5.5.10

सोरायसिस(अपरस) की सरल चिकित्सा

                                                                                                          
                                                                                                          

     सोरायसिस एक प्रकार का चर्म रोग है जिसमें त्वचा में सेल्स की तादाद बढने लगती है।चमडी मोटी होने लगती है और उस पर खुरंड और पपडियां उत्पन्न हो जाती हैं। ये पपडियां सफ़ेद चमकीली हो सकती हैं।इस रोग के भयानक रुप में पूरा शरीर मोटी लाल रंग की पपडीदार चमडी से ढक जाता है।यह रोग अधिकतर केहुनी,घुटनों और खोपडी पर होता है। अच्छी बात ये कि यह रोग छूतहा याने संक्रामक किस्म का नहीं है। रोगी के संपर्क से अन्य लोगों को कोई खतरा नहीं है। माडर्न चिकित्सा में अभी तक ऐसा परीक्षण यंत्र नहीं है जिससे सोरियासिस रोग का पता लगाया जा सके। खून की जांच से भी इस रोग का पता नहीं चलता है।

   
 यह रोग वैसे तो किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन देखने में ऐसा आया है कि १० वर्ष से कम आयु में यह रोग बहुत कम होता है। १५ से ४० की उम्र वालों में यह रोग ज्यादा प्रचलित है। लगभग १ से ३ प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीडित हैं। इसे जीवन भर चलने वाली बीमारी की मान्यता है।
चिकित्सा विग्यानियों को अभी तक इस रोग की असली वजह का पता नहीं चला है। फ़िर भी अनुमान लगाया जाता है कि शरीर के इम्युन सिस्टम में व्यवधान आ जाने से यह रोग जन्म लेता है।इम्युन सिस्टम का मतलब शरीर की रोगों से लडने की प्रतिरक्षा प्रणाली से है। यह रोग आनुवांशिक भी होता है जो पीढी दर पीढी चलता रहता है।इस रोग का विस्तार सारी दुनिया में है। सर्दी के दिनों में इस रोग का उग्र रूप देखा जाता है। कुछ रोगी बताते हैं कि गर्मी के मौसम में और धूप से उनको राहत मिलती है। एलोपेथिक चिकित्सा मे यह रोग लाईलाज माना गया है। उनके मतानुसार यह रोग सारे जीवन भुगतना पडता है।लेकिन कुछ कुदरती चीजें हैं जो इस रोग को काबू में रखती हैं और रोगी को सुकून मिलता है। मैं आपको एसे ही उपचारों के बारे मे जानकारी दे रहा हूं---

१) बादाम १० नग का पावडर बनाले। इसे पानी में उबालें। यह दवा सोरियासिस रोग की जगह पर लगावें। रात भर लगी रहने के बाद सुबह मे पानी से धो डालें। यह उपचार अच्छे परिणाम प्रदर्शित करता है।
२) एक चम्मच चंदन का पावडर लें।इसे आधा लिटर में पानी मे उबालें। तीसरा हिस्सा रहने पर उतारलें। अब इसमें थोडा गुलाब जल और शकर मिला दें। यह दवा दिन में ३ बार पियें।बहुत कारगर उपचार है।
३) पत्ता गोभी सोरियासिस में अच्छा प्रभाव दिखाता है। उपर का पत्ता लें। इसे पानी से धोलें।हथेली से दबाकर सपाट कर लें।इसे थोडा सा गरम करके प्रभावित हिस्से पर रखकर उपर सूती कपडा लपेट दें। यह उपचार लम्बे समय तक दिन में दो बार करने से जबर्दस्त फ़ायदा होता है।

४) पत्ता गोभी का सूप सुबह शाम पीने से सोरियासिस में लाभ होते देखा गया है।प्रयोग करने योग्य है।
५) नींबू के रस में थोडा पानी मिलाकर रोग स्थल पर लगाने से सुकून मिलता है।
 


नींबू का रस  तीन घंटे के अंतर से दिन में ५ बार पीते रहने से  छाल रोग  ठीक होने लगता है।
६)शिकाकाई पानी मे उबालकर रोग के धब्बों पर लगाने से नियंत्रण होता है|७) केले का पत्ता प्रभावित जगह पर रखें। ऊपर कपडा लपेटें। फ़ायदा होगा।
८) कुछ चिकित्सक जडी-बूटी की दवा में steroids मिलाकर ईलाज करते हैं जिससे रोग शीघ्रता से ठीक होता प्रतीत होता है। लेकिन ईलाज बंद करने पर रोग पुन: भयानक रूप में प्रकट हो जाता है। ट्रायम्सिनोलोन स्टराईड का सबसे ज्यादा व्यवहार हो रहा है। यह दवा प्रतिदिन १२ से १६ एम.जी. एक हफ़्ते तक देने से आश्चर्यजनक फ़ायदा दिखने लगता है लेकिन दवा बंद करने पर रोग पुन: उभर आता है। जब रोग बेहद खतरनाक हो जाए तो योग्य चिकित्सक के मार्ग दर्शन में इस दवा का उपयोग कर नियंत्रण करना उचित माना जा सकता है।

९) इस रोग को ठीक करने के लिये जीवन शैली में बदलाव करना जरूरी है। सर्दी के दिनों में ३ लीटर और गर्मी के मौसम मे ५ से ६ लीटर पानी पीने की आदत बनावें। इससे विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकलेंगे।
१०) सोरायसिस चिकित्सा का एक नियम यह है कि रोगी को १० से १५ दिन तक सिर्फ़ फ़लाहार पर रखना चाहिये। उसके बाद दूध और फ़लों का रस चालू करना चाहिये।
११) रोगी के कब्ज निवारण के लिये गुन गुने पानी का एनीमा देना चाहिये। इससे रोग की तीव्रता घट जाती है।
१२) अपरस वाले भाग को नमक मिले पानी से धोना चाहिये फ़िर उस भाग पर जेतुन का तेल लगाना चहिये।
१४) खाने में नमक वर्जित है।
१५) पीडित भाग को नमक मिले पानी से धोना चाहिये।
१६) धूम्रपान करना और अधिक शराब पीना विशेष रूप से हानि कारक है। ज्यादा मिर्च मसालेदार चीजें न खाएं।


आयुर्वेदिक चिकत्सा-
आयुर्वेद में सोरायसिस जैसे गंभीर एवं कष्टदायी रोग की कारगर चिकत्सा है| साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों के नियमित सेवन से अन्य दवाओं की तरह इनके दुष्प्रभाव होने का भय नहीं रहता है\
गंधक रसायन ६ रती , रस माणिक्य ३ रत्ती ,नवायस लोह ६ रत्ती , शुद्ध गंधक ६ रत्ती,,अश्वगंधा चूर्ण २ माशा,मधुयष्टी चूर्ण २ माशा, इनको मिश्रित कर तीन खुराक बनालें| दिन में तीन खुराक लें|
आरोग्य वर्धिनी वटी और केशोर गुग्गल एक एक गोली दिन में तीन बार लें| भोजन के बाद सारिवाध्यारिष्ट और खदिरारिष्ट २०-२० मिली मिलाकर सम भाग पानी मिलाकर लें| इन औषधियों को पथ्य -परहेज का धान रखते हुए सेवन कर्नर से १५-२० दिन में परिणाम दिखने लगते हैं| कुछ ही महीनों में सोरायसिस जैसे कठिन रोग से मुक्ति मिल जाती है|
उपरोक्त औषधियों के सेवन के दौरान रोगी नमक बिलकुल उपयोग न करे| मसाले और तेल में बनी चीजें न खाएं| सूती कपडे पहिनें\
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4 टिप्‍पणियां:

jagdish rathore ने कहा…

आपका पूरा लेख पढा।मुझे लगता है कि ये साधारण नुस्खे असाधारण प्रभाव डालते हैं।सोरियासिस रोग पर डा.दामोदर की बतायी मड थिरेपी याने मिट्टी द्वारा चिक्त्सा भी इस रोग में कारगर हो सकती हैं। आधुनिक चिकित्सा तो इसमें सफ़ल है नहीं। अत: उक्त उपाय कर रोग से मुक्ति का प्रयास करना उचित है।उपयोगी जानकारी के लिये आभार!

vinod ने कहा…

बहुत मुश्किल से नियंत्रित होने वाली बीमारी सोरियासिस पर उत्तम आलेख। डा.दामोदर द्वारा http://remedyherb.blogspot.com में बताई गई मड थिरेपी भी इस रोग में अच्छा काम करती है। आभार!

Anonymous ने कहा…

DrDayaram g me aapne jo disentre ke jo nukhse bataye hai mujhe lagta hai ye nukhse bahut he kargar hai.

Anonymous ने कहा…

Psoriasis 100% cure hota hai.