24.8.10

माईग्रेन(आधाशीशी) रोग का सरल उपचार

                  माईग्रेन (अर्धावभेदक) क्या है?

                                                         




  सिरदर्द एक आम रोग है और प्रत्येक व्यक्ति  कभी न कभी इसे मेहसूस करता ही है।इस रोग के विशेषग्य इसके कारण के मामले में एकमत न होकर अलग-अलग राय रखते हैं। सभी की राय है कि माईग्रेन के विषय में और अनुसंधान की आवश्यकता है। अभी तक माईग्रेन की तीव्रता का कोइ वैग्यानिक  माप भी  नहीं है।

   माईग्रेन एक रक्त परिसंचरण(vascular) तंत्र  की व्याधि है। मस्तिष्क की रुधिर वाहिकाओं का आकार बढ जाने से याने खून की नलिकाएं फ़ैल जाने से इस रोग का संबंध माना जाता है। इन रुधिर वाहिकाओं पर नाडियां(नर्व्ज) लिपटी हुई होती हैं। जब रक्त वाहिकाएं फ़ैलकर आकार में बढती हैं तो नाडियों पर तनाव बढता है और फ़लस्वरूप नाडियां एक प्रकार का केमिकल निकालती हैं जिससे दर्द और सूजन पैदा होते हैं,यही माईग्रेन है।

  माईग्रेन अक्सर हमारे सिम्पेथेटिक नर्वस  सिस्टम पर हमला करता है। इस नाडीमंडल की अति सक्रियता से आंतों में व्यवधान होकर  अतिसार,वमन भी शिरोवेदना के साथ होने लगते हैं। इससे आमाषय स्थित भोजन भी देरी से आंतों में पहुंचता है। माईग्रेन की मुख मार्ग से ली गई दवा भी भली प्रकार अंगीकृत नहीं हो पाती है। प्रकाश और ध्वनि के प्रति असहनशीलता पैदा हो जाती है। रक्त परिवहन धीमा पडने से चर्म पीला पड जाता है और हाथ एवं पैर ठंडे मेहसूस होते हैं।


  
माईग्रेन का सिरदर्द गर्मी,मानसिक तनाव,अपर्याप्त नींद से बढ जाता है। करीब ७० प्रतिशत माईग्रेन रोगियों का पारिवारिक इतिहास देखें तो उनके नजदीकी रिश्तेदारों में इस रोग की मौजूदगी मिलती है। पुरुषों की बनिस्बत औरतों में यह रोग ज्यादा होता है। इस रोग को आधाशीशी भी कहते हैं ।यह ज्यादातर सिर के बांये अथवा दाहिने भाग में होता है। कभी-कभी यह दर्द ललाट और आंखों पर स्थिर हो जाता है। सिर के पिछले भाग में गर्दन तक भी माईग्रेन का दर्द मेहसूस होता है। माईग्रेन का सिरदर्द ४ घंटे से लेकर ३-४ दिन की अवधि तक बना रह सकता है। बहुत से माईग्रेने रोगियों में सिर के दोनों तरफ़ दर्द पाया जाता है। माईग्रेन एक बार बांयीं तरफ़ होगा तो दूसरी बार दांये भाग में हो सकता है। माईग्रेन का दर्द सुबह उठते ही प्रारंभ हो जाता है और सूरज के चढने के साथ रोग भी बढता जाता है। दोपहर बाद दर्द में कमी हो जाती है। ऐसा देखने में आया है कि ६० साल की उम्र के बाद यह रोग हमला नहीं करता है।

    इस रोग के इलाज में माडर्न दवाएं ज्यादा सफ़ल नहीं हैं। साईड ईफ़ेक्टस ज्यादा होते हैं। मेरे  हिसाब से  निम्नलिखित उपाय निरापद  हैं और कारगर भी  हैं--

१)  बादाम १०-१२ नग प्रतिदिन खाएं। यह माईग्रेन का  उत्तम उपचार है।

२)  बंद गोभी को कुचलकर एक सूती कपडे में बिछाकर  मस्तक (ललाट) पर बांधें। रात को सोते वक्त या दिन में भी सुविधानुसार कर सकते हैं। जब गोभी का पेस्ट सूखने लगे तो नया पेस्ट बनाकर पट्टी बांधें। मेरे अनुभव में यह माईग्रेन का सफ़ल उपचार  हैं।

३)  अंगूर का रस २०० मिलि सुबह -शाम पीयें। आजमाने  योग्य  कारगर नुस्खा है।


४)  नींबू के छिलके  कूट कर पेस्ट बनालें।  इसे ललाट पर बांधें । जरूर फ़ायदा होगा।





५)  गाजर का रस और पालक का रस
 दोनों करीब ३०० मिलि  पीयें
 आधाशीशी में गुणकारी है।
६)  गरम जलेबी २०० ग्राम नित्य सुबह खाने से भी कुछ रोगियों को लाभ हुआ है।

७)   आधा चम्मच सरसों के बीज का पावडर ३ चम्मच पानी में घोलक्रर नाक में रखें । माईग्रेन का सिरदर्द कम हो जाता है।

७) सिर को कपडे से मजबूती से बांधें। इससे खोपडी में रक्त का प्रवाह कम होकर सिरदर्द से राहत मिल जाती है।

८) माईग्रेन रोगी देर से पचने वाला और मसालेदार भोजन न करें।

९) विटामिन बी काम्प्लेक्स का एक घटक नियासीन है। यह विटामिन आधाशीशी रोग में उपकारी है। १०० मिलि ग्राम की मात्रा में रोज लेते रहें।



१०) तनाव मुक्त जीवन शैली अपनाएं।

११) सूर्योदय से पूर्व  नारियल और गुड के साथ  छोटे चने के बराबर  कपूर  मिलाकर तीन दिन खाने से आधाशीशी का रोग मिटता है|

१२) गाय  का शुद्ध  ताजा घी दो -दो बूँद  नाक में डालने से माईग्रेन में लाभ होता है|

१३) दही चावल और मिश्री मिलाकर  सूर्योदय से पहिले कहानी से  आधाशीशी रोग  काबू में आ जाता है|,

 १४) इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हल्की खुशबू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

१५) एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।

१६) कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें। मक्खन में मिश्री मिलाकर सेवन करें।

१७) नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।


१८) हरी सब्जियों और फ़लों को अपने भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।

१४) माईग्रेन  रोग में हर्बल चिकित्सा सर्वाधिक सफल  प्रमाणित हो चुकी है| माईग्रेन नाशक  आशु लाभकारी हर्बल औषधि   वैद्य दामोदर   098267-95656  से  मंगवाकर लाभान्वित हो सकते हैं|
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17.8.10

उल्टी होने का घरेलू इलाज: home remedies to cure vomiting.





    उल्टी(वमन) होने के कारण-

                  आमाषय की मांसपेशी के आक्षेपिक संकुचन से भोजन पदार्थ और तरल पदार्थ का वेग से मुख मार्ग से निकलना वमन कहलाता है। उल्टी होने के कै कारण हो सकते हैं। जरूरत से ज्यादा खाना ,अधिक मात्रा में शराब पीना,गर्भावस्था,और पे्ट की गडबडी,माईग्रेन(आधाशीशी ) इस रोग के मुख्य कारण हैं। गर्मी के मौसम में भोजन विषाक्तता(फ़ूड पाइजिनिंग) और ज्यादा गर्मी से वमन होने लगती है। तेज शिरोवेदना से भी उल्टी होने की स्थिति बन जाती है। पेट में कीडे होने और खांसी की वजह से भी उल्टी होती है।

 


 अब यहां उल्टी होने की घरेलू चिकित्सा लिखता हूं-






१)  एक गिलास पानी में एक निंबू निचोड लें ,थोडी शकर घोल लें। यह  निंबू की शिकंजी पीने से उल्टी रोग में फ़ायदा होता है।

२)  मूंग भून लें। २० ग्राम लेकर  का काढा तैयार करें। आधा कप काढे में शकर या शहद मिलाकर पीने से उल्टी बंद होगी। साथ में दस्त लग रहे हों तो भी लाभ होगा।

३)  धनिये का चूर्ण ३ ग्रामलें, १२ ग्राम चावल का माड में मिलाकर दिन में ३-४ बार देने से उल्टी नियंत्रण में आ जाती है।

४) अदरक और धनिये का रस १०-१० मिलि मिलाकर पीने से फ़ौरन राहत मिलती है। पुदिने का रस ५  मिलि थोडी-थोडी देर में पीने से भी उल्टी रोग का निवारण होता है।





४)  नींबू के छिलके छाया में सूखा लें। इन छिलकों को जलाकर राख करलें। राख का चूर्ण बोतल में भर लें । एक ग्राम नींबू की राख में शहद मिलाकर यह चटनी २-२ घंटे के फ़ासले से लेने पर उल्टी बंद होगी।

५) नींबू को काटकर उस पर  चुटकी  भर कालीमिर्च का पावडर और सेंधा नमक  बुरककर आग पर सेक लें । इसे चूसने से उल्टी और पेट के विकारों में तुरंत लाभ होता है।


६) गर्भवती स्त्री सुबह गुन गुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीये तो उल्टी में लाभ मिलता है।








७)  गर्मी के मौसम में बर्फ़ चूसने से उल्टी बंद हो जाती है।

८) लौंग को भुन लें। मुहं मे रककर चूसने से उल्टी नियंत्रित होती है।

९)  तुलसी के रस में शहद मिलकर सेवन करने से वमन बंद होती है।

१०)  एक कप पानी में १० ग्राम शहद मिलाकर पीने से उल्टी रूक जाती है।

११)  हींग को थोडे से पानी में घोलकर पेट पर मालिश करने से उल्टी में राहत मिल जाती है।

१२)  आलू बुखारा मुहं में चूसने से उल्टी मे लाभ होता है। सूखा आलू बुखारा चूसने से गर्भवती  की उल्टी  में आशातीत लाभ होता है।

१३) दूध को फ़ाडलें। इसमें थोडी मिश्री मिलाकर १५-१५ मिनिट में आधा कप  पीने से उल्टी बंद हो जाती है।




१४) मौसंबी का रस निकालकर उसमे थोडा सेंधा नमक डालकर एक-एक घंटे से पीने से उल्टी में फ़ायदा होता है।



15) ) रोगी को मूंग के दाल की खिचडी दही के साथ खिलानी चाहिये।

विनम्र सूचना:--http://rekha-singh.blogspot यह एक चोर ब्लोगर है । इसने मेरे कई चिकित्सा लेख कापी- पेस्ट कर  अपने  ब्लोग पर स्थापित कर लिये हैं।
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7.8.10

कोलेस्टरोल कम करने के आसान उपाय.



कोलेस्टरोल कम करने के सरल उपचार

                                
                                                                                                              
                                                            



कोलेस्टरोल मुख्यत: ३ प्रकार के होते हैं।


१) एल.डी एल.कोलेस्टरोल


यह हानिकारक कोलेस्टरोल रक्त वाहिकाओं में जमता रहता है, जिससे वे भीतर से संकरी हो जाती है और उनमें दौडने वाले खून के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने से हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर जैसे हृदय रोग  जन्म लेते हैं।

२) एच.डी.एल.कोलेस्टरोल


यह लाभदायक कोलेस्टरोल माना जाता है । खून में इसका वांछित स्तर बना रहने से हृदय रोगों की संभावना कम हो जाती है। यह खराब और  हानिकारक कोलेस्टरोल को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया में मददगार होता है।

३) ट्राईग्लिसराईड कोलेस्टरोल

यह  भी हानिकारक होता है। हार्ट अटैक रोग में इसकी जिम्मेदारी  काफ़ी  अहम मानी गई है।
कोलेस्टरोल नियंत्रित और कम करने के लिये निम्न उपाय करना उचित है--

१) पर्याप्त रेशे वाली खाद्य वस्तुएं दैनिक भोजन में शामिल करें।हरी पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर रेशा होता है। इनका ज्युस भी लाभदायक है। सब्जियों में कोलेस्टरोल नहीं होता है।

२) सभी तरह के फ़ल खाएं। कोलेस्टरोल घटाने में इनका विशेष महत्व है।

३) साबुत अनाज,भूरे चावल जई,सोयाबीन का उपयोग करना लाभप्रद है। सोयाबीन में उच्चकोटि का प्रोटीन होता  है।। आलू और चावल में कोलेस्टरोल और सोडियम नहीं होते हैं और कोलेस्टरोल नियंत्रण के लिये इनके उपयोग की अनदेखी नहीं करना चाहिये।

४) टमाटर ,गाजर,सेवफ़ल,नारंगी,पपीता आदि फ़ल खूब खाएं।










५) एक अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया है कि काली और हरी चाय का उपयोग कोलेस्टरोल नियंत्रण का सशक्त उपाय है। ज्यादा चाय पीने वालों को हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है। लेकिन यह  चाय  दूध और शकर रहित होनी चाहिये।


६) 
तेल और वनस्पति घी में तली वस्तुएं खाने से खराब कोलेस्टरोल तेजी से बढता है। इनसे बचें।सब्जी, दाल का स्वाद मसालों से बढाएं। तेल,घी न्युनतम व्यवहार करें। कचोरी समोसे तो कभी न खाएं। लेकिन इस जगह यह लिखना भी जरूरी है कि जेतुन का तेल कोलेस्टरोल कम करता है। मंहगा जरूर है पर बहुत ज्यादा फ़ायदेमंद भी है।






७)  मांस खाने से खराब कोलेस्टरोल बढता है। यह हृदय रोग उत्पन्न करता है। 











८)  लहसुन का प्रयोग कोलेस्टरोल घटाता है। सुबह ३-४ लहसुन की कली  कच्ची चबाकर खाएं। इसमें खून को पतला करने के तत्व हैं जो खून मे थक्का जमने से बचाव करते हैं। भोजन में भी पर्याप्त लहसुन का प्रयोग करें।






९) कच्चा प्याज ,बादाम, अखरोट,खारक का समुचित उपयोग उत्तम है। इनमें उच्चकोटि की वसा पायी जाती  है।

१०) शकर से कोलेस्टरोल की वृद्धि होती है। अत: न्युनतम उपयोग करें।

११) मछली का तेल खराब कोलेस्टरोल को नियंत्रित करता है। काड लिवर आईल भी उत्तम है।

१२)  नियमित रुप से व्यायाम( घूमने,सीढी चढने) करने से कोलेस्टरोल नियंत्रण में रहता है।

 योगासन और प्राणायाम कोलेस्टरोल घटाने मे आशातीत लाभप्रद परिणाम प्रस्तुत करते  हैं।


१३) एलोपैथी के चिकित्सक कोलेस्टरोल कम करने के लिये स्टेटिन दवा का व्यवहार करते हैं।

१४) आयुर्वेदिक वैध्य  अर्जुन की छाल का काढा,त्रिफ़ला,पुनर्नवा मंडूर ,आरोग्यवर्धिनी वटी तथा चन्द्रप्रभा वटी का उपयोग करते हैं।

१५) कोलेस्टरोल कम करने के लिये जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी है। मोटापा कम करने से भी कोलेस्टरोल नियंत्रण में मदद मिलती है। आलसी जीवन से कोलेस्टरोल बढता है।
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6.8.10

हार्ट अटैक :सामान्य जानकारी



          हृदयाघात (हार्ट अटैक)  के सरल उपचार.

                                                                             
                                                                                                                       
                                                                                                                   



  हृदय हमारे शरीर में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है।संपूर्ण शरीर मे रक्त परिसंचरण हृदय की मांसपेशी के जरिये ही होता है।कोरोनरी धमनी के माध्यम से दिल की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति होती रहती है और इसी प्रक्रिया से दिल की पेशियां जीवंत रकर कार्यक्षम बनी रहती है।जब इन रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से रक्त परिभ्रमण रूक जाता है तो हार्ट अटैक का दौरा  पड जाता है।
 हृदय की जिन  मांस पेशियों को रक्त की आपूर्ति नहीं होती हैं वे मरने लगती हैं। हार्ट अटैक पडने के बाद के १-२ घंटे रोगी के जीवन को बचाने की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण होते हैं।बिना देर किये फ़ौरन मरीज को किसी बडे अस्पताल में पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिये। प्राथमिक चिकित्सा के तौर पर रोगी की जिबान के नीचे सोर्बिट्रेट और एस्प्रिन की गोली रखना चाहिये। समय पर ईलाज मिलने से रक्त का थक्का घुल जाता है और प्रभावित मांसपेशी फ़िर से काम करने लगती है।

रोगी को छाती के मध्य भाग में दवाब,बैचेनी,भयंकर दर्द,भारीपन और जकडन मेहसूस होती है। यह हालत कुछ समय रहकर समाप्त हो जाती है लेकिन कुछ समय बाद ये लक्षण फ़िर उपस्थित हो सकते हैं।

       अगर यह स्थिति आधा घंटे तक बनी रहती है और सोर्बिट्रेट गोली के इस्तेमाल से भी राहत नहीं मिलती है तो यह  हृदयाघात का पक्का प्रमाण माना चाहिये। छाती के अलावा शरीर के अन्य भागों में भी बेचैनी मेहसूस होती है।भुजाओं ,कंधों,गर्दन,कमर और जबडे में भी दर्द और भारीपन मेहसूस होता है।

       ; छाती में दर्द होने से पहिले रोगी को सांस में कठिनाई और घुटन के लक्षण हो सकते हैं। अचानक जोरदार पसीना होना,उल्टी होना और चक्कर आने के लक्षण भी देखने को मिलते हैं। कभी-कभी बिना दर्द हुए दम घुटने जैसा मेहसूस होता  है।

  जैसा कि ऊपर बताया गया है हार्ट अटैक के लक्षण प्रकट होते ही रोगी को एस्प्रिन की गोली देना चाहिये। घुलन शील एस्प्रिन(डिस्प्रिन) मिल जाए तो आधी गोली पानी में घोलकर पिलानी चाहिये। सोर्बिट्रेट गोली तुरंत जिबान के नीचे रखना चाहिये। एस्प्रिन में रक्त को पतला करने का गुण होता है। रक्त पतला होकर थक्का घुलने लगता है और प्रभावित मांस पेशी को खून मिलने से वह पुन: काम करने लगती है| इसके बाद हार्ट अटैक रोगी को तुरंत किसी बडे अस्पताल में जहां ईसीजी और रक्त  की जांच के साधन हो, पहुंचाने की व्यवस्था करें। साधन विहीन अस्पताल में समय नष्ट करने से रोगी अक्सर मौत के मुंह में चले जाते हैं।रोगी को एक या ज्यादा से ज्यादा डेढ घंटे में बडे अस्पताल में पहुंचाना बेहद जरूरी है। याद रखें, आधे से ज्यादा हृदयाघात के मरीज अस्पताल पहुंचने से पहिले ही मर जाते हैं।

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