसी स्थितियों में लाभ लेने के लिए लहसुन  के प्रयोग  की सलाह दी जाती है| 







    लहसुन का उपयोग तनाव दूर करने वाला है,थकान दूर करता है | यह यकृत के कार्य को सुचारू बनाती है|  चमड़ी के मस्से ,दाद  भी लहसुन  के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं|  लहसुन में  एलीसिन  तत्त्व  पाया जाता है| रोगों में यही तत्त्व  हितकारी है|   प्रमाणित हुआ है कि  लहसुन ई कोलाई, और साल्मोनेला  रोगाणुओं को नष्ट  कर देती है\  लहसुन की ताजी गाँठ  ज्यादा असरदार होती है| पुरानी  लहसुन कम प्रभाव  दिखाती है| 


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19.11.13

हल्दी के रोग नाशक उपचार

हल्दी से करें रोगों की चिकित्सा

हल्दी पीले रंग का एक मसला है जो भारत में बहुतायत से भोजन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है| रोगों के उपचार में हल्दी में पाया जाने वाला एक तत्त्व है जिसे करक्यूमिन कहा जाता है| करक्यूमिन तत्त्व हल्दी पीले रंग के लिए उत्तरदायी है| करक्यूमिन बहुत ही जबरदस्त शोथ रोधी(anti swelling) गुणों से संपन्न तत्त्व है| इसके एंटी ऑक्सीडेंट गुण भी इसे रोगोपचार में महत्ता प्रदान करते हैं| अब मैं इसके औषधीय गुणों के बारे में बताऊंगा-  संधिवात का दर्द कम करती है
हल्दी के सूजन विरोधी गुणों की वजह से संधिवात की चिकित्सा में इसका उपयोग उचित है| जो संधिवात के रोगी हल्दी का नियमित सेवन करते हैं यह देखा गया है कि उनमें जोड़ों के दर्द का लेविल बहुत नीचे रहता है| जोड़ों की सूजन भी कम हो जाती है| १००० एमजी हल्दी पावडर दिन में तीन बार लेना कर्त्तव्य है|

केंसर में उपयोगी है-

हल्दी का एक शक्तिशाली गुण यह है कि इसके नियमित इस्तेमाल से कई तरह के केंसर की रोक थाम की जा सकती है| प्रमाण मिले हैं कि हल्दी सेवन से केंसर की बढोतरी की चाल आधी रह जाती है और यहां तक कि करक्यूमिन केंसर के सेल्स को सीधे ही खत्म कर सकता है| रेडीएशन आधारित ट्यूमर्स करक्यूमिन तत्त्व से रोके जा सकते हैं| छाती और बड़ी आत के केंसर में हल्दी का उपयोग करना लाभ प्रद है|हल्दी प्रोस्टेट केंसर में हितकारी साबित हुई है| जो लोग प्रोस्टेट केंसर के रोगी हैं ,हल्दी के सेवन से केंसर की बढोतरी रुक सकती है|
डायबिटीज  में उपयोगी है-हल्दी शर्करा नियंत्रण में उपयोगी पायी गयी है| डायबिटीज रोगी शर्करा नियंत्रण के लिए जिन दवाओं का प्रयोग करते हैं ,हल्दी उनका प्रभाव बढ़ा देती है| टाईप -२ डायबिटीज में भी हल्दी का प्रयोग असरदार है| आंतों की सूजन में लाभ दायक है-

आन्तो में कई तरह के सूजन वाले रोग पैदा होते हैं| ऐसे रोगों में हल्दी का प्रयोग करना उचित है| | बड़ी आत के घाव में हल्दी के उपयोग से अच्छे परिणाम की आशा रहती है| फिर भी एक बात सनझ लें कि पित्ताशय के रोगों व पित्ताश्मरी (गाल स्टोन) में हल्दी का प्रयोग नहीं करना ही श्रेयस्कर है| वरना रोग के उग्र हो जाने की संभावना बन जाती है|लीवर के दोष  दूर करती है-
हल्दी रक्त के दोष दूर करती है | यह कार्य एन्जईम्स के माध्यम से संपन्न होता है| हल्दी नैसर्गिक तौर पर ऐसे एन्जाईम्स का उत्पादन बढाती है जिससे लीवर के विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है|
वजन घटाने में सहायक-
हल्दी में मौजूद  करक्यूमिन  भोजन  की वसा को विखंडित कर वजन कम करने में सहायता करती है|  नियमित व्यायाम और स्वास्थ्यकर   भोजन के साथ एक चम्मच हल्दी पावडर  दिन में दो बार लेते रहने से  वजन घटाने में  सफलता मिलती है|


दमा में हितकारी है-

हल्दी में सूजन विरोधी और दर्द नाशक गुण होने से दमा रोग में हितकारी है| इसके लिए आप एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पावडर घोलकर रात को सोते वक्त पीते रहें|

 हल्दी कोलेस्ट्रोल  घटाती है- 
  रक्त  में उच्च कोलेस्ट्रोल से शरीर में कई व्याधिया जन्म लेती हैं | अनुसंधान में पाया गया है कि  हल्दी के नियमित सेवन से  कोलेस्ट्रोल का लेविल  संतुलित  रखने में  मदद मिलती है|  इससे ह्रदय रोगों में हितकारी प्रभाव देखा जाता है| 
शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति उन्नत करती है

    हल्दी में लिपोपोलिसेकराईड तत्त्व पाया जाता है जो शरीर  की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढाता है|  इसके  एन्टी बेक्टीरीयल,एंटी वायरल ,एंटी फंगल  गुण विशेष  महत्व के हैं| अगर आपका इम्यून  सिस्टम ताकतवर है तो आप रोगों  की चपेट में कम आएंगे| 


10.11.13

पालक से करें पथरी,रक्ताल्पता ,थायराईड की चिकित्सा

पालक  खाएं रोग भगाएं- --



पालक एक पत्तेदार सब्जी है जो अपने स्वास्थ्यकारी  गुणों  के कारण  सारे भारत में उपयोग की जाती है|पालक में कई तरह के विटामिन्स के अलावा प्रोटीन.सोडियम,केल्सियम ,क्लोरीन और   रेशा पाया जाता है|इसमें पाया जाने वाला लोह तत्व और  रायबो फ्लेविन  चिकित्सीय दृष्टी  से महत्वपूर्ण  हैं|  अब हम पालक  से रोगोपचार  के बारे में बताएंगे --

दमा और श्वास रोग में--

   पालक के एक गिलास जूस में  चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर रोज सुबह और शाम  को सेवन  करने  दमा और श्वास रोग में हितकर  असर  होता है|

निम्न रक्त चाप में लाभकारी--

निम्न रक्त चाप रोगी को प्रतिदिन पालक की सब्जी खाने  से रक्त प्रवाह संतुलित करने में मदद मिलती है|

रक्ताल्पता में उपयोगी है--

रक्ताल्पता याने खून की कमी में पलक का उपयोग  बेहद लाभकारी है|  इसके सेवन से हेमोग्लोबिन में वृद्धि  होती है| एक गिलास जूस दिन में तीन बार लेना उचित है| इसमें श्रेष्ठ किस्म का लोह तत्व होता है जो एनीमिया  निवारण में सकारात्मक प्रभाव  डालता है|

थायरायड रोग में हितकर है--

एक गिलास पालक के जूस में एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच  जीरा  का पावडर  मिलाकर लेते रहने से  थायरायड रोग में लाभ होते देखा गया है| 

पथरी  निष्कासन में उपयोगी है-

पालक के पत्ते का रस और नारियल पानी सामान भाग मिलकर लेते रहने से  गुर्दे और मूत्र पथ की  पथरी   निकल जाती है|

पीलिया रोग ठीक होता है-

कच्चे पपीते  के साथ  पालक का रस  सेवन करना  पीलिया ठीक होने में सहायक है| छिलके वाली मूंग की दाल में पालक मिलाकर  सब्जी  बनाकर  रोगी को खिलाना चाहिए| 

दिल के रोग में--

ह्रदय रोगी एक गिलास पालक के जूस में २ चम्मच  शहद मिलाकर  पीते रहें| 

कब्ज मिटाता है पालक - 

       पालक का जूस दिन में  दो बार नियमित पीते रहने से कठिन से कठिन कब्ज का भी निवारण हो जाता है|

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