20.1.17

नजला-जुकाम: कारण और उपाय

    

    नजला या जुकाम ऐसा रोग है जो किसी भी दिन किसी भी स्त्री या पुरुष को हो सकता है| यह रोग वैसे तो ऋतुओं के आने-जाने के समय होता है लेकिन वर्षा, जाड़े और दो ऋतुओं के बीच के दिनों में ज्यादातर होता है|नजला-जुकाम एक बहुत ही आम और हमेशा परेशान करने वाला रोग है। वास्तव में यह रोग नहीं, शरीर की एक सांवेदनिक प्रतिक्रिया है, जो मौसम बदलने, नाक में धूल कण जाने आदि से उत्पन्न होती है। पूरे विश्व के लोग कभी न कभी, इसके शिकार होते ही हैं। नज़ला-जुकाम शीत के कारण होने वाला एक ऐसा रोग है, जिसमें नाक से पानी बहने लगता है। मामूली- सा दिखने वाला यह रोग, कफ की अधिकता के कारण अधिक कष्टदायक हो जाता है। यों तो ऋतु आदि के प्रभाव से दोष संचय काल में संचित हो कर अपने प्रकोप काल में ही कुपित होते हैं, परंतु दोषों के प्रकोपक कारणों की अधिकता, या प्रबलता के कारण तत्काल भी कुपित हो जाते हैं, जिससे जुकाम हो जाता है; अर्थात नज़ला-जुकाम शीत काल के अतिरिक्त भी हो सकता है।
आयुर्वेद में नजला-जुकाम 6 प्रकार के बताये गये हैं। आचार्य चरक ने इसके चार प्रकार बताये हैं, जबकि आचार्य सुश्रुत ने पांच प्रकार माने हैं।
वायुजन्य (वातज) : वायु से उत्पन्न जुकाम में नाक में वेदना, सुंई चुभने जैसी पीड़ा, छींक आना, नाक से पतला स्राव आना, गला, तालु और होठों का सूख जाना, सिर दर्द और आवाज बैठ जाना आदि लक्षण होते हैं।
पित्तजन्य (पित्तज) : नाक से गर्म और पीले रंग का स्राव आना, नाक का अगला भाग पक जाना, ज्वर, मुख शुष्क हो जाना, बार-बार प्यास लगना, शरीर दुबला और त्वचा चमकरहित होना इसके लक्षण हैं। नाक से धुंआ निकलता महसूस होता है।

कारण-
आमतौर पर कब्ज होने पर सर्दी लग जाने से होता है. पानी में निरंतर भीगने, एकाएक पसीना बंद हो जाने से, ठंडे पदार्थों का सेवन ज्यादा करने से, प्राक्रतिक आवेगों को रोकने प्रदूषित वातावरण में रहने से, या तम्बाकू का अधिक सेवन करने से हो जाता है. यह एक संक्रमण रोग है. इससे नाक की श्लेष्मा झिल्ली में शोध हो जाता है. इस रोग की सुरूआत में नाक में श्लेष्मा का बहना या बिलकुल खुश्क हो कर नाक बंद हो जाना, छींकें आना, नाक में खुश्की, सिर दर्द, नाक में जलन, आखें लाल होना, कान बंद होना खांसी के साथ कफ का आना, नाक में खुजली होना आदि नजला जुकाम के लक्षण होते हैं.
खाने मे खराबी, ठंड से, सु-बह उठने के साथ ठंडा पानी से मूह धोना या पीना , ज्यादा शराब पीने , ओर किसी नजले जुखाम के मरीज के साथ रहने पर
लक्षण
बार बार छींके आना, नाक मे खुजली, नाक का बहाना, गले मे खरास, बार बार नाक बंद होना, आंखो मे पानी बहाना और खांसी
नजला (जुकाम) की पहचान-
शुरू में नाक में खुश्की मालूम पड़ती है| बाद में छींकें आने लगती हैं| आंख-नाक से पानी निकलना शुरू हो जाता है| जब श्लेष्मा (पानी) गले से नीचे उतरकर पेट में चला जाता है तो खांसी बन जाती है| कफ आने लगता है| कान बंद-से हो जाते हैं| माथा भारी और आंखें लाल हो जाती हैं| बार-बार नाक बंद होने के कारण सांस लेने में परेशानी होती है| रात में नींद नहीं आती| रोगी को मुंह से सांस लेनी पड़ती है|
घरेलू उपचार हल्दी से -
-100 ग्राम साबुत हल्दी लें।
-घुन लगे टुकड़ों को निकाल दे।
- अच्छा होगा कि कच्ची हल्दी जो बाजार मे सब्जी बेचने वाले बेचते हैं वह ले।उसके छोटे छोटे टुकड़े काट कर सूखा ले।
- पीसी हुई हल्दी ना ले।
- साबुत हल्दी के छोटे छोटे (गेहूं या चने के समान) टुकड़े कर ले।
- एक लौहे की या पीतल की कड़ाही ले। ना मिले तो एल्यूमिनियम की कड़ाही ले।
स्टील या नॉन स्टिक की ना ले।
-उसमे लगभग 25 ग्राम देशी घी डालकर हल्दी के टुकड़े धीमी आग पर भुने।
- यदि किसी को घी नहीं खाना है तो वह बिना घी के भून सकता है।
 -हल्दी को इस प्रकार गरम करे कि ना तो वह जले और ना ही कच्ची रहे।
-अब इसे आग से उतार कर पीस कर रख ले।


प्रयोग विधि—
- 1 छोटा चम्मच यह भुनी हुई हल्दी और  10 ग्राम गुड प्रतिदिन सुबह या शाम गरम दूध से ले।
- जो अक्सर यात्रा करते हैं वह यह करे।
-हल्दी और गुड बराबर मिलाकर रख ले।
- 2 चम्मच यह दवाई गरम पानी से ले।
- साथ मे बर्फी या पेड़ा खाए।
- चाय से ना ले। चाय से कोई लाभ नहीं होगा।
 -लेने के 1 घण्टे तक ठंडा पानी ना पिए।
 -यह दवाई धीरे काम करती है।
-लगभग 1 सप्ताह प्रयोग से कुछ लाभ होता है।
- स्थायी लाभ के लिए कम से कम 3 महीने प्रयोग करे।
- जो अधिक परेशान हैं वह सुबह और शाम प्रयोग करे।
 -बच्चो को आयु के अनुसार कम मात्रा दे।
- गर्भवती स्त्री को भी दे सकते हैं।
- नाक की एलर्जी इस्नोफिलिया आदि सभी ठीक हो जाते हैं।
नजला जुकाम (Influenza Cold) के अन्य  उपाय
 
*अदरक और देशी घी
अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को देशी घी में भून लें| फिर उसे दिन में चार-पांच बार कुचलकर खा जाएं| इससे जुकाम बह जाएगा और रोगी को शान्ति मिलेगी|
* तुलसी के पत्ते, सौंठ, छोटी इलायची 6-6 ग्राम और दालचीनी 1 ग्राम ले कर पीस लें. और 100 ग्राम पानी में उबालें आधा पानी रह जाने पर छान कर पियें ऐसा काढ़ा दिन में 3 बार पीने से नजला जुकाम ठीक हो जाता है|
*हल्दी, अजवायन, पानी और गुड़-
10 ग्राम हल्दी का चूर्ण और 10 ग्राम अजवायन को एक कप पानी में आंच पर पकाएं| जब पानी जलकर आधा रह जाए तो उसमें जरा-सा गुड़ मिला लें| इसे छानकर दिन में तीन बार पिएं| दो दिन में जुकाम छूमंतर हो जाएगा|
* तुलसी के पत्ते छाया में सुखा कर पीस लें और नसवार की तरह सूंघें इससे छींकें आती हैं और जुकाम ठीक हो जाता है|
* छोटी इलायची, सौंठ, दालचीनी सभी को एक- एक ग्राम लें और तुलसी दल 6 ग्राम सब को कूट कर दिन में 3-4 बार चाय बना कर पीने से नजला जुकाम से छुटकारा मिलता है\
* तुलसी का रस शहद के साथ दिन में 4 बार चाटने से जुकाम ठीक हो जाता है साथ ही बुखार भी ठीक हो जाता है|
*लहसुन, शहद और कलौंजी-
लहसुन की दो पूतियों को आग में भूनकर पीस लें| फिर चूर्ण को शहद के साथ चाटें| कलौंजी का चूर्ण बनाकर पोटली में बांध लें| फिर इसे बार-बार सूंघें| नाक से पानी आना रुक जाएगा|

*दालचीनी और जायफल-
दालचीनी तथा जायफल  दोंनो एक चम्मच की मात्रा में चूर्ण के रूप में लेने से जुकाम फूर्र हो जाता है|

* 3 ग्राम तुलसी के पत्ते, 2 ग्राम दालचीनी, डेढ ग्राम सौंठ 1 ग्राम केसर, 2 ग्राम जावित्त्री, डेढ़ ग्राम लौंग, इन सब को पोटली में बांध कर 500 ग्राम पानी में पकाएं आधा पानी रहने पर इस में 250 ग्राम दूध मिला कर पीने से नजला जुकाम वह वदन दर्द दोनों मिट जाते हैं|
* तुलसी के बीज, गिलोय और कटेली की जड़ समान मात्रा में ले कर पीस लें और 4 रत्ती चूर्ण 1 चम्मच शहद में मिला कर सुबह शाम तीन दिन खाने से नजला जुकाम मिट जाता है|
*सरसों का तेल*
नाक के बाहर तथा नथुनों के भीतर सरसों-का तेल थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगाएं| जुकाम का पानी बह जाएगा|
*सौंठ-
एक चम्मच पिसी सोंठ की फंकी लगाकर ऊपर से गुनगुना पानी पी लें|

*गोमूत्र-
दोंनो नथुनों में गोमूत्र (ताजा) की दो-दो बूंदें सुबह-शाम टपकाएं
|*अदरक, प्याज, और तुलसी का रस समान मात्रा में मिला कर शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम आता है|
*अदरक और शहद-
एक चम्मच अदरक के रस में आधा चमच शहद मिलाकर चाट लें|


18.1.17

होम्योपैथिक की कुछ स्पेसिफ़िक औषधियां


क्रोटेलस – ब्लैक-वाटर-फीवर
बेलाडोना – स्कारलेट फीवर
आर्सेनिक – टोमेन पायजनिंग
मर्क कौर – डिसेन्ट्री (खूनी)
लैट्रोडेक्टस – एन्जाइना पैक्टोरिस
कोका – थकावट
कॉफ़िया .- दांत का दर्द
सीपिया – रिश्तेदारों से विराग
रस टॉस्क, रूटा – कमर का दर्द
आयोडाइड, स्पंजिया – गलगंड
स्टैफिसैग्रिया – दांत खुरना
स्पंजिया और हिपर – क्रुप खांसी
ड्रॉसेरा – हूपिंग-खांसी
थूजा – मस्से
एकोनाइट – बेचैनी का तेज़ बुखार
मेजेरियम – सिर की पपड़ी के नीचे पस
शक्ति – 3, 6, 30, 200

मानसिक रोगों के इलाज में मददगार है स्वप्न चिकित्सा


   आधुनिक मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सोते समय की चेतना की अनुभूतियों को स्वप्न कहते हैं। स्वप्न के अनुभव की तुलना मृगतृष्णा के अनुभवों से की गई है। यह एक प्रकार का विभ्रम है। स्वप्न में सभी वस्तुओं के अभाव में विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ दिखाई देती हैं। स्वप्न की कुछ समानता दिवास्वप्न से की जा सकती है। परंतु दिवास्वप्न में विशेष प्रकार के अनुभव करनेवाला व्यक्ति जानता है कि वह अमुक प्रकार का अनुभव कर रहा है। स्वप्न अवस्था में अनुभवकर्ता जानता नहीं कि वह स्वप्न देख रहा है। स्वप्न की घटनाएँ वर्तमान काल से संबंध रखती हैं। दिवास्वप्न की घटनाएँ भूतकाल तथा भविष्यकाल से संबंध रखती हैं।
     भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार स्वप्न चेतना की चार अवस्थाओं में से एक विशेष अवस्था है। बाकी तीन अवस्थाएँ जाग्रतावस्था, सुषुप्ति अवस्था और तुरीय अवस्था हैं। स्वप्न और जाग्रताअवस्था में अनेक प्रकार की समानताएँ हैं। अतएव जाग्रतावस्था के आधार पर स्वप्न अनुभवों को समझाया जाता है। इसी प्रकार स्वप्न अनुभवों के आधार पर जाग्रताअवस्था के अनुभवों को भी समझाया जाता है।



स्वप्नों का अध्ययन चिकित्सा दृष्टि से भी किया गया है। साधारणत: रोग की बढ़ी चढ़ी अवस्था में रोगी भयानक स्वप्न देखता है और जब वह अच्छा होने लगता है तो वह स्वप्नों में सौम्य दृश्य देखता है।
   एक यूरोपीय साइंस फाउंडेशन (ESF) कार्यशाला ने स्पष्ट अर्थ वाले स्वप्न के दैरान मस्तिष्क की गतिविधियों और मानसिक स्थितियों में समानता पायी है, जो मानसिक रोगों के इलाज में उपयोगी हो सकती है।
  जब कोई व्यक्ति इस बारे में अवगत है कि वह सपना देख रहा है तो स्पष्ट अर्थ वाला स्वप्न सोने और जागने के बीच एक संकर अवस्था है। यह मस्तिष्क में वैद्युत गतिविधियों का एक विशिष्ट पैटर्न बनाती है जिसमें सिज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक विकृति की अवस्था द्वारा बनाए गए पैटर्न से समानता होती है।
जर्मनी में फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय के उर्सुला वॉस इशारा करते हैं कि स्पष्ट अर्थ वाले स्वप्न और मानसिक स्थितियों के बीच संबंधों की पुष्टि करने से इस बात पर आधारित नए चिकित्सकीय रास्तों की संभावना होती है कि स्वस्थ रूप से सपना देखना तंत्रिका विज्ञान और मनोरोग विकारों के साथ जुड़ी अस्थिर अवस्थाओं से किस प्रकार अलग है।
 

कार्यशाला के दौरान प्राप्त नए आंकड़ों से पता चलता है कि स्पष्टतापूर्वक सपना देखने से मस्तिष्क एक असंबद्धता की अवस्था में होता है, ऐसा कुछ जो संबंद्धता की पुष्टि करता है।
वॉस के अनुसार, असंबद्धता में मानसिक प्रक्रियाओं, जैसे कि तार्किक सोच या भावनात्मक प्रतिक्रिया पर नियंत्रण खोना शामिल है।
वॉस कहते हैं कि कुछ मानसिक स्थितियों में इस अवस्था को उस समय भी होने का पता चला है, जब लोग जागे होते हैं।
इटली के मिलान में यूनिवर्सिटी डेगली स्टडी डी मिलानो में कार्यशाला के संयोजक सिल्वियो स्कारोन का कहना है, "मनोरोग विज्ञान के क्षेत्र में, मरीजों के सपनों में रूचि उत्तरोत्तर नैदानिक ​​अभ्यास और अनुसंधान दोनों से बाहर हो गयी है। लेकिन यह नया काम दिखाता हुआ प्रतीत होता है कि हम स्पष्ट अर्थ वाले सपने और उन कुछ मानसिक स्थितियों के बीच तुलना करने में सक्षम हो सकते हैं जिसमें हमारे जगे होने पर चेतना की असामान्य असंबद्धता जैसे मनोरोग, अवैयक्तिकीकरण और छद्मआघात शामिल होते हैं।"
   नए निष्कर्षों ने स्वप्न चिकित्सा के द्वारा कुछ दशाओं का उपचार करने के बदनाम विचार में फिर से चिकित्सकों की रूचि को पुनर्जीवित किया है, जैसे कि उदाहरण के लिए बुरे सपने से पीड़ित लोगों का इलाज उनके स्पष्ट अर्थ वाले सपने द्वारा किया जा सकता है ताकि वे होश में जाग सकें।
   सेक्रोन का कहना है, "एक तरफ, बुनियादी सपना शोधकर्ता अपने ज्ञान को अब मानसिक रोगियों पर इस लक्ष्य के साथ लागू कर सकते हैं कि मनोरोग विज्ञान के लिए एक उपयोगी उपकरण का निर्माण हो सकेगा, रोगियों के स्वप्नों में रूचि पैदा हो सकेगी। दूसरी ओर, तंत्रिका विज्ञान शोधकर्ता पता लगा सकते हैं कि अपने काम को सुप्त शोध से तीव्र मानसिक और मस्तिष्क-दिमाग की असंबद्ध अवस्थाओं के डेटा का मतलब निकालने के लिए मनोरोग की दशाओं तक कैसे फैलाया जाए।''
शोध टीम ने उस विचार का भी अध्ययन किया जिसमें पागल भ्रम और अन्य भ्रमात्मक घटनाएं होती हैं, जब असंबद्ध स्वप्न देखने की अवस्था में धमकीपूर्ण स्थितियों से लेकर जागने की अवस्था में आने की पुनरावृत्ति होती है।
  सेक्रोन का कहना है, "वास्तविक धमकीपूर्ण घटनाएं शायद स्वप्न प्रणाली को सक्रिय कर देती हैं, ताकि उन सिमुलेशनों का उत्पादन करें जो धारणा और व्यवहार के संदर्भ में धमकीपूर्ण घटनाओं के यथार्थवादी रिहर्सल हैं। यह सिद्धांत इस आधार पर काम करता है कि वह वातावरण जिसमें मानव मस्तिष्क विकसित हुआ, उसमें वे लगातार खतरनाक घटनाएं शामिल थीं जिसने मानव प्रजनन के लिए खतरा पैदा किया। ये पैतृक मानव आबादी पर एक गंभीर चयन दबाव होता है और शायद धमकी सिमुलेशन तंत्र को पूरी तरह से सक्रिय कर देती।"
अमेरिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए मनोचिकित्सक और सपना शोधकर्ता एलन हॉबस्न जोर देकर कहते हैं कि हालांकि, सपना देखने से धमकियों के पूरी तरह से फिर से पैदा करने की संभावना नहीं है, पर इनकी सीखने की प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है।
  जब आप जागे होते हैं तो सामग्री जुड़ जाती है और सोने के दौरान स्वप्न चेतना के स्वत: कार्यक्रम के साथ एकीकृत हो जाती है। यह उस प्रेक्षण के साथ काम करता है कि दिन के समय में सीखना रात में सोने के समय सुदृढ़ हो जाती है, जिससे वह घटना होती है जिसमें लोग उन तथ्यों को दिन में उस समय की तुलना में बेहतर याद रखते हैं जब उन्होंने उनको सीखा है।

16.1.17

जैतून के तेल के 10 बेहतरीन लाभ


जैतून का तेल एक स्वास्थ्यवर्धक तेल है। इसका प्रयोग कई तरह की बीमारियों में लाभदायक होता है साथ ही यह त्वचा संबंधी समस्याओं और सौंदर्य बढ़ाने के लिए भी खूब प्रयोग किया जाता है। जानिए जैतून के तेल के यह 10 लाभ -
1.जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है साथ ही यह मानसिक विकार दूर कर आपको जवां बनाए रखने में भी मदद करता है।
2॰जैतून के तेल में फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है जो हृदय रोग के खतरों को कम करती है।
3॰इसमें संतृप्त वसा की मात्रा कम होती है जिससे शरीर में कॉलेस्टेरोल की मात्रा को भी संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे हृदयाघात का खतरा काफी कम हो जाता है।
 

4॰विटमिन ए, बी, सी, डी और ई के साथ-साथ जैतून के तेल में आयरन और पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो बालों की कोमलता और मजबूती बढ़ाने में मदद करते हैं। यह ओलेइक एसिड और ओमेगा-9 फैटी एसिडका भी अच्छा स्रोत है।
5॰ लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
6॰जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। 

7॰जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है। हफ्ते में तीन बार नींबू में रस में ऑलिव ऑयल मिला कर चेहरे की मालिश करें, इससे न सिर्फ झुर्रियां भागेगीं बल्कि चेहरे की रंगत में भी निखार आएगा। साथ ही बालों में लगाने से इनकी अच्‍छी कंडीशनिंग भी हो जाती है। उलझे बालों की समस्‍या भी सुलझेगी। थोडा सा ऑलिव ऑयल अपने होथों में लें और उन्‍हें रुखे और बेजान बालों पर लगाएं, इससे आपके बाल सिल्‍की हो जाएंगे। और अगर आपको डैंड्रफ की समस्‍या है तो वही भी कम हो जाएगी।जैतून के तेल द्वारा त्वचा की देखभाल करने हेतु इस तेल का प्रयोग करके नहाएं। जैतून का तेल / ऑलिव ऑयल चेहरे के लिए, एक बाल्टी में नहाने का पानी लेकर उसमें 5 चम्मच जैतून का तेल मिलाएं। इस तेल से नहाने के समय साबुन का प्रयोग ना करें। एक बार नहाकर निकलने पर आपकी त्वचा काफी मुलायम हो जाएगी।


8॰ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। कोलोन कैंसर को दूर रखने में ऑलिव ऑयल ताजा फलों और सब्जियों की तरह प्रभावशाली है। एक अन्‍य जानकारी के अनुसार भोजन में ऑलिव ऑयल का इस्‍तमाल किया जाए, तो ब्‍लडप्रेशर को नियंत्रित रखा जा सकता है। इसके पीछे भी पोलीफिनोल्‍स की भूमिका है। यह तो हुई ऑलिव ऑयल का भोजन में प्रयोग करके हेल्‍दी रहने का तरीका। इसके अलावा इसका इस्‍तमाल उबटन, फेसमास्‍क आदि के रुप में भी किया जा सकता हे।
9॰त्वचा के लिए जैतून का तेल बहुत फायदेमंद है। रोजाना चेहरे पर इसकी मसाज करने से त्वचा की झुर्रियां समाप्त हो जाती हैं और त्वचा में नमी और चमक बनी रहती है। जापान में हुए एक महत्‍वपूर्ण शोध से पता चला है कि सन बाथ के बाद स्किन पर वजिर्न ऑलिव ऑयन के प्रयोग से ट्यूमर होने का खतरा कम हो जाता है। स्‍वास्‍थ्‍य विज्ञानियों का मानना है कि ऑलिव ऑयल के अंदर मौजूद फ्लेवसेनॉयड्स स्‍कवेलीन और पोरीफेनोल्‍स एंटीऑक्‍सीडेंट्स हैं, जो फ्री रैडिकल्‍स से सेल्‍स को डैमेज होने से बचाते हैं।
10.मधुमेह रोगियों के लिए यह काफी लाभदायक है। शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित बनाए रखने में इसकी खास भूमिका है। इसलिए आहार में भी इस तेल का प्रयोग किया जाता है।
और भी-
खराब जीवन शैली के कारण पुरूष और नारी दोनों में कामोत्तेजना की कमी आ जाती है। जिसके कारण वे एक दूसरे के करीब नहीं आ पाते हैं। पुरूषों में वृषणि (टेस्टास्टरोन) के कारण कामोत्तेजना का संचार होता है लेकिन इस हार्मोन की कमी से लिबीडो की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। जैतून के तेल के सेवन से शरीर में एस्ट्रोजेन (estrogen) का स्तर बढ़ जाता है जो टेस्टास्टरोन हार्मोन की कमी को पूर्ण करने में मदद करता है जिससे पुरूषों में लिबीडो की समस्या से कुछ हद तक राहत मिलता है। यहाँ तक कि जैतून के तेल के सेवन से महिलाओं में भी कामेच्छा का संचार होता है। अतः जैतून के तेल का संतुलित मात्रा में सेवन करें और अपने सेक्स लाइफ को संवारें।

14.1.17

किस ऋतु में क्या खाएँ?

    आज लोग पर्याप्त पौष्टिक भोजन कर रहे हैं, परंतु उसका लाभ नहीं हो रहा है। अच्छा खाने के बाद भी रोग हो रहे हैं। इसका कारण है कि भोजन लेने का तरीका और समय सही नहीं है। उन्हें यही नहीं पता कि किस समय और क्या खाना उचित है।
दही का वर्षा ऋतु में सेवन न करें। वर्षा ऋतु को पित्त का संचय काल माना गया है। इसमें स्वाभाविक रूप से पित्त बनता है। अम्ल गुण वाला होने के कारण से दही पित्त को बढ़ाता है। इसलिए वर्षा ऋतु में दही का सेवन करने से पित्तज रोग होने की संभावना बढ़ जाएगी। पित्तज रोग यानी चर्म रोग, एसिडिटी, शरीर में उष्णता बढ़ना आदि हैं। इसके अतिरिक्त रात में कभी भी दही का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। दही स्रोतों में रूकावट पैदा करने वाला है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्रोतों का निर्बाध होना आवश्यक है ताकि रस, रक्त, मांस, मेद, हड्डी, मज्जा, वीर्य आदि के पोषण की प्रक्रिया चलती रहती है। स्रोतों के बाधित होने से आम का संचय होता है जिससे भूख घटना, जुकाम, खांसी, मोटापा, मधुमेह आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। आज जो मधुमेह बढ़ रहा है, उसका एक बड़ा कारण दही का बढ़ता उपयोग है। पंजाब में इसलिए मधुमेह के रोगी अधिक पाए जाते हैं। हालांकि राजस्थान जैसे जांगल प्रदेशों में दही का प्रयोग लाभकारी है। थोड़ा बहुत स्थान का भी प्रभाव रहता है, परंतु ये सर्वसामान्य नियम हैं, इसका ध्यान रखना चाहिए।दही खाना ही हो तो उसे छाछ का रूप दे दें। इसमें थोड़ा पानी मिला लें और उसमें सैंधा या काला नमक मिला लें। फिर यह लाभकारी हो जाएगा। दही पथ्य नहीं है, छाछ पथ्य है। दही में पेट के लिए लाभकारी वैक्टीरिया होते हैं, परंतु उनका लाभ लेने और नुकसानों से बचने के लिए दही में कुछ न कुछ जैसे पानी, शक्कर, शहद, घी, आंवला या मंूग का सूप आदि कुछ अवश्य मिलाएं।
अब जानते हैं किस ऋतु मे क्या आहार होना चाहिए-



शिशिर ऋतु (जनवरी से मार्च)
इस मौसम में घी, सेंधा नमक, मूँग की दाल की खिचड़ी, अदरक व कुछ गरम प्रकृति का भोजन करना चाहिए।
कड़वे, तिक्त, चटपटे, ठंडी प्रकृति के व बादीकारक भोजन से परहेज रखें।
बसंत ऋतु (मार्च से मई)
इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूँ, चावल, मूँग, अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियाँ, केला, खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी आँवला आदि कफनाशक पदार्थों का पदार्थों का सेवन करें।
गन्ना, आलू, भैंस का दूध, उड़द, सिंघाड़ा, खिचड़ी व बहुत ठंडे पदार्थ, खट्टे, मीठे, चिकने, पदार्थों का सेवन हानिकारक है। ये कफ में वृद्धि करते हैं।
ग्रीष्म ऋतु (जून से जुलाई)
पुराना गेहूँ, जौ, सत्तू, भात, खीर, दूध ठंडे पदार्थ, कच्चे आम का पना, बथुआ, करेला, परवल, ककड़ी, तरबूज आदि का सेवन वाँछनीय है।


तिक्त, नमकीन, चटपटे, गरम व रूखे पदार्थों का सेवन न करें।
वर्षा ऋतु (अगस्त से सिम्बर)
पुराने चावल, पुराना गेहूँ, खीर, दही, खिचड़ी, व हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए। बरसात में पाचन शक्ति कमजोर रहती है अतः कम मात्रा में भोजन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
शरद ऋतु (अक्टूबर से नवम्बर)
शीत ऋतु में जठराग्नि प्रबल होती है, खाया हुआ आसानी से पच जाता है, गरिष्ठ भोजन भी पचकर शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं।
गर्म दूध, घी, गुड़, मिश्री, चीनी, खीर, जलेबी, आँवला, नीबू, जामुन, अनार, नारियल मुनक्का, गोभी तथा शक्ति प्रदान करने वाले पदार्थों का सेवन करें।
हेमंत ऋतु ( दिसम्बर से जनवरी)
सभी प्रकार के आयुर्वेदिक रसायन, बाजीकारक पदार्थ, दूध, खोए से बने पदार्थ, आलू, जलेबी, नया चावल, छाछ, अनार, तिल, जमीकंद, बथुआ तथा जो भी सेहत बनाने वाले पदार्थ हों, ले सकते हैं। वैसे भी शीत ऋतु सेहत बनाने हेतु सर्वोत्तम मानी गई है। पौष्टिक व विटामिन्स से भरपूर पदार्थ लेना चाहिए।
पुराना अन्न, मोठ, कटु, रूखे, शीतल प्रकृति के पदार्थ न लें। भोजन अल्प मात्रा में न करें

11.1.17

पेट के रोगों के घरेलू उपचार


   कमजोर पाचन तंत्र के कारण न सिर्फ भोजन पचने में परेशानी आती है, बल्कि शरीर का प्रतिरोध सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। शरीर में विजातीय तत्वों की मात्रा बढ़ने से शरीर कई अनियमितताओं का शिकार होने लगता है। यहाँ पाचन तंत्र के विकारों की जानकारी और उपचार पर लिखते हैं-
गैस की समस्या
जिनका पाचन अक्सर खराब रहता है और जो कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमें गैस की समस्या अधिक होती है। आरामतलब जीवनशैली व खान-पान की गलत आदतों के कारण यह समस्या अधिक बढ़ रही है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ भी शरीर में उन एंजाइम का स्तर कम हो जाता है, जो भोजन पचाने में मदद करते हैं। लंबे समय तक एसिडिटी से अल्सर का खतरा बढ़ता है।
कारण: वसा और प्रोटीनयुक्त भोजन की तुलना में काबरेहाइड्रेटयुक्त भोजन ज्यादा गैस बनाता है। कब्ज होने पर चूंकि भोजन अधिक देर तक बड़ी आंत में रहता है, इसलिए एसिड इसोफैगस में चला जाता है। तनाव भी एसिडिटी का एक बड़ा कारण है।
कैसे बचें: -शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से व्यायाम करें। -खाने को धीरे-धीरे और चबा कर खाएं। -दिन में तीन बार अधिक खाने की बजाए कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर खाएं।
क्या खाएं: -मौसमी फल और सब्जियां। -ऐसा भोजन जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक हो। -संतुलित और ताजा भोजन। रात्रि में गरिष्ठ व कम वसायुक्त आहार करें।
घरेलू उपचार : -लहसुन की तीन कलियों और अदरक के कुछ टुकड़ो को खाली पेट खाएं। -प्रतिदिन खाने के साथ टमाटर खाएं। टमाटर सेंधा नमक के साथ खाएं।
*खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं। खासतौर पर जिन्हें कब्ज रहता है, वे गुनगना पानी पिएं। -इलायची के पाउडर को एक गिलास पानी में उबालें। इसे खाना खाने से पहले गुनगुना पिएं।


गैस्ट्रो इसोफैगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी)
पेट की अंदरूनी परत भोजन को पचाने के लिए कई पाचक उत्पाद बनाती है, जिसमें से एक स्टमक एसिड है। कई लोगों में लोअर इसोफैगियल स्फिंक्टर (एलईएस) ठीक से बंद नहीं होता, जिससे पेट का एसिड बह कर वापस इसोफैगस में चला जाता है। इससे छाती में दर्द और तेज जलन होती है। इसे ही जीईआरडी कहते हैं। हार्ट बर्न जीईआरडी का सबसे सामान्य लक्षण है।
इसमें छाती की हड्डियों के पीछे जलन होती है और वहां से ऊपर गले तक उठती है। मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है। कई बार खाना खाने के बाद यह समस्या और बढ़ जाती है।
कारण: -शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, नियत समय पर खाना न खाना और मोटापा -गर्भावस्था और तंग कपड़े पहनने से पेट पर पड़ने वाला दबाव -मसालेदार भोजन, जूस, सॉस, खट्टे फल, लहसुन, टमाटर आदि का अधिक मात्रा में सेवन -धूम्रपान और तनाव -हर्निया, स्क्लेरोडर्मा के अलावा कुछ दवाएं जैसे एस्प्रिन, नींद की गोलियां और दर्द निवारक दवाओं का सेवन।
कैसे बचें: प्रतिदिन सुबह एक गिलास कुनकुना पानी अवश्य पिएं। भोजन के बीच लंबा अंतराल न रखें। तंग कपड़े न पहनें। रात में सोने से 2 घंटे पहले भोजन कर लें।
क्या खाएं: फलियां, कद्दू, गोभी, गाजर और लौकी जैसी सब्जियों का सेवन करें। भोजन में केला और तरबूज जरूर शामिल करें। तरबूज का रस एसिडिटी दूर करने में कारगर है। गुड़, नींबू, केला, बादाम और दही इसमें राहत देते हैं।
पेट फूलना
पेट फूलने के कई कारण हैं। गैस, बड़ी आंत का कैंसर, हर्निया पेट को फुलाते हैं। ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है, जो बेचैनी भी उत्पन्न करता है। कई बार गर्म मौसम और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण भी पेट में तरल रुक जाता है, जो पेट फुलाता है। नमक और कई दवाएं भी तरल पदार्थो को रोक कर रखती हैं, जो पेट को फुलाता है।
कैसे बचें: पोषक भोजन खाएं, जिसमें चीनी की मात्रा कम हो। ढेर सारा पानी पिएं। नमक का सेवन कम करें। खाने के तुरंत बाद न सोएं।
हमारा अच्छा स्वास्थ्य केवल पौष्टिक भोजन खाने पर निर्भर नहीं करता। यह इस पर भी निर्भर करता है कि हमारा शरीर उस भोजन को कितना पचा पाता है। अच्छी सेहत के लिए चुस्त-दुरुस्त पाचन तंत्र का होना जरूरी है। पाचन वह प्रकिया है, जिसके द्वारा शरीर ग्रहण किए गए भोजन और पेय पदार्थ को ऊर्जा में बदलता है। पाचन तंत्र के ठीक काम न करने पर भोजन बिना पचा रह जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालता है।
कब्ज
  कब्ज यानी बड़ी आंत से शरीर के बाहर मल निकालने में कठिनाई आना। यह समस्या गंभीर होकर बड़ी आंत को अवरुद्ध कर जीवन के लिए घातक हो सकती है। कब्ज एक लक्षण है, जिसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे खानपान की गलत आदतें, हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट आदि। उपचार के लिए जरूरी है पहले कारण जानें। लगातार तीन महीने तक कब्ज को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) कहते हैं।
कारण: -डाइटिंग -शरीर द्वारा मल त्यागने के संकेत को नजरअंदाज करना -हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां -थाइरॉयड हार्मोन की कमी या अधिकता से रक्त में कैल्शियम का बढ़ना -पीरियड्स या गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन का स्तर बढ़ना -मधुमेह, स्क्लेरोडर्मा और कई कैंसर -आंत की मांसपेशियों का कमजोर पड़ना।
कैसे बचें: सर्वागासन, उत्तानपादासन, भुजंगासन जैसे आसन पाचन संबंधी विकारों को दूर करते हैं। प्रतिदिन आहार में नीबू का रस शामिल करें। इससे लिवर स्वस्थ रहता है। बायोलॉजिकल क्लॉक को दुरुस्त रखने के लिए निश्चित समय पर खाना खाएं। तनावमुक्त रहें।
क्या खाएं: ज्यादा पानी पिएं। खाने में फाइबर अधिक लें। प्रोबायोटिक भोजन जैसे दही नियमित खाएं। लहसुन, केला अमरूद, अंगूर व पपीता खाएं।
घरेलू उपचार : -20 किशमिश रात भर के लिए पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट किशमिशों को चबा कर खाएं। उस पानी को भी पी लें। -सोने से पूर्व एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच ईसबगोल घोल कर पिएं। कब्ज अधिक होने पर गुनगुने दूध में दो चम्मच अरंडी का तेल मिला कर पिएं।


महत्वपूर्ण तथ्य-
*भारत में करीब 32% लोग एसिडिटी से पीड़ित हैं।
*जीईआरडी के लगभग 10% मामले ही गंभीर होते हैं, बाकी 90% से जीवनशैली में परिवर्तन लाकर छुटकारा पाया जा सकता है।
*मानव शरीर को अधिक वसायुक्त भोजन पचाने में 6 घंटे और काबरेहाइड्रेट को पचाने में 2 घंटे लगते हैं।
*उम्रदराज लोगों में युवाओं के मुकाबले कब्ज की समस्या पांच गुना होती है। बैक्टीरिया का संतुलन ना गड़बड़ाने दें हमारे पाचन तंत्र में 500 से अधिक तरह के बैक्टीरिया होते हैं, जो आहारनाल को स्वस्थ रखते हैं। तनाव, विभिन्न बीमारियां, एंटिबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल, अस्वस्थ जीवनशैली, उम्र का बढ़ना, अधिक यात्रा करना व नींद की कमी आदि कई कारण ऐसे हैं, जो शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिससे शरीर में बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं।
*एक अनुमान के अनुसार महानगरों में आरामतलबी की जिंदगी बिताने के कारण करीब 30 प्रतिशत लोगों का पेट साफ नहीं रहता।
*कब्ज की समस्या महिलाओं में अधिक होती है।
*हाल ही में हुए एक अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि जो लोग लगातार एसिडिटी कम करने वाली दवाएं लेते हैं, उनमें कूल्हे में फ्रैक्चर की आशंका 25% बढ़ जाती है।
अच्छे पाचन के लिए इन्हें कहें ना
*अधिक तले-भुने व मसालेदार भोजन का सेवन कम करें। जंक फूड व स्ट्रीट फूड आसानी से पचता नहीं है। इन्हें ढंग से चबा कर नहीं खाया जाता, जिससे पेट पर दबाव बना रहता है।
*अधिक धूम्रपान भी पाचन तंत्र में गड़बड़ी करता है।
*अधिक मसालेदार, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, टमाटर, सॉस, अचार, चटनी, सिरका आदि।
*अत्यधिक कॉफी, काबरेनेटेड ड्रिंक्स, चाय और अल्कोहल का सेवन कम करें। ये शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं।

6.1.17

पेशाब की समस्याओं की होम्योपैथिक चिकित्सा





मूत्राशय एवं गुर्दे संबंधी रोग अनेक कारणों से हो सकते हैं। विकसित देशों में इन रोगियों की संख्या अधिक पाई जाती है। गुर्दे संबंधी बीमारियां मुख्य रूप से अकारण होने वाले बुखार की स्थिति में, थकान, वजन गिरते जाना, उल्टी होना, जी मिचलाना, कमजोरी एवं रक्तहीनता की परेशानियां होने पर, गुर्दो की कार्यप्रणाली की जांच करना भी आवश्यक है, क्योंकि यह सब गुर्दो की खराबी की वजह से भी हो सकता है।
उच्च रक्तचाप, हृदय का काम करना बंद कर देना, पैरों, चेहरे एवं शरीर की सूजन गुर्दो की खराबी को परिलक्षित करने के लिए पर्याप्त हैं। बिना कारण सिरदर्द रहना, दौरे पड़ना, मूर्छा आना आदि भी गुर्दो की खराबी के कारण हो सकता है। गुर्दो में पथरी के कारण दर्द रहना, मधुमेह होना, सूजन के साथ-साथ उदर में पानी भर जाना गुर्दो की खराबी को ही परिलक्षित करते हैं। पेशाब करते समय दर्द होना, पेशाब न होना, अधिक पेशाब होना, पेशाब में खून आना, पेशाब रोक न पाना, सोते समय पेशाब निकल जाना आदि मूत्राशय से संबंधित परेशानियां हैं।

पेशाब करने में दर्द महसूस होना – 
यह अनेकों कारणों से हो सकता है – पेशाब करने की अचानक इच्छा होना, मूत्राशय के पीछे के झिल्ली की सूजन, पथरी अथवा किसी अनियमित कोशिका-वृद्धि के कारण हो सकती है। अन्य कारण, जिनकी वजह से दर्द के साथ एकदम ही पेशाब की हाजत उठती है, वे हैं –*मूत्राशय में पथरी।
* बुढ़ापे में प्रोस्टेट ग्रंथि के अनियमित रूप से बढ़ जाने के कारण।
* मूत्राशय में कैंसर।
 *स्त्रियों में गर्भाशय में गांठ बनने के कारण या पेट में बच्चा होने पर, मूत्राशय पर दबाव पड़ने के कारण।

*मूत्राशय में सूजन
 *प्रोस्टेट ग्रंथियों की सूजन।
* पेशाब के रास्ते यूरंथ्रा की सूजन।
   *क्षयरोग की वजह से गुर्दे / मूत्राशय में गांठे बनने के कारण।

पेशाब न होना –
 *उल्टियां एवं दस्त होने के कारण।
* अत्यधिक दवाइयों का सेवन, जिनसे बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता हो।
* शरीर में पानी की कमी के कारण।
* बुखार एवं पसीना आने से।



प्लाज्मा स्तर (घनत्व) घट जाने के कारण –
* उल्टियां एवं दस्त होने के कारण।
* अत्यधिक दवाइयों का सेवन, जिनसे बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता हो।
* हृदय का काम करना बंद करने की स्थिति में (संकुचन के कारण)।

गुर्दे की तात्कालिक अथवा पुरानी बीमारी के कारण
1. मूत्र नलियों का क्षरण।
2. गुर्दों की कार्टिकल सतह का क्षरण।
मूत्र-मार्ग में रुकावट जैसे पथरी इत्यादि के कारण 
पेशाब अधिक होना – .
 * मधुमेह (डायबिटीज मेलीटस)।
 *डायबिटीज इन्सीपिंडस।
* सिर में चोट लगने के कारण।
* गुर्दे की पुरानी खराबी के कारण।
 *मैनीटॉल चिकित्सा के कारण।
* पेशाब नलियों के क्षरण के ठीक होने की स्थिति में।
 *अत्यधिक पानी पीने के कारण।
पेशाब में रक्त आना 
 पोटैशियम की कमी।
 कैल्शियम की अधिकता।
1. गुर्दों 
में किसी लीजन (चोट अथवा पीड़ा) के कारण।
2. मूत्र नलियों अथवा मूत्राशय में चोट अथवा पीड़ा के कारण
3. पेशाब रोक पाने में असंयम
असत्याभास के कारण –
1. अचानक पेशाब निकल जाना।


2. मूत्राशय की निष्क्रियता।
3. मूत्राशय की ग्रीवा पर अवरोध को प्रकट करते हुए उक्त संक्रमण हो सकता हैं।
प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना – लगभग 60 या 70 वर्ष के पुरुषों में मूत्राशय के निकास द्वार पर स्थित प्रोस्टेट ग्रंथि जब आकार में बढ़ जाती है, तो मूत्र के सामान्य प्रवाह में रुकावट डालने लगती है जिससे रोगी को पेशाब बूंद-बूंद होना, मूत्र की धार दूर तक जाना, रात को बार-बार मूत्र को उठना जैसे प्रारंभिक लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। इस दशा को बहुत-से रोगी अनदेखा करके टालते रहते है और फिर एक दिन अचानक पूर्णरूपेण पेशाब रुक जाने के कारण डाक्टरों के पास आते हैं, तो कैथेटर (नली) द्वारा पेशाब उतारने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता। बार-बार कैथेटर डालने से मूत्रतंत्र में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
पेशाब रोग की होमियोपैथिक रेमेडीज-
लक्षणों की समानता के आधार पर उपरोक्त वर्णित बीमारियों एवं रोग लक्षणों के लिए निम्न होमियोपैथिक औषधियां अत्यधिक कारगर एवं सफल सिद्ध रही हैं –

हेमेमिलिस : बार-बार पेशाब की हाजत के साथ ही पेशाब में खून आना (काले रंग का रक्त स्राव, स्त्रियों में उपनियमित माहवारी) मूल अर्क में 5-10 बूंद औषधि दिन में तीन बार नियमित रूप से लेने पर आराम मिलता है। 30 शक्ति में भी ले सकते हैं।
एपिस : पेशाब में जलन व दुखन, कम मात्रा में कतरे आना, बार-बार हाजत, चुभन जैसा दर्द, गाढ़े पीले रंग का पेशाब, पेशाब की हाजत होने पर रोक पाना मुश्किल, आखिरी बूंद पर अत्यधिक जलन एवं दर्द महसूस होना आदि लक्षण मिलने पर 30 शक्ति में सेवन करना लाभप्रद रहता है।
सैबेलसैरुलाटा : रात्रि में हर वक्त पेशाब करने की हाजत रहना, पेशाब करने में दिक्कत महसूस होना, प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ी हुई, रात में सोते-सोते अपने आप पेशाब हो जाना आदि लक्षण मिलने पर मूल अर्क में 10 बूंद दवा दो-तीन बार सेवन करने पर तात्कालिक लाभ मिलता है।
जिन स्त्रियों में स्तन का विकास ढंग से नहीं हो पाता, उनके स्तन विकास के लिए उपरोक्त दवा (सैबेलसैरुलाटा) अत्यंत उपयोगी है। साथ ही ऐसी स्त्रियों को जैतून के तेल से सुबह शाम स्तन-गोलाई में मालिश भी करनी चाहिए।


लाइकोपोडियम : किसी शीशी में पेशाब को भर कर रखने से तली में रेत के लाल कण जम जाएं और पेशाब बिलकुल साफ रंग का रहे, यह इस दवा का मुख्य लक्षण है। ये लाल कण लिथिक एसिड के होते हैं जिसे यूरिक एसिड भी कहते हैं। यदि रेत कणों को शुरू में ही बाहर न निकाल दिया जाए, तो ये घनीभूत होकर गुर्दे में ही पथरी बन जाते हैं। लाइकोपोडियम 30 शक्ति की 4-6 गोलियां सुबह-शाम चूसनी चाहिए। यह गुर्दे के दर्द की भी दवा है, बशर्ते दर्द दाहिनी तरफ होता हो। पेशाब होने से पहले कमर में दर्द होना और पेशाब धीरे-धीरे होना भी लाइकोपोडियम के लक्षण हैं। कुछ दिन बाद इस की 200 शक्ति की 4 – 6 गोलियों की एक खुराक ले लेने से मूत्र पथरी बनने की सम्भावना भी समाप्त हो जाती है।
केप्सिकम : पेशाब करते समय जलन रहती है। जैसी जलन लाल मिर्च खाने से होती है, वैसी ही भयंकर जलन रोगी महसूस करता है। पाखाना करते समय भी ऐसी ही जलन रहती है। खांसी होने पर, खांसते समय रोगी के सिर में भयंकर दर्द उठता है, धसक-सी लगती है। 30 शक्ति में, दिन में 3 बार 7 दिन तक खानी चाहिए।
सारसापेरिला : पेशाब के समय असह्य कष्ट होना, गर्म चीजों के सेवन से कष्ट बढ़ना, बैठक पेशाब करने में तकलीफ के साथ-साथ बूंद-बूंद करके पेशाब उतरना, खड़े होकर करने पर पेशाब आसानी से होना, पेशाब में सफेद पदार्थ का निकलना और पेशाब का मटमैला होने की स्थिति में 6 शक्ति में लें।
केंथेरिस : मूत्र-मार्ग का संक्रमण, बार-बार पेशाब जाना, असंयम, पेशाब रोक पाने में असमर्थ, पेशाब रोकने पर दर्द, बूंद-बूंद करके पेशाब होना, पेशाब से पहले एवं पेशाब के बाद में जलन रहना, हर वक्त पेशाब की इच्छा, जेलीयुक्त पेशाब आदि लक्षण मिलने पर दवा 30 शक्ति में प्रयोग करनी चाहिए।
नाइट्रिक एसिड : थोड़ा पेशाब होना, घोड़े के बदबूदार पेशाब जैसी दुर्गंध, जलन, चुभन पेशाब में खून एवं सफेद पदार्थ (एल्ब्युमिन) आना, ठंडा पेशाब, साथ ही किसी चौपहिया गाड़ी में चलने पर सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं, तो 30 शक्ति में औषधि का सेवन करना चाहिए।
यूकेलिप्टस : गुर्दो का संक्रमण, इन्फ्लूएंजा, पेशाब में रक्त, पेशाब में मवाद आता है, किंतु जांच कराने पर यूरिया कम मात्रा में मिलता है। पेशाब की थैली (ब्लैडर) में ऐसा अहसास होता है कि पक्षाघात हो गया है, पेशाब निकालने की ताकत चुक चुकी है। यूरेथरा (मूत्रमार्ग) में संकुचन आ जाना, मूत्र-मार्ग में घातक जीवाणु संक्रमण, जिसके कारण कोशिका व ऊतकक्षय होने लगता है,पेशाब की बार-बार हाजत आदि लक्षण मिलने पर 10-20 बूंद मूल अर्क लाभ मिलने तक दिन में दो-तीन बार लेते रहना चाहिए।
इक्विजिटम : ब्लैडर (पेशाब की थैली) में हर वक्त हलका दर्द एवं भारीपन, ऐसा अहसास जैसे थैली भरी हुई है, किंतु पेशाब करने के बाद भी राहत न मिलना, बार-बार पेशाब की हाजत, साथ ही अत्यधिक दर्द होना, बूंद-बूंद कर पेशाब होना, तीक्ष्ण जलन, कटने जैसा दर्द महसूस होना, पेशाब रोक पाना असम्भव, बच्चों द्वारा रात्रि में बिस्तर में ही पेशाब कर देना, बूढ़ी औरतों में भी यही बीमारी रहती है। पेशाब में म्यूकस स्राव (चिकनाहट) गर्भावस्था के दौरान एवं बच्चा पैदा होने के बाद स्त्रियों में पेशाब होने में दिक्कत होना व दर्द होना आदि लक्षण मिलने पर मूल अर्क कुनकुने पानी में सेवन करने पर अत्यधिक लाभ मिलता है।
टेरेबिंथ : पेशाब में रक्त, रुक-रुक कर जलन के साथ पेशाब होना, गुर्दो का संक्रमण, पीठ दर्द, मूत्र-मार्ग में स्थायी जलन एवं दर्द, पेशाब में बनकशा पुष्पों (बैंगनी पुष्प) की गंध आदि लक्षण मिलने पर 6 × शक्ति में सेवन करना लाभप्रद रहता है।

31.12.16

लकवा रोग की जानकारी और घरेलू उपचार




लकवा (Paralysis)
मस्तिष्क की धमनी में किसी रुकावट के कारण उसके जिस भाग को खून नहीं मिल पाता है मस्तिष्क का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है अर्थात मस्तिष्क का वह भाग शरीर के जिन अंगों को अपना आदेश नहीं भेज पाता वे अंग हिलडुल नहीं सकते और मस्तिष्क (दिमाग) का बायां भाग शरीर के दाएं अंगों पर तथा मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं अंगों पर नियंत्रण रखता है। यह स्नायुविक रोग है तथा इसका संबध रीढ़ की हड्डी से भी है।
लकवा रोग निम्नलिखित प्रकार का होता है-
निम्नांग का लकवा- इस प्रकार के लकवा रोग में शरीर के नीचे का भाग अर्थात कमर से नीचे का भाग काम करना बंद कर देता है। इस रोग के कारण रोगी के पैर तथा पैरों की उंगुलियां अपना कार्य करना बंद कर देती हैं।
अर्द्धाग का लकवा- इस प्रकार के लकवा रोग में शरीर का आधा भाग कार्य करना बंद कर देता है अर्थात शरीर का दायां या बायां भाग कार्य करना बंद कर देता है।
एकांग का लकवा- इस प्रकार के लकवा रोग में मनुष्य के शरीर का केवल एक हाथ या एक पैर अपना कार्य करना बंद कर देता है।
पूर्णांग का लकवा- इस लकवा रोग के कारण रोगी के दोनों हाथ या दोनों पैर कार्य करना बंद कर देते हैं।


मेरूमज्जा-प्रदाहजन्य लकवा- इस लकवा रोग के कारण शरीर का मेरूमज्जा भाग कार्य करना बंद कर देता है। यह रोग अधिक सैक्स क्रिया करके वीर्य को नष्ट करने के कारण होता है।
मुखमंडल का लकवा- इस रोग के कारण रोगी के मुंह का एक भाग टेढ़ा हो जाता है जिसके कारण मुंह का एक ओर का कोना नीचे दिखने लगता है और एक तरफ का गाल ढीला हो जाता है। इस रोग से पीड़ित रोगी के मुंह से अपने आप ही थूक गिरता रहता है।
जीभ का लकवा- इस रोग से पीड़ित रोगी की जीभ में लकवा मार जाता है और रोगी के मुंह से शब्दों का उच्चारण सही तरह से नहीं निकलता है। रोगी की जीभ अकड़ जाती है और रोगी व्यक्ति को बोलने में परेशानी होने लगती है तथा रोगी बोलते समय तुतलाने लगता है।
स्वरयंत्र का लकवा- इस रोग के कारण रोगी के गले के अन्दर के स्वर यंत्र में लकवा मार जाता है जिसके कारण रोगी व्यक्ति की बोलने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
सीसाजन्य लकवा- इस रोग से पीड़ित रोगी के मसूढ़ों के किनारे पर एक नीली लकीर पड़ जाती है। रोगी का दाहिना हाथ या फिर दोनों हाथ नीचे की ओर लटक जाते हैं, रोगी की कलाई की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं तथा कलाई टेढ़ी हो जाती हैं और अन्दर की ओर मुड़ जाती हैं। रोगी की बांह और पीठ की मांसपेशियां भी रोगग्रस्त हो जाती हैं।
लकवा रोग का लक्षण-
लकवा रोग से पीड़ित रोगी के शरीर का एक या अनेकों अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं। इस रोग का प्रभाव अचानक होता है लेकिन लकवा रोग के शरीर में होने की शुरुआत पहले से ही हो जाती है। लकवा रोग से पीड़ित रोगी के बायें अंग में यदि लकवा मार गया हो तो वह बहुत अधिक खतरनाक होता है क्योंकि इसके कारण रोगी के हृदय की गति बंद हो सकती है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है। रोगी के जिस अंग में लकवे का प्रभाव है, उस अंग में चूंटी काटने से उसे कुछ महसूस होता है तो उसका यह रोग मामूली से उपचार से ठीक हो सकता है।
लकवा रोग होने के और भी कुछ लक्षण है जो इस प्रकार है-
*रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
*लकवा रोग के हो जाने के कारण शरीर का कोई भी भाग झनझनाने लगता है तथा उसमें खुजलाहट होने लगती है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
*इस रोग से ग्रस्त रोगी के मन में किसी कार्य को करने के प्रति उत्साह नहीं रहता है।
*शरीर के जिस भाग में लकवे का प्रभाव होता है उस तरफ की नाक के भाग में खुजली होती है।
साध्य लकवा रोग होने के लक्षण-


*इस रोग के कारण रोगी की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है और रोगी जिस भोजन का सेवन करता है वह सही तरीके से नहीं पचता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी को और भी कई अन्य रोग हो जाते हैं।
*इस रोग के कारण शरीर के कई अंग दुबले-पतले हो जाते हैं।
असाध्य लकवा रोग होने के लक्षण इस प्रकार हैं-
*असाध्य लकवा रोग के कारण रोगी के मुहं, नाक तथा आंख से पानी निकलता रहता है।
*असाध्य लकवा रोग के कारण रोगी को देखने, सुनने तथा किसी चीज से स्पर्श करने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
*असाध्य लकवा रोग गर्भवती स्त्री, छोटे बच्चे तथा बूढ़े व्यक्ति को होता है और इस रोग के कारण रोगी की शक्ति काफी कम हो जाती है।
*इस प्रकार के लकवे के कारण कई शरीर के अंगों के रंग बदल जाते हैं तथा वह अंग कमजोर हो जाते हैं।
*असाध्य लकवा रोग से प्रभावित अंगों पर सुई चुभाने या नोचने पर रोगी व्यक्ति को कुछ भी महसूस नहीं होता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी की ज्ञानशक्ति तथा काम करने की क्रिया शक्ति कम हो जाती है।
*असाध्य लकवा रोग से पीड़ित रोगी को और भी कई अन्य रोग हो जाते हैं।
लकवा रोग होने के निम्नलिखित कारण हैं-
*मस्तिष्क तथा रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज चोट लग जाने के कारण लकवा रोग हो सकता है।
*सिर में किसी बीमारी के कारण तेज दर्द होने से लकवा रोग हो सकता है।
*दिमाग से सम्बंधित अनेक बीमारियों के हो जाने के कारण भी लकवा रोग हो सकता है।
*अत्यधिक नशीली दवाईयों के सेवन करने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
*बहुत अधिक मानसिक कार्य करने के कारण लकवा रोग हो सकता है।
*अचानक किसी तरह का सदमा लग जाना, जिसके कारण रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक कष्ट होता है और उसे लकवा रोग हो जाता है।


*गलत तरीके के भोजन का सेवन करने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
*कोई अनुचित सैक्स संबन्धी कार्य करके वीर्य अधिक नष्ट करने के कारण से लकवा रोग हो जाता है।
*अधिक शराब तथा धूम्रपान करने के कारण भी लकवा रोग हो जाता है।
*अधिक पढ़ने-लिखने का कार्य करने तथा मानसिक तनाव अधिक होने के कारण लकवा रोग हो जाता है।
लकवा रोग के घरेलू उपचार-
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपना उपचार कराते समय अपना मानसिक तनाव दूर कर देना चाहिए तथा शारीरिक रूप से आराम करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को योगनिद्रा का उपयोग करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को पूर्ण रूप से व्यायाम करना चाहिए जिसके फलस्वरूप कई बार दबी हुई नस तथा नाड़ियां व्यायाम करने से उभर आती हैं और वे अंग जो लकवे से प्रभावित होते हैं वे ठीक हो जाते हैं।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए। इसके बाद रोगी का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से कराना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भाप-स्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद *धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
*रोगी व्यक्ति का रक्तचाप अधिक बढ़ गया हो तो भी रोगी को गर्म चीजों को सेवन नहीं करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए अंगूर, नाशपाती तथा सेब के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को कुछ सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से *अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।

*लकवा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए उसके पेट पर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए तथा उसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में लकवा रोग ठीक हो जाता है।
*लकवा रोग से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त पीले रंग की बोतल का ठंडा पानी दिन में कम से कम आधा कप 4-5 बार पीना चाहिए तथा लकवे से प्रभावित अंग पर कुछ देर के लिए लाल रंग का प्रकाश डालना चाहिए और उस पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से रोगी का लकवा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

26.12.16

बेदाग गोरेपन के लिए आसान उपाय



   क्‍या आप अपने चेहरे को गोरा बनाने के लिये विभिन्न बाजारू उत्‍पादों का प्रयोग करते हैं? अगर ऐसा है तो, अब आपको ऐसा करने की आवश्‍यकता नहीं है क्‍योंकि हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्‍खे और उपाय बताएंगे जिनसे आप गोरापन बरकरार रख सकते है।
सर्दियों में हमारी त्वचा अतिरिक्त देखभाल चाहती है लेकिन इसके लिए ब्यूटी पार्लर जाने का न तो अधिक समय होता है और न ही बजट। फिर त्योहारों और शादियों के मौसम में त्वचा दमके ऐसी ख्वाहिश भला किसकी नहीं होगी। तो अगर आप भी इस मौसम में अपनी त्वचा का खास ध्यान रखना चाहती हैं तो क्यों न अपने घर पर ही कुछ ऐसे नुस्खे ट्राइ करें जिससे आपकी त्वचा भी दमके और जेब भी ज्यादा ढीली न हो।
चेहरे से ब्लैकहेड्स और डेड सेल हटाने के लिए चेहरे की स्क्रबिंग बहुत जरूरी है। ऐसे में बेसन से आप अपनी जरूरत के हिसाब से मनचाहा स्क्रब तैयार कर सकती हैं। अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो बेसन में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर हल्की और स‌र्कुलर मसाज करें। वहीं अगर आपकी त्वचा ड्राइ है तो बेसन में थोड़ी मलाई मिलाकर चेहरे की स्क्रबिंग करें। झुर्रियों और झा‌इयों से छुटकारे के लिए बेसन में सेब का रस मिलाकर स्क्र
हल्दी पैक
त्वचा की रंगत को निखारने के लिए हल्दी एक अच्छा तरीका है। पेस्ट बनाने के लिए हल्दी और बेसन या फिर आटे का प्रयोग करें। हल्दी में ताजी मलाई, दूध और आटा मिला कर गाढा पेस्ट बनाएं, इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 10 मिनट लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।बिंग करें। संतरे के गूदे से भी चेहरे की स्क्रबिंग कर सकती हैं।
*गाजर का जूस आधा गिलास खाली पेट सुबह लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है।
गुलाब जल
यह आपके चेहरे को टोन कर के पोषण पहुंचाएगा। रोज वॉटर को मिल्‍क के साथ लगाएं। अच्‍छा होगा कि आप इसे रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। इससे त्‍वचा ब्राइट बनेगी।
चिरौंजी का पैक


गोरी रंगत के लिए मजीठ, हल्दी, चिरौंजी का पाउडर लें इसमें थोड़ा सा शहद, नींबू और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बांहों पर लगाएं और एक घंटे के बाद चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का रंग निखर जाएगा।
चंदन
गोरी रंगत देने के अलावा यह एलर्जी और पिंपल को भी दूर करता है। पेस्ट बनाने के लिए चंदन पाउडर में 1 चम्मच नींबू और टमाटर का रस मिलाएं और पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन में अच्छी तरह से लगाकर थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से धो लें। पेट को हमेशा ठीक रखें, कब्ज न रहने दें।
हनी आल्मड स्क्रब
बादाम भी रंगत निखारने का काम करता है। रात को 10 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उसे छील कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में थोड़ा सा शहद मिलाएं और इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाकर स्क्रब करें।
*अधिक से अधिक पानी पीएं।
बेसन का उबटन
बेसन 2 चम्मच, सरसों का तेल 1 चम्मच और थोड़ा सा दूध मिला कर पेस्ट बना लें। पूरे शरीर पर इस उबटन को लगा लें। कुछ देर बाद हाथ से रगड कर छुडाएं और स्नान करें। त्वचा गोरी व मुलायम हो जाएगी।
मसूर दाल पैक
मसूर की दाल का पाउडर लें इसमें अंडे की जर्दी, नीबू का रस व कच्चा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। रोज इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं, सूखने पर ठंडे पानी से धो लें। चेहरे का रंग निखर जाएगा।
*चाय कॉफी का सेवन कम करें।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा और पानी मिला कर पेस्‍ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट के लिये लगाएं। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाने से पहले मुंह को फेस वॉश से धो लें।
रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सोंफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है।
*चेहरे को बेदाग बनाने और सर्दियों में निखार के लिए कुछ फलों और घरेलू चीजों का उपयोग कर सकते हैं। आलू उबालकर उसमें नींबू या आलूबुखारे के रस को मिलाकर अपना फ्रूट पैक तैयार कर लें। इसकी मसाज से चेहरे के दाग कम होंगे और त्वचा का रंग निखरेगा।
एलोवेरा जैल
ऐलोवेरा जैल आपकी त्‍वचा को गोरा, साफ और नम बनाएगा। इसे चेहरे और गर्दन पर 30 मिनट के लिये लगाएं।
आम का छिलका
थोड़े से आम के छिलको को दूध के साथ पीस कर पेस्‍ट बना लें। फिर इसे चेहरे और गर्दन पर 15 मिनट तक लगाने के बाद पानी से धो लें। इससे सन टैन मिट जाएगा और चेहरा गोरा बन जाएगा।


*एक बाल्टी गुनगुने पानी में कुछ ठण्डे या दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है।
अनार का रस फायदेमंद
अगर आपकी त्वचा ड्राइ या नॉर्मल है तो दो छोटे चम्मच अनार के रस व चुटकी भर हल्की को मलाई में मिलाकर फेंट लें। इसे चेहरे पर लगाकर 15 से 20 मिनट तक छोड़ दें। फिर पानी से साफ करें। त्वचा यकीनन दमकेगी।
दूध-केला
पके हुए केले को थोड़े से दूध के साथ पेस्‍ट बना कर चेहरे पर लगाएं। 20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें।
तैलीय त्वचा के लिए ऑरेंज पैक
ऑयली स्किन के लिए ऑरेंज पैक अच्छा ऑप्शन है। संतरे के छिलकों को सुखाकर मिक्सर में पीस लें। इस पाउडर को गुलाबजल के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर छोड़ दें। अब चेहरा धोकर हल्का मॉश्चुयराइजर लगाएं।
आंवले का मुरब्बा रोज खाने से दो-तीन महीने में ही रंग निखरने लगता है।
सूरजमुखी बीज
थोड़े से सूरजमुखी बीज को रातभर दूध में भिगो कर रख दें। फिर सुबह इसमें हल्‍दी और केसर के कुछ धागे डाल कर पेस्‍ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा गोरा बन जाएगा।

16.12.16

पेट की फालतू चर्बी से कुछ ही दिन मे मुक्ति पाएँ

   

अगर हमारे शरीर पर अतिरिक्त  चर्बी या एक्स्ट्रा फेट होती है तो इससे हमारे पूरे शरीर की लुक ही खराब हो जाती है और यह न केवल आपके शरीर की सुंदरता को खराब करती है बल्कि बहुत सारी बीमारियों को भी बुलावा देती है|आज के समय में हमारी लगभग सभी बीमारियों का कारण हमारा मोटापा ही है क्योकि आप ये भली भांति जानते है कि सभी बीमारियों की जड़ हमारा पेट होता है और अगर हमारा पेट मोटा होगा या उस पर चर्बी अधिक होगी तो विभिन्न प्रकार की बीमारिया जन्म लेती है| इसीलिए हमे हमारे पेट की चर्बी का तुरन्त इलाज करना चाहिए जिससे हम सब बीमारियों से बच सके |
    समझने वाली बात है कि हमारे पेट के ऊपर चर्बी या मोटापे का मुख्य कारण है शारीरिक काम का कम होना है आज के समय में हमारा लगभग सब प्रकार का काम मशीनों से हो जाता है तो शरीरिक गतिविधि बहुत ही कम हो गयी है अगर हम खुद को फिट रखना चाहते है तो हमे सक्रिय रहना चाहिए और हर रोज व्यायाम करना चाहिए जिससे की हम फिट रह सके I
    व्यायाम करने के साथ साथ हमे अपने खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए जंक फ़ूड का सेवन नहीं  करना चाहिए और हर रोज 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए जिससे की हम हमेशा फिट रह सके और सभी प्रकार की बीमारियों से बचे रहे| 
हम बताते हैं  एक अचूक असर नुस्खे के बारे में जो आपके पेट की चर्बी को समाप्त  कर देगा| 


इस औषधि को तैयार करने मैं हम जिस सामग्री का प्रयोग कर रहे है सभी  आपको आसानी से अपने घर पर ही मिल जाएगी आपको  बाहर जाने की आवश्यकता नही है
सामग्री- 
1. शहद एक टेबल स्पून
2. धनियाँ एक पाव
3. अदरक का पेस्ट एक टेबल स्पून
4. खीरा एक
5. एलो वेरा जैल एक टेबल स्पून
6. निम्बू का रस एक टेबल स्पून
7. पानी गिलास
तैयार करने की विधि
इस औषधि को तैयार करना बिलकुल ही आसान है आपको करना बस इतना है की सबसे पहले सभी सामग्री को लेकर अच्छी तरह से साफ़ कर ले अब कोई ब्लेंडर ले या आप मिक्सी का यूज़ भी कर सकते है अब सारी सामग्री को ब्लेंडर में डाल कर ब्लेंड कर लें | अब आपकी औषधि तैयार है आपके सेवन करने के लिए I
सेवन विधि- 
इस ड्रिंक का सेवन आपको रात को सोने से पहले करना है

12.12.16

हरी मटर खाने के स्वास्थ्य और सौन्दर्य लाभ

   

सर्दियां आते ही हरी सब्जियों का मौसम शुरू हो जाता है जो पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर होती है। हरी फलियों और हरी मटर की पैदावार सर्दियों में सबसे ज्‍यादा होती है। कई लोगों को भ्रम होता है कि मटर में पोषक तत्‍व नहीं होते है लेकिन यह गलत है। हरी मटर, पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर होती है
हरी मटर काफी स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों में से एक है और यह कच्चा खाने में भी काफी स्वादिष्ट लगते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंटस, विटामिन्स, मिनरल्स (anti-oxidants, vitamins, minerals) और अन्य कई स्वास्थ्यवर्धक तत्व भरे हुए हैं जो रोगों का निदान करते हैं और आपके स्वास्थ्य में निखार लाते हैं। आप हमेशा ही स्वाद तथा पोषक मूल्य बढ़ाने के लिए अपने भोजन में हरे मटर डाल सकती हैं, पर इसे कच्चा खाना और भी ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक साबित होता है। जब मटर ताज़े और कच्चे होते हैं, तब ये ज्यादा स्वास्थ्यकर होते हैं। अतः आप इनका कच्चा सेवन करके भी स्वस्थ रह सकते हैं
शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाता है



मटर शरीर में मौजूद आयरन, जिंक, मैगनीज और तांबा शरीर को बीमारियों से बचाता है। मटर में एंटीआॅक्सीडेंट होता है। जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ताकि शरीर बीमारियों से मुक्त रह सके
मटर वजन निंयत्रित करता है
मटर में मौजूद गुण वजन को नियंत्रित करते हैं। मटर में लो कैलोरी और लो फैट होता है। हरी मटर में हाई फाइबर होता है जो वजन को बढ़ने से रोकता है। यदि वजन कम करना चाहते हैं तो अपने भोजन में हरी मटर का इस्तेमाल अधिक से अधिक करें।
आजकल कई डायटीशियन भी फूड चार्ट में हरी मटर को शामिल करने की सलाह देते है। एक शोध में पता चला है कि हरी मटर में काउमेस्‍ट्रोल होता है जो कि एक प्रकार का फाइटोन्‍यूट्रीयन्‍ट होता है, अगर शरीर में इसकी संतुलित मात्रा होती है तो कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि अगर आप हर दिन हरी मटर का सेवन करें तो पेट का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
बढ़ाए चेहरे की चमक
मटर का प्रयोग चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यह प्राकृतिक स्क्रब है। पानी में थोड़े से मटरों को उबाल लें और फिर उन्हें कूट पीसकर उनका लेप यानि पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर रगडें और 15 से 20 मिनट के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। यह चेहरे की खोई हुई चमक को वापस लाता है। और चेहरे की गंदगी को दूर करता है। मटर का उबटन चेहरे से झांई और धब्बों को मिटाता है।
दूध में भुनी हुई मटर के दानों और नारंगी के छिलकों को पीसकर उबटन तैयार करें और इसे चेहरे पर मलें। यह आपके रंग और रूप को संवारेगा।
भूल जाने की बीमारी को घटाएं :
कई लोगों को अल्‍जाइमर की समस्‍या होती है, ऐसे में वह रोजमर्रा की बातें भी भूल जाते है। हरी मटर के नियमित सेवन से यह समस्‍या दूर हो जाती है। हरी मटर को खाने से ऑस्ट्रियोपोरोसिस और ब्रोंकाइटिस आदि से लड़ने में सहायता मिलती है।
दिल की देखभाल करें :
हरी मटर के स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक गुणों में एक गुण यह भी है कि इसके सेवन से हार्ट की बीमरियां कम होती है। इसमें एंटी - इनफ्लैमेट्टरी कम्‍पाउंड होते है और एंटी - ऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होता है। इन दोनों ही कम्‍पाउंड के कॉम्‍बीनेशन से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।



ज्यादा उम्र  मे भी जवां रखे :
हरी मटर में भरपूर मात्रा में एंटी - ऑक्‍सीडेंट होते है जो शरीर को चुस्‍त - दुरूस्‍त रखने में सहायक होते है। इसके अलावा, हरी मटर में फ्लैवानॉड्स, फाइटोन्‍यूटिंस, कैरोटिन आदि होते है जो शरीर को हमेशा यंग और एनर्जी से भरपूर बनाएं रखता है। ये वाकई में हरी मटर का सबसे दिलचस्‍प गुण है।
गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद
मटर में मौजूद फालोक एसिड जो पेट में भू्रणं की समस्याओं को दूर करता है साथ ही गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषण देता है। गर्भवती महिलाओं को अपने खाने में हरी मटर को जरूर शामिल करना चाहिए।
ब्‍लड़ शुगर लेवल को कंट्रोल में करना :
हरी मटर में उच्‍च फाइबर और प्रोटीन तत्‍व होते है जो शरीर में ब्‍लड़ सुगर की मात्रा को नियंत्रित करते है।
दे सूजन और जलन में राहत
सर्दियों के समय में हाथों में होने वाली सूजन में मटर के काढ़े को हल्का गरम करके उसमें थोडी देर के लिए उंगलियों को डालकर रखने से सूजन कम होती है।
यदि सूजन शरीर में है तो मटर के उबले हुए पानी से नहाने से शरीर की सूजन खत्म होती है।
यदि किसी वजह से त्वचा जल गई हो तो हरी मटर का पेस्ट लगा लें। यह तुरंत राहत देती है।


1.12.16

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी


शंखपुष्पी के गुण:-
यह दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन (chemical) ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति (memory power), कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली (increase the sweetness in voice), मंगलकारी , अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट (destroying the mental problems) करने वाली होती है l
परिचय : —-मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l
फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (1) सफ़ेद फूल वाली (2) लाल फूल (red flowers) वाली और (3) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है |
दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी:–प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी एक्ससी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l
इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l
 शुक्रमेह :—-शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च (black pepper powder) आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानीके साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l
(3) ज्वर में प्रलाप :—तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थितिमें शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभहोता है और नींद भी अच्छी आती है l
 उच्च रक्तचाप :–उच्च रक्तचाप के रोगी ] को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l
 बिस्तर में पेशाब :—-कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत (habit) नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहदमें मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें l

25.11.16

घर से चूहे भगाने के कारगर तरीके



अधिकांश घरों में आजकल चूहे देखने को मिल ही जाते हैं. आजकल चूहों की समस्या होने एक आम बात है. लेकिन घर में चूहों के पनपने के कारण कई बार अनाज के साथ ही कपड़ों और अन्य मूल्यवान चीजों का नुकसान होने लगता है. आम तौर पर चूहे झूठे छोड़े गए खाद्य पदार्थों, अनाज, चावल इत्यादि खा कर जीवित रहते हैं.चूहे खुद को आस पास के वातावरण के अनुकूल बनाने में माहिर होते हैं. घर मे चूहे होने के कारण घर में तो नुकसान होता ही है साथ ही इनसे अनेक बीमारियों का खतरा भी रहता है. जिसमे सबसे खतरनाक संक्रामक रोग है रबिस. इस बीमारी से अनेक लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
इस समस्या को दूर करने के लिए लोग बाजार में मिलने वाली अनेक दवाओं का प्रयोग करते हैं. लेकिन इन दवाओं का कभी घर में खतरा भी हो सकता है इस समस्या के समाधान के लिए आप कुछ घरेलु उपायों की मदद ले सकते हैं. यह घरेलू उपाय अत्यन्त सरल तथा लाभदायक होते हैं.
पुदीना का उपयोग
 
यदि चूहे ने घर में बिल बन लिया हो तो उसके लिए पुदीने का प्रयोग करना लाभदायक होता है. चूहे पुदीना की गंध बर्दाश्त नहीं कर पाते. इसके लिए आप पुदीना तेल में कपास का टुकड़ा डुबाकर उनके बिल के पास रख दें. इससे चूहे घर से भाग जायेंगे.
बाल का प्रयोग
घर में चूहे होने के कारण घर में आतंक मचा रहता है. जिसके कारण हमें अनेक समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समयसा को दूर करने के लिए बालों का प्रयोग करना चाहिए. चूहे मानव बाल की दृष्टि बर्दाश्त नहीं कर सकते और अनेक बार चूहे बाल निगल लेते हैं जिसके कारण चूहे घर से भाग जाते हैं
बिल्ली पालें
घर में चूहे होने के कारण हमें अनेक समस्याएं होने लगती हैं. इस परेशानी से निपटने के लिए बिल्ली को घर में पाल लें. घर में बिल्ली को पालने से घर में चूहे समाप्त हो जाते हैं. बिल्ली चूहों की प्राकृतिक दुश्मन होती है. जहाँ बिल्लियाँ होगी वहां चूहों के होने का खतरा नहीं रहता.
पिपरमिन्ट का प्रयोग -
पिपरमिन्ट को आमतौर पर पुदीना कहा जाता है. पुदीने के कुछ फूल या पत्तियों को लें. अब इन पत्तियों को कूटकर घर के दरवाजे में रख दे. कुछ दिन इस विधि का प्रयोग करे. घर से भाग जाते हैं. 
चूहा जाल का प्रयोग
चूहे को कैद करने का जाल बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है. चूहों की समस्या होने पर आप एक चूहा जाल खरीद लें. अब इस जाल में कोई रोटी या अन्य खाद्य समग्री का टुकड़ा रखें. जब भी चूहा इस टुकड़े को खाने जायेगा तो उस जाल में फस जायेगा. अब इस फसे हुए चूहे को घर से कहीं दूर फेक दें, ताकि वह दुबारा घर में ना आ सके.

बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण नुस्खे




बालों के गिरने -झड़ने और टूटन की सबसे बड़ी वजह होती है तनाव यह माना जाता है की तनाव के कारण हमारे बालो का बढ़ने का चक्र रुक जाता है अगर हमारा तनाव बढ़ जाता है तो बालों का बढ़ना तो रुक ही जाता है |एवं बालो का गिरना या टूटना शुरू हो जाता है इसलिए यदि हम बालों को तेजी से बढ़ाना चाहते है तो हमे चाहिए कि हम तनाव से दूर रहे ओर हमेशा प्रसन्न रहने की कोशिस करे|

 आजकल की भागदौड़ और व्यस्त  लाइफस्‍टाइल की वजह से आखिर कितनी ऐसी औरते हैं , जो अपने बालों को लंबा करने की सोंच सकती हैं? लंबे बाल पाने के लिये खान-पान और उनकी केयर करने की आवश्‍यकता होती है, जो कि हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन अगर आप हमारे बताए गए इन तरीको को आजमाएंगी तो आपके भी बाल लंबे और घने हो सकते हैं।
बालो के बढ़ने की गति हमारी खानपान की आदतों ,बालों की देख भाल  और बहुत से अन्य कारणों पर निर्भर करती है |आज हम आपके लिए कुछ उपाय लेकर आये है जिनका प्रयोग करके आपके बाल तेजी से बढ़ने लगेंगे तो आइये जानते है उन उपायो के बारे मे जिनका प्रयोग करके आपके बाल घने काले और तेजी से बढ़ने लग जायेंगे # 
*बालों में तेल लगाएं अगर बाल बढाना है तो उसमें तेल लगाना होगा। बालों में तकरीबन 1 घंटे के लिये तेल लगा रहने दें जिससे बालों की जड़ तेल को पूरी तरह से सोख ले। सिर पर हल्‍के गरम तेल से मालिश करें और गरम पानी में डुबोई हुई तौलिये से सिर ढंक कर भाप लें। # 
*नीम और बेर के पत्तो को  पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा ले और इसके 3 घण्टो के बाद सिर को पानी से धो ले इसके प्रयोग से बालों का झड़ना कुछ ही दिनों में बन्द हो जायेगा और आपके बाल लम्बे भी होंगे #
* बादाम का तेल :-जल्‍दी बाल बढाने के लिये कोई भी तेल कारगर नहीं होता। इसके लिये सबसे अच्‍छा तेल बादाम का होता है। बादाम के तेल में विटामिन इ भारी मात्रा में पाया जाता है। 
* रोजाना धुलाई :-जिस तरह से बालों में तेल लगाना जरुरी है उसी तरह से बालों की सफाई और धुलाई भी बहुत जरुरी है। अगर आपके बाल लंबे हैं तो उन्‍हें हफ्ते में दो बार जरुर धोएं। आपके सिर की सफाई बहुत जरुरी है जिससे जड़ों को सांस लेने की जगह मिल सके।  
*सीताफल के बीज और बेर के पत्तो को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर बालों की जड़ो पर लगा ले और कुछ समय के अड़ अपने बालों को धो ले कुछ ही दिनों में आपको इसका असर देखने को मिलेगा 
* 250 ग्राम अमरबेल को ले और साथ में 3 लीटर पानी भी ले इस 3 लीटर पानी में अमरबेल को उबाले जब यह पानी उबलकर आधा रह जाए तो इसे आग से उतार ले और अपने बालों को इस पानी से धोये आपके बाल लम्बे होने लग जायेंगे 
* नीम ,मेहँदी और ग्रीन टी आदि  ऐसे हर्ब्स है जिनको बालो पर लगाने से बाल काले, घने और लम्बे होते है इन सब में मेहँदी सबसे अच्छी है क्योकि यह बालों की जड़ो को पोषण देती है और इसके प्रयोग से बाल काले ,घने और चमकदार बनते है|

22.11.16

नारियल तेल और बेकिंग सोडा का ये प्रयोग आपको बना देगा 10 साल जवां

|स्वच्छ, सुंदर त्वचा हर औरत का सपना होता है। और इस के लिए बाज़ार में कैमिकल युक्त फेशिअल क्रीमो की भरमार है | जिस से बहुत सारे साइड इफैक्ट हो सकते हैं इसी लिए आज हम आप के लिए एक ऐसा फेशिअल पैक लेकर आये हैं जो आपकी त्वचा को 10 साल तक जवां बना देगा | इसमें केवल दो घरेलु समग्रिओं का उपयोग होता जो हैं बेकिंग सोडा और नारियल का तेल आप इस प्राकृतिक फेस क्लीनर का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो आप आसानी से मुँहासे, दाग धब्बे ,चेहरे की सिअहियाँ और कई कॉस्मेटिक समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। साथ ही, यह प्रभावी ढंग से त्वचा की मृत कोशिकाओं, अतिरिक्त sebum और मलबे को हटाने अद्भुत काम करता है। इसके इलावा ये त्वचा के छिद्रों की सफाई , मुहासों से छुटकारा और blackheads को रोकने में बहुत ही कारगर है | इस औषधि का इतना प्रभावशाली होने की वजह इस में शामिल समग्रिओं का मिश्रण हैं बेकिंग सोडा त्वचा के ph लेवल को संतुलित करता है जिस से मुहासों को रोकने में मदद मिलती है दूसरी ओर, नारियल तेल अद्भुत जीवाणुरोधी, चिकित्सा और मॉइस्चराइजिंग गुणों से भरपूर है । यह त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार के लिए बेहद फायदेमंद है।

सामग्री : 2 चमच शुद्ध नारियल तेल 1 चमच बेकिंग सोडा
दिशा-निर्देश : 1. एक छोटी कटोरी में सामग्री ब्लेंड कर के एक पेस्ट की तरह मिश्रण बना लें ।
2. अपने चेहरे पर इस पेस्ट को धीरे धीरे हलके हाथों से रगड़ें |
3. लगभग 5 मिनट के लिए ऐसा करें |
4. इसके बाद गुनगुने पानी से इसे साफ़ कर दें
5. नारियल तेल आपकी त्वचा को हाइड्रेट कर देगा इस लिए बाद में moisturizer का उपयोग करने की जरूरत नहीं है।

18.11.16

बालों को घने काले और लम्बे बनाने के चमत्कारी उपाय




कुछ सालों पहले तक लोगों के सिर पर काफी बाल होते थे। यह वह समय था जब सौन्दर्य उत्पादों और रसायनों का प्रयोग ना के बराबर किया जाता था। तब रास्ते में प्रदूषण भी काफी कम होता था। पर आजकल चीज़ें काफी बदल गयी हैं। लोग अब निरंतर बालों के झड़ने और पतले होने की शिकायतें करते पाए जाते हैं। इसके पीछे उन रसायनों का हाथ है जो बालों की मज़बूती और घनत्व को काफी नुकसान पहुँचता है। बालों के स्टाइलिंग (styling) के उत्पादों का ज़्यादा इस्तेमाल करने पर भी कंघी करते वक़्त बाल बाहर निकल सकते हैं। पर कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप आसानी से बालों का घनत्व बढ़ा सकते हैं।
स्त्री और पुरुष के लिए बाल सुंदरता का प्रतीक होता है। सुंदर घने बाल अपने आप मे विश्वास जगाता है। कम बालो के कारण शर्म महसूस होती है और आत्मविश्वास की कमी भी होती है जो की मानसिक तनाव का कारण बनती है। बाजार मे बहुत सारे उत्पाद उपलब्ध है जो की बालो को घना बनाने मे आपकी मदद करता है। बालो की चमक बनाए रखने के लिए आपको ज़रूरत होती है सही उत्पाद के चुनाव और उपयोग करने के तरीके की। प्राकृतिक रूप से बालो को घना बनाने के लिए कुछ नुस्खे नीचे बताए गए है।
जब बात खासकर महिलाओं की हो रही हो तो घने बाल काफी खूबसूरत माने जाते हैं। पुराने ज़माने में शादियों के समय लड़के वाले लड़की के बाल की जाँच करते थे कि वे घने, काले तथा सुन्दर हैं या नहीं। अगर बाल सुन्दर हों तो लड़के के घरवाले भी लड़की का खुले दिल से स्वागत करते थे। पर कुछ सालों के बाद लम्बे बालों का चलन कम हो गया और मध्यम आकार के बालों का चलन शुरू हो गया। अब बालों का घना होना और भी ज़्यादा आवश्यक हो गया है। कुछ आसान नुस्खों से आप बालों का घनत्व बढ़ा सकते हैं।
आलू का रस
आलू का रस बालों के झड़ने से लड़ने और घना, लम्बा करने में मदद करता है। आप कुछ आलू का रस का उपयोग करें।
कैसे करें: अपने सिर पर आलू का रस का प्रयोग करें और आप सिर को धोने से पहले 15 मिनट के लिए छोड़ दें। आलू में मौजूद विटामिन बी आपके बालों को और मजबूत बनाता है।
बालों की जड़ो मे रोज तेल से मालिश करना चाहिए जो की रक्त संचार को बढ़ाता है और आपके बालो की जड़ो को मजबूत भी करता है। बालो की जड़ो मे गर्म तेल से और गोलाई मे मालिश करे। जोजोबा का तेल और नारियल का तेल बालो के लिए सबसे अच्छा तेल होता है। रूसी दूर करने के लिए मेहंदी का तेल लगाए | तेल लगाने के बाद और बालो को धोने से पहले बालों को गर्म पानी के तोलिये से 15 मिनिट तक ढक कर रखे, फिर बालो को धोए। ये आपके बालो को चमक देगा | रूसी से बचने के लिए हफ्ते मे 4 बार बालो को धोए और सिर मे सफाई बनाए रखे।
अमला
अमला विटामिन सी का एक भंडार है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
कैसे करें: आंवला पाउडर और नीबू के रस को बराबर भागों मिलाएं। बालों पे इस मिश्रण को लगाना शुरू करें। इसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ धो ले और सूखने दें

बालों के झड़ने से रोकने और घने बाल पाने का सबसे आच्छा तरीका है संतुलित आहार लेना। ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे की विटामिन और पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन ए, सी, तांबा(कॉपर), लोहा(आयरन), ज़िंक मौजूद हो।हमेशा हाइड्रेटेड रहना चाहिये जो की बालो को घना बनाए रखता है इसलिए शरीर मे पानी कमी नही होने देना चाहिये और भरपूर मात्रा मे पानी का सेवन करना चाहिये।
नींबू का रस
नींबू का रस भी आपके बालों को लंबा घना तथा स्वस्थ रखने में सहायक होता है ।
कैसे करें:
दो चम्मच नींबू का रस को थोड़े पानी के साथ मिलाकर लगा ले । 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं।
इस प्रकार बालों की देखभाल करें।
प्याज

प्याज रक्त के परिसंचरण को बढ़ावा और सिर को साफ रखने में मदद करता हैं।
कैसे करें: छोटे टुकड़ों में प्याज काटें और रस निचोड़ ले। अपने सिर पर इस रस को लगा ले। 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं।
कॅनडीशनर आपके बालों को कोमल और चमकीला बनता है बालो को धोने के बाद कॅनडीशनर लगाए और ध्यान रहे कॅनडीशनर बालो की जड़ो से 1-2 इंच की दूरी से लगाए। कॅनडीशनर को बालो की जड़ो मे नही लगाना चाहिये।
अंडे :
नियमित रूप से प्रोटीन बालों को मजबूत और घना बनाने के लिए आवश्यक है।
एक या दो अंडे ले लो और इसे ठीक से मिला लो। गीले बालों पर अंडा लगाना आरम्भ करे और 30 मिनट तक इसे करते रहें। इसके बाद गुनगुने पानी और शैम्पू के साथ अपने बालों को धो लें। आप इसे एक सप्ताह में दो बार इसका उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार बालों की देखभाल करें।
अंडा बालो की जड़ो को मजबूती प्रदान करता है और बालो घना और लंबा भी। एक अंडे को फोड़कर इसका पीला और सफेद भाग अलग कर ले और गीले बालो पर मास्क की तरह 1 घंटे तक लगाकर रखे फिर गर्म पानी या शैम्पू से धो दे। अब आपके बाल घने और चमकदार हो जाएगे। हफ्ते मे 2 बार इस नुस्खे का पालन करे।
जैतून का तेल
गर्म तेल के साथ अपने बालों और सिर की मालिश 45 मिनट करें। इसके बाद शैम्पू का उपयोग कर अपने बाल धो लें। इससे आपके बाल स्वस्थ होंगे और इसमें एक अद्भुत चमक नजर आएगी ।


नारियल का तेल
नारियल का तेल बालों के लिए अच्छा है और इससे आपको घना, मोटा और लम्बा बाल पाने के लिए मदद मिलती है। नारियल के तेल में प्रोटीन मौजूद होते हैं।घना, मोटा और लम्बा बाल प्राप्त करने के लिए नारियल तेल का उपयोग करे, खोपड़ी और बालों में गरम नारियल तेल का मालिश एक गर्म तौलिया के साथ करें। पचास मिनट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दे और फिर एक हल्के शैम्पू से धो लें।
*मेथी के दाने हमेशा रसोई घर मे मिल ही जाते है क्यो ना आप इनका इस्तेमाल करे। रातभर मेथी के दानो को पानी मे भिगोकर रखे फिर सुबह इसे पीस ले। बालो मे 1 घंटे तक लगाकर रखे फिर पानी से धो ले। हफ्ते मे 2 बार लगाए जिससे आप पाएगे काले और लम्बे घने बाल।
संतरे का रस
संतरे का रस भी मोटा बालों को घना करने के लिए एक बहुत अच्छा तरीका ह। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
संतरे का रस और सेब का एक मिश्रण स्वाभाविक रूप से घना बाल पाने के लिए एक अच्छा तरीका है। एक सप्ताह में दो बार, तीस मिनट के लिए अपने बाल में लगाए। यह अच्छी तरह से मिश्रित होना चाहिए।
गुडहल का फूल बालों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। नारियल और शीशम के तेल मे गुडहल के फूल का घोल मिलाए और बालो की ग्रोथ के लिए बालो मे 15 मिनिट तक लगाकर रखे फिर बालो को धो ले।
घने बालो के लिए उपाय – अरंडी का तेल (Castor oil)
यह एक चिपचिपा तेल है जिसकी गंध शायद आपको पसंद ना आए। पर ज़्यादातर लोगों का यह मानना है कि बालों को घना करने के लिए यह सबसे बेहतरीन तेल है। दूसरे तेलों के मुकाबले यह तेल चिपचिपा होता है जिससे कि बालों में अच्छे से लग जाता है और बालों का टूटना रोक देता है। इस तेल में फैटी एसिड एवं विटामिन इ के गुण होते हैं जो बालों को बढ़ाने में सहायता करते हैं। अगर आपको लगता है कि यह तेल ज़्यादा गाढ़ा और चिपचिपा है तो इसमें नारियल का तेल मिलाकर इसे गर्म करें। अब इसे बालों की जड़ों तक लगाएं। घने बाल पाने के लिए बालों पर गोलाकार मुद्रा में मालिश करें।
तनाव के कारण भी बाल कम और सफेद होते है इसलिए इन सब से बचने के लिए कोशिश करे की तनाव रहित रहे। तनाव से दूर रहने के लिए योगा , कसरत, ध्यान आदि कर सकते है। बालो को लंबा, काला और मजबूत बनाने के लिए उपर दी गई विधियो का पालन करे। जिसे आप ज़रूर ही अपने बालो मे एक बहतर फ़र्क महसूस करेगे।
अमला
अमला विटामिन सी का एक भंडार है। यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है।
कैसे करें: आंवला पाउडर और नीबू के रस को बराबर भागों मिलाएं। बालों पे इस मिश्रण को लगाना शुरू करें। इसके बाद इसे गुनगुने पानी के साथ धो ले और सूखने दें।