2.5.10

सफ़ेद दाग(ल्युकोडर्मा) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार .ह/:How to treat leucoderma?


                                                                                                                            
                              

ल्युकोडर्मा चमडी का भयावह रोग है,जो रोगी की शक्ल सूरत प्रभावित कर शारीरिक के बजाय मानसिक कष्ट ज्यादा देता है। इस रोग में चमडे में रंजक पदार्थ जिसे पिग्मेन्ट मेलानिन कहते हैं,की कमी हो जाती है।चमडी को प्राकृतिक रंग प्रदान करने वाले इस पिग्मेन्ट की कमी से सफ़ेद दाग पैदा होता है।इसे ही श्वेत कुष्ठ कहते हैं।यह चर्म विकृति पुरुषों की बजाय स्त्रियों में ज्यादा देखने में आती है।आपकी स्किन के अंदर एक वर्णक होता है जिसे melanin कहते हैं और इसी melanin के कारण आपकी स्किन का रंग निर्धारित होता है| ज़यादा वर्णक होने से आपका रंग कला होता है और इसकी कमी के कारण आपका कलर गोरा या fair होता है| ये melanin आपकी स्किन और आपकी बॉडी के दूसरे अंगों को सूर्या की हानिकारक किरणों से बचा कर आपको स्किन कॅन्सर जैसे बीमारी से बचाता है| लेकिन कुछ कारणों से आपकी त्वचा में अचानक से इस वर्णक का लॉस हो जाता है और यही vitiligo या leucoderma होने के पीछे का कारण होता है| इस melanin की कमी होने के लिए कई कारण और कारक जिम्मेदार होते हैं| स्किन पर white spots या patch होने के कुछ कारण नीचे दिए गाये हैं|
हेरिडिटी या आनुवांशिक या जेनेटिक कारण – 30 पर्सेंट लोगो में vitiligo का कारण आनुवंशिक गुण ही होता है|
सूर्य की हानिकारक किरणों के कारण
मानसिक तनाव (स्ट्रेस), चिंता (anxiety), टेंशन और डिप्रेशन
स्किन पर चोट लगने से
पेट की गड़बड़ी के कारण
पीलिया (jaundice) या लिवर प्राब्लम होना
पेट में कीड़े होना
पसीना आने की कार्य पर्णाली में गड़बड़ी होने से
मधुमेह , hyperthyroidism, Addison disease या कोई और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के कारण
जलने के कारण स्किन को होने वाले नुकसान के कारण
ल्युकोडर्मा के दाग हाथ,गर्दन,पीठ और कलाई पर विशेष तौर पर पाये जाते हैं। अभी तक इस रोग की मुख्य वजह का पता नहीं चल पाया है।लेकिन चिकित्सा के विद्वानों ने इस रोग के कारणों का अनुमान लगाया है।पेट के रोग,लिवर का ठीक से काम नहीं करना,दिमागी चिंता ,छोटी और बडी आंर्त में कीडे होना,टायफ़ाईड बुखार, शरीर में पसीना होने के सिस्टम में खराबी होने आदि कारणों से यह रोग पैदा हो सकता है।
 
  शरीर का कोई भाग जल जाने अथवा आनुवांशिक करणों से यह रोग पीढी दर पीढी चलता रहता है।इस रोग को नियंत्रित करने और चमडी के स्वाभाविक रंग को पुन: लौटाने हेतु कुछ घरेलू उपचार कारगर साबित हुए हैं जिनका विवेचन निम्न पंक्तियों में किया जा रहा है--
*आठ लीटर पानी में आधा किलो हल्दी का पावडर मिलाकर तेज आंच पर उबालें, जब ४ लीटर के करीब रह जाय तब उतारकर ठंडा करलें फ़िर इसमें आधा किलो सरसों का तैल मिलाकर पुन: आंच पर रखें। जब केवल तैलीय मिश्रण ही बचा रहे, आंच से उतारकर बडी शीशी में भरले। ,यह दवा सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। ४-५ माह तक ईलाज चलाने पर आश्चर्यजनक अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।
*बाबची के बीज इस बीमारी की प्रभावी औषधि मानी गई है।५० ग्राम बीज पानी में ३ दिन तक भिगोवें। पानी रोज बदलते रहें।बीजों को मसलकर छिलका उतारकर छाया में सूखालें। पीस कर पावडर बनालें।यह दवा डेढ ग्राम प्रतिदिन पाव भर दूध के साथ पियें। इसी चूर्ण को पानी में घिसकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। अवश्य लाभ होगा। दो माह तक ईलाज चलावें।
*बाबची के बीज और ईमली के बीज बराबर मात्रा में लेकर चार दिन तक पानी में भिगोवें। बाद में बीजों को मसलकर छिलका उतारकर सूखा लें। पीसकर महीन पावडर बनावें। इस पावडर की थोडी सी मात्रा लेकर पानी के साथ पेस्ट बनावें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर एक सप्ताह तक लगाते रहें। बहुत ही कारगर उपचार है।लेकिन यदि इस पेस्ट के इस्तेमाल करने से सफ़ेद दाग की जगह लाल हो जाय और उसमें से तरल द्रव निकलने लगे तो ईलाज कुछ रोज के लिये रोक देना उचित रहेगा।
*एक और कारगर ईलाज बताता हुं--
लाल मिट्टी लावें। यह मिट्टी बरडे- ठरडे और पहाडियों के ढलान पर अक्सर मिल जाती है। अब यह लाल मिट्टी और अदरक का रस बराबर मात्रा में लेकर घोटकर पेस्ट बनालें। यह दवा प्रतिदिन ल्युकोडेर्मा के पेचेज पर लगावें। लाल मिट्टी में तांबे का अंश होता है जो चमडी के स्वाभाविक रंग को लौटाने में सहायता करता है। और अदरक का रस सफ़ेद दाग की चमडी में खून का प्रवाह बढा देता है।
*श्वेत कुष्ठ रोगी के लिये रात भर तांबे के पात्र में रखा पानी प्रात:काल पीना फ़ायदेमंद है।

*मूली के बीज और सिरका (Radish seeds and vinegar)
मूली के बीज का उपयोग भी सफ़ेद दाग यानि vitiligo रोग को ठीक करने का एक असरदार तरीका है| इन बीज के 40 ग्राम पाउडर को पूरी रात के लिए सिरके में भिगो कर रखिए| सुबह इस पेस्ट को अपने वाइट स्पॉट्स पर लगा लें| दो घंटे बाद इसे उतार लें| कहा जाता है की मूली के बीज के साथ वाइट आर्सेनिक की थोड़ी मात्रा को सिरके में रात भर डुबो कर मॉर्निंग में उसे लगाने पर अच्छे रिज़ल्ट्स मिलते हैं| ये घरेलू नुस्ख़ा आपको रोजाना इस्तेमाल करना होगा ताकि आपकी समस्या का निवारण जल्दी हो सके|७) एक अनुसंधान के नतीजे में बताया गया है कि काली मिर्च में एक तत्व होता है --पीपराईन। यह तत्व काली मिर्च को तीक्ष्ण मसाले का स्वाद देता है। काली मिर्च के उपयोग से चमडी का रंग वापस लौटाने में मदद मिलती है।
*चिकित्सा वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि सफ़ेद दाग रोगी में कतिपय विटामिन कम हो जाते हैं। विशेषत: विटामिन बी १२ और फ़ोलिक एसीड की कमी पाई जाती है। अत: ये विटामिन सप्लीमेंट लेना आवश्यक है। कॉपर और ज़िन्क तत्व के सप्लीमेंट की भी सिफ़ारिश की जाती है।

 
अखरोट का पाउडर-
अखरोट खाने से आपकी स्किन तो अच्छी होती ही है लेकिन इसके पाउडर का उपयोग करके आप अपने रोग से जल्दी मुक्ति पा सकते हैं| बस इसके थोड़े से पाउडर में हल्का सा पानी मिलकर एक पेस्ट बना लीजिए| इस पेस्ट को vitiligo के निशान पर दिन में 3 बार कुछ दिनों तक लगाने पर अच्छे रिज़ल्ट्स मिलते हैं|नीम के पत्ते
नीम के पत्तों में बहुत सी स्किन फ्रेंड्ली प्रॉपर्टीज होती हैं और ये स्किन इन्फेक्शन से ले कर स्किन discolouration तक सभी मामलों से निपटने में सक्षम होते है| आपको नीम के तजा पत्तों का 2- 3 चम्मच जूस निकल कर उसके 1 चम्मच शहद के साथ मिलकर दिन में 3 बार कुछ दीनो के लिए लेना है| ये आपको खून सॉफ करने के साथ साथ आपके रूप रंग को भी निखरेगा साथ ही आपको अपने सफ़ेद दाग हटाने में भी मदद करेगा|
चंदन और बादाम का तेल-
दो चम्मच चंदन पाउडर में एक चम्मच बादाम का तेल मिलिए| अब इस मिक्स्चर में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिला लीजिए| इस पेस्ट को सफेद दाग पर लगाइए| एक घंटे बाद इस धो लीजिए| ऐसा दिन में 2 बार कुछ दीनो तक करने से लाभ होगा|
तुलसी पत्ते और नींबू का रस-
तुलसी हमारे भारतीय समाज में अपने औषधीय गुणों के कारण एक विशेष महत्व रखती है| इसके पत्तो में ऐसे कई गुण पाए जाते हैं जो की vitiligo रोग को ठीक कर सकते हैं| इनको स्किन पर नियमित रूप से लगाने पर melanin production बढ़ता है फलसवरूप आपके निशान ठीक हो जाते हैं| इसके 2 चम्मच जूस को एक चम्मच नींबू के रस के साथ मिलकर दिन में 3 बार दागपर लगाने से फ़ायदा होता है| ऐसा आपको डेली कुछ हफ़्तों के लिए करना होगा|बच्चों पर ईलाज का असर जल्दी होता है| चेहरे के सफ़ेद दाग जल्दी ठीक हो जाते हैं। हाथ और पैरो के सफ़ेद दाग ठीक होने में ज्यादा समय लेते है। ईलाज की अवधि ६ माह से २ वर्ष तक की हो सकती है।उक्त सरल उपचार अपनाकर ल्युकोडर्मा रोग को नियंत्रित किया जा सकता है| 
*हर्बल चिकित्सा इस रोग में जड से असर करती है| औषधि  के लिए 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है|

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2 टिप्‍पणियां:

satya vachan ने कहा…

सफ़ेद दाग की बीमारी खासकर विवाह योग्य लडकियों में हो तो माता पिता पर चिंता का पहाड टूट पडता है। योग्य वर मिलना बेहद कठिन हो जाता है। घरेलू नुस्खों से रोग काबू में आ जाए और ज्यादा न बढे तो फ़िर भी कुछ बात बन सकती है। डा.आलोक साब के नुस्खे काम कर जाएं तो सफ़ेद दाग वालों के लिये तो यह किसी वरदान से कम नहीं है। बढिया लेख के लिये बधाई,आभार!

जय भारत ने कहा…

सफ़ेद दाग निवारण में इन नुस्खों की महती भूमिका हो सकती है। बधाई!