29.10.13

सेहत के लिए श्रेष्ठ व्यायाम है प्रात;काल टहलना





रोग मुक्तिकारक  है सुबह का घूमना -

टहलने को कसरतों की रानी कहा गया है | 

इससे हृदय शक्तिशाली होता है| 

शरीर की रोग प्रतिरोधक  क्षमता बढती है| 

रक्तचाप सामान्य होने में सहायक है|

दिल का दौरा पड़ने की संभावना  काफी हद तक कम हो जाती है|

शरीर के जोड़ों और मांस पेशियो में  शक्ति  आती है| 

टहलने से शरीर की अनावश्यक केलोरी जल जाती है और इस तरह मोटापा कम करने में मदद  मिलती है| 

टहलने से शरीर सुडौल और तेजस्वी बनता है|

 ४५ की आयु के बाद जैसे ही प्रोढावस्था  आती है  तब हड्डिया कमजोर होने लगती हैं| | ३०-४० मिनिट नियमित टहलने और केल्शियम से भरपूर  भोजन लेने से हड्डिया मजबूत बनी रहती है|और अस्थि क्षरण  की आशंका  कम हो जाती है|

श्रेष्ठ  स्वास्थ के लिए टहलने का तरीका और वातावरण पर ध्यान  देना जरूरी है| घूमने का सही समय प्रात;काल सूर्योदय से पहिले  है|सुबह के वातावरण में आक्सीजन पर्यात मात्रा में मोजूद  होती है|,दुसरे यह समय प्रदूषण  मुक्त भी होता है| इसे ऊषाकाल  कहते है|
script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js">   टहलने से रक्त संचार  में इजाफा होता है|इससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त आक्सीजन मिलती  है| रक्त संचार बढ़ने से आहिस्ता- आहिस्ता  ब्लड प्रेशर  भी नियंत्रण में आ जाता है| वर्तमान जीवन शैली में कोलेस्ट्रोल  बढ़ाने की समस्या  उभार पर है|  कोलेस्ट्रोल  का  हार्ट अटेक से गहरा सम्बन्ध होता है|  नियमित घूमने से कोलेस्टरोल की  समस्या  का भी निवारण हो जाता है| 


टहलने का सही तरीका-



         वार्म अप जरूर कर लेना चाहिए| टहलना धीमी गति से  शुरू  करना चाहिए| ४-५  मिनिट बाद चाल बढानी चाहिए| थकावट महसूस होने पर पुन;  चाल धीमी कर देनी चाहिये| यानी जरूरत के मुताबिक़ धीमी गति और तेज गति से चलना अच्छा रहता है| कम से कम तीन  किलो मीटर घूमना उचित माना जा सकता है| देखने में आताहै कि जो लोग ५-६ किलोमीटर  प्रतिदिन घूमने के अभ्यस्त हैं वे ज्यादा चुस्त और फुर्तीले  और निरोग  होते हैं|  टहलने से थकने की चिंता नहीं करना चाहिए| हाँ ज्यादा थकावट महसूस हो तो कहीं थोड़ी देर के लिए विश्राम भी कर लेना चाहए| 


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