1.12.13

घुटनों में दर्द के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार : Knee pain: simple remedies

                              

    घुटना शरीर का भार सहता है,उसे सपोर्ट करता है और चलायमान बनाता है| लेकिन घुटनों में विकार आने पर रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई महसूस होने लगती है| जीवन में कभी न कभी घुटनों के दर्द की समस्या से सभी स्त्री-पुरुषों को रूबरू होना ही पड़ता है| कुछ लोग जवानी में ही इस दर्द की चपेट में आ जाते हैं और बुढापा तो घुटनों की पीड़ा के लिए खास तौर पर जाना जाता है|


     घुटनों के अंदरूनी या मध्य भाग में दर्द छोटी मोटी चोंटों या आर्थराईटीज के कारण हो सकता है| लेकिन घुटनों के पीछे का दर्द उस जगह द्रव संचय होने से होता है इसे बेकर्स सिस्ट कहते हैं| सीढ़ियों से नीचे उतरते वक्त अगर घुटनों में दर्द होता है तो इसे नी केप समस्या जाननी चाहिए | यह लक्षण कोंट्रोमलेशिया का भी हो सकता है| सुबह के वक्त उठने पर अगर आपके घुटनों में दर्द होता है तो इसे आर्थराई टीज की शुरू आत समझनी चाहिए\ चलने फिरने से यह दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है| बिना किसी चोंट या जख्म के अगर घुटनों में सूजन दिखे तो यह ओस्टियो आर्थ रा ईटीज,गाऊट अथवा जोड़ों का संक्रमण की वजह से होता है|

घुटनों के दर्द की चिकित्सा -

घुटनों में दर्द को कम करने के लिए गरम या ठंडे पेड से सिकाई की जरूरत हो सकती है| घुटनों में तीव्र पीड़ा होने पर आराम की सलाह डी जाती है ताकि दर्द और सूजन कम हो सके\ फिजियो थेरपी में चिकित्सक विभिन्न प्रक्रियाओं के द्वारा घुटनों के दर्द और सूजन को कम करने का प्रयास करते हैं\
*भोजन द्वारा इलाज के अंतर्गत रोजाना ३-४ खारक खाते रहने से घुटनों की शक्ति को बढ़ाया जा सकता है| अस्थियों को मजबूत बनाए रखने के लिए केल्शियम का सेवन करना उपकारी है| केल्शियम की ५०० एम् जी की गोली सुबह शाम लेते रहें| | दूध ,दही,ब्रोकली और मछली में पर्याप्त केल्शियम होता है|
घुटनों के लचीलेपन को बढाने के लिए दाल चीनी,जीरा,अदरक और हल्दी का उपयोग उत्तम फलकारी है| इन पदार्थों में ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो घुटनों की सूजन और दर्द का निवारण करते हैं
|
       *गाजर में जोड़ों में दर्द को दूर करने के गुण मौजूद हैं |चीन में सैंकडों वर्षों से गाजर का इस्तेमाल संधिवात पीड़ा के लिए किया जाता रहा है| गाजर को पीस लीजिए और इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर रोजाना खाना उचित है| यह घुटनों के लिगामेंट्स का पोषण कर दर्द निवारण का काम करता है|

   *मैथी के बीज संधिवात की पीड़ा निवारण करते हैं| एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें | सुबह पानी निकाल दें और मैथी के बीज अच्छी तरह चबाकर खाएं| शुरू में तो कुछ कड़वा लगेगा लेकिन बाद में कुछ मिठास प्रतीत होगी| भारतीय चिकित्सा में मैथी बीज की गर्म तासीर मानी गयी है| यह गुण जोड़ों के दर्द दूर करने में मदद करता है|
*प्याज अपने सूजन विरोधी गुणों के कारण घुटनों की पीड़ा में लाभकारी हैं| दर असल प्याज में फायटोकेमीकल्स पाए जाते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं| प्याज में पाया जाने वाला गंधक जोड़ों में दर्द पैदा करने वाले एन्जाईम्स की उत्पत्ति रोकता है| एक ताजा रिसर्च में पाया गया है कि प्याज में मोरफीन की तरह के पीड़ा नाशक गुण होते हैं|
*गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी है| एक बड़ा चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की २ कुली पीसकर डाल दें | इसे गरम करें कि लहसुन भली प्रकार पक जाए| आच से उतारकर मामूली गरम हालत में इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है| इस तेल में संधिवात की सूजन दूर करने के गुण हैं| घुटनों की पीड़ा निवारण की यह असरदार चिकित्सा है|
जोड़ों की पीड़ा दूर करने के लिये तेल निर्माण करने का एक बेहद असरदार फार्मूला नीचे लिख रहा हूँ ,जरूर प्रयोग करें-

       *काला उड़द १० ग्राम ,बारीक पीसा हुआ अदरक ५ ग्राम ,पीसा हुआ कर्पूर २ ग्राम लें| ये तीनों पदार्थ ५0 ग्राम सरसों के तेल में ५ मिनिट तक गरम करें और आंच से उतारकर छानकर बोतल में भर लें| मामूली गरम इस तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द में आराम मिलता है| दिन में २-३ बार मालिश करना उचित है| यह तेल आर्थ्रराईटीज जैसे दर्दनाक रोगों में भी गजब का असर दिखाता है|
नीचे बताई गयी सामग्री को मिला कर हल्दी का एक दर्द निवारक पेस्ट बना लीजिये.
1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
1 छोटा चम्मच पीसी हुई चीनी, या बूरा या शहद
1 चुटकी चूना (जो पान में लगा कर खाया जाता है)
आवश्यकतानुसार पानी
इन सभी को अच्छी तरह मिला लीजिये. एक लाल रंग का गाढ़ा पेस्ट बन जाएगा.

यह पेस्ट कैसे प्रयोग करें:-
सोने से पहले यह पेस्ट अपने घुटनों पे लगाइए. इसे सारी रात घुटनों पे लगा रहने दीजिये.
सुबह साधारण पानी से धो लीजिये.
कुछ दिनों तक प्रतिदिन इसका इस्तेमाल करने से सूजन, खिंचाव, चोट आदि के कारण होने वाला घुटनों का दर्द पूरी तरह ठीक हो जाएगा.

घुटनों का दर्द – उपाय 2
1 छोटा चम्मच सोंठ का पाउडर लीजिये और इसमें थोडा सरसों का तेल मिलाइए.
इसे अच्छी तरह मिला कर गाड़ा पेस्ट बना लीजिये.
इसे अपने घुटनों पर मलिए. इसका प्रयोग आप दिन या रात कभी भी कर सकते हैं.
कुछ घंटों बाद इसे धो लीजिये. यह प्रयोग करने से आपको घुटनों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा.

घुटनों का दर्द – उपाय 3
नीचे बताई गयी सामग्री लीजिये:-
4-5 बादाम
5-6 साबुत काली मिर्च
10 मुनक्का
6-7 अखरोट

प्रयोग:
इन सभी चीज़ों को एक साथ मिलाकर खाएं और साथ में गर्म दूध पीयें.
कुछ दिन तक यह प्रयोग रोजाना करने से आपको घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.

घुटनों का दर्द – उपाय 4
खजूर विटामिन ए, बी, सी, आयरन व फोस्फोरस का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है. इसलिए, खजूर घुटनों के दर्द सहित सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द के लिए बहुत असरकारक है.

प्रयोग:
एक कप पानी में 7-8 खजूर रात भर भिगोयें.
सुबह खाली पेट ये खजूर खाएं और जिस पानी में खजूर भिगोये थे, वो पानी भी पीयें. ऐसा करने से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और घुटनों के दर्द में बहुत लाभ मिलता
है.
घुटनों का दर्द – उपाय 5
नारियल भी घुटनों के दर्द के लिए बहुत अच्छी औषधी है.
नारियल का प्रयोग:
रोजाना सूखा नारियल खाएं.
नारियल का दूध पीयें.
घुटनों पर दिन में दो बार नारियल के तेल की मालिश करें.
इससे घुटनों के दर्द में अद्भुत लाभ होता है.
आशा है आपको इन आसान घरेलू उपायों की मदद से घुटनों के दर्द से छुटकारा मिलेगा और आपकी ज़िंदगी बेहतर हो सकेगी

प्रतिदिन नारियल की गिरी का सेवन करें|इससे घुटनों को ताकत आती है|
लगातार 20 दिनों तक अखरोट की गिरी खाने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है।
बिना कुछ खाए प्रतिदिन प्रात: एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लेने से घुटनों के दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है।

विशिष्ट परामर्श-

गठिया , संधिवात , कटिवात,साईटिका ,घुटनो की पीड़ा जैसे वात रोगों मे वैध्य श्री दामोदर 98267-95656 की जड़ी- बूटी निर्मित औषधि सर्वाधिक असरदार साबित होती है| बिस्तर पकड़े रोगी भी इस औषधि  से दर्द मुक्त होकर  चलने फिरने योग्य हो जाते हैं| 

30.11.13

अदरक लाभ कारी है प्रोस्टेट और ओवेरियन केन्सर में

अदरक  की केन्सर में उपयोगिता



                                                             



              अदरक के  सामान्य गुणों  से अधिकाँश लोग परिचित   हैं |सूखी खांसी,  सर्दी ,जुकाम,भूख न लगना जैसी समस्याओं  से निजात पाने के लिए अदरक का उपयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है| लेकिन इस जानकारी  को  आगे  बढाते  हुए  अमेरिका की मिशीगन  यूनिवर्सिटी  के  वेज्ञानिकों  द्वारा  किये गए एक शौध के परिणाम  केन्सर  चिकित्सा में  बेहद उत्साह्कारी हैं| शौध के मुताबिक़ अदरक ओवेरियन केन्सर की कोशिकाओं को नष्ट करने में सफल हुई है| 




   
 पुरुषों में प्रोस्टेट केन्सर की कोशिकाएं  अदरक के प्रयोग से नष्ट हो जाती हैं| वज्ञानिकों का कहना है कि प्रोस्टेट केन्सर और ओवेरियन केन्सर से पीड़ित  लोगों के लिए  अदरक  एक जीरो साईड इफेक्ट  वाली केमो थीरेपी  है|  वैज्ञानिकों ने प्रयोग के दौरान देखा कि जैसे ही केन्सर कोशिकाओं को अदरक के चूर्ण  के संपर्क में लाया गया , केन्सर के सेल्स  नष्ट होते चले गए| वेज्ञानिक भाषा में इसे  एपोप्टीज याने  कोशिकाओं की आत्म ह्त्या कह सकते हैं| यह भी देखा गया कि अदरक की मौजूदगी  में  केन्सर के सेल्स एक दुसरे को खाने लगे|  इसे डाक्टरी भाषा में  ऑटो फिगिज  कहते हैं| 





   ओवेरियन और प्रोस्टेट केन्सर से पीड़ित रोगियों में  अदरक एक प्राकृतिक  कीमो थिराप्यूटिक एजेंट की तरह  काम करता है| ब्रिटिश जनरल आफ  न्युट्रीशन में प्रकाशित  एक शौध  के अनुसार  अदरक का  सत्व    बढे हूए प्रोस्टेट ट्युमर की साईज  ५६% तक कम  कर  देता है|  सबसे अच्छी बात यह कि  अदरक की मात्रा  ज्यादा भी हो जाए तो  इसका दुष्प्रभाव  कीमो थेरपी की तरह नहीं होता है| 
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24.11.13

बादाम खाएं ,मोटापा,कोलेस्ट्रोल घटाएं.

बादाम  खाएं और  रहें तन्दुरस्त 


                                                  

           
अक्सर हम अपने स्वास्थ्य का  भली प्रकार ध्यान नहीं रख पाते हैं | इसकी वजह से हमारा शरीर सुस्ती और कमजोरी महसूस करने लगता है| कोइ काम करने में अनिच्छा  और आलस्य  अनुभव होता है|  इस  स्थिति से रूबरू  होने पर  हम सुस्ती भगाने के लिए व्यायाम  भी शुरू का देते हैं जो अच्छी बात है  लेकिन  अगर आप नियमित रूप से एक मुट्ठी भर बादाम  सेवन  करेंगे  तो आपकी सेहत में काफी बदलाव  आता नजर आएगा|  बादाम हमारे शरीर को सिर्फ तन्दुरस्त ही नहीं रखता बल्कि मोटापा भी कम करता है| 

 
   अगर आप कई दिनों से अपना मोटापा कम करने का प्लान  बना रहे हैं और जिम में जाने का वक्त  नहीं निकाल पा रहे हैं  तो आपको बस एक  मुटठी भर बादाम रोज खाने की सलाह दी जाती है|  यह मेवा शरीर के लिए बेहद फायदेमंद  माना गया है| 

          बादाम  स्वस्थ वसा और उच्च  कोटि के मिनरल्स  और विटामिन्स  से भरपूर पदार्थ है|  एक मुट्ठी भर बादाम खाने से आपका पेट भर जाता है और आपको भूख महसूस नहीं होती है जिससे आपका वजन  घटने लगता है और मोटापा  निवारण में मदद  मिलती है| 

      बादाम में काफी सारे  मिनरल्स पाए जाते है जैसे  मैंगनीज,कापर,मेग्नेशियम | इसके अलावा बी काम्प्लेक्स विटामीन  जैसे नियासीन और बायोटिन  जो शर्रीर  को शक्ति और ऊर्जा देते हैं|  आप अपने शरीर को जितना अधिक चुस्त और एक्टिव  रख पाएंगे  उतनी अधिक आपकी केलोरी खर्च होंगी  जिससे आपकी चर्बी कम होने लगेगी| 


          बादाम हमारे ह्रदय को तन्दुरस्त  रखने में सहायक है| इसमें मोनोसेचुरेटेड  फेट्टी  एसिड होता है  जो  खराब कोलेस्ट्रोल  को शरीर से बाहर करता है|  इससे हमारा दिल कई स्वास्थय  - समस्याओं से  मुक्त रहता है|  बादाम में पाया जाने वाला विटामिन  ई  हमारे कार्डियोवास्कुलर  सिस्टम् को चाक चोबंद रखता है|  हैं न मुट्ठीभर बादाम के ढेर सारे फायदे|
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23.11.13

गेहूं के जवारे हैं अच्छे स्वास्थय की कुंजी.












     गेहूं के जवारे में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स आदि वे सभी पौष्टिक तत्व है जो शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाये रखने के लिए जरूरी है |
लंबे और गहन अनुसंधान के बाद पाया गया है कि शारीरिक कमजोरी, रक्ताल्पता, दमा, खांसी, पीलिया, मधुमेह, वात-व्याधि, बवासीर जैसे रोगों में गेहूं के छोटे-छोटे हरे पौधों के रस का सेवन खासा कारगर साबित हुआ है |
यहां तक कि इसकी मानवीय कोशिकाओं को फिर से पैदा करने की विशिष्ट क्षमता और उच्चकोटि के एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण कैंसर जैसे घातक रोग की प्रारंभिक अवस्था में इसका अच्छा प्रभाव देखा गया है |
गेहूं हमारे आहार का मुख्य घटक है | इसमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है | इस संदर्भ में तमाम महत्वपूर्ण खोजें हुई हैं. अमेरिका के सुप्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. ए. विग्मोर ने गेहूं के पोषक और औषधीय गुणों पर लंबे शोध और गहन अनुसंधान के बाद पाया है कि शारीरिक कमजोरी, रक्ताल्पता, दमा, खांसी, पीलिया, मधुमेह, वात-व्याधि, बवासीर जैसे रोगों में गेहूं के छोटे-छोटे हरे पौधे के रस का सेवन खासा कारगर साबित हुआ है |


एन्टी आक्सी डेंट  से भरपूर --

यहां तक कि इसकी मानव कोशिकाओं को फिर से पैदा करने की विशिष्ट क्षमता और
उच्चकोटि के एन्टीऑक्सीडेंट होने के कारण कैंसर जैसे घातक रोग की प्रारंभिक
अवस्था में इसका अच्छा असर देखा गया है | यही नहीं, फोड़े-फुंसियों और घावों पर गेहूं के छोटे हरे पौधे की पुल्टिस 'एंटीसेप्टिक'और 'एंटीइन्फ्लेमेटरी' औषधि की तरह काम करती है. डॉ. विग्मोर के अनुसार, किसी भी तरह की शारीरिक कमजोरी दूर करने में गेहूं के जवारे का रस किसी भी उत्तम टॉनिक से बेहतर साबित हुआ है |प्राकृतिक बलवर्धक टॉनिक -
यह ऐसा प्राकृतिक बलवर्धक टॉनिक है जिसे किसी भी आयुवर्ग के स्त्री-पुरुष और
बच्चे जब तक चाहे प्रयोग कर सकते हैं, इसी गुणवत्ता के कारण इसे 'ग्रीन
ब्लड' की संज्ञा दी गयी है |
पोषक तत्वों की अधिकता के कारण गेहूं को खाद्यान्नों में सर्वोपरि माना गया
है. इसमें प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स आदि वे सभी पौष्टिक
तत्व विद्यमान रहता है जो शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाये रखने के लिए
जरूरी है | 
हरिद्वार स्थित 'ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान' के वैज्ञानिकों ने भी गेहूं की गुणवत्ता
का लाभ जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए कई सरल और सस्ते प्रयोग किये हैं |

रोग प्रतिरोधक क्षमता -
इस संस्थान के शोध वैज्ञानिकों के अनुसार, गेहूं के ताजे जवारों (गेहूं के
हरे नवांकुरों) के साथ थोड़ी सी हरी दूब और चार-पांच काली मिर्च को पीसकर
उसका रस निकालकर पिया जाए तो इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
होती है |यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि दूब घास सदैव स्वच्छ स्थानों
जैसे खेत, बाग-बगीचों से ही लेना चाहिए |
संस्थान के वैज्ञानिकों ने गेहूं के जवारे उगाने का सरल तरीका भी बताया है.
इसके लिए मिट्टी के छोटे-छोटे सात गमले लिये जाएं और उन्हें साफ जगह से
मिट्टी से भर ली जाए. मिट्टी भुरभुरी और रासायनिक खाद रहित होनी चाहिए |
अब इन गमलों में क्रम से प्रतिदिन एक-एक गमले में रात में भिगोया हुआ एक-एक
मुट्ठी गेहूं बो दें. दिन में दो बार हल्की सिंचाई कर दे. 6-7 दिन में जब
जवारे थोड़े बड़े हो जाएं तो पहले गमले से आधे गमले के कोमल जवारों को जड़
सहित उखाड़ लें |



सुबह खाली पेट ले -






              

ध्यान रखें, जवारे 7-8 इंच के हों तभी उन्हें उखाड़ें. इससे ज्यादा बड़े होने पर



उनके सेवन से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता. जवारे का रस सुबह खाली पेट लेना ही
उपयोगी होता है |
ख्याल रखें कि जवारे को छाया में ही उगाएं. गमले रोज मात्र आधे घंटे के लिए
हल्की धूप में रखें. जवारों का रस निकालने के लिए 6-7 इंच के पौधे उखाड़कर
उनका जड़वाला हिस्सा काटकर अलग कर दें |
अच्छी तरह धोकर साफ करके सिल पर पीस लें. फिर मुट्ठी से दबाकर रस निकाल लें. ग्रीन ब्लड तैयार है |
 इस रस के सेवन से हीमोग्लोबिन बहुत तेजी से बढ़ता है और नियमित सेवन से शरीर पुष्ट और निरोग हो जाता है.
बुढ़ापा दूर भगाये  -

दूर्वा घास' के बारे में आरोग्य शास्त्रों में लिखा है कि इसमें अमृत भरा है,
इसके नियमित सेवन से लंबे समय तक निरोग रहा जा सकता है | आयुर्वेद के
अनुसार, गेहूं के जवारे के रस के साथ 'मेथीदाने' के रस के सेवन से बुढ़ापा
दूर भगाया जा सकता है |
इसके लिए एक चम्मच मेथी दाना रात में भिगो दें. सुबह छानकर इस रस को जवारे के रस के साथ मिलाकर सेवन करें |

इसके साथ आधा नींबू का रस, आधा छोटा चम्मच सोंठ और दो चम्मच शहद मिला देने से इस पेय की गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है |

इस पेय में विटामिन ई, सी और कोलीन के साथ कई महत्वपूर्ण इंजाइम्स और पोषक तत्व शरीर को प्राप्त हो जाते हैं |


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21.11.13

लहसुन से करें कई रोगों का ईलाज.





               लहसुन सैकडों वर्षों से रसोईघर में मसाले  के तौर पर व्यवहार  में आ रही है|  लेकिन इसका उपयोग  कई तरह के रोगों के इलाज में  प्राचीन काल  से होता आया है|  यह  ह्रदय रोगों और  रक्त परिसंचरण  तंत्र के विकारों  को ठीक करने  में सफलता  से प्रयोग की जा रही है|  उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रोल ,कोरोनरी धमनी संबधित  ह्रदय दोष  और हृदयाघात  जैसी स्थितियों  में इसका उपयोग उत्साहवर्धक परिणाम  प्रस्तुत करता है|  धमनी-काठिन्य रोग में भी  लहसुन लाभदायक है\ लहसुन के प्रयोग विज्ञान सम्मत  होने के दावे किये जा रहे हैं|





   
 कुछ चिकित्सक  लहसुन का प्रयोग  फेफड़े  के केंसर ,बड़ी  आंत  के केंसर ,प्रोस्टेट केंसर ,गुदा के केंसर ,आमाशय के केंसर ,छाती के केंसर  में कर रहे हैं|  मूत्राशय के केंसर में भी प्रयोग हो रही है लहसुन|  लहसुन का प्रयोग पुरुषों में प्रोस्टेट  वृद्धि  की शिकायत में भी  सफतापूर्वक किया जा रहा है|  इसका उपयोग  मधुमेह रोग  अस्थि-वात् व्याथि  में भी करना उचित है| 
   लहसुन का प्रयोग  बेक्टीरियल  और फंगल उपसर्गों में  हितकारी सिद्ध  हुआ है\  ज्वर,सिरदर्द,सर्दी-जुकाम ,खांसी,,गठिया रोग,बवासीर  और दमा रोग में इसके प्रयोग से अच्छा लाभ मिलता है|
 

सांस भरने , निम्न  रक्त चाप, उच्च रक्त शर्करा  जैसी स्थितियों में लाभ लेने के लिए लहसुन  के प्रयोग  की सलाह दी जाती है| 







    लहसुन का उपयोग तनाव दूर करने वाला है,थकान दूर करता है | यह यकृत के कार्य को सुचारू बनाती है|  चमड़ी के मस्से ,दाद  भी लहसुन  के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं|  लहसुन में  एलीसिन  तत्त्व  पाया जाता है| रोगों में यही तत्त्व  हितकारी है|   प्रमाणित हुआ है कि  लहसुन ई कोलाई, और साल्मोनेला  रोगाणुओं को नष्ट  कर देती है\  लहसुन की ताजी गाँठ  ज्यादा असरदार होती है| पुरानी  लहसुन कम प्रभाव  दिखाती है| 


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19.11.13

हल्दी के रोग नाशक उपचार

हल्दी से करें रोगों की चिकित्सा

हल्दी पीले रंग का एक मसला है जो भारत में बहुतायत से भोजन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है| रोगों के उपचार में हल्दी में पाया जाने वाला एक तत्त्व है जिसे करक्यूमिन कहा जाता है| करक्यूमिन तत्त्व हल्दी पीले रंग के लिए उत्तरदायी है| करक्यूमिन बहुत ही जबरदस्त शोथ रोधी(anti swelling) गुणों से संपन्न तत्त्व है| इसके एंटी ऑक्सीडेंट गुण भी इसे रोगोपचार में महत्ता प्रदान करते हैं| अब मैं इसके औषधीय गुणों के बारे में बताऊंगा-  संधिवात का दर्द कम करती है
हल्दी के सूजन विरोधी गुणों की वजह से संधिवात की चिकित्सा में इसका उपयोग उचित है| जो संधिवात के रोगी हल्दी का नियमित सेवन करते हैं यह देखा गया है कि उनमें जोड़ों के दर्द का लेविल बहुत नीचे रहता है| जोड़ों की सूजन भी कम हो जाती है| १००० एमजी हल्दी पावडर दिन में तीन बार लेना कर्त्तव्य है|

केंसर में उपयोगी है-

हल्दी का एक शक्तिशाली गुण यह है कि इसके नियमित इस्तेमाल से कई तरह के केंसर की रोक थाम की जा सकती है| प्रमाण मिले हैं कि हल्दी सेवन से केंसर की बढोतरी की चाल आधी रह जाती है और यहां तक कि करक्यूमिन केंसर के सेल्स को सीधे ही खत्म कर सकता है| रेडीएशन आधारित ट्यूमर्स करक्यूमिन तत्त्व से रोके जा सकते हैं| छाती और बड़ी आत के केंसर में हल्दी का उपयोग करना लाभ प्रद है|हल्दी प्रोस्टेट केंसर में हितकारी साबित हुई है| जो लोग प्रोस्टेट केंसर के रोगी हैं ,हल्दी के सेवन से केंसर की बढोतरी रुक सकती है|
डायबिटीज  में उपयोगी है-हल्दी शर्करा नियंत्रण में उपयोगी पायी गयी है| डायबिटीज रोगी शर्करा नियंत्रण के लिए जिन दवाओं का प्रयोग करते हैं ,हल्दी उनका प्रभाव बढ़ा देती है| टाईप -२ डायबिटीज में भी हल्दी का प्रयोग असरदार है| आंतों की सूजन में लाभ दायक है-

आन्तो में कई तरह के सूजन वाले रोग पैदा होते हैं| ऐसे रोगों में हल्दी का प्रयोग करना उचित है| | बड़ी आत के घाव में हल्दी के उपयोग से अच्छे परिणाम की आशा रहती है| फिर भी एक बात सनझ लें कि पित्ताशय के रोगों व पित्ताश्मरी (गाल स्टोन) में हल्दी का प्रयोग नहीं करना ही श्रेयस्कर है| वरना रोग के उग्र हो जाने की संभावना बन जाती है|लीवर के दोष  दूर करती है-
हल्दी रक्त के दोष दूर करती है | यह कार्य एन्जईम्स के माध्यम से संपन्न होता है| हल्दी नैसर्गिक तौर पर ऐसे एन्जाईम्स का उत्पादन बढाती है जिससे लीवर के विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है|
वजन घटाने में सहायक-
हल्दी में मौजूद  करक्यूमिन  भोजन  की वसा को विखंडित कर वजन कम करने में सहायता करती है|  नियमित व्यायाम और स्वास्थ्यकर   भोजन के साथ एक चम्मच हल्दी पावडर  दिन में दो बार लेते रहने से  वजन घटाने में  सफलता मिलती है|


दमा में हितकारी है-

हल्दी में सूजन विरोधी और दर्द नाशक गुण होने से दमा रोग में हितकारी है| इसके लिए आप एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पावडर घोलकर रात को सोते वक्त पीते रहें|

 हल्दी कोलेस्ट्रोल  घटाती है- 
  रक्त  में उच्च कोलेस्ट्रोल से शरीर में कई व्याधिया जन्म लेती हैं | अनुसंधान में पाया गया है कि  हल्दी के नियमित सेवन से  कोलेस्ट्रोल का लेविल  संतुलित  रखने में  मदद मिलती है|  इससे ह्रदय रोगों में हितकारी प्रभाव देखा जाता है| 
शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति उन्नत करती है

    हल्दी में लिपोपोलिसेकराईड तत्त्व पाया जाता है जो शरीर  की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढाता है|  इसके  एन्टी बेक्टीरीयल,एंटी वायरल ,एंटी फंगल  गुण विशेष  महत्व के हैं| अगर आपका इम्यून  सिस्टम ताकतवर है तो आप रोगों  की चपेट में कम आएंगे| 


10.11.13

पालक से करें पथरी,रक्ताल्पता ,थायराईड की चिकित्सा

पालक  खाएं रोग भगाएं- --



पालक एक पत्तेदार सब्जी है जो अपने स्वास्थ्यकारी  गुणों  के कारण  सारे भारत में उपयोग की जाती है|पालक में कई तरह के विटामिन्स के अलावा प्रोटीन.सोडियम,केल्सियम ,क्लोरीन और   रेशा पाया जाता है|इसमें पाया जाने वाला लोह तत्व और  रायबो फ्लेविन  चिकित्सीय दृष्टी  से महत्वपूर्ण  हैं|  अब हम पालक  से रोगोपचार  के बारे में बताएंगे --

दमा और श्वास रोग में--

   पालक के एक गिलास जूस में  चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर रोज सुबह और शाम  को सेवन  करने  दमा और श्वास रोग में हितकर  असर  होता है|

निम्न रक्त चाप में लाभकारी--

निम्न रक्त चाप रोगी को प्रतिदिन पालक की सब्जी खाने  से रक्त प्रवाह संतुलित करने में मदद मिलती है|

रक्ताल्पता में उपयोगी है--

रक्ताल्पता याने खून की कमी में पलक का उपयोग  बेहद लाभकारी है|  इसके सेवन से हेमोग्लोबिन में वृद्धि  होती है| एक गिलास जूस दिन में तीन बार लेना उचित है| इसमें श्रेष्ठ किस्म का लोह तत्व होता है जो एनीमिया  निवारण में सकारात्मक प्रभाव  डालता है|

थायरायड रोग में हितकर है--

एक गिलास पालक के जूस में एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच  जीरा  का पावडर  मिलाकर लेते रहने से  थायरायड रोग में लाभ होते देखा गया है| 

पथरी  निष्कासन में उपयोगी है-

पालक के पत्ते का रस और नारियल पानी सामान भाग मिलकर लेते रहने से  गुर्दे और मूत्र पथ की  पथरी   निकल जाती है|

पीलिया रोग ठीक होता है-

कच्चे पपीते  के साथ  पालक का रस  सेवन करना  पीलिया ठीक होने में सहायक है| छिलके वाली मूंग की दाल में पालक मिलाकर  सब्जी  बनाकर  रोगी को खिलाना चाहिए| 

दिल के रोग में--

ह्रदय रोगी एक गिलास पालक के जूस में २ चम्मच  शहद मिलाकर  पीते रहें| 

कब्ज मिटाता है पालक - 

       पालक का जूस दिन में  दो बार नियमित पीते रहने से कठिन से कठिन कब्ज का भी निवारण हो जाता है|

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31.10.13

हल्दी के प्रयोग से रहें निरोग .



हमारे किचन में एक मसाले के रूप में व्यवहृत हल्दी  अपने भीतर सैंकडों  आरोग्यकारी गुण समाविष्ट किये हुए है | नीचे  पूरा वर्णन  दिया जा रहा है--

सौन्दर्यवर्धक



हल्दी केवल सब्जी या दाल को ही स्वादिष्ट नहीं बनाती, यह खाने वाले शरीर को भी सुन्दर बनाती है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि व्यवसायी लोग, जो शरीर को सुन्दर बनाने की क्रीम बनाते हैं, उसमें हल्दी का प्रयोग करते हैं ताकि बिक्री अच्छी हो सके। लेकिन ये लोग हल्दी का सीधा प्रयोग नहीं करते, उसमें रंग और सुगंध का प्रयोग करते हैं। इसी कारण यह क्रीम इतनी असरदार नहीं होती, जितनी चने के आटे में हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर बनी क्रीम जिसे ‘उबटन’ के नाम से जाना जाता है। मध्यकालीन युग में राजकुमारियां और रानियां इसी उबटन को लगाया करती थीं।
हल्दी में पौष्टिक तेल की भी मात्रा होती है जो दिखाई नहीं देती। यह हल्दी सूखी त्वचा को चिकनी और मुलायम बनाती है। इसमें तेल की मात्रा होने पर भी इसका तेल चेहरे अथवा शरीर पर दिखाई नहीं देता। इसका तेल त्वचा के अन्दर जाकर उसे प्राकृतिक रूप देता है।


कीटनाशक-



हल्दी का प्रयोग साफ, स्वच्छ तरीके से ही किया जाना चाहिए। क्योंकि यह कीटनाशक है और इसके प्रयोग से गलाव-सड़ाव नहीं होता इसलिए यह पवित्र है। पवित्र वस्तु का इस्तेमाल भी पूरी पवित्रता के साथ ही करना चाहिए। संस्कृत में हल्दी को कृमिघ्ना भी कहते हैं जिसका हिन्दी में अर्थ होता है कीटाणुनाशक। यदि शरीर के किसी भाग में पस हो जाए अथवा टी-बी. हो जाए तो हल्दी इन सभी रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करने में समर्थ है।


रक्तशोधक



हल्दी की एक और विशेषता यह है कि यह रक्तशोधक है। यह रक्त के दोषों को मूत्र द्वारा अथवा दस्त द्वारा निकालकर दूर कर देती है। यह शरीर में चूने के पदार्थ के साथ मिलकर रक्त को शुद्ध लाल रंग का बनाती है। रक्त के रंग को लाल रंग का बनाने का प्रमाण यह है कि ‘‘यद्यपि हल्दी का रंग पीला होता है फिर भी पीलिया के रोगियों की चिकित्सा हकीम हल्दी द्वारा करते हैं।’’ इसलिए यह बाहर से पीले रंग की दिखाई देने वाली हल्दी अन्दर शरीर में जाकर रक्त को शुद्ध एवं लाल रंग का बनाती है। साथ ही हम जो खाना खाते हैं उसे हजम भी करती है। यूनानी चिकित्सकों का कहना है कि रक्त यदि बिगड़ जाए तो इसे शुद्ध करने के लिए हल्दी का प्रयोग करना चाहिए।


उबटन



विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से हल्दी का उबटन तैयार करती हैं जो दुल्हन के तन-बदन को कंचन की तरह निखार देता है। यह उबटन त्वचा को और भी मोहक बनाता है और कंचन सी काया को कुन्दन की तरह चमका देता है। हल्दी के उबटन के बाद दुल्हन पर कैसा रूप चढ़ता है, यह हर गृहिणी जानती है।



हल्दी की प्रजातियां व उनके प्रयोग



रसोई में जिस हल्दी का प्रयोग किया जाता है, उसके अलावा भी इसकी कुछ अन्य विशिष्ट प्रजातियां हैं, जिनका औषधीय गुणों के कारण विभिन्न रोगों में प्रयोग किया जाता है। प्रस्तुत है उन्हीं की संक्षिप्त लेकिन सटीक जानकारी।


आमा हल्दी



आमा हल्दी का वानस्पतिक नाम क्यूरकुमा अमाडा है। इसमें कच्चे आम की सी गन्ध आती है। इसीलिए इसे आमा हल्दी या आम्रगन्धि हरिद्रा कहा जाता है। इस प्रकार की हल्दी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में विशेष रूप से बंगाल, कोंकण तथा तमिलनाडु में उत्पन्न होती है। इसकी गांठें बड़ी-बड़ी अदरक के समान, पीले रंग की तथा आम की सी गन्ध से युक्त होती हैं।

गुण—



आमा हल्दी शीतल, मधुर, पित्तशामक, आम की सी गन्ध वाली, पेट से वायु निकालने वाली, भोजन का पाचन कराने वाली, भूख बढ़ाने वाली एवं मल बांध कर लाने वाली होती है। सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि बनाने में उपयोग में लाते हैं। मिठाइयों आदि में भी आम की गन्ध लाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


दारु हल्दी



दारु हल्दी के वृक्ष जो हिमालय पर्वत पर तथा आसाम में पाए जाते हैं। जिनमें चार जातियों के वृक्ष मध्य भारत एवं दक्षिण भारत के नीलगिरी पर्वत पर पाए जाते हैं। इनका भूमिगत तना ही हल्दी होता है। बर्बेरिस अरिस्टेटा हल्दी का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की हल्दी पीले रंग की होती है, जिसमें हल्की-सी गंध आती है और स्वाद कड़ुवा होता है।
गुण—


दारु हल्दी उष्ण होती है। इसके गुण अन्य प्रकार की हल्दियों के गुणों के समान होते हैं। दारु हल्दी के सत्व को रसौत कहा जाता है।


त्वचा रोग



यह रोग अधिकतर खून की खराबी से उत्पन्न होते हैं। इसके बचाव के लिए स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए ! साथ ही खाद्य—पदार्थों में गरम मसालों, मिर्च-मसालों, खटाई, गुण, चीनी, शक्कर, मांस—मदिरा, धूम्रपान, तम्बाकू, विषम भोजन आदि से बचकर रहना चाहिए। पौष्टिक आहार नियमित व्यायाम, स्नान और स्वच्छ जल का सेवन और उचित उपचार इन रोगों को आपसे दूर भगाने में सहायक होते हैं।


चेहरे की झाइयां



चेहरे पर झाइयां पड़ जाने के अनेक कारण हैं। उम्र के साथ ही बाजारू क्रीम या लोशन चेहरे पर लगाते रहने से उस पर झाइयां पड़ जाती हैं या धब्बे हो जाते हैं। कारण यह है कि मुलायम त्वचा ऐसे लोशन से झुलस जाती है। उसे पुनः सुन्दर और आकर्षित बनाने के लिए प्रथम तो आवश्यक यह है कि लोशनों और क्रीमों का सेवन करना बन्द कर दिया जाए और हल्दी द्वारा तैयार किए गए उबटन का प्रयोग करना आरम्भ कर दें।


उपचार—


हल्दी का उबटन बनाने की विधि यह है कि दारु हल्दी दस ग्राम लेकर पीपल अथवा आक के दूध में डुबो दें और अच्छी तरह दूध को सोख लेने के बाद सायंकाल उसको घिसकर पेस्ट बना लें और किसी बर्तन में पेस्ट को रखकर ढक्कन बन्द कर दें तथा रात्रि को ओस में बाहर खुले में रख दें। अब उबटन पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। सुबह स्नान करने के आधा घण्टा पूर्व इस उबटन को चेहरे पर मलें और आधे घण्टे पश्चात् स्नान करें। एक सप्ताह तक नियमित इस उबटन का प्रयोग करके झाइयां मिट जाएंगी और त्वचा मुलायम होकर चेहरा आकर्षक हो जाएगा। बाद में सप्ताह में सिर्फ एक बार इस उबटन का सेवन करते रहें। किसी अन्य दवा का इस्तेमाल न करें।


गर्मी के दाने



जब तेज गर्मी पड़ती है और पसीना शरीर से निकलता है तो पसीने के साथ ही शरीर के अनेक खनिज भी बाहर निकल जाते हैं।
इन दिनों प्याज का सलाद बनाकर सैंधा नमक और काली मिर्च तथा नीबू डालकर खाना चाहिए। और इस प्रकार की व्यवस्था कीजिए कि पसीना शरीर पर ही सूख जाए, बहने न पाए। इसके लिए सिन्थेटिक्स अथवा सिल्क के कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए, बल्कि सूती और मोटे कपड़े ही पहनने चाहिए जिससे कपड़े पसीना सोख लें।


उपचार—


एक किलो कच्ची हल्दी को पानी में डालकर उबाल लें। अच्छी तरह उबालकर पानी को आंच से उतार कर ठण्डा कर लें और छानकर किसी शीशे के ऐसे बर्तन में भरें जिसमें पहले से ही तीन सौ ग्राम शहद भरा हुआ हो। इस शहद युक्त पानी को दो सप्ताह तक रखा रहने दें। अब आपका ठण्डा पेय तैयार हो गया। इसमें चम्मच भर फालसे का जूस या अनार का रस मिला दें और इस शर्बत का सेवन गर्मी दूर करने और दानों को शरीर से हटाने के लिए सेवन करते रहें। शरीर पर गर्मियों में दाने नहीं निकलेंगे।

फोड़ा-फुंसी



शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं। कुछ समय बाद उनमें पीब पड़ जाती है और दर्द का अनुभव होता है।
खून की खराबी, दूषित वातावरण में रहन-सहन, दूषित जल व भोजन का प्रयोग। गरम मसाला व मांस-मदिरा, तम्बाकू, चाय—कॉफी, मीठी वस्तुओं का अत्यधिक सेवन।


उपचार


आधा किलो हल्दी पीसकर चार लीटर पानी में घोलकर उबालें और ठण्डा करके इसमें दो सौ ग्राम शहद मिला दें। इस मिश्रण को किसी शीशे के बर्तन में दो सप्ताह तक रखा रहने दें, अब इसको छानकर किसी साफ बोतल में भरकर रख दें। खाना खाने के बाद इस आसव को दस या पन्द्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इस आसव को पीने से रक्त साफ हो जाता है।

•    त्वचा की खुश्की और छूत रोग का प्रभाव मिटाने के लिए आप हल्दी-तेल ही मलिए, लेकिन खून की खराबी दूर करने के लिए हल्दी-वटी खाइए। हल्दी पीसकर शहद मिलाकर और बेर (जंगली बेर) के बराबर गोलियां बना लीजिए। हल्दी और शहद मिलकर रक्त की बूंद-बूंद से सारे जहर निकाल देते हैं। एक गोली हल्दी के गुणों को याद करके और दूसरी गोली शहद के गुणों को याद करके सुबह चूस जाइए, इसी तरह दो गोलियां शाम या रात को सेवन कीजिए। अन्दर से रक्त का शोधन हो जाएगा और बाहर की त्वचा में न खाज उठेगी, न खुजली रहेगी।
•    महिलाओं को चाहिए कि सप्ताह में एक नहीं तो महीने में एक बार ही सही, हल्दी और बेसन को सरसों के तेल में गूंधकर उबटन बना लें और सारे बदन पर इसे अच्छी तरह मला करें। इसका प्रभाव महीने भर तक बना रहता है और खाज-खुजली से शरीर बचा रहता है।

30.10.13

धनिया के चोक़ाने वाले फ़ायदे जानकर हैरान रह जायेंगे |





                                                                                                                                       -






धनिये के उपयोग 

धनिये की हरी-हरी पत्तियों की सुगंध किसी भी व्यंजन की सुंगध और उसके स्वाद को
कई गुना बढ़ा देती है। सब्जियों में हरे धनिये के साथ ही सुखे धनिये का
उपयोग भी भारतीय भोजन में बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। लेकिन हरे
धनिए की कोमल पत्तियां सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं डाली जाती
बल्कि इनका औषधीय महत्व भी है। इसका सेवन जाने-अनजाने ही आपको कई
बीमारियों से निजात भी दिलाता है। आइये जानें कि धनिया किन-किन बीमारियों
या परेशानियों में मददगार हो सकता है... 









 





आंख 


आंखों के लिए धनिया बड़ागुणकारी होता है। थोड़ा सा धनिया कूट कर पानी
में उबाल कर ठंडा कर के, मोटेकपड़े से छान कर शीशी में भर लें। इसकी दो बूंद आंखों
 में टपकाने से आंखोंमें जलन, दर्द तथा पानी गिरना जैसी समस्याएं दूर होती हैं।

  ताजा  धनिया  पत्ते  में विटामिन सी,विटामिन ए,एंटी ऑक्सीडेंट्स और फास्फोरस  जैसे
 मिनरल्स  पाए जाते हैं जो मस्कुलर डिजनरेशन,नेत्र शोथ और आँखों की उम्र वृद्धि  को
कम करते  है|



नकसीर :


  हरा धनिया 20 ग्राम व चुटकी भर कपूर मिला कर पीस लें। सारा रस निचोड़ लें। 

इस रस की दो बूंद नाक में दोनों तरफ टपकाने से तथा रस को माथे पर लगा कर 

मलने से खून तुरंत बंद हो जाता है। 


गर्भावस्था में जी घबराना उल्टी  होना  :












गर्भ धारण करने के दो-तीन महीने तक गर्भवती महिला को उल्टियां आती है। ऐसे में धनिया 


का काढ़ा बना कर एक कप काढ़े में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से जी घबराना बंद 

होता है।



पित्त 


पित्त बढ़ जाने से जी मिचलाना रहता हो तो हरा धनिया पीसकर
उसका ताजा रस दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से लाभ होता है। भोजन में हरे
धनिये की ताजी पिसी चटनी का प्रयोग करते रहने से भी जी मिचलाना कम होता है। 



     धनिये की हरी पत्तियों को लहसुन, प्याज, गुड़, इमली, अमचूर, आंवला,

नींबू, पुदीना आदि के साथ बारीक पीसकर चटनी के रूप में खाते रहने से पाचन

क्रिया दुरुस्त बनी रहती है तथा भूख भी खूब लगती है। 



पित्ती


शरीर में पित्ती की तकलीफ हो तो हरे धनिये के पत्तों का रस, शहद और रोगन गुल तीनों
को मिला कर लेप करने से पित्ती की खुजली में तुरंत आराम होता है।




पित्त

बढ़ जाने पर हरी-पीली उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं। इस अवस्था में हरे
धनिया का रस निकालकर उसमें गुलाब जल मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।




लू लगने पर पर 


गर्मी में बाहर जाने से, लू लग जाने पर परेशानी हो रही हो तो
धनिया पीसकर, रस निकालकर, इसे पानी में घोलकर मिठास के लिए चीनी डालकर पी
लें।



       एक बड़ा गिलास पानी लें। इसमें दो बड़े चम्मच धनिया डालें। उबालें।
जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उतार लें। इसमें मिश्री मिलाकर, छानकर, पी लें,
कुछ दिन जारी रखें।




अधिक गैस बनना


एक गिलास पानी लें, दो चम्मच धनिया मिलाकर उबालें। छानें, तीन भाग कर, दिन में तीन बार पी लें।



भोजन में अरुचि 


खाना खाने को मन नहीं करता। भरपेट नहीं खा सकते। पचता भी
नहीं, धनिया, छोटी इलायची, कालीमिर्च तीनों एक जैसी मात्रा में लें। इन्हें
पीसकर छानकर शीशी में रखें। चौथाई चम्मच घी तथा आधा चम्मच चीनी में आधा
चम्मच इस चूर्ण को डालकर खायें। चन्द दिनों में अरुचि खत्म।




श्वास के रोग






खांसी हो, दमा हो, सांस फूलता हो, धनिया तथा मिश्री पीसकर रख लें। एक
चम्मच चावल के पानी के साथ रोगी को पिलाएं। आराम आने लगेगा। कुछ दिन नियमित लें।














पेट दर्द 


आधा गिलास पानी लें। इसमें दो चम्मच धनिया डालें। उबालें। गुनगुना पिला दें। पेट दर्द ठीक होगा।



पेशाबमें जलन रहना


एक छोटा चम्मच धनिया लें। इसे एक कप बकरी के दूध में
मिलाएं, एक चम्मच मिश्री भी। पीने से पेशाब की जलन खत्म होगी। धनिया तथा
आंवला एक-एक चम्मच (पिसा) रात पानी में भिगो दें। प्रात: मसलकर छानकर पीने
से पेशाब की जलन खत्म होगी। कुछ दिन रोजाना लिया करें।




गंजापन होने पर


हरा धनिया पीसकर, गंजे पर लेप करें। कुछ दिनों के इस उपचार से बाल
 आने लगते हैं। अजमाया जा चुका है।



 कमजोरी

अधिक काम वासना की पूर्ति या स्वप्नदोष हो जाने से आने वाली कमजोरी में
रात को पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा धनिया भिगों दें। प्रात: छानकर पी लें।
कुछ दिन नियमित करें। कमजोरी दूर होगी। अत: धनिया को केवल मसालों में नहीं,
दवा के रूप में भी प्रयोग करें।





त्वचा की समस्याएं

  अपने एंटी फंगल,एंटी सेप्टिक ,डीटाक्सीफाईंग और डिसइन्फेक्टेट गुणों के चलते  धनिया पत्ता त्वचा की कुछ समस्याओं से भी निजात दिलाता है|   खुजली से राहत पाने के लिए इसके रस का सेवन करना उपादेय है या इसका पेस्ट भी त्वचा पर लगा सकते हैं| शरीर की फुंसियों  को ठीक करने के लिए  धनिया पत्ती के रस में शहद मिलाकर प्रभावित भाग पर लगाएं|   १५ मिनिट बाद ठन्डे पानी से धो लें| 


29.10.13

सेहत के लिए श्रेष्ठ व्यायाम है प्रात;काल टहलना





रोग मुक्तिकारक  है सुबह का घूमना -

टहलने को कसरतों की रानी कहा गया है | 

इससे हृदय शक्तिशाली होता है| 

शरीर की रोग प्रतिरोधक  क्षमता बढती है| 

रक्तचाप सामान्य होने में सहायक है|

दिल का दौरा पड़ने की संभावना  काफी हद तक कम हो जाती है|

शरीर के जोड़ों और मांस पेशियो में  शक्ति  आती है| 

टहलने से शरीर की अनावश्यक केलोरी जल जाती है और इस तरह मोटापा कम करने में मदद  मिलती है| 

टहलने से शरीर सुडौल और तेजस्वी बनता है|

 ४५ की आयु के बाद जैसे ही प्रोढावस्था  आती है  तब हड्डिया कमजोर होने लगती हैं| | ३०-४० मिनिट नियमित टहलने और केल्शियम से भरपूर  भोजन लेने से हड्डिया मजबूत बनी रहती है|और अस्थि क्षरण  की आशंका  कम हो जाती है|

श्रेष्ठ  स्वास्थ के लिए टहलने का तरीका और वातावरण पर ध्यान  देना जरूरी है| घूमने का सही समय प्रात;काल सूर्योदय से पहिले  है|सुबह के वातावरण में आक्सीजन पर्यात मात्रा में मोजूद  होती है|,दुसरे यह समय प्रदूषण  मुक्त भी होता है| इसे ऊषाकाल  कहते है|
script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js">   टहलने से रक्त संचार  में इजाफा होता है|इससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त आक्सीजन मिलती  है| रक्त संचार बढ़ने से आहिस्ता- आहिस्ता  ब्लड प्रेशर  भी नियंत्रण में आ जाता है| वर्तमान जीवन शैली में कोलेस्ट्रोल  बढ़ाने की समस्या  उभार पर है|  कोलेस्ट्रोल  का  हार्ट अटेक से गहरा सम्बन्ध होता है|  नियमित घूमने से कोलेस्टरोल की  समस्या  का भी निवारण हो जाता है| 


टहलने का सही तरीका-



         वार्म अप जरूर कर लेना चाहिए| टहलना धीमी गति से  शुरू  करना चाहिए| ४-५  मिनिट बाद चाल बढानी चाहिए| थकावट महसूस होने पर पुन;  चाल धीमी कर देनी चाहिये| यानी जरूरत के मुताबिक़ धीमी गति और तेज गति से चलना अच्छा रहता है| कम से कम तीन  किलो मीटर घूमना उचित माना जा सकता है| देखने में आताहै कि जो लोग ५-६ किलोमीटर  प्रतिदिन घूमने के अभ्यस्त हैं वे ज्यादा चुस्त और फुर्तीले  और निरोग  होते हैं|  टहलने से थकने की चिंता नहीं करना चाहिए| हाँ ज्यादा थकावट महसूस हो तो कहीं थोड़ी देर के लिए विश्राम भी कर लेना चाहए| 


19.10.13

नपुंसकता मिटाता है प्याज




प्याज के द्वारा २१ दिन में






नपुंसकता और  शीघ्र  पतन  निवारण:-








 आज हम प्याज के कुछ पारंपरिक  उपचारों के बारे में जानकारी देना चाहते हैं-


वीर्य वृद्धि  के लिए-






       सफ़ेद प्याज के रस को शहद के साथ लेने से वीर्य बनाने की  प्रक्रिया में तेजी आ जाती है|





  देसी उपचारों के जानकार बताते हैं  कि




सफ़ेद प्याज का रस  ५ मिली ,शहद १० ग्राम ,अदरक का रस ५ मिली और गाय का घी ५ ग्राम  मिश्रण कर  सुबह शाम  २१ दिन तक लेते रहने से नपुंसकता का निवारण होता है  और पुरुषत्व  में वृद्धि  होती है|


















जोड़ों के दर्द में उपकारी :-



   प्याज के रस को सरसों के तेल में  मिलाकर कुछ गर्म करके जोड़ों पर मालिश करने से  बहुत लाभ होता है|  यह उपचार लगातार  दो माह करने से आशातीत सफल परिणाम प्राप्त होते हैं|










खांसी में उपयोग-



    बच्चों और बूढों  की




खांसी में प्याज का रस  मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए| खांसी धीरे धीरे ठीक  होने लगती है|





   सफ़ेद प्याज दिल के रोगों में उपकारी होता है|  लाल प्याज बल बढाने वाला होता है|





   बालकों की शारीरिक विकास  हेतु प्याज का उपयोग गुड के साथ करने की सलाह दी जाती है|




दांत का दर्द और मसूढों  की सूजन में --



      प्याज के रस में नमक मिलाकर दांत-मसूढों  पर मलने से  दर्द और सूजन दूर होते हैं|


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23.7.13

जलोदर रोग की सरल चिकित्सा. Home remedies for ascites

उदर- गुहा में  तरल  जमा होने की सरल चिकित्सा-
                                                                                                                                                

पेट (peritoneal cavity)में पानी इकट्ठा होने लगने को जलोदर कहा जाता है। रोगी का पेट फूल जाता है।
जलोदर के कारण--
जलोदर मुख्यतः लिवर के पुराने रोग से उत्पन्न होता है।
खून में एल्ब्युमिन के स्तर में गिरावट होने का भी जलोदर से संबंध रहता है।
जलोदर के लक्षण--
पेट का फूलना
सांस में तकलीफ
टांगों की सूजन
बेचैनी और भारीपन मेहसूस होना
घरेलु चिकित्सा--
जलोदर रोग में लहसुन का प्रयोग हितकारी है। लहसुन का रस आधा चम्मच आधा गिलास जल में मिलाकर लेना कर्तव्य है। कुछ रोज लेते रहने से फर्क नजर आएगा।
देसी चना करीब ३० ग्राम ३०० मिली पानी में उबालें कि आधा रह जाए। ठंडा होने पर छानकर पियें। २५ दिन जारी रखें।
करेला का जूस ३०-४० मिली आधा गिलास जल में दिन में ३ बार पियें। इससे जलोदर रोग निवारण में अच्छी मदद मिलती है।
जलोदर रोगी को पानी की मात्रा कम कर देना चाहिये। शरीर के लिये तरल की आपूर्ति दूध से करना उचित है। लेकिन याद रहे अधिक तरल से टांगों की सूजन बढेगी।
जलोदर की चिकित्सा में मूली के पत्ते का रस अति गुणकारी माना गया है। १०० मिली रस दिन में ३ बार पी सकते हैं।
मैथी के बीज इस रोग में उपयोग करना लाभकारी रहता है। रात को २० ग्राम बीज पानी में गला दें। सुबह छानकर पियें।
अपने भोजन में प्याज का उपयोग करें इससे पेट में जमा तरल मूत्र के माध्यम से निकलेगा और आराम लगेगा।
जलोदर रोगी रोजाना तरबूज खाएं। इससे शरीर में तरल का बेलेंस ठीक रखने में सहायता मिलती है।
छाछ और गाजर का रस उपकारी है। ये शक्ति देते हैं और जलोदर में तरल का स्तर अधिक नहीं बढाते हैं।
अपने भोजन में चने का सूप ,पुराने चावल, ऊंटडी का दूध , सलाद ,लहसुन, हींग को समुचित स्थान देना चाहिये।
रोग की गंभीरता पर नजर रखते हुए अपने चिकित्सक के परामर्शानुसार कार्य करें।

जलोदर की चिकित्सा का विडियो- 

20.7.13

पीलिया निवारक सरल उपचार

     
    पीलिया यकॄत का बहुधा होने वाला रोग है। इस रोग में चमडी और श्लेष्मिक झिल्लियों के रंग में पीलापन आने लगता है। ऐसा खून में पित्त रस (bile) की अधिकता की वजह से होता है। रक्त में बिलरुबिन की मात्रा बढ जाती है। हमारा लिवर पित्त रस का निर्माण करता है जो भोजन को पचाने और शरीर के पोषण के लिये जरूरी है। यह भोजन को आंतों में सडने से रोकता है। इसका काम पाचन प्रणाली को ठीक रखना है। अगर पित्त ठीक ढंग से आंतों में नहीं पहुंचेगा तो पेट में गैस की शिकायत बढ जाती है और शरीर में जहरीले तत्व एकत्र होने लगते हैं।
पीलिया तीन रूपों में प्रकट हो सकता है-
१/ हेमोलाइटिक जांडिस में खून के लाल कण नष्ट होकर कम होने लगते हैं। परिणाम स्वरूप रक्त में बिलरूबिन की मात्रा बढती है और रक्ताल्पता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
२/ इस प्रकार के पीलिया में बिलरूबिन के ड्यूडेनम को पहुंचने में बाधा पडने लगती है। इसे obstructive jaundice कहते हैं।
३/ तीसरे प्रकार का पीलिया लिवर के सेल्स को जहरीली दवा (toxic drugs) या विषाणु संक्रमण (viral infection) से नुकसान पहुंचने की वजह से होता है।
त्वचा का और आंखों का पीला होना तीनों प्रकार के पीलिया का मुख्य लक्षण है।<
अन्य लक्षण--
अत्यंत कमजोरी
सिरदर्द
ज्वर होना
मिचली होना
भूख न लगना
अतिशय थकावट
सख्त कब्ज होना
 
आंख जीभ त्वचा और मूत्र का रंग पीला होना।
अवरोधी पीलिया अधिकतर बूढे लोगों को होता है और इस प्रकार के रोग में त्वचा पर जोरदार खुजली मेहसूस होती है।
पीलिया ठीक करने के सरल उपचार--
*उचित भोजन और नियमित व्यायाम पीलिया की चिकित्सा में महत्वपूर्ण हैं। लेकिन रोगी की स्थिति बेहद खराब हो तो पूर्ण विश्राम करना जरूरी है। पित्त वाहक नली में दबाव बढने और रूकावट उत्पन्न होने से हालत खराब हो जाती है। ऐसी गंभीर स्थिति में ५ दिवस का उपवास जरूरी है। उपवास के दौरान फलों का जूस पीते रहना चाहिये। संतरा, नींबू ,नाशपती, अंगूर , गाजर ,चुकंदर ,गन्ने का रस पीना फायदेमंद होता है।
*रोगी को रोजाना गरम पानी का एनीमा देना कर्तव्य है। इससे आंतों में स्थित विजातीय द्रव्य नियमित रूप से बाहर निकलते रहेंगे और परिणामत: आंतों के माध्यम से अवशोषित होकर खून में नहीं मिलेंगे।
* ५ दिवस के फलों के जूस के उपवास के बाद ३ दिन तक सिर्फ फल खाना चाहिये। उपवास करने के बाद निम्न उपचार प्रारंभ करें-
*सुबह उठते ही एक गिलास गरम पानी में एक नींबू निचोडकर पियें।
*नाश्ते में अंगूर ,सेवफल‍‍‍‍‍ पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।
*मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।
*करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।
*रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , ‍ गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मैथी ,पालक ।
*रात को सोते वक्त ऐक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।
*सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी‍ ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। *प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों और फलों का जूस पीना चाहिेये। कच्चे सेवफल और नाशपती अति उपकारी फल हैं।
 
* दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।
* मूली के हरे पत्ते पीलिया में अति उपादेय है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी।
*टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थौडा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें। स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। अब भोजन ऐसा होना चाहिये जिसमें पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन सी ,विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें।
 पीलिया के रोगियों को मैदा, मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया, मिठाइयां नहीं खाना चाहिए।
* पीलिया के रोगियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो कि आसानी से पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल, सब्जियां आदि।

* नीम के पत्तों को धोकर इनका रस निकाले। रोगी को दिन में दो बार एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे पीलिया में बहुत सुधार आएगा।
* पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।
 

* रोगी को दिन में तीन बार एक एक प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।
 गोभी और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस तैयार करें। इस रस को कुछ दिनों तक रोगी को पिलाएँ।
* रोगी को दिन में तीन बार एक एक प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।
* टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत लाभदायक होता है। एक गिलास टमाटर के जूस में चुटकी भर काली मिर्च और नमक मिलाएं। यह जूस सुबह के समय लें। पीलिया को ठीक करने का यह एक अच्छा घरेलू उपचार है।

रोग की रोकथाम एवं बचाव-
*खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद में हाथ साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
*भोजन जालीदार अलमारी या ढक्कन से ढक कर रखना चाहिये, ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सकें।
*ताजा व शुद्व गर्म भोजन करें दूध व पानी उबाल कर काम में लें।
*पीने के लिये पानी नल, हैण्डपम्प या आदर्श कुओं को ही काम में लें तथा मल, मूत्र, कूडा करकट सही स्थान पर गढ्ढा खोदकर दबाना या जला देना चाहिये।
*गंदे, सडे, गले व कटे हुये फल नहीं खायें धूल पडी या मक्खियॉं बैठी मिठाईयॉं का सेवन नहीं करें।
*स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें यदि शौचालय में शौच नहीं जाकर बाहर ही जाना पडे तो आवासीय बस्ती से दूर ही जायें तथा शौच के बाद मिट्टी डाल दें।
*रोगी बच्चों को डॉक्टर जब तक यह न बता दें कि ये रोग मुक्त हो चूके है स्कूल या बाहरी नहीं जाने दे।
*अनजान व्यक्ति से यौन सम्पर्क से भी बी प्रकार का पीलिया हो सकता है।

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30.6.13

पेट के रोगों में आंतों को डिटॅाक्स करने के तरीके












                                                                                     

      आंतों में  विजातीय तत्व  और भोजन के अपशिष्ट पदार्थ जमा होते रहते हैं।




त्रिफला चूर्ण इन्हें स्वाभाविक  ढंग से शरीर से बाहर निकालने में सहायता  करता है।  यह आंतों को स्वच्छ कर डिटॅाक्स करता है। विषैले तत्व बाहर निकलने पर शरीर का फालतू वजन भी कम होने लगता है। त्रिफला अम्ल पित्त यानी ऍसीडीटी को भी नियंत्रित करता है।  त्रिफला  लिवर को भी डिटॅाक्स करता है। रात को सोते समय गुन गुने पानी से  अेक चम्मच चूर्ण लेना उचित है।



              गेहूं का चौकर जिसे अक्सर  लोग फैंक देते हैं  यह छिलका फाइबर और  विटामिन युक्त  होता है। यह चौकर शरीर में जमा वसा को सोख लेता है जिससे  अनावश्यक चर्बी समाप्त होकर शरीर का वजन नियंत्रण में रहता है। गेहूं का चौकर  गर्म दूध  में मिलाकर लेने से शरीर  का वजन कम होता है।



 




       अपच रोग में पपीता और पाइनेपल  फल बहुत उपकारी हैं। पपीता में ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा बहुत कम होने से यह डायबिटीज आर्थ्राइटीज और मोटापा में  हितकारी सिद्द होता है। इसका पेपैन  अेजाइम  भोजन पचाने में सहायक है।रात के भोजन से कुछ पहिले पपीते  और पाइनेपल के कुछ टुकडे  कुनकुने  जल के साथ  लेने से पाचन संस्थान ठीक रहता है।

 

             सुबह उठते ही  आधा लिटर गुन गुना पानी नियमित पीना शरीर के स्वास्थ्य के लिये हितकर रहता है।भूख शांत करने के लिये स्नेक्स या फ्राइड फुड खाने से वजन बढता है और ऐसीडीटी जैसी समस्यायें  पैदा हो जाती हैं।



   भोजन के साथ फलों का सलाद लेना  फायदेमंद  होता है।


  सेवफल उपवास -

   शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त  करने के लिये तीन दिवस का उपवास किया जाता है। इस अवधि में  सिर्फ सेवफल  और सेवफल  का रस  तथा पानी   ही  उपयोग  किया जाता है।



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