31.10.13

हल्दी के प्रयोग से रहें निरोग .



हमारे किचन में एक मसाले के रूप में व्यवहृत हल्दी  अपने भीतर सैंकडों  आरोग्यकारी गुण समाविष्ट किये हुए है | नीचे  पूरा वर्णन  दिया जा रहा है--

सौन्दर्यवर्धक



हल्दी केवल सब्जी या दाल को ही स्वादिष्ट नहीं बनाती, यह खाने वाले शरीर को भी सुन्दर बनाती है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि व्यवसायी लोग, जो शरीर को सुन्दर बनाने की क्रीम बनाते हैं, उसमें हल्दी का प्रयोग करते हैं ताकि बिक्री अच्छी हो सके। लेकिन ये लोग हल्दी का सीधा प्रयोग नहीं करते, उसमें रंग और सुगंध का प्रयोग करते हैं। इसी कारण यह क्रीम इतनी असरदार नहीं होती, जितनी चने के आटे में हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर बनी क्रीम जिसे ‘उबटन’ के नाम से जाना जाता है। मध्यकालीन युग में राजकुमारियां और रानियां इसी उबटन को लगाया करती थीं।
हल्दी में पौष्टिक तेल की भी मात्रा होती है जो दिखाई नहीं देती। यह हल्दी सूखी त्वचा को चिकनी और मुलायम बनाती है। इसमें तेल की मात्रा होने पर भी इसका तेल चेहरे अथवा शरीर पर दिखाई नहीं देता। इसका तेल त्वचा के अन्दर जाकर उसे प्राकृतिक रूप देता है।


कीटनाशक-



हल्दी का प्रयोग साफ, स्वच्छ तरीके से ही किया जाना चाहिए। क्योंकि यह कीटनाशक है और इसके प्रयोग से गलाव-सड़ाव नहीं होता इसलिए यह पवित्र है। पवित्र वस्तु का इस्तेमाल भी पूरी पवित्रता के साथ ही करना चाहिए। संस्कृत में हल्दी को कृमिघ्ना भी कहते हैं जिसका हिन्दी में अर्थ होता है कीटाणुनाशक। यदि शरीर के किसी भाग में पस हो जाए अथवा टी-बी. हो जाए तो हल्दी इन सभी रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करने में समर्थ है।


रक्तशोधक



हल्दी की एक और विशेषता यह है कि यह रक्तशोधक है। यह रक्त के दोषों को मूत्र द्वारा अथवा दस्त द्वारा निकालकर दूर कर देती है। यह शरीर में चूने के पदार्थ के साथ मिलकर रक्त को शुद्ध लाल रंग का बनाती है। रक्त के रंग को लाल रंग का बनाने का प्रमाण यह है कि ‘‘यद्यपि हल्दी का रंग पीला होता है फिर भी पीलिया के रोगियों की चिकित्सा हकीम हल्दी द्वारा करते हैं।’’ इसलिए यह बाहर से पीले रंग की दिखाई देने वाली हल्दी अन्दर शरीर में जाकर रक्त को शुद्ध एवं लाल रंग का बनाती है। साथ ही हम जो खाना खाते हैं उसे हजम भी करती है। यूनानी चिकित्सकों का कहना है कि रक्त यदि बिगड़ जाए तो इसे शुद्ध करने के लिए हल्दी का प्रयोग करना चाहिए।


उबटन



विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से हल्दी का उबटन तैयार करती हैं जो दुल्हन के तन-बदन को कंचन की तरह निखार देता है। यह उबटन त्वचा को और भी मोहक बनाता है और कंचन सी काया को कुन्दन की तरह चमका देता है। हल्दी के उबटन के बाद दुल्हन पर कैसा रूप चढ़ता है, यह हर गृहिणी जानती है।



हल्दी की प्रजातियां व उनके प्रयोग



रसोई में जिस हल्दी का प्रयोग किया जाता है, उसके अलावा भी इसकी कुछ अन्य विशिष्ट प्रजातियां हैं, जिनका औषधीय गुणों के कारण विभिन्न रोगों में प्रयोग किया जाता है। प्रस्तुत है उन्हीं की संक्षिप्त लेकिन सटीक जानकारी।


आमा हल्दी



आमा हल्दी का वानस्पतिक नाम क्यूरकुमा अमाडा है। इसमें कच्चे आम की सी गन्ध आती है। इसीलिए इसे आमा हल्दी या आम्रगन्धि हरिद्रा कहा जाता है। इस प्रकार की हल्दी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में विशेष रूप से बंगाल, कोंकण तथा तमिलनाडु में उत्पन्न होती है। इसकी गांठें बड़ी-बड़ी अदरक के समान, पीले रंग की तथा आम की सी गन्ध से युक्त होती हैं।

गुण—



आमा हल्दी शीतल, मधुर, पित्तशामक, आम की सी गन्ध वाली, पेट से वायु निकालने वाली, भोजन का पाचन कराने वाली, भूख बढ़ाने वाली एवं मल बांध कर लाने वाली होती है। सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि बनाने में उपयोग में लाते हैं। मिठाइयों आदि में भी आम की गन्ध लाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


दारु हल्दी



दारु हल्दी के वृक्ष जो हिमालय पर्वत पर तथा आसाम में पाए जाते हैं। जिनमें चार जातियों के वृक्ष मध्य भारत एवं दक्षिण भारत के नीलगिरी पर्वत पर पाए जाते हैं। इनका भूमिगत तना ही हल्दी होता है। बर्बेरिस अरिस्टेटा हल्दी का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की हल्दी पीले रंग की होती है, जिसमें हल्की-सी गंध आती है और स्वाद कड़ुवा होता है।
गुण—


दारु हल्दी उष्ण होती है। इसके गुण अन्य प्रकार की हल्दियों के गुणों के समान होते हैं। दारु हल्दी के सत्व को रसौत कहा जाता है।


त्वचा रोग



यह रोग अधिकतर खून की खराबी से उत्पन्न होते हैं। इसके बचाव के लिए स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए ! साथ ही खाद्य—पदार्थों में गरम मसालों, मिर्च-मसालों, खटाई, गुण, चीनी, शक्कर, मांस—मदिरा, धूम्रपान, तम्बाकू, विषम भोजन आदि से बचकर रहना चाहिए। पौष्टिक आहार नियमित व्यायाम, स्नान और स्वच्छ जल का सेवन और उचित उपचार इन रोगों को आपसे दूर भगाने में सहायक होते हैं।


चेहरे की झाइयां



चेहरे पर झाइयां पड़ जाने के अनेक कारण हैं। उम्र के साथ ही बाजारू क्रीम या लोशन चेहरे पर लगाते रहने से उस पर झाइयां पड़ जाती हैं या धब्बे हो जाते हैं। कारण यह है कि मुलायम त्वचा ऐसे लोशन से झुलस जाती है। उसे पुनः सुन्दर और आकर्षित बनाने के लिए प्रथम तो आवश्यक यह है कि लोशनों और क्रीमों का सेवन करना बन्द कर दिया जाए और हल्दी द्वारा तैयार किए गए उबटन का प्रयोग करना आरम्भ कर दें।


उपचार—


हल्दी का उबटन बनाने की विधि यह है कि दारु हल्दी दस ग्राम लेकर पीपल अथवा आक के दूध में डुबो दें और अच्छी तरह दूध को सोख लेने के बाद सायंकाल उसको घिसकर पेस्ट बना लें और किसी बर्तन में पेस्ट को रखकर ढक्कन बन्द कर दें तथा रात्रि को ओस में बाहर खुले में रख दें। अब उबटन पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। सुबह स्नान करने के आधा घण्टा पूर्व इस उबटन को चेहरे पर मलें और आधे घण्टे पश्चात् स्नान करें। एक सप्ताह तक नियमित इस उबटन का प्रयोग करके झाइयां मिट जाएंगी और त्वचा मुलायम होकर चेहरा आकर्षक हो जाएगा। बाद में सप्ताह में सिर्फ एक बार इस उबटन का सेवन करते रहें। किसी अन्य दवा का इस्तेमाल न करें।


गर्मी के दाने



जब तेज गर्मी पड़ती है और पसीना शरीर से निकलता है तो पसीने के साथ ही शरीर के अनेक खनिज भी बाहर निकल जाते हैं।
इन दिनों प्याज का सलाद बनाकर सैंधा नमक और काली मिर्च तथा नीबू डालकर खाना चाहिए। और इस प्रकार की व्यवस्था कीजिए कि पसीना शरीर पर ही सूख जाए, बहने न पाए। इसके लिए सिन्थेटिक्स अथवा सिल्क के कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए, बल्कि सूती और मोटे कपड़े ही पहनने चाहिए जिससे कपड़े पसीना सोख लें।


उपचार—


एक किलो कच्ची हल्दी को पानी में डालकर उबाल लें। अच्छी तरह उबालकर पानी को आंच से उतार कर ठण्डा कर लें और छानकर किसी शीशे के ऐसे बर्तन में भरें जिसमें पहले से ही तीन सौ ग्राम शहद भरा हुआ हो। इस शहद युक्त पानी को दो सप्ताह तक रखा रहने दें। अब आपका ठण्डा पेय तैयार हो गया। इसमें चम्मच भर फालसे का जूस या अनार का रस मिला दें और इस शर्बत का सेवन गर्मी दूर करने और दानों को शरीर से हटाने के लिए सेवन करते रहें। शरीर पर गर्मियों में दाने नहीं निकलेंगे।

फोड़ा-फुंसी



शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं। कुछ समय बाद उनमें पीब पड़ जाती है और दर्द का अनुभव होता है।
खून की खराबी, दूषित वातावरण में रहन-सहन, दूषित जल व भोजन का प्रयोग। गरम मसाला व मांस-मदिरा, तम्बाकू, चाय—कॉफी, मीठी वस्तुओं का अत्यधिक सेवन।


उपचार


आधा किलो हल्दी पीसकर चार लीटर पानी में घोलकर उबालें और ठण्डा करके इसमें दो सौ ग्राम शहद मिला दें। इस मिश्रण को किसी शीशे के बर्तन में दो सप्ताह तक रखा रहने दें, अब इसको छानकर किसी साफ बोतल में भरकर रख दें। खाना खाने के बाद इस आसव को दस या पन्द्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इस आसव को पीने से रक्त साफ हो जाता है।

•    त्वचा की खुश्की और छूत रोग का प्रभाव मिटाने के लिए आप हल्दी-तेल ही मलिए, लेकिन खून की खराबी दूर करने के लिए हल्दी-वटी खाइए। हल्दी पीसकर शहद मिलाकर और बेर (जंगली बेर) के बराबर गोलियां बना लीजिए। हल्दी और शहद मिलकर रक्त की बूंद-बूंद से सारे जहर निकाल देते हैं। एक गोली हल्दी के गुणों को याद करके और दूसरी गोली शहद के गुणों को याद करके सुबह चूस जाइए, इसी तरह दो गोलियां शाम या रात को सेवन कीजिए। अन्दर से रक्त का शोधन हो जाएगा और बाहर की त्वचा में न खाज उठेगी, न खुजली रहेगी।
•    महिलाओं को चाहिए कि सप्ताह में एक नहीं तो महीने में एक बार ही सही, हल्दी और बेसन को सरसों के तेल में गूंधकर उबटन बना लें और सारे बदन पर इसे अच्छी तरह मला करें। इसका प्रभाव महीने भर तक बना रहता है और खाज-खुजली से शरीर बचा रहता है।

30.10.13

धनिया के चोक़ाने वाले फ़ायदे जानकर हैरान रह जायेंगे |





                                                                                                                                       -






धनिये के उपयोग 

धनिये की हरी-हरी पत्तियों की सुगंध किसी भी व्यंजन की सुंगध और उसके स्वाद को
कई गुना बढ़ा देती है। सब्जियों में हरे धनिये के साथ ही सुखे धनिये का
उपयोग भी भारतीय भोजन में बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। लेकिन हरे
धनिए की कोमल पत्तियां सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं डाली जाती
बल्कि इनका औषधीय महत्व भी है। इसका सेवन जाने-अनजाने ही आपको कई
बीमारियों से निजात भी दिलाता है। आइये जानें कि धनिया किन-किन बीमारियों
या परेशानियों में मददगार हो सकता है... 









 





आंख 


आंखों के लिए धनिया बड़ागुणकारी होता है। थोड़ा सा धनिया कूट कर पानी
में उबाल कर ठंडा कर के, मोटेकपड़े से छान कर शीशी में भर लें। इसकी दो बूंद आंखों
 में टपकाने से आंखोंमें जलन, दर्द तथा पानी गिरना जैसी समस्याएं दूर होती हैं।

  ताजा  धनिया  पत्ते  में विटामिन सी,विटामिन ए,एंटी ऑक्सीडेंट्स और फास्फोरस  जैसे
 मिनरल्स  पाए जाते हैं जो मस्कुलर डिजनरेशन,नेत्र शोथ और आँखों की उम्र वृद्धि  को
कम करते  है|



नकसीर :


  हरा धनिया 20 ग्राम व चुटकी भर कपूर मिला कर पीस लें। सारा रस निचोड़ लें। 

इस रस की दो बूंद नाक में दोनों तरफ टपकाने से तथा रस को माथे पर लगा कर 

मलने से खून तुरंत बंद हो जाता है। 


गर्भावस्था में जी घबराना उल्टी  होना  :












गर्भ धारण करने के दो-तीन महीने तक गर्भवती महिला को उल्टियां आती है। ऐसे में धनिया 


का काढ़ा बना कर एक कप काढ़े में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से जी घबराना बंद 

होता है।



पित्त 


पित्त बढ़ जाने से जी मिचलाना रहता हो तो हरा धनिया पीसकर
उसका ताजा रस दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से लाभ होता है। भोजन में हरे
धनिये की ताजी पिसी चटनी का प्रयोग करते रहने से भी जी मिचलाना कम होता है। 



     धनिये की हरी पत्तियों को लहसुन, प्याज, गुड़, इमली, अमचूर, आंवला,

नींबू, पुदीना आदि के साथ बारीक पीसकर चटनी के रूप में खाते रहने से पाचन

क्रिया दुरुस्त बनी रहती है तथा भूख भी खूब लगती है। 



पित्ती


शरीर में पित्ती की तकलीफ हो तो हरे धनिये के पत्तों का रस, शहद और रोगन गुल तीनों
को मिला कर लेप करने से पित्ती की खुजली में तुरंत आराम होता है।




पित्त

बढ़ जाने पर हरी-पीली उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं। इस अवस्था में हरे
धनिया का रस निकालकर उसमें गुलाब जल मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।




लू लगने पर पर 


गर्मी में बाहर जाने से, लू लग जाने पर परेशानी हो रही हो तो
धनिया पीसकर, रस निकालकर, इसे पानी में घोलकर मिठास के लिए चीनी डालकर पी
लें।



       एक बड़ा गिलास पानी लें। इसमें दो बड़े चम्मच धनिया डालें। उबालें।
जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उतार लें। इसमें मिश्री मिलाकर, छानकर, पी लें,
कुछ दिन जारी रखें।




अधिक गैस बनना


एक गिलास पानी लें, दो चम्मच धनिया मिलाकर उबालें। छानें, तीन भाग कर, दिन में तीन बार पी लें।



भोजन में अरुचि 


खाना खाने को मन नहीं करता। भरपेट नहीं खा सकते। पचता भी
नहीं, धनिया, छोटी इलायची, कालीमिर्च तीनों एक जैसी मात्रा में लें। इन्हें
पीसकर छानकर शीशी में रखें। चौथाई चम्मच घी तथा आधा चम्मच चीनी में आधा
चम्मच इस चूर्ण को डालकर खायें। चन्द दिनों में अरुचि खत्म।




श्वास के रोग






खांसी हो, दमा हो, सांस फूलता हो, धनिया तथा मिश्री पीसकर रख लें। एक
चम्मच चावल के पानी के साथ रोगी को पिलाएं। आराम आने लगेगा। कुछ दिन नियमित लें।














पेट दर्द 


आधा गिलास पानी लें। इसमें दो चम्मच धनिया डालें। उबालें। गुनगुना पिला दें। पेट दर्द ठीक होगा।



पेशाबमें जलन रहना


एक छोटा चम्मच धनिया लें। इसे एक कप बकरी के दूध में
मिलाएं, एक चम्मच मिश्री भी। पीने से पेशाब की जलन खत्म होगी। धनिया तथा
आंवला एक-एक चम्मच (पिसा) रात पानी में भिगो दें। प्रात: मसलकर छानकर पीने
से पेशाब की जलन खत्म होगी। कुछ दिन रोजाना लिया करें।




गंजापन होने पर


हरा धनिया पीसकर, गंजे पर लेप करें। कुछ दिनों के इस उपचार से बाल
 आने लगते हैं। अजमाया जा चुका है।



 कमजोरी

अधिक काम वासना की पूर्ति या स्वप्नदोष हो जाने से आने वाली कमजोरी में
रात को पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा धनिया भिगों दें। प्रात: छानकर पी लें।
कुछ दिन नियमित करें। कमजोरी दूर होगी। अत: धनिया को केवल मसालों में नहीं,
दवा के रूप में भी प्रयोग करें।





त्वचा की समस्याएं

  अपने एंटी फंगल,एंटी सेप्टिक ,डीटाक्सीफाईंग और डिसइन्फेक्टेट गुणों के चलते  धनिया पत्ता त्वचा की कुछ समस्याओं से भी निजात दिलाता है|   खुजली से राहत पाने के लिए इसके रस का सेवन करना उपादेय है या इसका पेस्ट भी त्वचा पर लगा सकते हैं| शरीर की फुंसियों  को ठीक करने के लिए  धनिया पत्ती के रस में शहद मिलाकर प्रभावित भाग पर लगाएं|   १५ मिनिट बाद ठन्डे पानी से धो लें| 


29.10.13

सेहत के लिए श्रेष्ठ व्यायाम है प्रात;काल टहलना





रोग मुक्तिकारक  है सुबह का घूमना -

टहलने को कसरतों की रानी कहा गया है | 

इससे हृदय शक्तिशाली होता है| 

शरीर की रोग प्रतिरोधक  क्षमता बढती है| 

रक्तचाप सामान्य होने में सहायक है|

दिल का दौरा पड़ने की संभावना  काफी हद तक कम हो जाती है|

शरीर के जोड़ों और मांस पेशियो में  शक्ति  आती है| 

टहलने से शरीर की अनावश्यक केलोरी जल जाती है और इस तरह मोटापा कम करने में मदद  मिलती है| 

टहलने से शरीर सुडौल और तेजस्वी बनता है|

 ४५ की आयु के बाद जैसे ही प्रोढावस्था  आती है  तब हड्डिया कमजोर होने लगती हैं| | ३०-४० मिनिट नियमित टहलने और केल्शियम से भरपूर  भोजन लेने से हड्डिया मजबूत बनी रहती है|और अस्थि क्षरण  की आशंका  कम हो जाती है|

श्रेष्ठ  स्वास्थ के लिए टहलने का तरीका और वातावरण पर ध्यान  देना जरूरी है| घूमने का सही समय प्रात;काल सूर्योदय से पहिले  है|सुबह के वातावरण में आक्सीजन पर्यात मात्रा में मोजूद  होती है|,दुसरे यह समय प्रदूषण  मुक्त भी होता है| इसे ऊषाकाल  कहते है|
script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js">   टहलने से रक्त संचार  में इजाफा होता है|इससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त आक्सीजन मिलती  है| रक्त संचार बढ़ने से आहिस्ता- आहिस्ता  ब्लड प्रेशर  भी नियंत्रण में आ जाता है| वर्तमान जीवन शैली में कोलेस्ट्रोल  बढ़ाने की समस्या  उभार पर है|  कोलेस्ट्रोल  का  हार्ट अटेक से गहरा सम्बन्ध होता है|  नियमित घूमने से कोलेस्टरोल की  समस्या  का भी निवारण हो जाता है| 


टहलने का सही तरीका-



         वार्म अप जरूर कर लेना चाहिए| टहलना धीमी गति से  शुरू  करना चाहिए| ४-५  मिनिट बाद चाल बढानी चाहिए| थकावट महसूस होने पर पुन;  चाल धीमी कर देनी चाहिये| यानी जरूरत के मुताबिक़ धीमी गति और तेज गति से चलना अच्छा रहता है| कम से कम तीन  किलो मीटर घूमना उचित माना जा सकता है| देखने में आताहै कि जो लोग ५-६ किलोमीटर  प्रतिदिन घूमने के अभ्यस्त हैं वे ज्यादा चुस्त और फुर्तीले  और निरोग  होते हैं|  टहलने से थकने की चिंता नहीं करना चाहिए| हाँ ज्यादा थकावट महसूस हो तो कहीं थोड़ी देर के लिए विश्राम भी कर लेना चाहए| 


19.10.13

नपुंसकता मिटाता है प्याज




प्याज के द्वारा २१ दिन में






नपुंसकता और  शीघ्र  पतन  निवारण:-








 आज हम प्याज के कुछ पारंपरिक  उपचारों के बारे में जानकारी देना चाहते हैं-


वीर्य वृद्धि  के लिए-






       सफ़ेद प्याज के रस को शहद के साथ लेने से वीर्य बनाने की  प्रक्रिया में तेजी आ जाती है|





  देसी उपचारों के जानकार बताते हैं  कि




सफ़ेद प्याज का रस  ५ मिली ,शहद १० ग्राम ,अदरक का रस ५ मिली और गाय का घी ५ ग्राम  मिश्रण कर  सुबह शाम  २१ दिन तक लेते रहने से नपुंसकता का निवारण होता है  और पुरुषत्व  में वृद्धि  होती है|


















जोड़ों के दर्द में उपकारी :-



   प्याज के रस को सरसों के तेल में  मिलाकर कुछ गर्म करके जोड़ों पर मालिश करने से  बहुत लाभ होता है|  यह उपचार लगातार  दो माह करने से आशातीत सफल परिणाम प्राप्त होते हैं|










खांसी में उपयोग-



    बच्चों और बूढों  की




खांसी में प्याज का रस  मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए| खांसी धीरे धीरे ठीक  होने लगती है|





   सफ़ेद प्याज दिल के रोगों में उपकारी होता है|  लाल प्याज बल बढाने वाला होता है|





   बालकों की शारीरिक विकास  हेतु प्याज का उपयोग गुड के साथ करने की सलाह दी जाती है|




दांत का दर्द और मसूढों  की सूजन में --



      प्याज के रस में नमक मिलाकर दांत-मसूढों  पर मलने से  दर्द और सूजन दूर होते हैं|


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